ch
Feedback
CTETNOTESPATHSHALA

CTETNOTESPATHSHALA

前往频道在 Telegram

आपको इस चैनल पर शिक्षक भर्ती के सम्पूर्ण नोट्स पीडीएफ टेस्ट सीरीज दिए जाएंगे जो आपके विभिन्न परीक्षाओं में काम आएंगे जैसे कि CTET UPTET REET MPTET UKTET DSSSB KVS NVS इस चैनल से ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़े।

显示更多
3 388
订阅者
无数据24 小时
无数据7 天
无数据30 天
帖子存档
पद्मावत-- मलिक मुहम्मद जायसी द्वारा रचित पद्मावत महाकाव्य पर विशेष तथ्य -- 💐रचनाकाल 1540 ई. 💐रचनाकार- मलिक मोहम्मद जायसी 💐भाषा अवधी 💐पद्मावत के रचनाकार मलिक मोहम्मद जायसी हैं । 💐इनका जन्म 1492 ईस्वी में हुआ। 💐पद्मावत 1540 ई. में शेरशाह सूरी के समय में लिखी गई 💐सूफी प्रेमाख्यान परंपरा का यह प्रतिनिधि ग्रंथ माना जाता है। 💐रामचंद्र शुक्ल ने इस ग्रंथ को हिंदी का ‘जगमगाता रत्न’ कहां है। 💐पद्मावत में 57 खंड है और अंत में उपसंहार है। 💐पद्मावत की पहली पंक्ति है : ” सुमिरौ आदी एक करतार” 💐57 वें खण्ड की अंतिम पंक्ति है : “जौहर भई सब इस्तिरीपुरुष भये संग्राम। बादशाह गढ़ चूरा,चित् उर भा ईस्लाम।।” 💐उपसंहार की अंतिम पंक्ति है : “बिरिध जो सीस डोलावै पूनि धुनि आवै रीस। बूढी आयु होअ तुम्हें यह दिन्हे – कीन्हे असीस।।” 💐नागमती वियोग खंड की पहली पंक्ति है : “नागमती पथ चित्त उर हेरा, पिउ जो गये पुनि कीन्ह न फेरा।” 💐इस नागमती वियोग खंड की अंतिम पंक्ति है:- “नहिं पावस ओहि देसरा नहि हेवंत बासंत। ना कोकिल ना पपीहरा जेहिं सुनै आवे कंत।।” 💐रामचंद्र शुक्ल ने नागमती वियोग खंड को हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर कहा है । 💐पद्मावत में बारहमासा आषाढ माह से प्रारंभ होता है। पहली पंक्ति है : “चढौ आकाश गगन घन गाजा” 💐पद्मावत में एक पद मिलता है जिसके आधार पर पद्मावत की प्रतीकात्मक व्याख्या की जाती है हालांकि माता प्रसाद गुप्त इस पद को प्रक्षिप्त मानते हैं। “तन चित उर मन राजा कीन्हा। हिय सिंहलगढ बुधि पद्मनी चिन्हा।।“ 💐प्रतीक इस प्रकार है :- तन /शरीर -चित्तौड़गढ़ मन- रत्नसेन ह्रदय- सिंहलगढ़ बुद्धि- पद्मावती दुनिया धंधा/ सांसारिकता - नागमती गुरु -- हीरामन तोता माया-- अलाउद्दीन खिलजी शैतान -- राघव चेतन पद्मावत के स्वरूप के बारे में विभिन्न विद्वानों के मत : 💐पद्मावत में प्रेम की प्रधानता निर्विवाद है किंतु इसके स्वरूप को लेकर विद्वानों में मतभेद रहा है। जो इस प्रकार से है : — आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार : 💐शुक्ल जी ने पद्मावत के प्रेम को अलौकिक, एकांतिक एवं आध्यत्मिक माना है । 💐शुक्ल जी पद्मावत को समासोक्ति व अन्योक्क्तिपरक काव्य माना है। 💐शुक्ल जी के अनुसार पद्मावत‘ हिंदी साहित्य का जगमगाता रत्न‘ है । 💐शुक्ल के अनुसार प्रबंध के क्षेत्र में पद्मावत का स्थान रामचरितमानस के बाद दूसरा है। विजय देव नारायण साही के अनुसार : 💐विजयदेव नारायण साही ने पद्मावत के प्रेम को लौकिक माना है। इनके अनुसार जायसी को बैकुंठी प्रेम की तलाश नहीं है बल्कि वह तो ऐसा प्रेम चाहते हैं जो प्रेम करने वाले कोई बैकुंठी बना दे। 💐जायसी यदि सूफी है तो कुजात सूफी हैं । 💐जायसी पहले कवि है बाद में सूफी है। 💐पद्मावत एक महाकाव्यात्मक त्रासदी है। माता प्रसाद गुप्त के अनुसार : 💐पद्मावत ना तो समासोक्ति है ना ही अन्योक्ति बल्कि वह तो ‘स्वभावोक्ति’ है और जो कुछ उसके स्वभाव में है वह है – प्रेम। 💐वासुदेवशरण अग्रवाल ने पद्मावत की ‘संजीवनी टीका’ लिखी है। इसका 1956 ईस्वी में दूसरा साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला है। 💐 वासुदेव शरण अग्रवाल जी ने जायसी को पृथ्वी पुत्र की संज्ञा दी है । ‘पृथ्वी पुत्र’ नाम से इन्होंने निबंध संग्रह भी लिखा है।

photo content
+3

photo content
+9

photo content
+6

🟦 भारत के प्रमुख दर्रे ■ काराकोरम दर्रा - जम्मू कश्मीर ■ जोजिला दर्रा - जम्मू कश्मीर ■ पीरपंजाल दर्रा - जम्मू कश्मीर ■ बनिहाल दर्रा - जम्मू कश्मीर ■ बुर्जिल दर्रा - जम्मू कश्मीर ■ शिपकीला दर्रा - हिमाचल प्रदेश ■ रोहतांग दर्रा - हिमाचल प्रदेश ■ बड़ालाचा दर्रा - हिमाचल प्रदेश ■ लिपुलेख दर्रा - उत्तराखंड ■ माना दर्रा - उत्तराखंड ■ नीति दर्रा - उत्तराखंड ■ नाथूला दर्रा - सिक्किम ■ जैलेप्लो दर्रा - सिक्किम ■ बोम्डिला दर्रा - अरुणाचल प्रदेश ■ यांग्याप दर्रा - अरुणाचल प्रदेश ■ दिफू दर्रा - अरुणाचल प्रदेश ■ तुजु दर्रा - मणिपुर

photo content
+3

photo content
+7

photo content
+1

photo content
+1

photo content
+9

photo content
+9

photo content
+7

photo content
+3

photo content
+2

photo content
+9

photo content
+9

photo content
+9

photo content
+9

Super Tet aur ctet ,uptet की तैयारी के लिए ग्रुप जॉइन करें पूरी पीडीएफ के लिए लिंक को जॉइन करें https://t.me/CTETUPTETSUPERTETNOTESPDF

कृषि से सम्बंधित क्रांतियां_preview.pdf