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स्त्री की योनि 2.7 से 3.1 इंच तक होती है और यौन उत्तेजना के दौरान, 4.7 इंच तक बढ़ सकती है।
तो 5 इंच का लिंग पर्याप्त है यौन सुख लेने के लिए।
ज्यादा बड़े के चक्कर मे मत पड़ो कोई चाहे पुरुष हो या महिला।
लिंग बढ़ाने से अच्छा है टाइमिंग बढ़ाओ।
स्टेमिना बढ़ाओ।
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सं भोग में स्त्री आंखें बंद करके आनंद की चरम को महसूस करने का प्रयास करती है और पुरुष स्त्री की चेहरे और सिसकियां में ही खुश रह जाता है।
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किसी स्त्री का पति होना कोई खास बात नहीं है,,
परन्तु उस स्त्री के जीवन का सर्वश्रेष्ठ पुरुष होना खास बात है......
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बिना सिखाए यह कैसे हो जाता है?
सत्य की शिक्षा दी जाती है, प्रेम की शिक्षा दी जाती है, उसका तो कोई पता नहीं चलता। इस सेक्स का इतना प्रबल आकर्षण, इतना नैसर्गिक केंद्र क्या है? जरूर इसमें कोई रहस्य है और इसे समझना जरूरी है। तो शायद हम इससे मुक्त भी हो सकते हैं।
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सेक्स एक शक्ति है, उसको समझिए-:-
आदमी को हमने परवर्ट किया है, विकृत किया है और अच्छे नामों के आधार पर विकृत किया है। ब्रह्मचर्य की बात हम करते हैं। लेकिन कभी इस बात की चेष्टा नहीं करते कि पहले मनुष्य की काम की ऊर्जा को समझा जाए, फिर उसे रूपांतरित करने के प्रयोग भी किए जा सकते हैं। बिना उस ऊर्जा को समझे दमन की, संयम की सारी शिक्षा, मनुष्य को पागल, विक्षिप्त और रुग्ण करेगी। इस संबंध में हमें कोई भी ध्यान नहीं है! यह मनुष्य इतना रुग्ण, इतना दीन-हीन कभी भी न था; इतना विषाक्त भी न था, इतना पायज़नस भी न था, इतना दुखी भी न था।
मनुष्य के भीतर जो शक्ति है, उस शक्ति को रूपांतरित करने की, ऊंचा ले जाने की, आकाशगामी बनाने का हमने कोई प्रयास नहीं किया। उस शक्ति के ऊपर हम जबरदस्ती कब्जा करके बैठ गए हैं। वह शक्ति नीचे से ज्वालामुखी की तरह उबल रही है और धक्के दे रही है। वह आदमी को किसी भी क्षण उलटा देने की चेष्टा कर रही है।
क्या आपने कभी सोचा? आप किसी आदमी का नाम भूल सकते हैं, जाति भूल सकते हैं, चेहरा भूल सकते हैं। अगर मैं आप से मिलूं या मुझे आप मिलें तो मैं सब भूल सकता हूं—कि आपका नाम क्या था, आपका चेहरा क्या था, आपकी जाति क्या थी, उम्र क्या थी, आप किस पद पर थे—सब भूल सकता हूं, लेकिन कभी आपको खयाल आया कि आप यह भी भूल सके हैं कि जिससे आप मिले थे, वह आदमी था या औरत? कभी आप भूल सके इस बात को कि जिससे आप मिले थे, वह पुरुष है या स्त्री? कभी पीछे यह संदेह उठा मन में कि वह स्त्री है या पुरुष? नहीं, यह बात आप कभी भी नहीं भूल सके होंगे। क्यों लेकिन? जब सारी बातें भूल जाती हैं तो यह क्यों नहीं भूलता?
हमारे भीतर मन में कहीं सेक्स बहुत अतिशय होकर बैठा है। वह चौबीस घंटे उबल रहा है। इसलिए सब बात भूल जाती है, लेकिन यह बात नहीं भूलती। हम सतत सचेष्ट हैं। यह पृथ्वी तब तक स्वस्थ नहीं हो सकेगी, जब तक आदमी और स्त्रियों के बीच यह दीवार और यह फासला खड़ा हुआ है। यह पृथ्वी तब तक कभी भी शांत नहीं हो सकेगी, जब तक भीतर उबलती हुई आग है और उसके ऊपर हम जबरदस्ती बैठे हुए हैं। उस आग को रोज दबाना पड़ता है। उस आग को प्रतिक्षण दबाए रखना पड़ता है।
वह आग हमको भी जला डालती है, सारा जीवन राख कर देती है। लेकिन फिर भी हम विचार करने को राजी नहीं होते—यह आग क्या थी? और मैं आपसे कहता हूं, अगर हम इस आग को समझ लें तो यह आग दुश्मन नहीं है, दोस्त है। अगर हम इस आग को समझ लें तो यह हमें जलाएगी नहीं, हमारे घर को गरम भी कर सकती है सर्दियों में, और हमारी रोटियां भी पका सकती है, और हमारी जिंदगी के लिए सहयोगी और मित्र भी हो सकती है।
लाखों साल तक आकाश में बिजली चमकती थी। कभी किसी के ऊपर गिरती थी और जान ले लेती थी। कभी किसी ने सोचा भी न था कि एक दिन घर में पंखा चलाएगी यह बिजली। कभी यह रोशनी करेगी अंधेरे में, यह किसी ने सोचा नहीं था। आज? आज वही बिजली हमारी साथी हो गई है। क्यों? बिजली की तरफ हम आंख मूंद कर खड़े हो जाते तो हम कभी बिजली के राज को न समझ पाते और न कभी उसका उपयोग कर पाते। वह हमारी दुश्मन ही बनी रहती। लेकिन नहीं, आदमी ने
बिजली के प्रति दोस्ताना भाव बरता। उसने बिजली को समझने की कोशिश की, उसने प्रयास किए जानने के। और धीरे-धीरे बिजली उसकी साथी हो गई। आज बिना बिजली के क्षण भर जमीन पर रहना मुश्किल मालूम होगा।
मनुष्य के भीतर बिजली से भी बड़ी ताकत है सेक्स की।
मनुष्य के भीतर अणु की शक्ति से भी बड़ी शक्ति है सेक्स की। कभी आपने सोचा लेकिन, यह शक्ति क्या है और कैसे हम इसे रूपांतरित करें? एक छोटे से अणु में इतनी शक्ति है कि हिरोशिमा का पूरा का पूरा एक लाख का नगर भस्म हो सकता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि मनुष्य के काम की ऊर्जा का एक अणु एक नये व्यक्ति को जन्म देता है?
उस व्यक्ति में गांधी पैदा हो सकता है, उस व्यक्ति में महावीर पैदा हो सकता है, उस व्यक्ति में बुद्ध पैदा हो सकते हैं, क्राइस्ट पैदा हो सकता है। उससे आइंस्टीन पैदा हो सकता है और न्यूटन पैदा हो सकता है। एक छोटा सा अणु एक मनुष्य की काम-ऊर्जा का, एक गांधी को छिपाए हुए है। गांधी जैसा विराट व्यक्तित्व जन्म पा सकता है।
सेक्स है फैक्ट, सेक्स जो है वह तथ्य है मनुष्य के जीवन का। और परमात्मा? परमात्मा अभी दूर है। सेक्स हमारे जीवन का तथ्य है। इस तथ्य को समझ कर हम परमात्मा के सत्य तक यात्रा कर भी सकते हैं। लेकिन इसे बिना समझे एक इंच आगे नहीं जा हमने कभी यह भी नहीं पूछा कि मनुष्य का इतना आकर्षण क्यों है? कौन सिखाता है सेक्स आपको?
सारी दुनिया तो सिखाने के विरोध में सारे उपाय करती है। मां-बाप चेष्टा करते हैं कि बच्चे को पता न चल जाए। शिक्षक चेष्टा करते हैं। धर्म-शास्त्र चेष्टा करते हैं। कहीं कोई स्कूल नहीं, कहीं कोई यूनिवर्सिटी नहीं। लेकिन आदमी अचानक एक दिन पाता है कि सारे प्राण काम की आतुरता से भर गए हैं! यह कैसे हो जाता है?
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पुराने कुँए की गहराई न नापना साहेब
नापते नापते न जाने कितने डूब गए !!
मधुर बांसुरी खिलाडी
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स्त्री का जुनून और सुकून
सिर्फ इतना है कि मर्द औरत को बिस्तर में इतना थका दे कि अगले दिन तक वो रात की कामक्रीड़ा की चुभन महसूस कर सके।
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औरतों के जिस्म पर कपड़े या साड़ी !! तभी तक रहते है, जब तक मर्द उत्तेजित ना हो जाए!!🍑🍑
एक बार उनका मोटा केला खड़ा हो गया फिर तो औरत को Na#ga कोमल जिस्म कई घंटो तक उनके बिस्तर पे अंगड़ाईयां लेता रहता है !!😍😍
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गदराया यौवन, गले में मंगलसूत्र, होंठो पर लाली, पैर में पायल, हाथ में कंगन, बदन पर इत्र, साड़ी लपेट कर जब रात को औरत पूरे श्रृंगार के साथ बिस्तर पर घोड़ी बनती है तो मर्दो की उत्तेजना दो गुना बढ़ जाती है फिर जब मर्द सवारी करता है तो दिनभर की थकान उतर जाती है रोम रोम खिल जाता है।
�मेरे तरफ से जनहित में जारी ��
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क्रिस क्रॉस से क्स पोजीशन
(Criss Cross S ex Position)
इस पोजीशन में से क्स करने से शरीर में ज्यादा भार नहीं पड़ता है।
इस से क्स पोजीशन में महिला साथी नीचे होती है
और पुरुष महिला के टांगों के बीच से निकलकर कैंची की तरह की आकृति बनाते हैं।
यानि की मेल पार्टनर क्रॉस लेग करके बैठता है।
और महिला एक तरह से पुरुष की गोद में उसे हाथों और पैरों से लपेटकर बैठती है।
क्रिस क्रॉस से क्स पोजीशन के फायदे -
इस पोजीशन में दोनों पार्टनर एक-दूसरे के सामने होते हैं,
इसलिए एक को देख दूसरे का मूड बन जाता है।
इस पोजीशन में आई कॉन्टैक्ट करते हुए आप
दोनों एक अलग ही लेवल पर पहुंच सकते है।
इस पोजीशन को करने से दोनों ही पार्टनर की पैरों की मसल्स मजबूत होती है॥
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स्त्रियों की तरह पुरुषो के निप्पल में भी ऐसे स्नायु होते हैं जहां स्त्रियों द्वारा जीभ , होठ से चुम्बन करने या चूसने पर पुरुष बहुत उत्तेजित हो जाते हैं , जिससे कामेक्षा जागृत होती है। और आनंद की एहसास बढ़ जाती है ।
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"वासना"
प्रत्येक व्यक्ति सेक्स का नाम सुनकर एकदम अलर्ट हो जाता है, मानो की उसकी वासना की इंद्री जाग गई हो।
सुनते ही नसों में तनाव या रिसन शुरू हो जाता है ।
अक्सर देखा गया है की ज्यों ज्यों औरत अपनी बड़ी उम्र की और अग्रसर होती है , उसकी सेक्स की क्षमता बढ़ती जाती है, क्योंकि संभोग पर ध्यान एकांत में जाता है या तो कम उम्र में या 40 के बाद ।
उस उम्र के पड़ाव में पुरुष उस स्त्री के साथ रह रह कर उस स्त्री के प्रति नीरस होता चला जाता है क्योंकि पुरुष की क्षमता कम होती जाती है वो सही से संभोग नही कर पाता है , उसकी आकर्षण कम हो जाती है जो की नही होना चाहिए।
स्त्री को परमात्मा ने कोमल,ममतामई बनाया है, उस उम्र के पड़ाव में स्त्री को कामवासना की शांति और प्रेम,एहसास की तलाश होती है जो की उसका पति इसमें असमर्थ होता है, ऐसी परिस्थितियों में अक्सर देखा गया है की औरतें लड़कों की और आकर्षित होने लगती हैं।
ऐसा स्वाभाविक है क्योंकि यह उस स्त्री की शारीरिक और मानसिक आवश्यकता है,जिसे वह पुर्ण करने में सक्षम होने की कोशिश करती है।
अब हमारे आज के इस पाश्चत्य सभ्यता को मानने वाले लोग इस संबंध को खूब अच्छी तरह निभा रहें है पति पत्नी दोनो मिलकर अपना जीवन एक दूसरे के लिए समर्पित कर रहे हैं।
#संभोग_करो_सेक्स_नही
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तलाक हो रही है ohh कोई नही ऐसा करो नही होगा अगर वजह है की टोटी का पानी जल्दी टपकता है तो ।
कितना देर चाहते हो मैदान में बेट्रिंग करना , मैदान चिरचिरा जाएगा , सिसकियां ufff
एक काम करो 2 हरी इलायची, 2 लॉन्ग,छोटा अदरक मुंह में डाल कर करो , हो सके तो दूध ऊपर से पी लो ।
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