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प्रियत्मा तुझे #जी भर के #देखा था...👩🚒🌿
#उसी का #पैग़ाम आया है... !!
तेरी #मासूम #निग़ाहों और
#अधर के काले #तिल पर
#कत्ल़ का #इल्ज़ाम आया है.... !!
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#वो_लम्हे_जब_स्त्री_को_सेक्स_की_भावना_ज्यादा_जागृत_रहती_है।
❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤🌹🌹🌹🌹🌹
औरतों की चाहत और इच्छाएं हमेशा से ही चर्चा का मुद्दा रही हैं. औरतों का नेचर मर्दों के समझ से थोड़ा परे है। कुछ पल ऐसे होते हैं जिनमें महिलाओं के अंदर सेक्स की भावना ज्यादा जागृत होती है।
1. मासिक धर्म के बाद :-
जब महिलाओं को मासिक धर्म होता है तो उसके करीब दो हफ्ते के बाद महिलाओं में प्रजनन क्षमता बढ़ जाती है। यह समय महिलाओं के मां बनने के लिए सबसे अच्छा समय माना जाता है। यह समय मां बनने के साथ-साथ सेक्स करने के लिए भी सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि इस दौरान लड़कियां संबंध बनाने के लिए बहुत आतुर होती हैं।
2. अश्लील फिल्में देखने के बाद :-
ये बात तो साबित हो ही चुकी है कि महिलाएं पुरुषों के मुकाबले ज्यादा पोर्न फिल्में देखती हैं, लेकिन क्या आपको पता है ये फिल्में देखने के बाद महिलाओं में सेक्स करने की इच्छा यकायक जागृत हो जाती है। अंतरंग पलों को स्क्रीन में देखने के बाद महिलाओं में यौन उत्तेजना का विकास होता है जिस वजह से वो खुद को अपने साथी को सौंप देती हैं।
3. जलन की भावना के बाद :-
महिला है तो जलन की भावना स्वाभाविक है। अपने पार्टनर को अपने वश में करने के लिए महिलाएं संबंध बनाती हैं और उन्हें हर संभव तरीके से खुश रखने की कोशिश करती हैं। ताकि उनका पार्टनर उन्हें छोड़कर कहीं न जाए।
4. अल्कोहल लेने के बाद :-
अक्सर महिलाएं अल्कोहल लेने के बाद बहक जाती हैं और वो संबंध बना लेती है। शराब पीने के बाद उनकी सेक्स के प्रति उत्तेजना बढ़ जाती है और वो संबंध बनाने के लिए राजी हो जाती हैं। अल्कोहल लेने के बाद महिलाएं संकोच छोड़ सेक्स को इंज्वाय करती हैं।
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आसमानी प्याले के साथ उसका इन्तज़ार करो
ख़ुशबूदार ग़ुलाबों के बीच वसन्त की शाम उसका इन्तज़ार करो
पहाड़ चढ़ने का प्रशिक्षण पाए घोड़े के धैर्य के साथ उसका इन्तज़ार करो
किसी शहज़ादे के सौन्दर्यबोध और खुसूसियत से भरी रुचि के साथ उसका इन्तज़ार करो
बादल के सात तकियों के साथ उसका इन्तज़ार करो
उड़ती हुई निस्वानी ख़ुशबू के रेशों के साथ उसका इन्तज़ार करो
घोड़े की पीठ पर चन्दन की मर्दाना महक के साथ उसका इन्तज़ार करो
उसका इन्तज़ार करो और तनिक भी हड़बड़ाओ मत
अगर वह देर से आती है, उसका इन्तज़ार करो
अगर वह जल्दी आती है, उसका इन्तज़ार करो
उसकी लटों में गुँथी चिड़ियों को डराओ मत
फूलों की लकदक के चरम पर उसके बैठने की प्रतीक्षा करो
उसका इन्तज़ार करो ताकि वह इस हवा को सूंघ सके जो
उसके हृदय के लिए इतनी अजनबी
इन्तज़ार करो कि वह बादल-दर-बादल पैरों से अपना वस्त्र उठाए
और उसका इन्तज़ार करो
दूध में डूबते चन्द्रमा को दिखाने को उसे छज्जे पर लेकर जाओ
उसका इन्तज़ार करो और शराब से पहले उसे पानी पेश करो
उसके सीने पर सो रहे दो परिन्दों पर निगाह मत डालो
इन्तज़ार करो और हौले से उसका हाथ छुओ जब वह संगेमरमर पर प्याला रखे
इन्तज़ार करो जैसे कि तुम उस के वास्ते ओस ले कर आए हो
उससे बातें करो जैसे कोई बांसुरी बातें करेगी किसी डरे हुए वायोलिन के डरे हुए तार से
जैसे कि तुम्हें पता हो कल का दिन क्या लाने वाला है
इन्तज़ार करो और अंगूठी-दर-अंगूठी उसके वास्ते रात को चमकाओ
उसका इन्तज़ार करो
जब तक कि रात तुम से इस तरह बातें न करने लगे:
तुम दोनों के अलावा कोई भी जीवित नहीं है
सो हौले हौले उसे ले जाओ उस मौत की तरफ़ जिसे तुम
इस कदर चाहते हो
और इन्तज़ार करो ।
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जब किसी स्त्री को तुम अपने प्रेम से बेचैन कर दो, आपकी प्रेम में बेसुध होकर आपकी आलिंगन में आ जाये तो समझना हम पुरुष हैं हममें पुरुषार्थ है।
जबर्दस्ती, फोटो शेयर की धमकी ,कॉल रिकॉर्डिंग,वीडियो वायरल की धमकी से आलिंगन में लेना पुरुष के लिए नही है फिर हममे पुरुष और किन्नर में क्या अंतर ?
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प्रियत्मा !
शाम की सिंदूरी बेला में
तुम्हारा संवर कर आना
पलकें झुकी हुई शर्माना
और कंधे से आँचल का
सरकना मेरे रोम रोम को पुलकित कर दिया
उफ़्फ़फ़ प्रियत्मा
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प्रियत्मा !
सुनो !
तुम्हारी चेहरे से नजरो को हटाया नहीं जाता
कभी प्यार को लफ्जो़ में बताया नहीं जाता।
यहाँ रोज ही दिखते है हजारो चेहरे
तुम्हारी चेहरे से नजरो को, हटाया नहीं जाता।
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प्रियत्मा !
खामोशियां भी रिश्ते खा जाती है...
थोडा ही सही ताल्लुक़ जिंदा रखिये...
सुप्रभात
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प्रियत्मा !
खुद को तेरी नज़रों में पिरोना चाहते हैं
तेरे शहर की इक शाम होना चाहते हैं
खाब ही में सही इक बार तो चले आओ
तेरे दामन से लग के आनन्दित होना चाहते हैं ,,,
खौफ है तूफ़ां का हमको इस क़दर
तेरी साहिल पे हम कश्ती डुबोना चाहते हैं ,,,
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शर्म ओ हया जो बिक गई मंडियों में
जिस्म की आग उठी जब भीतर तक
कितनी कालिख लगी आज इश्क पर
देख ना पाये हम इश्क ऐ मंजर तक
कोई शिकन ना देखी इन चेहरों पर
चले हो कारवां लेकर जैसे लश्कर तक
हम तो हुवे मुफ्त बदनाम कविता में
लिख ना पाये उनके हुस्न और यौवन तक
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प्रियत्मा !
शाम की सिंदूरी बेला में
तुम्हारा संवर कर आना
पलकें झुकी हुई शर्माना
और कंधे से आँचल का
सरकना मेरे रोम रोम को पुलकित कर दिया
उफ़्फ़फ़ प्रियत्मा
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पलकों पर नींद ने दस्तक दी ऐसे
नई नवेली दुल्हन सज आई जैसे
देखकर नीचे से अंग ने पेंटी पर मारा धक्का ऐसे
खुल गया हो किला का दरवाजा जैस
सुप्रभात🙏
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स्त्री नदी जैसी होती है ,पुरुष भी अगर सागर जैसा मीले तो जिस तरह नदी सागर के दिल मे मिल जाना चाहती हैं , नदी अपना स्तीत्व खोकर सागर में मिल कर सागर जैसा रूप धारण कर लेती है उसी तरह स्त्री पुरुष में मिल जाना चाहती है,पुरुष में खो जाना चाहती है, पुरुष के नाम से ही जानी जाना चाहती है।
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#प्रेम_और_सम्भोग_पूरक_है ।
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इसे अलग मत समझो। नासमझ कहते हैं कि सम्भोग के लिए प्रेम का बहाना है पर उनसे ही पूछो क्या सम्भोग बिना प्रेम का हो सकता है ?
याद रखना बिना प्रेम लिंग में तनाव नहीं और योनि में चिकनाहट नही हो सकता । इस दुनिया का कोई क्रेन ऐसा नही बना जो लिंग को खड़ा कर दे उत्तेजित करके ।
इसलिए हमेशा ध्यान रखो प्रेम की अभाव में सिर्फ बलात्कार होता है सम्भोग नहीं । नाटक ही सही प्रेम से ही सम्भोग होगा और सम्भोग रिश्ते में गहराई लाता है क्योंकि 2 जिस्म का मिलन होता है जिससे शर्म का पर्दा हटता है , चुम्बन के क्रम में , लिंग योनि को चाटने के क्रम में पानी का मिलन होता है।
आस्था ,विश्वाश की कड़ी जुटती है सम्भोग से ही । ये जितने तुम्हे गंदे कहेंगे ये सब कहने वाले वही लोग हैं जो दुनिया की सभी स्त्री को वासना की नजर से देखते हैं और न पाने पर सन्यासी आशाराम,नित्यानंद जैसे बन जाते हैं।
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ब्रह्मचर्य क्या है ??
ब्रह्म नाम है , विराट परमात्मा का। ' चर्य ' अर्थ है , दिनचर्या। ब्रह्म + चर्य = ब्रह्म के समान दिनचर्या। ईश्वर की तरह सुंदर जीवन जीने का अभ्यास ।
बहुत से लोग कामवासना का विरोध, इसका अर्थ लगाते है , यह अर्थ बहुत संकुचित है । वंश परम्परा चलाने से अधिक काम-चिंतन आत्मघात है । आत्मघाती मत बनो। केवल वंश परम्परा चलाने के लिए, काम का सेवन करों।
गृहस्थ जीवन में रहना चाहते हो तो, वैदिक रीति से विवाह करों। धर्मपत्नी के साथ रहकर जीवन बिताओं। एक पत्नी व्रत का पालन करों, उस शाश्वत को खोजों, इस आश्रम में यही ब्रह्मचर्य है ।
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सुनो प्रियत्मा !
ये जो जब तुम सुबह सुबह
नहा कर आती हो न
और झुक जाती हो भींगे वदन
तो तेरे भींगे बालों से टपकते पानी
का स्पर्श मुझे ठंडा नहीं गर्म कर देता है
तुझे आलिंगन में पाने को
।। शुभ प्रभात ।।
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