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"#सम्भोग
कोई अपवित्रता नहीं
अपितु एक पवित्र अनुष्ठान है !
ताकि
निज में आनन्द की वर्षा हो सके !
लेकिन
अफ़सोस
धर्म के ठेकेदारों ने
सैकड़ों वर्षों से
इसे बदनाम कर रखा है.. !
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सारे युद्ध मे सब से सर्वश्रेस्त्र युद्ध "काम युद्ध"
एक ऐसा युद्ध जिसमे जय, पराजय का कोई मोल नही,
मोल है तो सिर्फ शारीरिक संतुष्टि का,
एक ऐसा युद्ध जो बड़ी सेनाओं के बीच नही,
बल्कि एक कामुक औरत और एक भूखे भेड़िये
समान मर्द के बीच होता है।
एक ऐसा यद्ध जिसमे लाल लहू की जगह सिसकियां और
मदहोश करने वाली कामुक आवाजें निकलती है।
दुनिया का एक मात्र युद्ध जिसका आंत आनंद माये होता
है।
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गर्भ से पहले और गर्भकाल में
यदि माता-पिता ध्यान करते हैं
तो बच्चे पर इसका क्या असर पड़ता है ?
निश्चित ही,
बच्चे का जीवन जन्म के बाद नहीं शुरू नहीं होता ।
वह तो गर्भ धारण के समय से ही शुरू हो जाता है ।
उसका शरीर ही नहीं,
माँ के पेट में उसका मन भी बनता है ।
उसका ह्रदय भी बनता है ।
माँ अगर दुःखी है, परेशान है, चिन्तित है
तो ये घाव बच्चे पर छूट जायेगा और
ये घाव बहुत गहरे होगें,
जिनको वह जीवन भर धो कर भी नहीं धो सकेगा,
माँ अगर क्रोधित है, झगड़ालू है,
हर छोटी-मोटी बात का बतँगड़ बना बैठती है
तो इसके गम्भीर परिणाम बच्चे पर होने वाले हैं ।
इस दौरान पति का भी उतना ही दायित्व बनता है कि
वह अपनी पत्नी का पूरा ख्याल रखे,
ऐसी अवस्था में ससुराल में प्रत्येक व्यक्ति को
औरत की हर सम्भव देखभाल करनी चहिए,
अगर माँ पूरे नौ महीने बच्चे को ध्यान में रख कर चले,
ऐसा कुछ भी न करे जो ध्यान के विपरीत है और
ऐसा कुछ करे जो ध्यान के लिए सहयोगी हो,
तो निश्चित ही इन नौ महीनों में
किसी बुद्ध, राम, या कृष्ण को जन्म दिया जा सकता है ll
🙏🏻❤️🙏
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अपने प्रेयसी की योनि की खुशबू को फील करें और योनि को अपनी जीभ से गीला करने की कोशिश करें, ऐसा करते समय अपनी प्रेयसी के चेहरे पर जरूर ध्यान दें और अगर वह आपको बार-बार जोर लगाने और स्माइल देती है, तो आप समझ सकते हैं कि आपका किस करना उसे बेहद पसंद आया तो सही से अपने जीभ से योनि को चाटिए और चूमिए।
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अगर आपको माइग्रेन है, तो दवा नहीं बल्कि यौन संबंध का सहारा लें । सिरदर्द दूर भगाने का ये बेहतरीन उपाय है। सेक्स के दौरान एंडॉर्फिन हार्मोन रिलीज होता है, जो पेन किलर के रूप में काम करता है।
दो लोगों के रिश्ते को गहरा बनाती है उनकी सेक्स लाइफ। ये जितनी ज्यादा हैप्पनिंग होगी, रिश्ते में उतना ज्यादा प्यार भी बना रहेगा। वैसे सेक्स हमारे मूड को भी प्रभावित करता है।
फरवरी 2013 में जर्नल सेफालगिया में पब्लिश हुई एक स्टडी में पाया गया कि 60 प्रतिशत लोगों ने माइग्रेन के दौरान यौन संबंध बनाए थे और उनके सिरदर्द के लक्षणों में सुधार हुआ।
सेक्स और माइग्रेन का आपस में कनेक्शन है। एक सिद्धांत यह है कि सेक्स में लोगों को उनके दर्द से विचलित करने की अच्छी खासी क्षमता है। सेक्स करने पर लोगों का ध्यान दर्द से हटकर सिर्फ भावनाओं पर रहता है और वे दर्द के बारे में भूल जाते हैं।
एसोसिएशन ऑफ माइग्रेन डिसऑर्डर के अनुसार, संबंध बनाने से शरीर में एंडोर्फिन रिलीज होता है, जो दर्द से राहत देने में भी मदद कर सकता है,। महिलाओं में एंडोफ्रिन हार्मोन ऑर्गेज्म होने से निकलता है, जो माइग्रेन को दूर करता है। हेल्थलाइन की एक रिपोर्ट कहती है कि अमेरिका की महिलाओं ने माना कि सेक्स लाइफ के बेहतर होते ही उनका माइग्रेन कम हो गया।
माइग्रेन के साथ सेक्स करने के टिप्स
अपने साथी के साथ बातचीत करें- अपने पार्टनर को बताएं कि आपको माइग्रेन अटैक पड़ रहा है, ताकि वे गति और स्थिति के बारे में आपकी जरूरतों के बारे में जागरूक हो सकें।
बहुत ज्यादा मूवमेंट और स्पीड दर्द, चक्कर और मतली जैसे माइग्रेन के लक्षण को खराब कर सकते हैं। इसलिए अगर आप पोजीशन बदल रहे हैं तो धीरे-धीरे आगे बढ़ने का प्रयास करें या ऐसी स्थिति में रहें, जिससे आपका सिर स्थिर रह सके।
आप किसी भी समय रुक सकते हैं। अगर माइग्रेन अटैक आया है, तो फोरप्ले या सेक्स के दौरान आप रूक सकते हैं।
सेक्स माइग्रेन के लिए उन प्राकृतिक उपचारों में से एक है जिसका अनुभव आपको खुद लेना होगा। अब जब भी माइग्रेन महसूस हो, तो इस पर विचार जरूर करें। हो सकता है कि ये दवा से भी ज्यादा अच्छा काम कर जाए।
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संतान प्राप्ति के नियम और उपाय 👇
हमारे ऋषि महर्षियों ने हजारो साल पहले ही संतान प्राप्ति के कुछ नियम बताये है
प्रत्येक दम्पति चाहता हैं कि उसके कम से कम एक संतान हो | प्रकृति के अनुसार पुरुष और स्त्री को गर्भाधान का कारण समझ लेना चाहिये। जिनका पालन करने से आप तो संतानवान होंगे ही आप की संतान भी आगे कभी दुखों का सामना नहीं करेगा…!
कुछ राते ये भी है जिसमे हमें सम्भोग करने से बचना चाहिए .. जैसे अष्टमी, एकादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, पूर्णिमा और अमवाश्या को बिलकुल संभोग नही करना चाहिए ।
चन्द्रावती ऋषि का कथन है कि लड़का-लड़की का जन्म गर्भाधान के समय स्त्री-पुरुष के दायां-बायां श्वास क्रिया, पिंगला-तूड़ा नाड़ी, सूर्यस्वर तथा चन्द्रस्वर की स्थिति पर निर्भर करता है।
कहते हैं गर्भाधान के समय स्त्री का दाहिना श्वास चले तो पुत्री तथा बायां श्वास चले तो पुत्र होगा।
मासिक धर्म शुरू होने के प्रथम चार दिनों में संभोग से पुरूष रोग को प्राप्त होता है। पांचवी रात्रि से संतान उत्पन्न करने की विधि करनी चाहिए ।
इस समय में पुरूष का दायां एवम स्त्री का बांया स्वर ही चलना चाहिये। इसमे ध्यान देने वाली बात यह है कि पुरुष का जब दाहिना स्वर चलता है तब उसका दाहिना अंडकोशः अधिक मात्रा में शुक्राणुओं का विसर्जन करता है जिससे कि अधिक मात्रा में पुल्लिग शुक्राणु निकलते हैं. अत: पुत्र उत्पन्न होता है।
यदि पति पत्नि संतान प्राप्ति के इच्छुक ना हों और सहवास करना ही चाहें तो मासिक धर्म के अठारहवें दिन से पुन: मासिक धर्म आने तक के समय में सहवास कर सकते हैं, इस काल में गर्भाधान की संभावना नही के बराबर होती है।
चार मास का गर्भ हो जाने के पश्चात दंपति को सहवास नही करना चाहिये. अगर इसके बाद भी संभोग रत होते हैं तो भावी संतान अपंग और रोगी पैदा होने का खतरा बना रहता है. इस काल के बाद माता को पवित्र और सुख शांति के साथ देव आराधन और वीरोचित साहित्य के पठन पाठन में मन लगाना चाहिये। इसका गर्भस्थ शिशू पर अत्यंत प्रभावकारी असर पड़ता है
अगर दंपति की जन्मकुंडली के दोषों से संतान प्राप्त होने में दिक्कत आ रही हो तो बाधा दूर करने के लिये संतान गोपाल के सवा लाख जप करने चाहिये. यदि संतान मे सूर्य बाधा कारक बन रहा हो तो हरिवंश पुराण का श्रवण करें, राहु बाधक हो तो क्न्यादान से, केतु बाधक हो तो गोदान से, शनि या अमंगल बाधक बन रहे हों तो रूद्राभिषेक से संतान प्राप्ति में आने वाली बाधायें दूर की जा सकती हैं।
मासिक स्राव रुकने से अंतिम दिन (ऋतुकाल) के बाद 4, 6, 8, 10, 12, 14 एवं 16वीं रात्रि के गर्भाधान से पुत्र तथा 5, 7, 9, 11, 13 एवं 15वीं रात्रि के गर्भाधान से कन्या जन्म लेती है।
१- चौथी रात्रि के गर्भ से पैदा पुत्र अल्पायु और दरिद्र होता है।
२- पाँचवीं रात्रि के गर्भ से जन्मी कन्या भविष्य में सिर्फ लड़की पैदा करेगी।
३- छठवीं रात्रि के गर्भ से मध्यम आयु वाला पुत्र जन्म लेगा।
४- सातवीं रात्रि के गर्भ से पैदा होने वाली कन्या बांझ होगी।
५- आठवीं रात्रि के गर्भ से पैदा पुत्र ऐश्वर्यशाली होता है।
६- नौवीं रात्रि के गर्भ से ऐश्वर्यशालिनी पुत्री पैदा होती है।
७- दसवीं रात्रि के गर्भ से चतुर पुत्र का जन्म होता है।
८- ग्यारहवीं रात्रि के गर्भ से चरित्रहीन पुत्री पैदा होती है।
९- बारहवीं रात्रि के गर्भ से पुरुषोत्तम पुत्र जन्म लेता है।
१०- तेरहवीं रात्रि के गर्भ से वर्णसंकर पुत्री जन्म लेती है।
११- चौदहवीं रात्रि के गर्भ से उत्तम पुत्र का जन्म होता है।
१२- पंद्रहवीं रात्रि के गर्भ से सौभाग्यवती पुत्री पैदा होती है।
१३- सोलहवीं रात्रि के गर्भ से सर्वगुण संपन्न, पुत्र पैदा होता है।
सहवास से निवृत्त होते ही पत्नी को दाहिनी करवट से 10-15 मिनट लेटे रहना चाहिए, एम दम से नहीं उठना चाहिए।
वास्तु शास्त्र में कुछ ऐसे प्रमुख दोष बताये गए है जिनके कारण संतान की प्राप्ति नहीं होती या वंश वृद्धि रुक जाती है | इस समस्या के पीछे की वास्तविकता..क्या है इसका शास्त्रीय और ज्योतिषीय आधार क्या है ये आप अपनी जन्म कुंडली के द्वारा जानकारी प्राप्त कर सकते है ... इसके लिए आप हरिवंश पुराण का पाठ या संतान गोपाल मंत्र का जाप करे
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स्त्री की ओर झुकाव
दो तरह से हो सकता है,
एक वासना के कारण
और दूसरा प्रेम के कारण /
वासना लालची चित्त की अवस्था है
और प्रेम निःस्वार्थ भाव दशा है /
वासना सँसार है
और प्रेम आध्यात्म है /
जो समय के साथ बढ़ता जाये वो प्रेम है
और जो समय के साथ घटता जाये वो वासना है /
वासनाग्रस्त चित्त सदैव अशान्त रहता है
और प्रेमपूर्ण चित्त सदैव शान्त रहता है,
आनन्दित रहता है /
जिसने स्त्री में वासना देखी,
उसे स्त्री का प्रेम कभी उपलब्ध नहीं हो सकता है /
और जिसने स्त्री को प्रेम किया,
उसे स्त्री में परमात्मा दिखायी पड़ने लगता है /
प्रेम में इतनी शक्ति है कि
स्त्री परमात्मा ही हो जायेगी /
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जीभ से योनि को चारों तरफ सहलाएं
अब आप अपनी आखें बंद करके योनि को पूरी तरह से किस करें और उसे क्लाइटोरिस को अपने होठों में भरने का प्रयास करें। ऐसा करने के दौरान आपकी पार्टनर आपको और जोर लगाने के लिए कह सकती है। अब आप अपनी जीभ से योनि को चारों तरफ सहलाएं और इस पल का भरपूर आनंद उठाएं। बीच-बीच में हल्के से उसे काटने की कोशिश करें। ध्यान रखें कि यह सिर्फ उसे खुश करने के लिए करें, न कि कष्ट देने के लिए।
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सेक्स के दौरान शरीर में क्या होता है?
1. वाहिकाओं को चालू किया जाता है और रक्त को जननांगों में पंप किया जाता है।
2. मस्तिष्क रिलीज करने के लिए तैयार करता है
किसे ??
रक्त में 3 सबसे महत्वपूर्ण हार्मोन - ऑक्सीटोसिन, प्रोलैक्टिन और एंडोर्फिन। योनि लंबी हो जाती है, लिंग और शुक्राणु को ग्रहण करने की तैयारी करती है
अतः सुरक्षित सम्भोग करे
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Mrsharkshipper.in
Hamare Mitra ne naya vyapar shuru kiya he online madhyam se kripa.kar ke yaha jake shop kare aapko yaha lagi ache products mil jaenge
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फोरप्ले कितनी देर तक चलना चाहिए?..
शरीर विज्ञान के बारे में हमारे ज्ञान के आधार पर, हम महसूस करते हैं कि एक पुरुष को उत्तेजित होने में एक महिला की तुलना में कम समय लगता है। मजबूत सेक्स में उत्तेजना चक्र की अवधि लगभग 3 मिनट होती है
एक महिला की उत्तेजना का चक्र लगभग 13 मिनट तक चलता है। तो पुरुष और महिला चक्र के बीच अनुमानित अंतर 10 मिनट है!
इससे हमें क्या मिलता है?
यदि महिला शारीरिक रूप से इसके लिए तैयार होने से पहले संभोग शुरू कर देती है, तो संभावना है कि वह सेक्स के बाद संतुष्ट रहेगी, जो बहुत कम है
फोरप्ले की अवधि इंटरकोर्स से 5 गुना ज्यादा होनी चाहिए। प्रारंभिक दुलार को कम से कम 15 मिनट का समय देना चाहिए। यह कथन कोई नियम नहीं है, जिसका उल्लंघन अनिवार्य रूप से यौन असंतोष को जन्म देगा। लेकिन मेरी सलाह होगी कि इस दावे का लाभ उठाएं और आप निश्चित रूप से अंतर देखेंगे😉
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स्त्रीभोग का सुख वही पुरुष लूट सकता है,जो निरोग है,बलवान है,वीर्यवान और पुष्ट है। जो रोगी है, बलहीन है,वीर्यक्षीण है,कमजोर है,वह स्त्री-भोग का आनन्द नहीं उठा सकता।क्यों कि जो खुद को स्वस्थ रखेगा मैं सक्षम नहीं वो दूसरे को क्या सुख देगा पता लगे बीच में हमको ही दवा देनी पड़ रही है
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गुदा मैथुन आनंददायक हो सकता है
अचानक गुदा मैथुन ना करे
प्रियतम से अचानक सुबह उठकर आप उन्हें नही कह सकते
एक लघु गुदा प्रशिक्षण सत्र लें।
सेक्स में थोड़ा-थोड़ा करके एनल प्लग शामिल करें और साथ ही प्रियतम को उनकी आदत डालने के लिए समय देने के लिए क्यूनी का अभ्यास करें
अपनी उंगलियों का प्रयोग करें.
मैं आपको सलाह देता हूं कि हमेशा उन्हीं से शुरुआत करें। पीछे के छेद को चिकना करें, एक उंगली डालें और प्रवेश द्वार को फैलाएं, ताकि प्रियतम आराम कर सके और आपके लिंग के प्रवेश द्वार से भयभीत न हो।
जीभ का प्रयोग करें.
वैसे यह सामान्य तौर पर एक बहुत ही गर्म गतिविधि है। गुदा के छेद को चाटने से न केवल आप उत्तेजित होंगे, बल्कि यह आपके प्रियतम को आराम देगा, उसे इसकी आदत डालने और गर्म संवेदनाएं लाने का समय देगा।
आपका दिलजीत ❤️
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29% पुरुषों का मानना है कि अंडरवियर में एक लड़की पूरी तरह से नग्न होने की तुलना में अधिक आकर्षक होती है।
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""कितना मदमस्त बदन है...
एक तो गठीला बदन ऊपर से अंगड़ाई..
सच में कामुकता की सारी हद पार कर दी..!""
अगर कामुकता है तो दृष्टि का वहां रुक जाना स्वाभाविक है..
इसमें दृष्टि का क्या दोष भला..
वह तो वासना के अधीन है..
जिसे तुम चाहकर भी नहीं रोक सकते।
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💋 कामरस रंग 💋
💋 कवियों की तरंग
💙💙
💜 स्तनतटमिदमुत्तुंग निम्नो मध्यःसमुन्नतं जघनम ।विषमे मृगशावक्ष्या वपुषि नवे क इव न स्खलति।।
( नयी नयी यौवनावस्था में स्त्री के स्तनों में भरपूर उभार आ जाता है, कमर पतली हो जाती है और जाँघें मांसल हो जाती है। हिरनी के समान चंचल नयनों वाली की ऐसी ऊँची - नीची नई नई देह पर भला कौन लड़खड़ाने से बच सकता है?)
❤️ अनाघ्रातं पुष्पं किसलयमलूनं कररुहैरनाविद्धं रत्नं मधु नवमनास्वादितरसम ।अखण्डं पुण्यानां फलमिव च तद्रुपमनघं न जाने भोक्तारं कमिह समुपस्थास्यति विधि।
(उस सुन्दरी के निष्पाप रूप को, जो उस फूल की तरह है जिसे अभी तक सूँघा नही गया है, नाखूनों से बिना कुरेदे गए कोमल किसलय की तरह है, सुन्दर रत्न की तरह है जिस पर तनिक भी छिद्र नही है, ताजे, स्वादिष्ट मधु की तरह है जिसे अभी तक किसी ने चखा नही है, जो अखण्ड पुण्यों के फल सदृश है। पता नही विधाता यहाँ किसे उसे भोगने का आस्पद बनाएगा?)
💙नारब्धं कुचपरिरम्भणेषु वाम्यं वैमुख्यं किमपि न चुंबने कदाचित किं नीवीगतंबले रुणत्सि पाणिं विक्रीते करिणिकिमंशुके विवादः ।
( जब मैंने तुम्हारे उरोजों का कसकर आलिंगन किया, तुमने मना नहीं किया। तुम्हारे होंठों का चुंबन किया, तब भी कुछ नहीं कहा। अरी सुन्दरी! फिर नीवी (अधोवस्त्र का नाड़ा) को खोलने में तुम मुझे क्यों रोक रही हो? जब हाथी बिक गया, तब फिर अंकुश पर क्या विवाद करना?)
💖 स्वामिन्प्रभो प्रिय गृहाण परिष्वजस्य किं किं शठोऽस्यकरुणोऽसि सुखोचितोऽसि। हा दुःखयस्यलमलं विरमेति वाचः स्त्रीणां भवन्तिसुरते प्रणयानुकूलाः।
( अरे स्वामी! प्रभो! प्रियवर! मुझे ग्रहण करो! आलिंगन करो न! मुझे भोगों न! क्या क्या कहूँ, तुम तो बड़े शठ हो! बड़े निर्दयी हो! बड़े मजेदार हो! अरे बहुत दुख दे रहो हो! मत सताओ! अब बहुत हो गया! अब बस करो! रुको न! शय्या पर रति क्रिया के समय स्त्रियों के मुख से बीच बीच में निकलने वाले ऐ शब्द, प्रेम को और अधिक बढाने वाले, उत्तेजक होते हैं।)
💙उपबहरामम्बुजदृशो निजं भुजं विरचय्य वक्त्रमपि गण्डमण्डले ।निजसक्थि सक्थनि निधाय सादरं स्वपिति स्तनार्पितकराम्बुजे ।।
( रात में जबरदस्त रति क्रीडा करके थका हुआ नौजवान अपनी बाँह को तकिया बनाकर, कमलनयनी सुन्दर प्रिया के कपोलों पर अपने मुख को रखे, उसकी जाँघों पर अपनी जाँघें रखे, उत्तुंग उरोजों पर अपने करकमल रखे, आराम से सो रहा है।)
❤️व्यावृत्या शिथिलीकरोति वसनं जाग्रत्यपि व्रीड्या स्वप्नभ्रान्तिपरिप्लुप्तेन मनसा गाढं समालिंगति। दत्वांगं स्वपिति प्रियस्य रतए व्याजेन निद्रा गता तन्वंग्या विफलं विचेष्टितमभूद्भावनभिज्ञे जने ।
(अनाड़ी - ठंडे पति के साथ शय्या पर लेटी कामव्याकुल पत्नी की पीड़ा को कौन समझे?
रात में जागती हुई वह सुन्दर तन्वंगी पत्नी लज्जा वश अपने को ढकती हुई भी बीच-बीच में वस्त्रों को ढीला कर रही है - खोल रही है।स्वप्न जन्य भ्रम के बहाने स्वयं ही पहल कर पति का भरपूर आलिंगन कर रही है। रति करने के लिए व्याकुल वह बहाने से अपने अंगों को उसके अंगों से सटा रही है - उसे सौंप रही है, सोने का नाटक कर रही है। लेकिन वह बेचारी करे भी तो क्या? बहुत जतन कर रही है? पर उसकी सारी चेष्टाएं व्यर्थ हो रही हैं - अनाड़ी पति की ओर से कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दिख रही है।)
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