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जी स्पॉट योनि के अंदर करीब 2-3 सेंटीमीटर की गहराई में होता है. कुछ महिलाओं का कहना है कि इस हिस्से में उन्हें सबसे ज्यादा ऑर्गेज्म महसूस होता है । सर्च करें और आनंद ले
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ये चीज़ें खायेंगे तो
कभी नहीं होंगे गुईयाँ के आगे शर्मिन्दा :-
🌿 आँवले के चूर्ण में मिश्री पीस कर मिला लें,
सोने से पहले इस पॉवडर का एक चम्मच सेवन करें,
इसके बाद एक गिलास पानी पी लें ।
जैसी ताक़त चाहते हैं वैसी ही मिलेगी ।
🌿 रात को सोने से पहले
दो लहसुन की कलियाँ ख़ा लें
औऱ थोड़ा सा पानी पी लें ।
फ़िर देखिये पलँग पर कैसी ताक़त मिलती है ।
🌿 बराबर मात्रा में
सफ़ेद प्याज़ का रस, शहद, अदरक का रस औऱ
घृत को मिला कर मिश्रण तैयार कर लें ।
इसे 21 दिनों तक खाने से
गज़ब की पौरुष शक्ति मिलती है ।
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फोल्डेड डेक पोजीशन --
यह पोजीशन उन लोगों के लिए है जो सेक्स को एक डेली रूटीन के रूप में ना लेकर उसे पूरा एंजॉय करते हैं और साथी को बेड पर पूरी तरह से संतुष्ट करना ही इनका मकसद होता है।
इस पोजीशन में पुरुष महिला के ऊपर होता है और वह महिला के नीचे के हिस्से और टांगों को अपने कंधे पर रख लेता है, उसके पैरों को खोलते हुए सेक्स की शुरुआत करता है। इसमें पुरुष अपने घुटनों और पैरों को थोड़ा ऊपर उठा लेता है और उसके सीने और बॉडी का कुछ वजन महिला के ऊपर आता है।
फोल्डेड डेक पोजीशन के फायदे -
इस पोजीशन में डीप पेनिट्रेशन होता है जो ऑर्गेज़्म को बढ़ाता है।
इस पोजीशन में पुरुष साथी की सेक्स पावर का पूरा पता चलता है। यही वो पोजीशन है जिससे वह अपनी फीमेल पार्टनर को पूरी तरह से सेक्स के दौरान अपना फैन बना सकता है।
इस पोजीशन में पूरा कमांड भले ही पुरुष में हाथों में हो लेकिन फिर भी महिला को यह पोजीशन पसंद आती है क्योंकि इसके जरिए वह अपने पार्टनर के साथ खुद भी पूरा आनंद लेती है।
अगर दोनों ही पार्टनर का वजन ज्यादा है तो आप इसे आसानी से कर सकते हैं।
इस सेक्स पोजीशन को जल्दबाजी में नहीं किया जाता है बल्कि इसके लिए कम से कम 10 मिनट का समय लगता है। अगर इस पोजीशन को पूरा समय लेकर किया जाए तो दोनों पार्टनर इसमें पूरी तरह से संतुष्ट होते हैं।
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फीमेल संभोग के समय हर 12 मिनट में ऑर्गेज्म का अनुभव करती हैं, जबकि पुरुषों को दूसरे ऑर्गेज्म का आनंद लेने में औसतन आधे घंटे से एक घंटे तक का समय लग सकता है।
तो अगर महिला संतुष्ट हो गई पुरुष से पहले तो 12 मिनट बाद फिर वह जागृत हो सकती है इस बीच में पुरुष को फोरप्ले करते रहना चाहिए और जब महिला कामुक हो जाय तो फिर, वह इंटरकोर्स शुरू कर सकता है, और तब तक जारी रख सकता है जब तक कि दोनों संतुष्ट न हों।
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मध्यम संभोग में भी अश्व पुरुष का बड़वा स्त्री के साथ, वृष पुरुष का मृगीस्त्री के साथ संभोग करना कुछ हद तक ठीक है। लेकिन हस्तिनी स्त्री से वृष पुरुष का या बड़वा स्त्री का शश पुरुष से संभोग करना किसी भी मायने में सही नहीं कहा जा सकता।
अगर सिर्फ संभोग करने में मिलने वाले सुख को ही सामने रखकर विचार करते हैं तो सीत्कार, विलास और उपसर्ग यह तीन क्रियाएं संभोग में प्रमुख मानी जाती हैं।
लेकिन संभोग क्रिया का असली आनंद स्त्री और पुरुष के स्वभाव, शरीर की बनावट और जननेन्द्रियों की बनावट पर ज्यादा निर्भर करता है।
आचार्य वात्स्यायन ने जननेन्द्रियों के नाप के अनुसार 3 तरह के पुरुष बताए हैं-
1.शश (खरगोश)- ऐसे पुरुषों का लिंग लगभग 6 इंच का होता है।
2.वृष (बैल)- इस तरह के पुरुषों का लिंग 8 इंच का होता है।
3.अश्व (घोड़ा)- इनका लिंग लगभग 12 इंच का होता है।
ऐसी ही स्त्रियों में भी होता है-
1.मृगी (हिरनी) स्त्री।
2.बड़वा (घोड़ी) स्त्री।
3.हस्तिनी (हथिनी) स्त्री।
पुरुष के लिंग का मापन लंबाई तथा मोटाई के आधार पर किया जाता है और स्त्री की योनि का मापन उसकी गहराई तथा चौड़ाई से होता है। जिन स्त्री और पुरुषों के लिंग और योनि का माप एक ही आकार में होता है उनके आपस में संभोग करनेकी क्रिया को सम कहा जाता है।
सम संभोग मुख्यताः 3 तरह का होता है और विषम संभोग अर्थात अदल-बदलकर संभोग करना मुख्यताः 6 तरह का होता है। सम अर्थात शश पुरुष का मृगी स्त्री के साथ, वृष पुरुष का बड़वा स्त्री के साथ और अश्व पुरुष काहस्तिनी स्त्री के साथ संभोग करना। इस तरह से यह 3 तरह की संभोग क्रिया होती है। शश पुरुष का बड़वा तथा हस्तिनी स्त्री के साथ, वृष पुरुष का मृगी या हस्तिनी स्त्री के साथ और अश्व पुरुष का बड़वा स्त्री के साथ संभोग करना। इस तरह से यह 6 तरह की संभोग क्रिया होती है।
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असन्तुष्ट स्त्रियों की नैतिकता
कुछ दिन पहले किसी पटल पर एक चर्चा थी कि
70 प्रतिशत स्त्रियों को शारीरिक सुख नहीं मिलता ।
अतः उन्हें कहीं भी
शारीरिक सम्बन्ध बनाने की छूट मिलनी चाहिए ।
क्योंकि,
पहली बात ऑर्गेज़म हर स्त्री का अधिकार है ।
दूसरी बात सारी नैतिकता स्त्रियों के लिए क्यों !
तस्लीमा नसरीन का एक उपन्यास है
" लज्जा "
उस में दँगाईयों ने एक आदमी का शिश्न काट दिया है ।
उस व्यक्ति के मन में अपनी स्त्री को
दैहिक सुख न दे पाने की ग्लानि है पर
उसकी पत्नी अपने पति से भावनात्मक रूप से जुड़ी है
तो वह उसे ग्लानि न करने को कहती है ।
एक बार मेरे एक सहकर्मी
अपनी पत्नी के साथ सम्बन्ध न बना पाने की बात
मुझ से साझा कर किसी विकल्प की चर्चा की ।
उनकी पत्नी कर्कश स्वभाव की थीं और
उन्हें दैहिक सम्बन्ध से अत्यधिक अरुचि थी ।
सहकर्मी कहीं और सम्बन्ध बनाना चाहते थे ।
पर नैतिकता उन्हें रोक रही थी ।
यहाँ पर भी वही भावनात्मक समस्या थी ।
जिसकी वज़ह से दैहिक सम्बन्ध नहीं बन पा रहे थे ।
मैंने उन्हें दाम्पत्य जीवन में ह्युमर,
पत्नी के प्रति केयरिंग एटीट्यूड और
इमोशनल बॉन्डिंग पर फोकस करने को कहा,
थोड़े दिन में चीजों में बदलाव आया ।
हम जब दाम्पत्य सम्बन्ध में होते हैं तो
वहाँ भावनात्मक जुड़ाव सब से महत्वपूर्ण होता है ।
जब एक औरत अपने आदमी से असन्तुष्ट होती है
तो अपवाद छोड़ दें तो
उसे दुनिया का कोई आदमी सन्तुष्ट नहीं कर सकता ।
हो सकता कि
वह फौरी तौर पर किसी से सन्तुष्ट हो जाए पर
थोड़े दिनों के बाद उससे भी असन्तुष्ट हो कर
उसकी तलाश किसी और के लिए शुरू हो जायेगी ।
यही बात आदमी पर लागू होती है ।
दरअसल असन्तुष्टि देह की नहीं
बल्कि मन की होती है ।
भाव में होती है ।
हम जिसे चाहते हैं
उससे दृष्टि मिलते
सँसार के सारे सुख मिल जाते हैं ।
जो स्त्रियाँ नैतिकता को तोड़ कर
किसी भी आदमी की गोद में बैठने की बात को
अपना अधिकार बता रहीं
दरअसल वह भावनात्मक रूप से विकलाँग हैं ।
वह दर्पण की धूल साफ करने के लिए
क्रान्ति करने को तैयार हैं पर
धूल उनके चश्मे में लगी है ।
सत्तर प्रतिशत का आँकड़ा पीठ पर लादे ये स्त्रियाँ
पूरी मानव जाति को वेश्यालय में तब्दील करना चाहती हैं ।
जब कि सौ प्रतिशत वेश्याएँ नख भर
दैहिक सुख से शायद ही परिचित हो पाती हों ।
देह का स्पर्श मन के स्पर्श से हो कर जाता है ।
हम ने किसी के मन को छुआ है
तभी हम उसकी देह को महसूस कर सकते हैं ।
ये स्त्रियाँ मन को कभी न छू पाने का अभिशाप लिए
प्रेतनी जैसे भटक रहीं हैं ।
यह सभी स्त्रियों को अपने जैसा बना देना चाहती हैं ।
यही इनका स्त्रीवाद है, यही इनकी तथाकथित नैतिकता ।
मैं फिर एक बात दुहराता हूँ,
प्रेम सबसे बड़ी नैतिकता है,
बिना प्रेम किये कोई भी देह तक नहीं उतर सकता ।
हॉन्टेड स्त्रीवाद से स्त्रियाँ बचें, मेरी मङ्गल कामना हैं ।
🌿🌀✨
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जी स्पॉट खुद महिलाओं को सर्च करना पड़ेगा इसके लिए मास्टरबेशन करिए और धीरे धीरे अपनी फिगर को प्रवेश करिए उस समय एक हाथ से अपने स्तन को भी सहलाइये और ध्यान से स्लो स्लो उंगली डालिए जिस जगह पर आपकी उंगली टच होने के बाद आपको आनंद आने लगे समझिए वही जी स्पॉट है ।
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यह तस्वीर एक कामुक औरत के मर्द के साथ कामवासना के उस सौंदर्य की मूर्ति है जो बेहद दिलचस्प है।
औरत ने जब भी शादी के ख्वाब बुने तो उसने कभी भी नहीं सोचा होगा की जब वो 30 से 45 के बीच की होने चलेगी तो उसकी कामुकता इतनी बढ़ जाएगी की उसका पति उसे संतुष्ट नहीं कर पाएगा।
इसमें न उसकी गलती है और न ही उसके पति की, शादी के 5 साल बाद अक्सर पति पत्नी एक दूसरे से ऊब चुके होते हैं इसलिए ऐसा होता है। आखिर यौवन से भरे जिस्म का औरत फिर करे क्या?
उसके योनि की आग और उसके गदरीले जिस्म की कसक सब अधूरी सी रह जाती हैं, ऐसे में गैर मर्द के तरफ वह आकर्षित होती है। और अपने जिंदगी की अधूरी कहानी को हम जैसे पराए जा_लिम मर्द के साथ पूरा करना चाहती है।
चोदू पंडित
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क्रिस क्रॉस से क्स पोजीशन (Criss Cross S ex Position)
इस पोजीशन में से क्स करने से शरीर में ज्यादा भार नहीं पड़ता है। इस से क्स पोजीशन में महिला साथी नीचे होती है और पुरुष महिला के टांगों के बीच से निकलकर कैंची की तरह की आकृति बनाते हैं। यानि की मेल पार्टनर क्रॉस लेग करके बैठता है और महिला एक तरह से पुरुष की गोद में उसे हाथों और पैरों से लपेटकर बैठती है।
क्रिस क्रॉस से क्स पोजीशन के फायदे -
इस पोजीशन में दोनों पार्टनर एक-दूसरे के सामने होते हैं, इसलिए एक को देख दूसरे का मूड बन जाता है।
इस पोजीशन में आई कॉन्टैक्ट करते हुए आप दोनों एक अलग ही लेवल पर पहुंच सकते है।
इस पोजीशन को करने से दोनों ही पार्टनर की पैरों की मसल्स मजबूत होती है।
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जिंदगी में यदि सबसे खूबसूरत कुछ है तो वह है सम्भोग । जिंदगी में यदि कुछ भी सबसे इंटेंस है तो वह है सम्भोग । जिंदगी में सबसे आनन्ददायक कुछ है तो वह है सम्भोग ।
पर कुछ शर्तें हैं !
पहली शर्त यह है कि दोनों पार्टनर इसमें पूरी तरह भाग लें । पूरी तरह डूब जाएँ । पूरी तरह घुल जाएँ ।
दूसरी शर्त है कि सम्भोग के प्रति कोई हीन ग्रन्थि न हो । कोई टैबू न हो । इस प्रकार की कोई अवधारणा न हो कि यह कोई गलत कृत्य है । माइंड एक दम स्वस्थ हो इसके प्रति !
तीसरी शर्त है ! दोनों पार्टनर प्रेम में हों । यदि प्रेम न हो तो भी चलेगा । लेकिन यदि दोनों में प्रेम हो तब जो दोनों पिघलेंगे एक दूसरे में जैसे नमक की डली पानी में घुल जाती है । एक दूसरे को सुख के उस मुकाम पर पहुंचा देंगे जहां सब कुछ दिव्य हो उठेगा । जहां सम्भोग पारलौकिक हो जाएगा । यह सिर्फ देह का नही बल्कि रूह का मिलन हो जाएगा ।
हर इंसान को आभारी होना चाहिए कि सम्भोग जैसा क्रिया प्रकृति ने उपहार में दिया है । पहले स्त्री और पुरुष बनाया फिर उनके मिलने हेतु सम्भोग !
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सेक्स के दौरान पुरुष द्वारा स्त्री के स्तनों को छूना,सहलाना,दबाना, निप्पल को चूसना, दांतों से धीरे-धीरे काटना, उस पर अपना चेहरा रगड़ना प्यार और सेक्स का सर्वाधिक आनंद प्राप्त करने का जरिया होता है।
निप्पल को चाटने और चूसने का काम बारी-बारी से करें।पुरुषों द्वारा इन क्रियाओं के करने से स्त्री को आनंद और उत्तेजना की अनुभूति होती है।
स्त्री के स्तनों को दबाने, चूसने और सहलाने से उनके नीचे योनि के भग में आनंददायक थिरकन का एहसास होता है, जिसके कारण उनकी कामोत्तेजना बढ़ने लगती है और वे सेक्स करने के लिए तैयार हो जाती है और फिर अदभुत आनंद की तृप्ति प्राप्त करती है।
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"वासना"
प्रत्येक व्यक्ति सेक्स का नाम सुनकर एकदम अलर्ट हो जाता है, मानो की उसकी वासना की इंद्री जाग गई हो।
अक्सर देखा गया है की ज्यों ज्यों औरत अपनी बड़ी उम्र की और अग्रसर होती है , उसकी सेक्स की क्षमता बढ़ती जाती है, उस उम्र के पड़ाव में पुरुष उस स्त्री के साथ रह रह (संभोग)कर उस स्त्री के प्रति नीरस होता चला जाता है।
स्त्री को परमात्मा ने कोमल बनाया है, उस उम्र के पड़ाव में स्त्री को सुडौल व्यक्ति की तलाश होती है जो की उसका पति इसमें असमर्थ होता है, ऐसी परिस्थितियों में अक्सर देखा गया है कि मिडल एज की औरतें जवां लड़कों की और आकर्षित होने लगती हैं।ऐसा स्वाभाविक है क्योंकि यह उस स्त्री की शारीरिक आवश्यकता है,जिसे वह पुर्ण करने में सक्षम होता है।
अब हमारे आज के इस पाश्चत्य सभ्यता को मानने वाले लोग इस संबंध को खूब अच्छी तरह निभा रहें है पति पत्नी दोनो मिलकर अपना जीवन एक दूसरे के लिए समर्पित कर रहे हैं।
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स्त्री को चुम्बन, आलिंगन और प्रहार उत्तेजना पैदा करने वाली क्रियाओं की वजह से पुरुष के साथ संभोग क्रिया करने में चरम सुख की प्राप्ति होती है।
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एक सवाल आया की 👉
क्या लड़की खड़े होकर सेक्स करने से गर्भवती हो सकती है –
हां यदि लड़की खड़े होकर सेक्स करती है तो वह गर्भवती हो सकती हैं। एक लड़की किसी भी स्थिति में गर्भवती हो सकती है अगर वह यौन संबंध रखती है। यह एक मिथक है कि यदि कोई लड़की लड़के के ऊपर बैठ कर सेक्स करती है या दीवार से खड़ा होकर या झुक कर सेक्स करती है तो वह गर्भवती नहीं होगी।
देखिए आप किसी भी सेक्स पोजीशन में प्रेग्रेंट हो सकती हैं। गर्भधारण से बचने के लिए कंडोम का प्रयोग करें सिर्फ ।
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कामासूत्र के अनुसार लिंग और योनि के 3 प्रकार होते हैं । संभोग बराबर वाले योनि और लिंग से करें तो नायिका जल्दी संतुष्ट होती हैं ।
छोटे, बड़े या मध्यम आकार के लिंग के आधार पर पुरुष को शश (खरगोश), बैल और घोड़े की संज्ञा दी गई है।
स्त्री की योनि कम गहरी, ज्यादा गहरी या साधारण गहरी होने के आधार पर उसे मृगी (हिरनी), घोड़ी तथा हथिनी की संज्ञा दी जाती है।
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एक रिसर्च के अनुसार, सुबह के समय सेक्स करने से पुरुषों में वीर्य की गुणवत्ता 12 % तक बढ़ जाती है।
जिन महिलाओं को गर्भधारण करने में दिक्कत होती है, उन्हें सुबह में सेक्स करना चाहिए। इससे गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है और सेक्स संबंधी कई समस्याओं से भी छुटकारा मिलता है।
शुभ प्रभात
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संभोग क्रिया के समय जिस पुरुष की काम-उत्तेजना बहुत कम होती है, वीर्य कम निकलता है और जो स्त्री के द्वारा अपने शरीर पर नखक्षत (नाखूनों को गढ़ाना) और दन्तक्षत (दांतों को गढ़ाना) आदि प्रहारों को सहने में असमर्थ हो तो वह पुरुष मन्दवेग कहलाता है।
पोस्ट - 5
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मध्यम और तेज संभोग करने की इच्छा रखने वाले पुरूषों को चण्डवेग कहा जाता है।
इसी तरह संभोग की इच्छा के मुताबिक स्त्रियां भी 3 प्रकारकी होती हैं-
मंदवेग
मध्यम वेग और
चंडवेग।
पोस्ट - 6
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फीमेल संभोग के समय हर 12 मिनट में ऑर्गेज्म का अनुभव करती हैं, जबकि पुरुषों को दूसरे ऑर्गेज्म का आनंद लेने में औसतन आधे घंटे से एक घंटे तक का समय लग सकता है।
तो अगर महिला संतुष्ट हो गई पुरुष से पहले तो 12 मिनट बाद फिर वह जागृत हो सकती है इस बीच में पुरुष को फोरप्ले करते रहना चाहिए और जब महिला कामुक हो जाय तो फिर, वह इंटरकोर्स शुरू कर सकता है, और तब तक जारी रख सकता है जब तक कि दोनों संतुष्ट न हों।
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