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प्रियत्मा !
दिल की हर धड़कन मे
मोहब्बत की तरह समाये हो
हमने जब भी सांस ली है
सिर्फ तुम ही तुम तुम याद आयी हो❣️
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लडकियों की अंर्तवस्त्रों से उनके रोमांटिक मूड और सेक्स की इच्छा का पता लगाया जा सकता है। इसके लिए एक सर्वेक्षण किया गया। इस सर्वेक्षण के अनुसार लाल, पीला तथा नारंगी रंग गर्म स्पेक्ट्रम को दर्शाता है जो कि ऊर्जा तथा उत्साह की भावनाएं पैदा करता है, यह हमारे दिल की धडकन और रक्तचाप को भी ब़डा सकते है।
लाल/पीला/ऑंरेज रंग के अंर्तवस्त्र
इन रंगो के अंतरवस्त्र आवेशपूर्ण ऊर्जावान तथा नाटकीय स्वभाव को दर्शाते है। यह रंग पसंद करने वाली महिलाएं बिदास होती है तथा उनका मुड भी नाटकीय रूप से बदलता है जो कि उनके आकर्षण का एक हिस्सा है।
गुलाबी रंग के अंर्तवस्त्र
यह रंग पसंद करने वाली महिलाएं स्वभाव से रोमांटिक तथा विन्रम होती है, इन्हे अधिक से अधिक स्त्रेह पाने
की लालसा होती है। यह महिलाएं काफी कामुक होती है परंतु कभी आगे से पहल नही करती है।
काला रंग के अंर्तवस्त्र
यह रंग एक व्यक्तिपरक और शक्तिशाली व्यक्तित्व को दर्शाता है। इस तरह की महिलाएं सूक्षम आकर्षण वाली परन्तु आवेशपूर्ण होती है।
सफेद रंग के अंर्तवस्त्र
यह रंग पंसद करने वाली महिलाएं मासूम परंतु सुझाव देने के लिए तत्पर रहती है। यह एक अच्छी शिक्षार्थी भी होती है।
स्किन या भूरा रंग के अंर्तवस्त्र
यह रंग स्वाभाविक वास्तविक तथा पारदर्शी व्यक्तितत्व को दर्शाता है। इसको पसंद करने वाली महिलाएं कुछ भी छुपाना पंसद नही करती है।
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#संभोग में चुम्बन सबसे प्रथम होता है। चरम तक जाने की शुरुआत यही तय करता है कि आगे कहां तक जा पाओगे ?
ऐसे संभोग एक श्रेष्ठ योग है जिसमें दो शरीर का समान रूप योग होता है, और वास्तविक योग तो यही है जिसमें दो शरीर मिलकर कुछ नया बनाते है। योग मतलब जोड़ना।
अंग-अंग का योग ही तो संभोग है जिसमें अंत में शांतचित्त हो जाना असीम अनुभव के साथ
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💞 "किन अल्फाज़ो में कहूँ कि
मुझे तुम्हारी आदत हो गई है....तेरी.....!!
💞 "ये खूबसूरत मोहब्बत तेरी..
अब मेरी इबादत हो गई है....पुरनकी.....!!
शुभ प्रभात प्रिये !!
💞💞💞💞💞💞💕
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ऐ पुरनकी !!
सुनो ऐसा ना करना,
जब आना तो जरूर बताना,,
यूँ बिन मिले लौट न जाना..
हम पलके बिछा के राह देखेंगे,
अपने हृदय की गति बताएंगे तुम्हें,
कितनी यादें सजा के रखे हैं,
पास अपने,सब दिखाएंगे तुम्हें।
तुम्हारे साथ ही पहाड़ियों की सैर करना
बहुत अच्छा लगता हैे मुझे
इन वादियों और घटाओ के सिवा है ही क्या हमारा बस
एक तुम ही तो हो,
जिसके साथ हम इन नजारों को देखते हैं और
ये नज़ारे और भी हसीन हो जाते हैं।
आना तो जरूर बताना, बिन मिले लौट न जाना
💕💕💕
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प्रिय पुरनकी !
रूह में आकर तुम मेरे
कुछ इस कदर समाए ।
चाहा भूल जाएंँ तुम्हे पर,
भूले ना भुलाए हम ।।
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*👉ये कथा घर में सबको सुनायें👈*
*एक महिला को सब्जी मण्डी जाना था..*
*उसने जूट का बैग लिया और सड़क के किनारे सब्जी मण्डी की ओर चल पड़ी...*
*तभी पीछे से एक ऑटो वाले ने आवाज़ दी : —'कहाँ जायेंगी माता जी...?''*
*महिला ने ''नहीं भैय्या'' कहा तो ऑटो वाला आगे निकल गया.*
*अगले दिन महिला अपनी बिटिया मानवी को स्कूल बस में बैठाकर घर लौट रही थी...*
*तभी पीछे से एक ऑटो वाले ने आवाज़ दी :—बहनजी चन्द्रनगर जाना है क्या...?''*
*महिला ने मना कर दिया...*
*पास से गुजरते उस ऑटोवाले को देखकर महिला पहचान गयी कि ये कल वाला ही ऑटो वाला था.*
*आज महिला को अपनी सहेली के घर जाना था.*
*वह सड़क किनारे खड़ी होकर ऑटो की प्रतीक्षा करने लगी.*
*तभी एक ऑटो आकर रुका :—''कहाँ जाएंगी मैडम...?''*
*महिला ने देखा ये वो ही ऑटोवाला है जो कई बार इधर से गुज़रते हुए उससे पूंछता रहता है चलने के लिए..*
*महिला बोली :— ''मधुबन कॉलोनी है ना सिविल लाइन्स में, वहीँ जाना है.. चलोगे...?''*
*ऑटोवाला मुस्कुराते हुए बोला :— ''चलेंगें क्यों नहीं मैडम..आ जाइये...!"*
*ऑटो वाले के ये कहते ही महिला ऑटो में बैठ गयी.*
*ऑटो स्टार्ट होते ही महिला ने जिज्ञासावश उस ऑटोवाले से पूंछ ही लिया :—''भैय्या एक बात बताइये..?-*
*दो-तीन दिन पहले आप मुझे माताजी कहकर चलने के लिए पूंछ रहे थे,*
*कल बहनजी और आज मैडम, ऐसा क्यूँ...?''*
*ऑटोवाला थोड़ा झिझककर शरमाते हुए बोला :—''जी सच बताऊँ... आप चाहे जो भी समझेँ पर किसी का भी पहनावा हमारी सोच पर असर डालता है.*
*आप दो-तीन दिन पहले साड़ी में थीं तो एकाएक मन में आदर के भाव जागे,*
*क्योंकि,*
*मेरी माँ हमेशा साड़ी ही पहनती है.*
*इसीलिए मुँह से स्वयं ही "माताजी'" निकल गया.*
*कल आप सलवार-कुर्ती में थीँ, जो मेरी बहन भी पहनती है*
*इसीलिए आपके प्रति स्नेह का भाव मन में जागा और मैंने ''बहनजी'' कहकर आपको आवाज़ दे दी.*
*आज आप जीन्स-टॉप में हैं, और इस लिबास में माँ या बहन के भाव तो नहीँ जागते*.
*इसीलिए मैंने आपको "मैडम" कहकर पुकारा.*
*कथासार*
*हमारे परिधान का न केवल हमारे विचारों पर वरन दूसरे के भावों को भी बहुत प्रभावित करता है.*
*टीवी, फिल्मों या औरों को देखकर पहनावा ना बदलें, बल्कि विवेक और संस्कृति की ओर भी ध्यान दें.*
*धन्यवाद सहित -----🙏🙏*
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जिंदगी धीरे-धीरे यह सिखा ही देती है ।
किसी से कोई उम्मीद ना रखना । अपने आप में खुश रहना । यही हकीकत खुशी का मूल मंत्र है ।
जो यह नहीं सीख पाते उनके दुख दूर होना जरा मुश्किल है ।
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जिह्वा अंग को थी उकसाती, उसे होठों से मैं कसकर पकडे,
साजन के बदन में थिरकन के, सखी कई-कई अब बुलबुले उड़े,
अंग को जिह्वा-होठों से खीच, सखी मैंने कंठ लगाय लिया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.
उसको करने से प्यार सखी, मेरा मन कभी न भरता था,
मुंह का रस अंग भिगोने को, सखी कभी भी न कम पड़ता था
चूस- चाट- चटकार-चबा, कई बार उसे कंठस्थ किया,
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.
साजन भी अब जल में उतरे, मुझे अपनी बाँहों में उठा लिया
फिर कम्मर से मुझे पकड़ सखी, अपने अंग पे जैसे बिठा लिया
अंग से अंग मिल गया सखी, अंग स्वतः ही अंग में उतर गया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.
दस अंगुल के कठोर अंग ने, मेरे अंग में स्वछंद प्रवेश किया
हम कम्मर तक डूबे थे सखी, जल में अंग ने अंग धार लिया
साजन ने पकड़ नितम्बों से, थोडा ऊपर मुझे उठाय लिया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.
साजन के हाथों के आर-पार, मैंने जंघाएँ सखी फंसा लई
साजन की गर्दन में बाहें लपेट, नितम्बों को धीमी गति दई
दोनों हाथों से पकड़ नितम्ब, साजन ने उन्हें गतिमान किया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.
मेरी गति से सखी जल के मध्य, छप-छप आवाजें होती थी,
मुख से निकली मेरी आह ओह, मेरे सुख की कहानी कहती थी
मादक अंगों की लिसलिसी छुअन, रग-रग को भाव बिभोर किया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.
जंघा से पार दो कठोर हाथ, नितम्बों को जकड़े- पकडे थे,
कभी उसने सहलाया उनको, कभी उँगलियों से गए मसले थे
मेरे अंग ने साजन के अंग की, चिकनाई सखी और बड़ा दिया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
साजन के अंग पे चढ़-चलकर, मैं सुख के शिखर तक जा पहुंची,
अंगों के घर्षण-मर्दन से, तन में ज्वालायें कई-कई धधकीं,
मैं जैसे ही स्थिर हुई सखी, साजन ने नितम्ब-क्रम चला दिया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
बृक्षों से लिपटी लता सदृश, अंग उसके अंग से चिपटा था
अंग घर्षण से निकले स्वर से, वातावरण बहुत ही मादक था
उसका अंग तो मेरे अंग के, जैसे कंठ के भी सखी पार गया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.
जल में छप-छप अंग में लप-लप, मुंह में थे आह-ओह के शब्द
साँसें थी जैसे धोकनी हो, हमें देख प्रक्रति भी थी स्तब्ध
उसके जोशीले नितम्बों ने, जल में लहरें कई उठाय दिया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
साजन का सिर पकड़ के हाथों में, मुख उसके जिह्वा घुसाय दिया
होठों को होठों से जकड़ा, जिह्वा से जिह्वा का मेल किया
जैसे अंग परस्पर मिलते थे, जिह्वा ने मुख में वही खेल किया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
साँसों की गति थी तूफानी, पर स्पंदन की उससे भी तेज
अंगों की तरलता के आगे, चांदनी भी थी जैसे निस्तेज
चुम्बन के स्वर, जल की छप-छप, साँसों के स्वर में घोल दिया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
अति तीब्र गति से सांसों के, तूफ़ान निरंतर बह निकले,
अति दीर्घ आह-ओह के संग, बदन कँपकपाए हम बह निकले,
अंग के अन्दर बने तरण ताल, मन ने उनमे खूब किलोल किया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
अंगों से जो रस बह निकले, अन्तरंग ताल के जल में मिले
सांसों में उठे तूफानों के, अब जाके धीमे पड़े सिले
तरण ताल में उठी लहरों ने, अब जाकर के विश्राम किया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
सब शांत हुआ लेकिन री सखी, मैं साजन से लिपटी ही रही
मेरे अंग में उसके अंग की सखी, गहन ऊष्मा घुलती रही
मुझे पता नहीं कब साजन ने, मुझे तट पर लाकर लिटा दिया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
मैंने खोली जब आँखें तो, साजन को निज सम्मुख पाया
होठों पर म्रदु मुस्कान लिए, उसे मुख निहारते हुए पाया
बाँहों से साजन को घेर सखी, तृप्त होठों से होठ मिलाय दिया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
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सखी चारों तरफ चांदनी थी, हम तरण-ताल में उतरे थे,
जल तो कुछ शीतल था लेकिन, ये बदन हमारे जलते थे,
जल में ही सखी सुन साजन ने, मुझको बाँहों में भीच लिया,
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.
हर्षित उल्लासित मन से हमने, कई भांति जल में क्रीडा की,
साजन ने दबा उभारों को, मन-मादक मुझको पीड़ा दी,
यत्र-तत्र उसके चुम्बनों का, मैंने जरा नहीं प्रतिकार किया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.
मुझको बाँहों में उठा सखी, कभी जल में उछाल के झेल लिया,
कभी मुझे पकड़ कर कम्मर से, जल में चक्कर सा घुमा दिया,
हाथों से जल मुझपे उछाल, कई भांति उसने चुहुल किया,
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.
मैं भी साजन को छेड़त थी, कभी अंग को पकड़त छोड़त थी,
साजन की कमर, नितम्बों पर, कभी च्योंटी काट के दौड़त थी,
साजन के उभरे सीने पर, मैंने दंताक्षर री सखी छाप दिया
उस रात की बात न पूंछ सखी , जब साजन ने खोली अँगिया.
गर्दन, जांघें, स्तन, नितम्ब, पेडू पे होष्ठ-चिन्ह छापे गए,
ऊँगली-मुट्ठी के पैमाने से, वस्त्र सहित दृढ़ स्तन नापे गए,
होठों पे रख कर तप्त होठ, मुख में मुख का रस घोल दिया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.
अब जहाँ- जहाँ साजन जाता, मैं वहाँ- वहाँ पर जाती थी,
उससे होने की दूर सखी, नहीं चेष्टा मैं कर पाती थी,
जल में डूबे द्रवित अंग लिए, नैनों से साजन को न्योत दिया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.
सखी साजन ने जल के अन्दर, मुझे पूर्णतया निर्वस्त्र किया,
हाथों से जलमग्न उभारों को, कई भांति दबाकर छोड़ दिया,
जल में तर मेरे नितम्बों को, कई तरह से उसने निचोड़ दिया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
ऊँगली-मुट्ठी से वस्त्र रहित नितम्ब, नोचे-खरोचे-मसले गए,
आटे की लोई से स्तन द्वय, दबाये-भीचे-पकडे-छोड़े गए,
नितम्बों की गहन उस घाटी में, उँगलियों ने गमन भी खूब किया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
स्तन की बोंडी पे चुम्बन ले, जिह्वा से उनको उकसाया,
पहले बोंडी मुंह अन्दर की, फिर अमरुद तरह स्तन खाया,
होंठ-जिह्वा-दांतों से दबा-दबा, सारा रस उनका चूस लिया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
साजन मेरे पीछे आया, मुझे अंग की गडन महसूस हुई
स्तन से लेकर द्रवित अंग तक, उँगलियाँ की सरसरी विस्तृत हुई
दोनों हाथों में भीची कम्मर, और अंग पे मुझे बिठाय लिया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.
सखी साजन ने भर बाँहों में, मेरे होठों को अतिशय चूमा,
जल में जलमग्न स्तनों को, हाथों से उभार-उभार चूमा,
स्तनों के मध्य रख कर अंग को, उन्हें कई- कई बार हिलोर दिया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.
होकर अब बड़ी बेसब्र सखी, मैं जल-तल पर मछली सी मचली,
साजन का अंग पकड़ने को, मेरी मुट्ठी घडी-घडी फिसली
साजन की सख्त उँगलियों ने, अंग में कमल के पुष्प कई खिला दिया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.
तरण-ताल के जल में सखी, हमरे अंग के रंग विलीन हुए
जल में चिकने होकर हमने, उत्तेजना के नए-नए शिखर छुए,
मैंने मुट्ठी से अंग के संग, साजन को भाव -विभोर किया.
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.
सखी साजन ने मुझको अपनी, निर्मम बाँहों में उठा लिया,
और ला के किनारे तट पे मुझे, हौले से सखी बिठाय दिया,
खुद वो तो रहा जल के अन्दर, मुझे जांघों से पकड़कर खीच लिया.
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.
मैं कुहनी के बल बैठी थी, अंग उसके मुख के सम्मुख था,
मैं सोच-सोच उद्वेलित थी, मैं जानत थी अब क्या होगा
साजन ने अपनी जिह्वा से, मेरी मर्जी का सखी काम किया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.
मस्ती के मारे सुन री सखी, अब मुझको कुछ न सूझत था,
साजन होठों और जिह्वा से, मेरे अंतर्रस को चूसत था,
मैंने भी उठाकर नितम्ब सखी, मस्ती का उदाहरण पेश किया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.
साजन के होंठ तो चंचल थे, जिह्वा भी अंग पर अति फिसली,
कुहनी के बल मैंने नितम्ब उठा, जिह्वा अंग के अन्दर कर ली
अंग में जिह्वा का मादक रस, सखी मैंने स्वयं उड़ेल लिया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.
साजन का दस अंगुल का अंग, मुझे जल में और विशाल दिखा,
उसकी मादकता पाने को, सखी मेरे मन भी लोभ उठा
मैंने जल में अब उतर सखी, साजन को किनारे बिठा दिया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.
भीगे अंग को मुख के रस से, चहुँ और सखी लिपटाय दिया
होठों से पकड़ कर कंठ तरफ, मैंने उसको सरकाय लिया
नीचे के होंठ संग जिह्वा रख, मैंने लिप्सा अपनी पूर्ण किया
उस रात की बात न पूंछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया.
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8.उम्र बढ़ाने में मददगार-
ऑर्गैज्म पाने की कोशिश के दौरान शरीर से डिहाइड्रोइपियानड्रोस्टीरोन हॉर्मोन रिलीज होता है, जो उम्र बढ़ाने में मददगार होता है। यह हॉर्मोन इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है और शरीर के टिश्यू रिपेयर करता है।
9.सेक्स मसल्स को बनाए मजबूत:-
कम सेक्स करने वाले पुरुषों के मुकाबले हर दिन सेक्स करने वाले पुरुषों के मसल्स अधिक मजबूत हो सकते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि सेक्स के दौरान पुरुषों के शरीर से टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन रिलीज होता है जो फील गुड के साथ-साथ मसल्स और हड्डियों को भी मजबूत बनाता है।
पुरूषों को सेक्स के बहुत से फायदे मिलते हैं जैसे सेक्स करने से उनकी मसल्स मजबूत होती हैं। जो पुरूष नियमित रूप से सेक्स करते हैं उनके मसल्स मजबूत बनते हैं।
10. सेक्स करना तनाव कम करे-
रोजाना सेक्स करने से न सिर्फ आपका मूड अच्छा रहता है, बल्कि यह तनाव से दूर रखने में भी मदद करता है। सेक्स करने से तनाव कम होता है। ऐसा डॉक्टर भी कहते हैं कि सेक्स आपकी बॉडी में स्ट्रेस लेवल को कम करता है।
सेक्स करने से शरीर में हैप्पी हॉर्मोन रिलीज होता है जो स्ट्रेस कम करने में मददगार होता है।
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हर दिन सेक्स करना कैसे फायदेमंद है ।
Dr. Hemakshi J के द्वारा मेडिकल समीक्षाAnkita mishra द्वारा लिखितअपडेटेड 25/09/2019 ......
भले ही सेक्स शब्द का नाम आप लोगों के बीच लेने से कतराते हों लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि सेक्स हमारी जिंदगी का एक अहम हिस्सा है। अगर कहें कि सेक्स करना सिर्फ शारीरिक सुख के लिए जरूरी है तो यह गलत होगा।
ऐसा इसलिए है क्योंकि कई रिसर्च इस बात को साबित कर चुकी हैं कि सेक्स करना न सिर्फ शरीर को संतुष्टि देता है बल्कि स्वास्थ्य को भी कई बीमारियों से बचा कर रखता है।
सेक्स करना कई तरह से फायदेमंद होता है। यह शरीर से तनाव को कम करता है और इसकी वजह से ब्लड सर्कुलेशन भी ठीक रहता है।
1.सेक्स करना आपको खुश करता है
सेक्स करने के दौरान शरीर में डोपामाइन हार्मोन रिलीज होता है, जिसे फील गुड हॉर्मोन भी कहा जाता है। ये उन हॉर्मोंस में से एक है जो हमें खुशी का एहसास दिलाता है। यकीन मानिए अगर आप चॉकलेट खाकर सेक्स करेंगे, तो सेक्स से मिलने वाली खुशी कई गुना तक बढ़ सकती है।
सेक्स करना आपको कई तरीके से खुश रखता है। वह चाहे हॉर्मोन रिलीज से हो या फिर आपकी सेक्सुअली सेटिस्फेक्शन से हो। ज्यादातर लोगों के लिए सेक्स हर तरह से खुश रखने का जरिया बन सकता है।
2.सेक्स करना एक्सरसाइज का बेहतरीन तरीका है
इंटरकोर्स के दौरान शारीरिक गतिविधि होती है और आपके शरीर एक्टिव मोड़ में रहता है। इस दौरान शरीर उतनी ही मेहनत करता है, जितना किसी वर्कआउट या व्यायाम करते समय करनी होती है।
सेक्स शरीर की कैलोरी बर्न करने में मददगार होता है। रिसर्च की मानें तो हफ्ते में तीन बार सेक्स करने से एक साल में शरीर उतनी कैलोरी बर्न कर सकता है, जितनी 75 मील जॉगिंग करने से बर्न होती है। जो लोग जिम में जाकर एक्सरसाइज करना पसंद नहीं करते हैं, उनके लिए सेक्स करना सरल उपाय है।
3.सेक्स करना इम्यून सिस्टम को सुधारे :-
पेंसिल्वेनिया के विल्क्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि “ऐसे छात्र जो हफ्ते में दो बार से अधिक सेक्स करते थे, उनका शरीर सेक्स न करने या बहुत कम सेक्स करने वाले छात्रों के मुकाबले कीटाणुओं, वायरस और अन्य कई तरह की बीमारियों से लड़ने के लिए ज्यादा मजबूत पाया गया।”
इम्यून सिस्टम सुधारने के लिए भी सेक्स करना आसान उपाय है। अगर आपको सेक्स करना पसंद है तो आपका इम्यून सिस्टम हमेशा ठीक रहता है। किसी भी बीमारी से लड़ने और बचने का सबसे आसान उपाय है इम्यूनिटी को मजबूत करना और सेक्स की मदद से आप अपनी इम्यूनिटि को बढ़ा सकते हैं।
4.सेक्स करना साथी की इंटिमेसी बढ़ाए-
सेक्स करने के बाद पार्टनर के साथ मानसिक और शारीरिक दोनों तरह से इंटिमेसी बढ़ जाती है। ऐसे कपल्स जो बहुत कम सेक्स करते हैं, उनके पुरुष साथियों की शिकायत रहती है कि सेक्स के दौरान उनकी महिला साथी उनके साथ काफी असहज महसूस करती हैं।
वहीं, इन कपल्स में से महिलाओं का भी मानना है कि सेक्स के दौरान वो अपनी शारीरिक गतिविधियों को लेकर परेशान हो जाती हैं जबकि, नियमित सेक्स करने वाले कपल्स इस समस्या से बचे रहते हैं।
वह सेक्स से जुड़ी अपनी ऐसी किसी भी समस्या को एक-दूसरे से शेयर कर पाते हैं। सेक्स करना आपको आपके पार्टनर के और करीब लेकर जाता है। अगर आपको लगता है कि आप अपने साथी से दूर जा रहे हैं तो आप सेक्स के जरिए इस दूरी को कम कर सकते हैं।
5.महिलाओं के मूत्राशय के नियंत्रण में सुधार-
अगर महिलाएं सेक्स के लिए समय निकाल लेंगी, तो यह उनके पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को बेहतर बना सकता है। सेक्स के दौरान ऑर्गैज्म प्राप्त करने पर इन मांसपेशियों में संकुचन आता है। इससे महिलाओं के मूत्राशय के नियंत्रण में सुधार आता है। सेक्स करना महिलाओं को उनके ब्लैडर पर कंट्रोल करने का सही उपाय है।
6. सेक्स करना स्किन को ग्लोइंग बनाए-
आमतौर पर देखा जाता है कि शादी के बाद अचानक से महिलाओं की त्वचा में निखार आ जाता है। इसका एक कारण सेक्स भी हो सकता है। सेक्स कार्डियो की तरह ही शरीर पर असर करता है।
यह पसीना बहाता है, कैलोरी बर्न करता है जिससे त्वचा पर निखार आता है। कई महिलाओं में सेक्स के दौरान ऐसे हॉर्मोन रिलीज होते हैं जिससे उनकी स्किन ग्लोइंग होती है।
7.हर दिन के छोटे-मोटे दर्द से छुटकारा
सेक्स के दौरान पुरुष और महिला दोनों के ही शरीर में एंडोर्फिन हॉर्मोन रिलीज होता है, जो एक तरह से पेन किलर का काम करता है। स्टडी के मुताबिक, अगर हर बार सेक्स के दौरान ऑर्गैज्म का अनुभव होता है, तो ऐसे लोगों को बदन दर्द या सिरदर्द की समस्या से छुटकारा मिल सकता है।
सेक्स करने से शरीर में होने वाले छोटे-मोटे दर्द से छुटकारा मिल सकता है। पीरियड्स के दर्द से भी सेक्स करने के बाद आराम मिलता है। सेक्स शरीर में मौजूद कई परेशानियों को कम करने का करता है।
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गठीला_बदन, विशाल स्तन, गोरी चमड़ी बस एक ब्रा और पैंटी पहनी हो, कमरबन्द हो नंगे पेट पर, कमर से खिसकती लंगोट, काली बगलो से आते पसीने की सुगंध सबको मोहित कर लेती है।
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संभोग से जुड़ी हुई प्रेम से जुड़ी हुई सभी जानकारी के लिए सन्देश भेजे जय कामदेव जय भोलेनाथ
https://t.me/dev_your_buddy
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स्ट्रॉबेरी हार्ट के लिये तो अच्छी होती ही है ।
बल्कि सेक्स डाइट में खाने के लिये भी अच्छी मानी जाती है। यह उत्तेजना पैदा करती है।
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तेरे प्यार की हिफाज़त ..
कुछ इस तरह की मैंने,
जब भी किसी ने प्यार से देखा..
नज़रे झुका लीया मैंने।
💎❤️🌹
#प्रियत्मा💎
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#प्रियत्मा_की_कलम_से
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
एक शादी_शुदा स्त्री, जब किसी पुरूष से मिलती है...
उसे जाने अनजाने मे अपना दोस्त बनाती है....
तो वो जानती है की
न तो वो उसकी हो सकती है....
और न ही वो उसका हो सकता है....
वो उसे पा भी नही सकती और खोना भी नही चाहती..
फिर भी वह इस रिश्ते को वो अपने मन की चुनी डोर से बांध लेती है....
तो क्या वो इस समाज के नियमो को नही मानती?
क्या वो अपने सीमा की दहलीज को नही जानती?
जी नहीं....!!
वो समाज के नियमो को भी मानती है....
और अपने सीमा की दहलीज को भी जानती है...
मगर कुछ पल के लिए वो अपनी जिम्मेदारी भूल जाना चाहती है...!!
कुछ खट्टा... कुछ मीठा....
आपस मे बांटना चाहती है ..
जो शायद कही और किसी के पास नही बांटा जा सकता है...
वो उस शख्स से कुछ एहसास बांटना चाहती है...
जो उसके मन के भीतर ही रह गए है कई सालों से...
थोडा हँसना चाहती है...
खिलखिलाना चाहती हैं...
वो चाहती है की कोई उसे भी समझे बिन कहे...
सारा दिन सबकी फिक्र करने वाली स्त्री चाहती है की कोई उसकी भी फिक्र करे...
वो बस अपने मन की बात कहना चाहती है...
जो रिश्तो और जिम्मेदारी की डोर से आजाद हो...
कुछ पल बिताना चाहती है...
जिसमे न दूध उबलने की फिक्र हो,न राशन का जिक्र हो....न EMI की कोई तारीख हो....
आज क्या बनाना है,
ना इसकी कोई तैयारी हो....
बस कुछ ऐसे ही मन की दो बातें करना चाहती है....
कभी उल्टी_सीधी ,बिना सर_पैर की बाते...
तो कभी छोटी सी हंसीओर कुछ पल की खुशी...
बस इतना ही तो चाहती है....
आज शायद हर कोई इस रिश्ते से मुक्त एक दोस्त ढूंढता है....
जो जिम्मेदारी से मुक्त हो...!.!😊❤
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