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* प्यास दरिया की निगाहों से छुपा रखी है
एक बादल से बडी आश लगा रखी हैं
* तेरी आँखों की कशिश कैसे तुझे समझाऊ
इन चरागो ने मेरी नींद उडा रखी हैं
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वीर्य
अक्सर आप देखते होंगे की कई कपल ऐसे हैं जिन्हे संतान नहीं हो पाता है वीर्य संपुष्ट नही होने के कारण ।
इसलिए वीर्य के महत्ता को समझिए और वीर्य को बरबाद मत करिए यह अनमोल है इसका प्रयोग करिए दुरुपयोग नहीं ।
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कामसुत्र के अनुसार जिस लड़की ने अभी युवावस्था में कदम रखा हो उसका चुम्बन 3 तरह का होता है-
निमित्तक
स्फुरितक
घट्टितक
निमित्तक- जब पुरुष सबसे पहले शर्माने वाली स्त्री से अपने होंठों पर जबरदस्ती चुंबन कराता है तो स्त्री पुरुष के मुंह पर अपना हाथ रख तो देती है लेकिन अपने होंठों को चूमने के लिए बिल्कुल भी नहीं हिलाती। इस तरह के चुंबन को निमित्तक कहा जाता है।
स्फूरितक- एक बार जब संभोग क्रिया हो जाती है तो उसके बाद पुरुष अपने होंठों को जब स्त्री के होंठों पर रख देता है तब शर्माती हुई स्त्री पति के होंठों को अपने होंठों से दबाना भी चाहती है और अपने नीचे वाले होंठ को हिलाती भी है लेकिन शर्म के कारण उसके होंठ चिपके रह जाते हैं। इस तरह के चुम्बन को स्फुरितक कहते हैं।
घट्टितक- संभोग क्रिया का आनंद प्राप्त करने के बाद स्त्री अपने होंठों पर रखे हुए पुरुष के होंठों को पकड़ती है लेकिन शर्म के मारे आंखें बंद कर लेती है तथा अपने हाथों से पति की दोनों आंखों को बंद करके जीभ के आगे के भाग से पति के होंठ को रगड़ती है। इस प्रकार के चुम्बन को घट्टितक कहते हैं।
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योनि पूजन की बहुत सी विधियां हैं जो भिन्न भिन्न गुरुओं द्वारा बताई जाती हैं जिस विधि से जिसने सफलता पाई है वह विधि उनके लिए श्रेष्ठ है।
योनि पूजन में समर्पण,साहस और श्रद्धा बहुत ही आवश्यक है विशेषकर महिलाओं को इसका बहुत ही लाभ मिलता है । गुरु के सानिध्य में पूर्णता प्राप्त स्त्री के पास तेज,यौवन,धन, अदृश्य शक्ति आ जाती है । जो उस स्त्री को सफल बनाने में मुख्य भूमिका निभाती है। योनि आदिशक्ति है इसकी विशेषता जानने वाले इसे पूजते हैं और शक्ति ,तेज ,ओज अर्जित करते हैं । यह पूजा स्त्रियों को बहुत लाभ देती है।
जय मां कामाख्या
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पद्म नयन मादक अधर,
छूते केश नितम्ब
अनुपम रूप सुलक्षणी,
कद काठी से लम्ब,
कोमलांगना हंसनी,
तेरा रूप अनूप
अधर तुम्हारे रसभरे,
चमके शबनम धूप,
काजल करधन आलता,
माँग सजा सिंदूर
पायल बिंदी चूड़ियाँ,
लगे रूप से हूर ,
जब-जब मुस्काये अधर,
अनुपम लगे अपार
श्वेत धवल दंतावली ,
चमके मुक्ताहार ,
नयन तुम्हारे बाण-से,
नागिन -जैसें केश
लगे अप्सरा स्वर्ग की,
मनहर तेरा भेष,
नैन तुम्हारे दोहरे ,
अधर तुम्हारे गीत
नैन अधर जब हो निकट,
मधुर मिलन मनमीत
कमल नयन गजगामिनी,
लगती परी समान
केश घटा काले सघन,
मदिर मधुर मुस्कान,
कजरारे तेरे नयन,
मदन बाण संधान
उर मेरा पुलकित हुआ,
प्रणय काम उत्थान,
नर्म रेशमी बाल हैं,
आँखें गहरी झील
लगे अप्सरा स्वर्ग की,
रूप रंग से शील..!!
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🔴स्त्रीत्व को छूना भी एक कला है।
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तुम नंगे हो जाओ, कपडे उतारने की बात नहीं कह रहा हूँ; मन के आवरणों को हटाने की बात कह रहा हूँ। लेकिन जब भी ऐसी कोई बात होती है तो तुम्हारे ख्यालो में स्त्री ही आती है! क्योकि ये बात जानकर तुम हैरान होगे कि तुम्हारी पत्नी भी स्त्री ही है!
तुम रोज उसे बिस्तर पर साथ पाते हो पर फिर भी उसे समझने की, जानने की चाह कभी नही की! अभी तुम्हे स्त्रीत्व तक पहुँचने में देर है; स्त्री को समझने का, उसके तन को जानने का दम चाहिए। अदभुत साहस चाहिए, प्रेम की अनुभूति चाहिए। परम की आकांक्षा चाहिए।
जबकि लोग उसके उभारो की ऊँचाई देखकर गिर जाते हैं। उसकी गहराइयो में ऐसे डूबते हैं कि मरकर के वापस आते हैं। इसलिए जब भी तुम्हें स्त्री के नजदीक जाने का अवसर मिले तो चूकना मत! जरुरी नहीं कि हर बार तुम सेक्स में हो जाओ, कुछ समय ऐसा भी गुजारना; जहाँ तुम शरीर के पार देखने की कोशिश करना; शायद तुम उसके दिल की धडकन सुन सको, शायद तुम उसके स्त्रीत्व को छू सको, और जिस पल तुमने उसके स्त्रीत्व को छू लिया!
तब अचानक से वासना तिरोहित होगी, और प्रेम का आगमन होगा, तुम एक परमसुख की अनुभूति करोगे, एक ऐसा आनंद जो तुम्हे जन्मों जन्मों तक गुदगुदाता रहेगा, तुम मुस्करा उठोगे, खिल जाओगे, और यही खिलावट तुम्हे जीवन के परम सत्ता की अनुभूति देगी, जीवन के परमआनंद से तुम्हारा मिलन होगा।
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जिस तरह गर्भावस्था के दौरान बगल में सोना होने वाली माँ के लिए बहुत अच्छा होता है, उसी तरह साथ-साथ सेक्स करना भी अच्छा होता है। इस पोजीशन में आप और आपका साथी दोनों अपनी करवट लेकर लेट जाएं ताकि आपके शरीर का एक वी शेप बने। जब आप अपने साथी का सामना करते हैं, तो समर्थन के लिए अपनी पीठ के नीचे एक तकिया बांधें, और दोनों पैरों को उनके कूल्हे पर टिकाएं। यह स्थिति आपके साथी को अपना अधिकांश वजन आपके पेट से दूर रखने की अनुमति देती है।
साथ-साथ सेक्स न केवल गर्भावस्था के दौरान सबसे आरामदायक सेक्स पोजीशन में से एक है, बल्कि आमने-सामने लेटने का अवसर आपको अपने साथी के साथ गहरे और अधिक अंतरंग स्तर पर जुड़ने देता है। ज़रा सोचिए कि एक-दूसरे की आँखों में टकटकी लगाकर आप क्या कर सकते हैं।
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आजकल सेक्स के ऊपर बहुत लोग ज्ञान देते हैं, काश यही बात उस वक्तपर करते जब तुम्हारी उम्र 19 से 21 साल होती।
हमारे पास जो बचता हैं उसीसे हम दुनिया को रिज़्हाने की कोशिश करते हैं, लेकिन कभी ये नही कहते कि पहले जैसा जोश अब मेरे में नही है।
जब जवानी थी तब रात दिन मजा लिए हो और अब डंडा टूट चुका हो तो ज्ञान की बाते करते हो।
और थोड़े दिन रुको जब सुनने शक्ति जाएगी,10 फिट चलने के लिए घंटो की तैयारी करोगे और बोलने के लिए जुबान नही बचेगी उस वक्त सेक्स ऊपर प्रवचन देकर दिखाना।
हम चलाख इतने होते है कि जो खुद के बस में नही रहा उसे छोड़ने की सलाह दुनिया को देते है।
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प्रेम में पड़ी युवतियों को देखा कभी,
या कभी उन महिलाओं को जो एक उम्र गुजर जाने के बाद, किसी के प्रेम में पड़ जाती हैं,
जो जवानी में नहीं मिलता, उन्हें बाद में सब मिल जाता है, वह सब जब किसी से मोहब्बत हो जाती है,
वे खिल जाती हैं,
युवतियां जैसे कमल की कली थीं और खिल जाती हैं, फूल बन जाती हैं..
महिलाएं अपने स्वभाव में आ जाती हैं, चंचलता,अल्हड़पन और मस्ती,
उनके होंठ गुलाब की पंखुड़ियों जैसे हर पल मुस्कान से भरे रहते हैं,
जहाँ युवतियों में आ जाता है बदलाव..तन की बनावट में..
उभर आते हैं, स्तन एवं नितंब..
यौवन का चरम पर होना, मानों संकेत दे रहा कि वह प्रेम में है,
और खुशी छिपाए नहीं छिप रही..
वहीँ महिलाओं को मोहब्बत होने के बाद बोलने में आ जाती है मधुरता..
वे पूरी प्रेममय हो जाती है,
खोई रहती है सपनों में..
वह चाहती है खुलकर जीना,
और साथ ही चाहती हैं, अपने एहसास बता दे, जिसके साथ वह प्रेम में है..
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इतिहास में यह घटना अंकित है कि एक ब्राह्मण के घर की स्त्री स्नान कर रही थी तभी संयोग से वहां से "ब्राह्मण कुल शिरोमणि "वाजीराव पेशवा " की सवारी निकल रही थी हाथी पर बेठे महाराज वाजीराव पेशवा को घर के अंदर आँगन में स्नान कर रही स्त्री का चेहरा गर्दन तक दिख गया संयोग से ब्राह्मण स्त्री की नज़र भी पेशवा जी से टकरा गयी महाराज बाजीराव पेशवा जी तत्काल हाथी से नीचे उतरकर पैदल चलने लगे.. साथ चल रहे उनके अंग रक्षक ने हिम्मत जुटा कारण पूछा तो पेशवा जी बोले अनजाने में मैने एक ब्राह्मण स्त्री की हत्या कर दी.. आज के बाद हाथी की सवारी नहीं करुँगा घोड़े की सवारी करुँगा और वास्तव में थोड़ी देर बाद खबर मिली कि उस ब्राह्मण स्त्री ने लज्जावश प्राण त्याग दिए... मेरे भाई बहनों ऐसा रहा ब्राह्मणों का मर्यादित गरिमामय जीवन इतिहास.. !
अतः आप लोग भले ही आधुनिक रहें लेकिन पूर्वजों की अर्जित की हुई महानता को याद रखे ब्राह्मण ऐसे ही पूज्य नहीं हुए हमारे पूर्वजो का त्याग तपस्या, बलिदान, त्रिकाल संध्या सहित जीवन सदैव पवित्रता पूर्ण मर्यादित गरिमामय रहा अतः सदैव ब्राह्मण धर्म का पालन करे l
फूहड़ वस्त्र अमर्यादित भोजन और अमर्यादित व्यवहार का त्याग करे जीवन ऐसा गरिमामय जियें कि अन्य लोग आपसे प्रेरणा लें l
।। जय श्री राम ।।
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आपने भूलभुलैया फ़िल्म देखी ही होगी। यह याद ही होगा, कि अक्षय कुमार ने किस किस तरीके से आती हुई बाधाओं को टाल कर सब कुछ सही किया था आखिर में।
वह दृश्य मेरे हिसाब से बहुत ही प्रेरक दृश्य था, जब अक्षय, विद्या बालन के पति को सच्चाई बताता है। वो बताता है कि जब जब उसने विद्या बालन के अंदर से मंजूलिका को बाहर आते महसूस किया, तब तब उसने बहस छोड़ कर, अपने दोनों हाथ जोड़कर तुरंत बोला,
"अच्छा ठीक है। तुम्हीं सही, हम गलत। शांत हो जाओ।" या तो उसने गलती अपनी मान ली, या फिर इल्जाम दूसरों पर डाल दिया। लेकिन भूल कर भी विद्या से बहस जारी नहीं रखा।
मेरी नजर से देखा जाय तो जीवन के सुख शांति की कुंजी इसी दृश्य में छिपी हुई है।
आपको जब भी अपनी पत्नी, प्रेमिका, गर्लफ्रेंड इत्यादि के अंदर से मंजूलिका बाहर आते दिखे, तुरंत हाथ जोड़कर अक्षय कुमार के उपरोक्त संवाद को बोलिये। मंजूलिका शांत हो जाएगी, और आपकी जिंदगी की गाड़ी फिर से पटरी पर सुखमय तरीके से दौड़ने लगेगी।
मेरी यह बात प्रत्येक पुरूष को गाँठ बांध लेनी चाहिए, बल्कि मैं तो यह कहता हूँ कि मेरी यह बात तो सेलेबस में पढ़ाया जाना चाहिए, क्योंकि दुनिया की प्रत्येक नारी के अंदर एक मंजूलिका छिपी हुई रहती ही है।
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आज का विषय है:-
"पुरुषों का स्त्री के उरोजों को लेकर विशेष आकर्षण"
स्त्री के उरोज उसके यौवन व सौंदर्य का एक विशेष अंग है।स्त्री के स्तनों का आकार उसमे आत्मविश्वास व आकर्षण भरता है।
पुरुषों के मन मे स्त्री के स्तनों के प्रति आकर्षण बाल्यकाल से ही शुरू हो जाता है।जब मां बच्चे को स्तनपान कराती है तो उसके पोषण से बच्चे का विकास होता है। स्त्री के दुग्ध में इतना पोषण होता है कि वह शिशु का पालन 5 वर्ष तक कर सकता है।स्त्री के दुग्ध में हर प्रकार का पोषण होता है जो विकास के लिए आवश्यक है।
स्तनपान के दौरान ही पुरुषों के अवचेतन मन मे स्तनों को लेकर आकर्षण उतपन्न होने लगता है।
ये भाव तब दब जाता है जब शिशु बड़ा होने लगता है तथा 5 वर्ष के ऊपर की आयु प्राप्त करता है।
इस आयु में बालक या बालिका समान लिंग के प्रति आकर्षण व्यक्त करते हैं।
फिर जब किशोरावस्था आती है तो बालक के मन मे विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण उतपन्न होने लगता है।
इस अवस्था में जब उसे स्त्री के स्तन दिखते हैं तब वह अवचेतन रूप से उनसे अपनी भूख शांत करने के लिए कल्पना करने लगता है।
स्तनों का आकार पुरुषों के मन मे ये भाव उतपन्न करता है कि आकार के अनुसार ही उनमें दुग्ध होगा।
यही कारण है कि पुरुषों को बड़े उरोज़ अधिक पसन्द आते हैं तथा वो क्रिया के समय उन्हें चूसकर अपनी भूख शांत करने की कोशिश करते हैं।
उरोज़ो को चूसकर,दबाकर पुरुषों को लगता है कि कहीं न कहीं उनकी भूख शांत हो गई है।
ये रहा आज का लेख।
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।।धन्यवाद।।
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