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Clitoris को छूने से ही अधिकतर महिलाएं संभोग के लिए उत्तेजित हो जाती हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि इसमें 8000 नसें होती हैं। वहीं, पुरुषों के लिंग में 4000 नसें ही होती हैं। यह भी वजह है कि योनि महिला के शरीर का सबसे अधिक संवेदनशील अंग होता है। #ज्ञान_की_बात
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होली में ध्यान रखिये :-
1. होली में नशे करके संभोग मत करें।
2. नशे की स्थिति में संभोग करते समय आपको अपने पार्टनर की स्थिति का अंदाजा नही होता जिससे कोई अप्रिय घटना हो सकती है ।
3. स्त्री होली खेलते समय अंतः वस्त्र ब्रा और पेंटी जरूर पहने ।
4. कुछ लोग गुलाल का प्रयोग योनि पर कर देते हैं जो कि पूर्णतः गलत है इसका ध्यान रखीये क्योंकि गुलाल या रंग में केमिकल मिले होते हैं जो की योनि के लिए घातक हो सकते हैं अगर योनि में गुलाल या जाए तो योनि को सही से सफाई करें ।
5. स्त्री को बिना सहमति रंग गुलाल न डाले सभ्यता,पुरुषार्थ और अपनी मर्दानगी का परिचय दें। जबरदस्ती ब्रा में हाथ देकर रंग ,गुलाल,कीचड़ नही डाले बल्कि ब्रा पर शॉल डाल कर दे जिससे आपकी मरायदा बढ़ेगी ।
6. छछोरा पन पुरुष न करें आपकी परिवार की स्त्री भी अपने जीजा, देवर और पुरुष साथी के साथ होली खेलती है वहाँ भी आप जैसा ही कोई पुरुष है ।
7. स्त्री तन उसे ही सौंपती है जिससे मन मीलता है ।
8. जबरदस्ती आप बलात्कार कर सकते प्रेम नही ।
9. सम्भोग में प्रेम से आनन्द आता है जबरदस्ती तो सिर्फ लिंग की तनाव को शांत करने के लिए होता है ,ये आप हस्तमैथून से भी कर सकते ।
10. गुलाल या रंग लगे ओठ को मत चूमे इससे बीमार हो सकते हैं ।
#होली की #शुभकामनाएं । #होली में अपने #होल का ध्यान रखें
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हमें सीने से लगाकर हमारी सारी कसक दूर कर दो,
हम सिर्फ तुम्हारे हो जाऐ हमें इतना मजबूर कर दो।
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तुम ने कभी
पढ़ा ही नहीं
मेरे अनकहे शब्दों में
छिपा प्रेम
पता नहीं कसूर
मेरी आँखों का था
या तुम ही नहीं जान पाये कभी
मेरी आँखों की भाषा
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*पत्नी का दिमाग*:
भैयै पत्नी गांव वाली हो या पढ़ी-लिखी, सभी औरतों का दिमाग ऊपर वाला एक ही फैक्टरी में बनाता है !!!!
😝
😝
*आप उस दिमाग को जानना चाहते हैं ना..*
➡चावल में पानी ज्यादा हुआ तो...
💁 - *"चावल नया था,"*
➡रोटियाँ कड़क हो गई तो...
💁- *"कमबख्त ने अच्छा आटा पीस कर ही नहीं दिया,"*
➡चाय ज्यादा मीठी हो गयी...
💁 *- "शक्कर ही मोटी थी"*
चाय पतली हो गयी तो ...
💁 *"दूध में पानी ज्यादा था,"*
➡शादी या किसी Function में जाते समय...
💁 *-"कौन सी साड़ी पहनूं..?"*
*"मेरे पास अच्छी साड़ी ही नहीं है !"*
➡घर पर जल्दी आ गए तो...
💁 *-"आज जल्दी कैसे आ गए ?"*
➡लेट हो गए तो....
💁 - *"इतने वक़्त तक कहाँ थे ?"*
➡कोई चीज सस्ती मिल जाए तो...
💁 *- "तुमको सभी फंसा देते हैं" ...*
➡महंगी लाई तो...
💁 *-"तुमको किसने कहा था लाने को ?"*
➡खाने की तारीफ़ कर दो तो...
💁 *-"मैं तो रोज ऐसा ही खाना बनाती हूँ."*
➡खाने को गलत कहा तो...
💁 *- "तुमको तो मेरी कदर ही नहीं"....*
➡कोई काम करो तो...
💁 *- "एक काम कभी ढंग से करते नहीं..".*
➡और न किया तो...
💁 - *"तुम्हारे भरोसे रहे तो कोई काम नहीं होने वाला."..*
नुस्खा यह है कि...👇
1 )खुद का ध्यान रखें,
2) शांत रहने का प्रयास करें.
3) डरना नहीं,
4) *ईश्वर आपके साथ है...*
💞सभी विवाहित पुरुषों को सादर प्रेषित💞
💞🙏💞
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क्या आप जानते बैन कि
केला 🍌 और नारियल 🥥
सनातनी हिन्दुओं के पूजा पाठ में
खास स्थान क्यूँ रखते हैं ?? 🚩
👍नारियल और केला ये दो ही ऐसे फल हैं
जो किसी के जूठे बीज से उत्पन्न नहीं होते ।
मतलब अगर हमें आम का पेड़ लगाना है
तो हम आम को खाते है और
उसके बीज या गुठली को जमीन में गाड़ते हैं
तो वह पौधे के रूप में उगता है
या फिर ऐसे ही गुठली निकाल कर लगा दें तो भी
वह उस पेड़ का बीज (जूठा या अँग) ही हुआ,
लेकिन केले का या नारियल का पेड़ लगाने को
केवल जमीन से निकला हुआ पौधा (ओधी) ही लगाते हैं,
जो की खुद में ही पूर्ण है,
न किसी का बीज न हिस्सा, न जूठा,
इसलिए भगवान को सम्पूर्ण फल अर्पित किया जाता है ।
👍हमारे पूर्वज कितने ज्ञाता थे,
जो चीजें हमें आज तक पता नहीं वो पहले से जानते थे
और उसका जीवन में इस्तेमाल कर
जीवन पध्दति में ढाल लिये थे,
जो हमे परम्परा से प्राप्त हुआ है,
केवल हम उन्हें इस्तेमाल करते गये पर
उनकी क्यों और क्या महत्ता है,
यह कभी भी जानने की कोशिश नहीं किये ।
👍
🚩 अपनी सँस्कृति, अपना गौरव 🚩
🙏🙏🙏
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“ *जन्म देने की प्रक्रिया में पुरुष का कार्य न के बराबर है। उसके भीतर हीन भावना ने सब से बड़ी समस्या खड़ी कर दी – पुरुष ने स्त्री के पर काटने शुरू कर दिए। वह उसे हर प्रकार छोटा दिखाने लगा, निंदित करने लगा, ताकि वह कम से कम यह तो मानने लगे कि वह उससे श्रेष्ठ है।* उसने स्त्री के साथ पालतू जानवर की तरह बर्ताव किया – बल्कि उससे भी बुरा। चीन में हज़ारों वर्षों तक ऐसा माना जाता रहा है कि स्त्री के भीतर कोई आत्मा नहीं होती, तो उसका पति यदि उसे जान से भी मार दे तो क़ानून भी उसमें कोई दखल नहीं दे सकता था – स्त्री उसकी निजी संपत्ति थी। यदि वह अपने फर्नीचर को नष्ट करना चाहता था तो कर सकता था, उसमें गैर-कानूनी कुछ न था। यदि वह अपनी स्त्री को नष्ट करना चाहता था तो कर सकता था, उसमें गैर-कानूनी कुछ न था। यह स्त्री का घोर अपमान था – कि उसके भीतर कोई आत्मा नहीं है।”
सदियों से पड़े इस जाल से छूटने के लिए आप क्या सुझाव देते हैं?
"पुरुषों ने सदा स्वयं के लिए ही स्वतंत्रता निर्मित की है, लेकिन स्त्रियों को बाधित कर दिया है। पुरुषों ने घर की चार दीवारी में स्त्रियों को कैद कर दिया है और खुद वह स्वतंत्र जीता रहा है। वे दिन अब चले गए। अब स्त्रियां उतनी ही स्वतंत्र हैं जितने कि तुम। और यदि तुम ईर्ष्या में स्वयं को जलाना नहीं चाहते हो तो इसके दो ही मार्ग हैं: एक मार्ग है कि तुम स्वयं किसी भी इच्छा से मुक्त हो जाओ, जहां कोई इच्छा नहीं है, वहां ईर्ष्या नहीं टिक सकती। और दूसरा मार्ग: यदि तुम इच्छा से मुक्त नहीं होना चाहते, तो कम से कम दूसरे को भी वही अधिकार उसी रूप में दो जैसे तुम्हारे पास है। इतना साहस इकट्ठा करना होगा। मैं चाहूंगा कि तुम इच्छा से मुक्त हो जाओ।
“तुम्हारी पत्नी के पास स्वतंत्रता का उतना ही अधिकार है जितना कि तुम अपने लिए मांगते हो। और अगर तुम्हें यह लगता है कि नहीं, यह सही नहीं है कि तुम्हारी पत्नी अन्य पुरुषों में दिलचस्पी ले, तो फिर तुम्हारा दूसरी स्त्रियों में दिलचस्पी लेना भी सही नहीं है। जो अपेक्षा तुम अपनी पत्नी से रखते हो, वही तुम्हें स्वयं बनना होगा, तुम्हें भी उसी तरीके से कार्य करना होगा। तभी तुम भी कोई अधिकार रखते हो।"
*ऐसा लगता है कि आप, आपके काम में पारंपरिक दृष्टिकोण से पूरी तरह से टूट चुके हैं?*
"मैंने पहली बार स्त्रियों को पुरुषों के समान आधार पर स्वीकार किया है। मैं स्त्रियों की मुक्ति के पक्ष में हूं क्योंकि मुझे पता है कि जब तक स्त्रियां मुक्त नहीं होतीं, पुरुष कभी भी मुक्ति नहीं पाएंगे। उनकी मुक्ति एक साथ है, क्योंकि वे एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। स्वाभाविक रूप से मेरे पास बहुत स्त्रियां आई हैं, क्योंकि सदियों से उन्हें इनकार किया गया है, उन्हें अपमानित किया गया है, उन्हें कभी पुरुषों के समान स्वीकार नहीं किया गया। स्वाभाविक है कि यहां, अधिक से अधिक महिलाएं आती रहेंगी - और यहां केवल वे पुरुष ही होंगे जो महिलाओं को समान रूप से स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। मेरे पास कोई भी ऐसा पुरुष नहीं रह सकता जो स्वयं को स्त्री से श्रेष्ठ मानता है। यह समान लोगों का एक परिवार है, जिसमें सबका एक जैसा सम्मान है।
"यदि कभी अतीत में स्त्री को आदर मिला होता, तो मानवता इस तरह की मुसीबत में नहीं पड़ी होती जिसमें वह आज है - क्योंकि स्त्रियां मानवता का आधा हिस्सा हैं, और यह मानवता का आधा हिस्सा अपमानित, अशिक्षित, सारी स्वतंत्रता,सभी आंदोलनों से वंचित है। ऐसा करके हमने स्वयं को ही बाधित और अक्षम किया है हमने अपने इस आधे हिस्से को नष्ट कर दिया है, और अगर आज हम दुख में हैं तो इसके लिए हम किसे दोषी ठहराएं?
" *मैं पूर्णतया स्त्रियों की मुक्ति के पक्ष में हूं, लेकिन इस तरह से नहीं जिस तरह से स्त्रियों की मुक्ति के आंदोलन चल रहे हैं। यह वास्तविक क्रांति न होकर एक प्रतिक्रियावादी दृष्टिकोण है, यह पुरुष की नकल करने की कोशिश है और स्मरण रखना, नकली कभी आपको समान नहीं बनाती है; ज्यादा से ज्यादा जो नकली है वह आपको एक कार्बन कॉपी बना देगा – लेकिन असली तो असली है।"*
बुद्धिमान पुरुष इस परिस्थिति को कैसे समझे?
“स्त्री की मुक्ति सहज ही पुरुष मुक्ति है। स्त्री की दासता सहज ही पुरुष की दासता है। दोनों एक साथ चलते हैं।”
*“मेरा जोर स्त्री को सम्मान देने पर है – और समानता पुरुष के विरुद्ध नहीं है। यह संसार तुम दोनों का है और इसे सुंदर और दिव्य बनाने के लिए दोनों को एक-दूसरे के साथ खड़ा होना होगा।”*
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*“मेरा जोर स्त्री को सम्मान देने पर है – और समानता पुरुष के विरुद्ध नहीं है। यह संसार तुम दोनों का है और इसे सुंदर और दिव्य बनाने के लिए दोनों को एक-दूसरे के साथ खड़ा होना होगा।”*
*पुरुषों ने सदियों से स्त्रियों पर शासन किया है। उसे हर अवसर और मौका दिया गया है और स्त्री को लगातार दमित कर दिया गया है, उसे अपंग कर दिया गया है। उसे कभी पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिला कर काम करने की अनुमति नहीं दी गई है। हम नहीं जानते कि यही कारण है कि महिलाओं के भीतर कितने ही गौतम बुद्ध खिलने से वंचित रह गए हैं। हमें नहीं पता है कि इस कारण और कितने ही अल्बर्ट आइंस्टीन हैं जिनके विकास की संभावना पर रोक लग गई।"
"पुरुष को और अधिक ह्रृदयपूर्ण होने की शिक्षा देनी होगी क्योंकि ह्रदय हमें हमारी आत्मा तक पहुंचने का मार्ग है। आप ह्रदय को दरकिनार नहीं कर सकते। *एक स्त्री बेहतर स्थिति में है, वह सीधे अपने ह्रदय से हो कर आत्मा में जा सकती है लेकिन स्त्रियों की इस महान गुणवत्ता को पहचानने की बजाय, पुरुष उसकी निंदा करता आया है।* शायद इसका एक कारण है; शायद उसे आभास था कि स्त्री उससे श्रेष्ठ है – वह प्रेम करने में उससे कहीं ऊपर है। कोई तर्क प्रेम से ऊपर नहीं जा सकता है। और कोई भी मन हृदय से ऊपर नहीं हो सकता। *लेकिन मन हत्यारा हो सकता है; मन बहुत ही हिंसक हो सकता है, और यही तो मन सदियों से करता आया है।*
*"पुरुष स्त्री पर हाथ उठाता आया है, स्त्री को दमित करता आया है, उसकी निंदा करता आया है। पुरुषों द्वारा स्त्री को निंदित करने और दबाने के कारण उसे नीचा कर दिया है ऐसा करने में आधी मानवता अपनी चेतना को विकसित करने से वंचित हो गई है।* और तुम वंचित हो, क्योंकि तुम भी ब्रह्मांड के एक हिस्से से आगे बढ़ने की कला सीख सकते थे, तुम भी उसी मार्ग पर चल सकते थे; इसलिए मैं हमेशा कहता हूं, स्त्रियों की मुक्ति पुरुषों की मुक्ति है। इस मुक्ति में स्त्रियों की मुक्ति से अधिक पुरुषों की मुक्ति है। "
*क्या पुरुष के प्रधान होने के पीछे धर्म का हाथ है?*
“ईसाई धर्म ने हजारों बुद्धिमान स्त्रियों को नष्ट कर दिया, उन्हें जिंदा जला दिया यहां तक कि यह नाम- 'विच' - जिसका अर्थ और कुछ नहीं, 'एक बुद्धिमान स्त्री' है - इतना निंदात्मक बन गया है… और ऐसा ही यहां पूरब में भी हुआ। सभी धर्मों ने महिलाओं को निषिद्ध कर दिया, और मैं देख सकता हूं कि इसके पीछे का कारण है एक बड़ा भय, कि यदि महिलाओं को पुरुषों के समान अवसर दिए जाएं, तो वे चेतना के अनुभवों में उससे कहीं आगे बढ़ जाएंगी। और यह पुरुष के अहंकार के विरुद्ध है।"
लेकिन इसके पीछे कारण क्या है, *पुरुष क्यों इस तरह बर्ताव करता रहा है?*
“पुरुष हीन भावना से ग्रस्त है क्योंकि वह बच्चों को जन्म नहीं दे सकता। यह उसके अचेतन की गहराई में दबी एक हीनता की ग्रंथि है। वह जानता है कि स्त्री उससे श्रेष्ठ है, क्योंकि अपने जीवन में से किसी और जीवन को जन्म दे देने से बढ़कर कुछ भी नहीं।
“किसी बच्चे को जन्म देने के पीछे पुरुष की भागीदारी एक सिरिंज के इंजेक्शन से ज्यादा नहीं। यह काम तो एक सिरिंज भी कर सकती है – उसे प्रजनन की प्रक्रिया से बिल्कुल छुटकारा दिलाया जा सकता है। पुरुष को इस बात का बहुत ही आरंभ से आभास होगा। और अपनी हीन भावना से छुटकारा पाने के लिए उसे एक ही मार्ग नज़र आया होगा कि स्त्री को हर संभव तरीके से इतनी हीन स्थिति पर गिरा दे ताकि वह अपनी हीनता भुला कर स्वयं को श्रेष्ठ मानने लगे।
दुनिया के सभी समाज, सभी संस्कृतियां, सभी धर्म अलग-अलग तरीकों से एक ही बात करते आएं हैं: स्त्री को पुरुष के बराबर न रख कर मानवता में दूसरे नंबर का दर्जा दिया जाए।” *एक स्त्री किसी भी पुरुष के मुकाबले ज्यादा केंद्रित है।ज्यादा शांत, ज्यादा मौन, ज्यादा धैर्यवान है, वह प्रतीक्षा करने में ज्यादा सक्षम है।* शायद इन गुणों के कारण उसके भीतर बीमारियों का प्रतिरोध करने की ज्यादा क्षमता है और वह पुरुष से ज्यादा लंबा जीवन जीती है। अपनी शांति, अपनी कोमलता के कारण वह एक पुरुष के जीवन को कृतकृत्य कर देती है। वह पुरुष के जीवन को अपनी सौम्य गर्माहट से आच्छादित कर देती है।
“लेकिन पुरुष डरता है – वह नहीं चाहता कि स्त्री उसके जीवन को आच्छादित करे, वह उसे अपने आस-पास किसी सौम्य ऊष्मा से भरने की अनुमति नहीं देना चाहता। वह डरता है क्योंकि ऐसे वह उस पर निर्भर हो जाएगा। तो सदियों से वह उससे दूरी बना कर रखे हुए है। और वह डरा हुआ है क्योंकि कहीं गहरे में उसे आभास है कि स्त्री उससे कहीं आगे है। वह एक जीवन को जन्म दे सकती है। प्रकृति ने उसे प्रजनन के लिए चुना है, पुरुष को नहीं।
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💋💋 श्रृंगार शतक - भर्तृहरि से 💋
💕💕
💘 ऐसे कुछ ही भाग्यशाली पुरूष होते हैं जो विपरीत रति के समय हृदय पर आरूढ़ होने वाली, सुरत - वेग से बिखरे बालों वाली, स्वाभाविक लज्जा के कारण बन्द आँखों वाली तथापि उत्सुकता वश बीच - बीच में अधखुली आँखों वाली, मैथुन श्रम से उत्पन्न स्वेद-विन्दुओं से तर-बतर कपोलों वाली कामिनियों के अधर - मधु का पान करते हैं।
(श्लोक 26 भावानुवाद)
💋 विपरीत रति - इसे पुरूषायित भी कहा जाता है। संभोग आसन का एक प्रकार। इसमें ऊपर स्त्री मुख्य भूमिका में रहती है।
💋💋 पहले पहले तो वह न न कहती है। इसके बाद थोड़ी थोड़ी अभिलाषा करती है। इसके बाद अंगों को ढ़ीला कर देती है। फिर अधीर हो, प्रेम के रस में सराबोर हो जाती है। इसके भी बाद एकांत क्रीडा की इच्छा करती है। और भोग विलास में तरह तरह की चतुराई दिखलाती हुई निःशंक होकर मर्दन चुंबन आदि से असाधारण सुख देती है। ऐ सब गुण कुलबालाओं में ही होते हैं।
(श्लोक 25 भावानुवाद)
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पुरुष में वासना की उत्पति पानी के बुलबुले की तरह क्षणिक होती है किन्तु स्त्री में यह एक लहर कि तरह होती जो बहुत गहराई तक जाती है और सहज शांत भी नहीं होती।
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स्त्री_शरीर में प्रथम आकर्षण का केंद्र यह विशाल स्तन का आकार होता है योनि कदापि नहीं।
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जिस तरह चंदन घिसने से ज्यादा असर से महकता है उसी तरह जितना संभोग करो ,संभोग की प्यास बढ़ती है । खास कर अगर कामुक स्त्री बाहों में हो तो क्या कहना ! चुम्बन माथे से शुरू करो और पांव तक करो फिर स्त्री की प्रेम समर्पण की बराबरी पुरुष नही कर पाता है ।
कल के स्वप्न का अनुभव मेरी विश के साथ 💋❤️
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आज हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बताएंगे जिसे अपना कर आप भी सम्भोग का असली मजा ले सकते हैं और यह मजा तिगुना तक हो जाएगा। तो आइए जानते हैं।
1. कभी भी संभोग करते वक्त जल्दबाजी न करें बल्कि फोरप्ले के साथ ही संभोग करें।
2. सम्भोग के वक्त थोड़ी बहुत सेक्सी बातें जरूर करें इससे संभोग के मजा कई गुना बढ़ जाता है।
3. सम्भोग के वक्त रूम में रूम फ्रेशनर का यूज़ जरूर करें। इससे पूरा माहौल खुशनुमा बना रहता है।
4. सम्भोग से पहले सतावरी का सेवन दूध के साथ जरूर करें। यह सेक्स पावर को कई गुना तक बढ़ा देता है और लंबे समय तक इंसान सेक्स कर सकता है।
5. सम्भोग के समय हल्का सा बाईट जरूर करें।
यदि आप भी इन टिप्स को अपनाते हैं तो आपका भी सम्भोग टाइम दुगुना नही बल्कि तिगुना बढ़ जाएगा।
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संभोग के समय स्त्री आंखे बंद करके रूह से आनंद की अनुभूति लेती है जिससे स्त्री को संतुष्टि मिलती है।संभोग की चरम का आनंद ध्यान से लेती है।
मेरी प्रियतमा भी ऐसे ही आनंद की अनुभूति करती हे ❤️ विश
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