ch
Feedback
Forex Pro Guru

Forex Pro Guru

前往频道在 Telegram
2 563
订阅者
-324 小时
-117 天
-4430 天
吸引订阅者
9月 '26
九月 '26
+4
在0个频道中
八月 '26
+3
在0个频道中
Get PRO
七月 '26
+3
在0个频道中
Get PRO
六月 '26
+5
在0个频道中
Get PRO
五月 '26
+2
在0个频道中
Get PRO
四月 '26
+6
在0个频道中
Get PRO
三月 '26
+6
在0个频道中
Get PRO
二月 '26
+8
在0个频道中
Get PRO
一月 '26
+15
在0个频道中
Get PRO
十二月 '25
+4
在0个频道中
Get PRO
十一月 '25
+4
在0个频道中
Get PRO
十月 '25
+13
在0个频道中
Get PRO
九月 '25
+7
在0个频道中
Get PRO
八月 '25
+15
在0个频道中
Get PRO
七月 '25
+6
在0个频道中
Get PRO
六月 '25
+11
在0个频道中
Get PRO
五月 '25
+8
在0个频道中
Get PRO
四月 '25
+24
在0个频道中
Get PRO
三月 '25
+14
在0个频道中
Get PRO
二月 '25
+11
在0个频道中
Get PRO
一月 '25
+20
在0个频道中
Get PRO
十二月 '24
+15
在0个频道中
Get PRO
十一月 '24
+38
在0个频道中
Get PRO
十月 '24
+15
在0个频道中
Get PRO
九月 '24
+60
在0个频道中
Get PRO
八月 '24
+43
在1个频道中
Get PRO
七月 '24
+48
在0个频道中
Get PRO
六月 '24
+39
在0个频道中
Get PRO
五月 '24
+41
在0个频道中
Get PRO
四月 '24
+79
在0个频道中
Get PRO
三月 '24
+102
在0个频道中
Get PRO
二月 '24
+96
在0个频道中
Get PRO
一月 '24
+157
在0个频道中
Get PRO
十二月 '23
+3 675
在0个频道中
日期
订阅者增长
提及
频道
28 九月+1
27 九月0
26 九月0
25 九月0
24 九月0
23 九月0
22 九月+1
21 九月+1
20 九月0
19 九月0
18 九月0
17 九月0
16 九月0
15 九月0
14 九月0
13 九月0
12 九月0
11 九月0
10 九月0
09 九月+1
08 九月0
07 九月0
06 九月0
05 九月0
04 九月0
03 九月0
02 九月0
01 九月0
频道帖子
विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय लम्बोदराय सकलाय जगद्धितायं।नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषिताय गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते॥ 🙏

2
Middle East की सारी लड़ाई इस्लामिक दुनिया का खैरख्वाह बनने की है..... एक तरफ सऊदी अरब है... जहाँ इस्लाम के Holiest स्थान हैं.. मक्का और मदीना... और सऊदी अपने आपको सुन्नियों का नेता मानता है... वहीं इरान अपने आपको शियाओं का सबसे बड़ा नेता या कहिये एकमात्र आवाज समझता है. Middle East में आज जो भी हो रहा है... या कहिये कि इतने दशको से जो भी चल रहा है.. उसके पीछे मूल कारण इन दोनों देशों का टकराव ही है..... लट्ठ तो इन्ही में बजते हैं... वो तो अमेरिका, यूरोप और रूस वाले तो बिल्लियों की लड़ाई में मलाई हड़पने के लिए आ जाते हैं. अब यूं तो सऊदी अरब हर मामले में इरान से कोसों आगे है..... पैसा, power, हथियार, जीडीपी, Per Capita Income..... जो parameter उठाइये... सऊदी अरब हर मामले में इरान से कहीं आगे है. लेकिन एक parameter है... जहाँ इरान सऊदी अरब से Light Years आगे है.... और वो है.. हिम्मत. अब आप कहेंगे कि ये क्या बात हुई... इसमें हिम्मत कहाँ से आ गई... और उससे होता भी क्या है? एक कहावत है.... कि हथियारों से कहीं ज्यादा जरूरी होता है उन्हें चलाने वाला.... वही Decider होता है.... वही जीत और हार का अंतर तय करता है. एक तरफ सऊदी अरब है....जिसकी सबसे बड़ी ताकत “एक हथियार” नहीं बल्कि पूरा integrated system है: सऊदी अरब की सेनायें हथियारों के मामले में दुनिया की सबसे Advanced सेनाओं में से एक है.... पिछले साल ही सऊदी ने 83 बिलियन डॉलर खर्च किये हैं हथियार खरीदने में. F-15 और Eurofighter जैसे आधुनिक Fighter जेट्स+ AWACS + Tankers + Patriot + THAAD + Radar/ISR....यह सब मिल कर सऊदी अरब की सेनाओं की क्षमता को अलग ही लेवल पर ले जाते हैं. सऊदी अरब के पास मध्य-पूर्व की सबसे आधुनिक air-power और air/missile-defence capabilities में से एक है.. या कह सकते हैं कि पूरे middle east, अरब, अफ्रीका, और कुछ मामलों में यूरोप के कई देशों से सऊदी अरब की सेनायें कहीं ज्यादा advanced हैं. लेकिन वही बात है.... हथियार तो हैं... लेकिन उन्हें चलाने का गूदा नहीं है. इस साल इरान ने सऊदी अरब पर 38 मिसाइल्स और 435 Drones फायर किये..... जिनमे से काफी हवा में मार दिए गए... और अच्छी खासी संख्या में Target पर भी गिरे. बदले में सऊदी अरब ने जानते हैं इरान पर कितने मिसाइल और ड्रोन फायर किये? अंदाजा लगाइये. शून्य. सऊदी अरब की हिम्मत नहीं हुई इरान के Airspace को breach तक करने की... और यह हालात तब हैं... जब इरान की एयरफोर्स और सेना तो अमेरिका ने तबाह कर दी है. सऊदी अरब ने कुछ अटैक इराक में किये.. कुछ यमन में किये.... इरान समर्थित आतंकियों पर.... लेकिन इरान से सीधा लड़ने की हिम्मत सऊदी में आज भी नहीं. सऊदी अरब ने हथियार ले लिए अमेरिका और यूरोप से.... और लड़ने के लिए सैनिक ले रखे हैं पाकिस्तान से...... लेकिन खुद में दम नहीं..... सऊदी अरब की सेना कितनी ही आधुनिक हों.. उनके पास Battle Experience बिलकुल नहीं... इसलिए वह इरान से सीधी लड़ाई से डरते हैं. ऐसे ही हालात हमारे एक पडोसी के भी हैं.... Advanced हथियार भर भर के हैं.... लेकिन Battle एक्सपीरियंस शून्य है. नाम तो पता होगा ही आपको उस देश का 😁😁 #geopolitics #forexproguru
519
3
没有文字...
474
4
没有文字...
835
5
没有文字...
1 114
6
🇷🇺 Russia approves Bitcoin, Ethereum and USDT for public trading on exchanges.
1 039
7
🤝 Happy Friendship Day
🤝 Happy Friendship Day
1 131
8
कल रात जापान और South Korea की सरकारों ने ऐसा कदम उठाया, जो बहुत कम देखने को मिलता है। हुआ ये कि Japan की currency yen 40 साल के सबसे कमज़ोर स्तर पर पहुँच गई। 1 डॉलर के बदले 163 yen मिल रहे थे। वहीं South Korea की currency won भी 17 साल के सबसे कमज़ोर स्तर पर पहुँच गई। 1 डॉलर के बदले 1,561 won मिल रहे थे। जब दोनों देशों की currencies लगातार गिरने लगीं, तो Japan और South Korea ने लगभग एक ही समय पर बाज़ार में डॉलर बेचना शुरू कर दिया, ताकि अपनी currencies को सहारा मिल सके। Reuters के मुताबिक, अमेरिका ने भी शायद इसमें मदद की। यानी तीनों देशों ने मिलकर बाज़ार को संभालने की कोशिश की। अब इसमें खास बात क्या है? Japan और South Korea के रिश्ते हमेशा से अच्छे नहीं रहे हैं। दोनों देशों के बीच पुराने राजनीतिक और ऐतिहासिक विवाद हैं। इसलिए इनका एक साथ मिलकर currency बचाने के लिए कदम उठाना बहुत बड़ी बात मानी जा रही है। इसका असर भी तुरंत दिखा। कुछ ही देर में yen 163 से मज़बूत होकर करीब 157 तक आ गया और won भी लगभग 2% मज़बूत हो गया। लेकिन अगले ही दिन बाज़ार ने फिर दबाव बनाया और yen दोबारा 160 के पार चला गया। अब सवाल है कि Japan की currency इतनी कमज़ोर क्यों हो रही है? Japan अपनी ज़रूरत की लगभग 87% energy बाहर से खरीदता है। उसमें भी सबसे बड़ा हिस्सा तेल का है। Iran-US युद्ध के दौरान जब कच्चे तेल की कीमत 103 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई, तो Japan को तेल खरीदने के लिए पहले से कहीं ज़्यादा डॉलर खर्च करने पड़े। जितने ज़्यादा डॉलर बाहर गए, yen उतना ही कमज़ोर होता गया। और yen जितना कमज़ोर हुआ, बाहर से सामान खरीदना उतना ही महँगा हो गया। यानी Japan एक ऐसे चक्र में फँस गया, जिससे निकलना आसान नहीं है। South Korea की परेशानी भी कुछ ऐसी ही है। उसकी सबसे बड़ी ताकत semiconductor export है। लेकिन China ने rare earth minerals और Indium की सप्लाई पर सख़्ती कर दी। इससे Samsung और SK Hynix जैसी कंपनियों की supply chain पर दबाव बढ़ गया। Investors घबरा गए, won गिरने लगा और South Korea का शेयर बाज़ार भी दबाव में आ गया। कुछ दिन पहले SK Hynix ने America में 26.5 billion डॉलर का ADR issue किया था। उस पैसे का कुछ हिस्सा won में बदला गया, जिससे currency को थोड़ी राहत मिली। लेकिन जैसे ही उसका असर खत्म हुआ, won फिर दबाव में आ गया। इसलिए South Korea के केंद्रीय बैंक को बाज़ार में उतरना पड़ा। उधर Japan भी लगातार अपनी currency बचाने में अरबों डॉलर खर्च कर रहा है। इस साल April-May में उसने करीब 73 अरब डॉलर बाज़ार में झोंक दिए। फिर 11 July को 20.7 अरब डॉलर बेचे और अब 31 July को फिर बड़ा intervention करना पड़ा। Bank of Japan ने ब्याज दर नहीं बढ़ाई, क्योंकि अगर वह ऐसा करता है तो पूरी दुनिया के bond market पर असर पड़ सकता है। इसलिए उसने डॉलर बेचकर yen को संभालने की कोशिश की। लेकिन अब सवाल यही है कि बिना ब्याज दर बढ़ाए वह अपनी currency को कितने दिन तक बचा पाएगा। सबसे बड़ी बात यह है कि जब Japan और South Korea की currencies कमज़ोर होती हैं, तो China को फायदा मिलता है। क्योंकि दोनों देशों को rare earth जैसे ज़रूरी minerals के लिए China पर निर्भर रहना पड़ता है। ऊपर से उनकी अपनी currencies भी कमज़ोर हैं, इसलिए China की पकड़ और मज़बूत हो जाती है। @forexproguru
1 130
9
🇰🇷🇺🇸 South Korea sells US dollars in rare market intervention to strengthen the won.
816
10
🇯🇵 Japan sells US dollars and buys yen in massive currency intervention after yen falls to 40-year low.
812
11
"सस्नेहं गुरुपूर्णिमा-शुभाशयाः"🙏
"सस्नेहं गुरुपूर्णिमा-शुभाशयाः"🙏
984
12
16 वर्षों तक आमरण अनशन रखने वाली मणिपुर की इरोम शर्मिला के साथ क्या हुआ? इरोम शर्मीला ने मणिपुर में 16 साल लगातार यानी 2000 स
16 वर्षों तक आमरण अनशन रखने वाली मणिपुर की इरोम शर्मिला के साथ क्या हुआ? इरोम शर्मीला ने मणिपुर में 16 साल लगातार यानी 2000 से 2016 तक आमरण अनशन किया. अन्न का एक दाना नहीं खाया. सरकार नाक में नली डालकर दूध और पोषक तत्व देकर उनको जिंदा रखती रही. फिर इरोम ने अपने मुद्दे पर विधानसभा चुनाव लड़ा. लेकिन उनको सिर्फ नब्बे (90) वोट मिले, वह सीट कांग्रेस ने जीत ली. इरोम ने फिर राजनीति छोड़ दी. शादी कर ली. अब उनका एक सुंदर सा परिवार है, जिसमें दो बच्चे भी हैं. अब वे खुश हैं. इरोम के अनशन के दौरान ज्यादातर समय कांग्रेस सत्ता में रही. बीजेपी भी आई. पर राष्ट्र ने इस बात को नहीं माना कि अनशन करने के कारण देश का कानून बदल दिया जाए. इसके लिए तो सरकार बनानी पड़ती है. यही तो लोकतंत्र है इसी लिए इराम ने चुनाव लड़ा. फिर उनको पता चला कि इस मुद्दे पर जनता उनके साथ नहीं है. वे एक चुनावी रैली भी नहीं कर पाईं, जिसमें 100 लोग भी आए हों पिछले 25 साल में 4 अलग अलग सरकारों के साथ काम करने के अनुभव के आधार पर मेरा आकलन है कि 100 में 99 आंदोलन इसलिए सफल नहीं हो पाते क्योंकि सरकार उसका दमन नहीं करती दमन करना भी नहीं चाहिए.
1 318
13
कल रविवार अमेरिका में प्रेसिडेंट ट्रम्प का बर्थडे है. ट्रम्प चाहते थे कि ईरान के साथ उनकी डील उनके जन्म दिवस पर साइन हो ताकि देश वासियों के सामने राजनैतिक संदेश जाये कि यह ट्रम्प का बर्थडे गिफ्ट है. ईरान यह संदेश बिल्कुल नहीं देना चाहता था. अंततः हल निकला कि ईरान ने अपने समयानुसार रविवार समाप्त होते ही जैसे ही घड़ी की सुई ने बारह क्रॉस किया सोमवार लगा साइन कर दिया. टाइमज़ोन का अंतर है तो यह अभी अमेरिका की रविवार की शाम है, प्रेसिडेंट के बर्थडे की पार्टी आरम्भ होने का समय. ईरान के लिहाज से वो झुके नहीं और ट्रम्प के ऐंगल से उन्हें बर्थडे गिफ्ट भी मिल गया. संक्षेप में अमेरिका ईरान डील यही है. विन विन डील. अमेरिका के ऐंगल से यह उनके इतिहास की सबसे कम खर्चे / जान माल की क्षति वाला युद्ध रहा. दुश्मन के हजारों मारे, अपने बस दस बारह ही हताहत हुवे. युद्ध का खर्च जो हुआ उससे कई गुना ज्यादा तो वह यूक्रेन को युद्ध के लिए दान देते हैं. ऊपर से वेनेजुवेला का तेल बेच ऐसे कई युद्ध वह ऐसे ही लड़ सकते थे. ईरान की सबसे बड़ी जीत यह है कि उन्होंने हार नहीं मानी. चाहे जो नुक़सान हो वह अंत तक टिके रहे. अमेरिका का युद्ध में एक ही एजेंडा था ईरान को न्यूक्लियर बम नहीं बनाने देना है. आरंभिक MOU साइन होने के पश्चात फाइनल डील आने में दो महीने का समय रहेगा जिसमें इस विषय पर विस्तार से बात होगी. ईरान के लिहाज़ से वह चाहते थे कि उनके जिस फण्ड पर अमेरिका के मित्र देशों ने कब्जा कर रखा है वह वापस किया जाये. उसका एक हिस्सा डील के आरम्भ में मिल जाएगा. ईरान चाहता है कि युद्ध में और सैंक्शन से जो नुक़सान हुआ है उसके कंपनसेशन हेतु अमेरिका पैसे दे. अमेरिका सदैव इसके लिए तैयार रहता है, साझेदारी करो आधा तुम्हारा आधा हमारा पैसे हम लगा रहे हैं - इस संदर्भ में अभी आगे बात होगी. शेष अमेरिका की स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मुज़ ख़ाली करने की शर्त - वह तो युद्ध से पहले ही खुला था. ईरान की शर्त कि अमेरिका पर्शियन गल्फ से सेना हटाए तो वह युद्ध से पहले ही नहीं थी. वह सब हेडलाइंस के लिए हैं. मूल बात यह है कि अमेरिका को चाहिए ईरान कभी न्यूक्लियर पॉवर न बना पाये. ईरान को चाहिए पैसे और विकास. समझौता परफ़ेक्ट है. प्रेसिडेंट ट्रम्प के पोलिटिकल ऐंगल से भी नवंबर में अमेरिकी संसद के मिड टर्म हैं. युद्ध समझौता हो जाने की खबर उनकी पार्टी के लिए पॉजिटिव माहौल बनाएगी. दो महीने में फाइनल डील बिल्कुल चुनाव प्रचार के समय आयेगी वह डबल फायदा. यह वाक़ई डील है. न तुम जीते न हम हारे. @forexproguru
644
14
Now Deal is finally done🇮🇷🇺🇸✔️
Now Deal is finally done🇮🇷🇺🇸✔️
630
15
SpaceX का आईपीओ सोमवार को आ रहा है. 1.8 ट्रिलियन डॉलर वैल्यू. आलरेडी चार गुना ओवरसब्सक्राइब है. लगभग 4400 लोग जिनमे स्टाफ़ के
SpaceX का आईपीओ सोमवार को आ रहा है. 1.8 ट्रिलियन डॉलर वैल्यू. आलरेडी चार गुना ओवरसब्सक्राइब है. लगभग 4400 लोग जिनमे स्टाफ़ के इंजीनियर ही नहीं बल्कि कुक, वेल्डर जैसे लोग भी शामिल हैं मिलियनेयर बनने वाले हैं. चार सौ लोग तो हंड्रेड प्लस मिलियन ओनर बनने वाले हैं. इन सबके बीच एलन मस्क मानवता के इतिहास का पहला ट्रिलियन डॉलर वर्थ का व्यक्ति बनने वाला है. यह इतनी बड़ी रकम है कि वह अकेले बंगला देश प्लस पाकिस्तान जैसे कई देशों की जीडीपी से ज्यादा है. यह अकेला व्यक्ति व्यक्ति छोड़िए भारत की टाटा बिड़ला अंबानी अदानी सब कंपनियां मिला दी जायें उससे ज्यादा अमीर है. @forexproguru
900
16
🇺🇸/🇮🇷 President Trump: ‘We’re going to hit Iran very hard today’. 🚨 MARKET UPDATES: Over $1.2 trillion erased from U.S.
🇺🇸/🇮🇷 President Trump: ‘We’re going to hit Iran very hard today’. 🚨 MARKET UPDATES: Over $1.2 trillion erased from U.S. equities as escalating Trump–Iran tensions trigger a broad risk-off selloff. 📉 ▪️ S&P 500: -1.61% ▪️ NASDAQ: -1.98% Geopolitical uncertainty is rapidly being priced into stocks, with risk assets across the board coming under pressure. 🇺🇸 Bank of America says 70% of its bear-market signals are now active, a level that has historically coincided with market stress. 📉 Gold has slipped below its 200-day moving average by the largest margin seen since 2022. 🇨🇳 China increased its gold reserves by 10 tonnes in May, the biggest monthly purchase since January 2025. 🌍 Geopolitical tensions are also intensifying as Iran announces a full closure of the Strait of Hormuz following U.S. military strikes. Markets are now facing a potent mix of economic uncertainty, weakening sentiment, and rising geopolitical risk. @forexproguru
875
17
ट्रम्प ने नेतनयाहू को कहा है , भाई रुक जा आईपीओ तक फिर दोनों भाई मिल के मारेगे , क्यों अभी मार्केट बिगाड़ रहा है, पैसा लिया है
ट्रम्प ने नेतनयाहू को कहा है , भाई रुक जा आईपीओ तक फिर दोनों भाई मिल के मारेगे , क्यों अभी मार्केट बिगाड़ रहा है, पैसा लिया है मैंने सब से,तुझे भी दूंगा😂 "गंदा है पर धंधा है ये" @forexproguru
852
18
ट्रम्प ने नेतनयाहू को कहा है , भाई रुक जा आईपीओ तक फिर दोनों भाई मिल के मारेगे , क्यों अभी मार्केट बिगाड़ रहा है, पैसा लिया है
ट्रम्प ने नेतनयाहू को कहा है , भाई रुक जा आईपीओ तक फिर दोनों भाई मिल के मारेगे , क्यों अभी मार्केट बिगाड़ रहा है, पैसा लिया है मैंने सब से,तुझे भी दूंगा😂 @forexproguru
23
19
🚨🚨 MASSIVE CRYPTO BLOODBATH 🚨🚨 📉 Bitcoin crashes to $61,400 🔻 Ethereum plunges below $1,720 💥 More than $1.76 BILLION
🚨🚨 MASSIVE CRYPTO BLOODBATH 🚨🚨 📉 Bitcoin crashes to $61,400 🔻 Ethereum plunges below $1,720 💥 More than $1.76 BILLION in long positions wiped out in just 24 hours! ⚠️ Fear is spreading across the market as liquidations surge and volatility explodes. 🔥 Traders are getting wiped out while uncertainty grips the entire crypto market. 🐂 Bull trap or the ultimate buying opportunity? 🚀 📉 Strategy's Bitcoin holdings are now down a staggering $11.2 BILLION 🔻 BitMine's Ethereum holdings are down $9.38 BILLION 💥 Combined paper losses have surpassed $20.5 BILLION ⚠️ As crypto markets tumble, even the biggest institutional holders are feeling the pressure. 🔥 Billions erased. Volatility exploding. Fear rising. @forexproguru
1 109
20
चाइना को छोड़कर विश्व के अन्य सभी देशों में बॉन्ड यील्ड में वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि चिना में यह घट गई है। 📉📈 वह देश, जो
चाइना को छोड़कर विश्व के अन्य सभी देशों में बॉन्ड यील्ड में वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि चिना में यह घट गई है। 📉📈 वह देश, जो सबसे कम लागत पर ऋण प्राप्त कर सकता है, वह ही विश्व की आर्थिक महाशक्ति मानी जाती है, और वर्तमान में यह स्थिति चिना की है। 🌏🏆 ईरान में चल रहे संघर्ष का वास्तविक विजेता भी वही है। पिछले 15 वर्षों में चाइना ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए उल्लेखनीय प्रगति की है, जिसका यह एक सकारात्मक परिणाम है। ⚡🛡️ इस संघर्ष के दौरान चाइना ने लगातार स्वर्ण खरीदते हुए अपनी संपत्ति बढ़ाई है, जबकि अमेरिका ने स्वर्ण विक्रय किया है। 🥇💰 अर्थशास्त्र का एक सदियों पुराना सिद्धांत है: "जिसके पास स्वर्ण है, वही नियम बनाता है।" 📜👑 किसी भी देश का विश्लेषण करें, तो एक समान तथ्य सामने आता है कि जिसके पास सबसे बड़ा स्वर्ण भंडार रहा है, वही प्रमुख शक्ति बना रहा है। द्वितीय विश्व युद्ध तक यह स्थिति ब्रिटेन की थी, लेकिन युद्ध समाप्ति के दौरान ब्रिटेन का स्वर्ण अमेरिका स्थानांतरित हो गया। 🇬🇧➡️🇺🇸 वर्तमान में, स्विट्ज़रलैंड के माध्यम से अमेरिका का स्वर्ण चाइना की ओर स्थानांतरित होने लगा है। 🇨🇭➡️🇨🇳 @forexproguru
1 215