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आबकारी आरक्षक एवं पुलिस आरक्षक - क्विक रिवीजन बैच
Open For All / सभी के लिए निशुल्क *4 जुलाई 2025 से प्रारंभ*
सुबह 10:00 से 11:30 तक छत्तीसगढ़ सामान्य अध्ययन *मनीष वर्मा सर*
सुबह 11:30 से 1:00 तक गणित और तर्कशक्ति *लवलेश सर*
दोपहर 1:00 से 2:00 तक सामान्य अध्ययन *परमानंद सर*
सिद्ध बाबा जलाशय छत्तीसगढ़ के खैरागढ़–छुईखदान–गंडई जिले में विकासखंड छुईखदान के अंतर्गत स्थित ग्राम गभरा के पास बन रहा है। यह भवन लमती नदी पर लगभग 22 किमी दूर जिला मुख्यालय से दूर बनाया जा रहा है । कुल परियोजना लागत करीब ₹220 करोड़ है और इसकी जलभराव क्षमता लगभग 9.496 मिलियन घन मीटर है ।
📌 मुख्य तथ्य:
स्थान: ग्राम गभरा, विकासखंड छुईखदान, खैरागढ़–छुईखदान–गंडई जिला
नदी: लमती नदी पर स्थित, जिला मुख्यालय से लगभग 22 किमी दूर
लागत: करीब ₹220.07 करोड़, मंजूरी 9 मार्च 2022 को मिली
क्षमता: 9.496 मिलियन घन मीटर, करीब 34 गांवों में 1 840 हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र
💧 प्रमुख लाभ:
सिंचाई सुविधा: खैरागढ़, छुईखदान, गंडई, बेमेतरा और दुर्ग जिले के कुल 34 ग्रामों में
जल आपूर्ति: 23 लघु जलाशयों को जलापूर्ति
सामुदायिक वृद्धि: कृषक आय, ग्रामीण रोजगार व भूजल स्तर में सुधार
निष्कर्ष: सिद्ध बाबा जलाशय एक महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजना है जो छत्तीसगढ़ के मध्य भाग में किसान और ग्रामीणों के लिए जल सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
समलूर (छत्तीसगढ़) का धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत में विशेष स्थान रखता है। यह स्थान राजनांदगांव जिले में स्थित है और यह हिंदू धर्म, विशेषकर शैव परंपरा से जुड़ा हुआ एक प्रमुख धार्मिक स्थल माना जाता है।
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🔷 धार्मिक महत्व:
1. शिव मंदिरों का प्रमुख स्थल:
समलूर में प्राचीन शिव मंदिर स्थित हैं, जो स्थानीय लोगों के बीच गहरे आस्था का केंद्र हैं। ये मंदिर महाशिवरात्रि, श्रावण मास और अन्य धार्मिक पर्वों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं।
2. श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र:
यहां आने वाले भक्त जल चढ़ाने, पूजा अर्चना करने और मन्नतें मांगने के लिए दूर-दूर से आते हैं। शिवभक्तों के लिए यह एक तीर्थस्थान जैसा अनुभव प्रदान करता है।
3. लोक मान्यताएं और धार्मिक आयोजन:
समलूर में समय-समय पर धार्मिक मेले और उत्सव आयोजित होते हैं, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण समुदाय भाग लेते हैं।
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🔷 ऐतिहासिक महत्व:
1. प्राचीन स्थापत्य कला:
यहां के मंदिरों में छत्तीसगढ़ की प्राचीन स्थापत्य कला की झलक मिलती है। शिलालेख, पत्थर की मूर्तियां, और स्तंभों की शैली से अनुमान लगाया जाता है कि यह क्षेत्र मध्यकालीन काल में भी महत्वपूर्ण रहा होगा।
2. पुरातात्विक संभावनाएं:
समलूर के आस-पास के क्षेत्र में पुरातात्विक सर्वेक्षण से यह ज्ञात होता है कि यह स्थल प्राचीन मानव बसाहट और धार्मिक गतिविधियों का केंद्र रहा है।
3. स्थानीय राजवंशों से संबंध:
कुछ इतिहासकार मानते हैं कि यह क्षेत्र प्राचीन रतनपुर या कलचुरी राजवंशों के प्रभाव में था, और उस काल में यह धार्मिक गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण केंद्र था।
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🔷 संक्षेप में:
समलूर छत्तीसगढ़ का एक ऐसा स्थल है जहाँ धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक महत्व और सांस्कृतिक विरासत तीनों का समागम देखने को मिलता है। यह छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और धार्मिक आस्थाओं का प्रतीक स्थल है।
