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MPPSC 2026 PRE + MAINS NOTES #MPPSC MAINS 2025 MP PSC TEST SERIES CURRENT AFFAIRS MP CURRENT AFFAIRS

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📈 Telegram 频道 MPPSC 2026 PRE + MAINS NOTES #MPPSC MAINS 2025 MP PSC TEST SERIES CURRENT AFFAIRS MP CURRENT AFFAIRS 的分析概览

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📊 受众指标与增长动态

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根据 10 七月, 2026 的最新数据,频道保持稳定运转。过去 30 天订阅人数变化为 -4,过去 24 小时变化为 4,整体触达仍然可观。

  • 认证状态: 未认证
  • 互动率 (ER): 平均受众互动率为 16.51%。内容发布后 24 小时内通常能获得 5.30% 的反应,占订阅者总量。
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  • 互动与反馈: 受众积极参与,单帖平均反应数为 1
  • 主题关注点: 内容集中在 2025, ऑफर, परीक्षा, स्टेशनरी, अमेजॉन 等核心主题上。

📝 描述与内容策略

作者将该频道定位为表达主观观点的平台:
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凭借高频更新(最新数据采集于 11 七月, 2026),频道始终保持新鲜度与高覆盖。分析显示受众积极互动,使其成为 教育 类别中的关键影响点。

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मैकाले ने इसके तहत ‘अधोगामी निस्पंदन का सिद्धांत’ (Downward Filtration Theory) दिया जिसके तहत भारत के उच्च तथा मध्यम वर्ग के एक छोटे से हिस्से को शिक्षित करना था ताकि एक ऐसा वर्ग तैयार हो जो रंग और खून से भारतीय हो लेकिन विचारों, नैतिकता तथा बुद्धिमत्ता में ब्रिटिश हो। यह वर्ग सरकार तथा आम जनता के मध्य एक कड़ी का कार्य कर सके और इनके माध्यम से उनमें भी पाश्चात्य शिक्षा के प्रति रुचि उत्पन्न हो। जेम्स थॉमसन के प्रयास (1843-53): ब्रिटिश भारत के पश्चिमोत्तर प्रांत (North-Western Provinces) के लेफ्टिनेंट गवर्नर जेम्स थॉमसन ने स्थानीय भाषा में ग्रामीण शिक्षा के विकास हेतु एक व्यापक योजना लागू की। इसके तहत मुख्य रूप से प्रायोगिक विषयों जैसे- क्षेत्रमिति, कृषि विज्ञान आदि पढ़ाया जाता था। जेम्स थॉमसन के प्रयासों का मुख्य उद्देश्य नए स्थापित हुए राजस्व तथा लोक निर्माण विभाग हेतु कर्मचारियों की आवश्यकता को पूरा करना था। वुड्स डिस्पैच, 1854 (Wood’s Dispatch): चार्ल्स वुड ईस्ट इंडिया कंपनी के बोर्ड ऑफ कंट्रोल (Board of Control) के अध्यक्ष थे। भारत में शिक्षा व्यवस्था में सुधार हेतु उन्होंने एक विस्तृत योजना तैयार की जिसे तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौज़ी द्वारा लागू किया गया। इसके तहत प्रावधान किया गया कि जनसामान्य तक शिक्षा के प्रसार की ज़िम्मेदारी भारत सरकार की होगी। इसके माध्यम से अधोगामी निस्पंदन के सिद्धांत का विरोध किया गया। इसने देश में विद्यमान शिक्षा पद्धति को सुव्यवस्थित करते हुए प्राथमिक शिक्षा का माध्यम क्षेत्रीय भाषा को, माध्यमिक शिक्षा हेतु एंग्लो-वर्नाकुलर (अर्द्ध-अंग्रेज़ी) भाषा तथा उच्च शिक्षा हेतु अंग्रेज़ी को माध्यम बनाया। इसने पहली बार महिला शिक्षा हेतु प्रयास किया। इसके द्वारा व्यावसायिक शिक्षा तथा शिक्षकों के प्रशिक्षण हेतु प्रावधान किये गए। इसके द्वारा यह निर्धारित किया गया कि सरकारी संस्थानों में दी जाने वाली शिक्षा धर्म-निरपेक्ष हो। इसके तहत निजी विद्यालयों को प्रोत्साहन देने हेतु अनुदान (Grant-in-aid) का प्रावधान भी किया गया। इसके तहत भारत के सभी राज्यों में शिक्षा विभाग की स्थापना का निर्देश दिया गया। इस अधिनियम के परिणामस्वरूप देश के तीनों प्रेसीडेंसियों (बंगाल, मद्रास तथा बॉम्बे) में एक-एक विश्वविद्यालय स्थापित किया गया। हंटर आयोग, 1882-83 (Hunter Commission): हालाँकि वुड्स डिस्पैच ने देश के उच्च शिक्षा के लिये प्रयास किये लेकिन प्राथमिक तथा माध्यमिक शिक्षा के विकास पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया गया। प्रत्येक राज्य में शिक्षा विभाग की स्थापना से प्राथमिक तथा माध्यमिक शिक्षा की ज़िम्मेदारी भी राज्यों पर आ गई जिसके लिये उनके पास संसाधनों की कमी थी। वर्ष 1882 में सरकार ने डब्लूडब्लू हंटर की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया जिसका कार्य वुड्स डिस्पैच के बाद देश में शिक्षा के क्षेत्र में हुई प्रगति का मूल्यांकन करना था। हंटर आयोग के मुख्य सुझाव प्राथमिक तथा माध्यमिक शिक्षा से संबंधित थे जो कि इस प्रकार थे: इसके तहत इस बात पर ज़ोर दिया गया कि राज्य प्राथमिक शिक्षा के विस्तार तथा विकास हेतु विशेष कार्य करे और प्राथमिक स्तर पर शिक्षा का माध्यम क्षेत्रीय भाषा हो। इसके द्वारा यह अनुशंसा की गई कि प्राथमिक शिक्षा का नियंत्रण नए स्थापित ज़िला तथा नगरपालिका बोर्डों को दिया जाए। इसकी अनुशंसा थी कि माध्यमिक शिक्षा के अंतर्गत दो शाखाएँ हों: साहित्यिक (Literary), जिसके बाद विद्यार्थी विश्वविद्यालयी शिक्षा की तरफ जाएँ। व्यावसायिक (Vocational), जिसके बाद विद्यार्थी रोज़गार प्राप्त करें। इसके माध्यम से तत्कालीन समय में महिला शिक्षा में विद्यमान अवसंरचनात्मक कमियों को उजागर किया गया तथा उसकी भरपाई हेतु व्यापक प्रयास के सुझाव प्रस्तुत किये गए। हंटर आयोग की सिफारिशों के लागू होने के बाद अगले दो दशक तक देश में शिक्षा का उल्लेखनीय विकास हुआ तथा पंजाब विश्वविद्यालय (1882) और इलाहाबाद विश्वविद्यालय (1887) की स्थापना हुई।

औपनिवेशिक भारत में शिक्षा का विकास अंग्रेज़ों से पूर्व भारतीय शिक्षा: 1830 के दशक में तत्कालीन भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड विलियम बैंटिक ने बिहार तथा बंगाल की स्कूली शिक्षा व्यवस्था के अध्ययन हेतु एक ईसाई प्रचारक और शिक्षाविद् विलियम एडम (William Adam) को नियुक्त किया। एडम ने तीन रिपोर्टें प्रस्तुत कीं जिसके निष्कर्ष निम्नलिखित थे: ब्रिटिश अधीनता से पूर्व भारत की शिक्षा व्यवस्था लंबे समय से गुरु-शिष्य परंपरा पर आधारित थी। आधुनिक विद्यालयों के विपरीत उस समय छोटी-छोटी पाठशालाएँ होती थीं जहाँ स्थानीय शिक्षक या गुरु द्वारा बच्चों को संस्कृत, व्याकरण, प्रायोगिक गणित, महाजनी खाता आदि के बारे में पढ़ाया जाता था। ये पाठशालाएँ प्रायः किसी मंदिर, दुकान, किसी शिक्षक के घर, किसी वृक्ष के नीचे या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर चलती थीं। पाठशालाओं में कुल 10-20 विद्यार्थी ही होते थे और फसलों की कटाई के मौसम में पाठशालाएँ बंद रहती थीं ताकि बच्चे अपने घर के कामों में मदद कर सकें। शिक्षक या गुरु की फीस निर्धारित नहीं थी। गरीब बच्चों से कम तथा आर्थिक रूप से सक्षम छात्रों से अधिक फीस ली जाती थी। उस समय अलग-अलग कक्षाएँ नहीं चलती थीं बल्कि सभी छात्र एक ही जगह साथ-साथ बैठते थे और विभिन्न स्तर के विद्यार्थियों को शिक्षक अलग-अलग पढ़ाते थे। प्राच्यवादी तथा पाश्चात्यवादी विवाद: ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में शिक्षा के प्रसार हेतु प्रारंभ में कोई विशेष रुचि नहीं दिखाई लेकिन भारत में बढ़ते साम्राज्य तथा राजनीतिक शक्ति के कारण उसे एक ऐसे वर्ग की आवश्यकता हुई जो कि प्रशासन और व्यापार के कार्यों में उसकी सहायता कर सके। इसके लिये वर्ष 1813 में ब्रिटेन की संसद द्वारा पारित चार्टर अधिनियम में भारत में शिक्षा के विकास हेतु प्रतिवर्ष 1 लाख रुपए के अनुदान का प्रावधान किया गया। चार्टर अधिनियम, 1813 (Charter Act, 1813) द्वारा निर्दिष्ट शिक्षा हेतु अनुदान के विषय पर कंपनी प्रशासन में मतभेद उत्पन्न हुआ कि भारत में शिक्षा का प्रारूप तथा माध्यम कैसा हो? इस मतभेद में दो पक्ष थे। एक पक्ष प्राच्यवादियों (Orientalist) का था जो मानते थे कि भारत में पारंपरिक शिक्षा व ज्ञान को प्रोत्साहन देना चाहिये एवं शिक्षा का माध्यम स्थानीय भाषाएँ होनी चाहिये, जबकि दूसरा पक्ष पाश्चात्यवादियों (Anglicist) का था जो मानता था कि शिक्षा व्यावहारिक तथा उपयोगी होनी चाहिये और शिक्षा का माध्यम इंग्लिश होना चाहिये। प्राच्यवादियों में विलियम जोन्स, जेम्स प्रिंसेप, चार्ल्स विल्किंस, एचएच विल्सन आदि शामिल थे, जबकि पाश्चात्यवादी शिक्षा के समर्थन में टीबी मैकाले, जेम्स मिल, चार्ल्स ग्रांट, विलियम विल्बरफोर्स आदि शामिल थे। जेम्स मिल उपयोगितावादी विचारक था तथा उसका मानना था कि अंग्रेज़ों को भारतीय जनता को खुश करने या उनकी भावनाओं को ध्यान में रख कर शिक्षा नहीं देनी चाहिये बल्कि शिक्षा के माध्यम से उन्हें उपयोगी तथा व्यावहारिक ज्ञान देना चाहिये जिसमें पश्चिमी विज्ञान, तकनीकी तथा व्यावसायिक शिक्षा शामिल हो। टीबी मैकाले प्राच्य शिक्षा का घोर विरोधी था और प्राच्य शिक्षा के बारे में उसका कथन था कि “एक अच्छे यूरोपीय पुस्तकालय का केवल एक शेल्फ ही भारत और अरब के समूचे साहित्य के बराबर है।” हालाँकि इस विवाद के बावजूद पाश्चात्यवादी शिक्षा के समर्थकों की बात भारत परिषद ने स्वीकार की तथा अंग्रेज़ी शिक्षा अधिनियम, 1835 (English Education Act, 1835) पारित किया। इसके बाद भारत में अंग्रेज़ी को शिक्षा के माध्यम हेतु औपचारिक तौर पर स्वीकार किया गया। मैकाले का स्मरण-पत्र (Macaulay’s Minute): लॉर्ड मैकाले वर्ष 1834 में भारत आया तथा उसे गवर्नर जनरल की कार्यकारी परिषद के विधि सदस्य के तौर पर नियुक्त किया गया था। उसकी नियुक्ति सार्वजनिक शिक्षा समिति के अध्यक्ष पद पर कर दी गई जिसका कार्य प्राच्यवादी तथा पाश्चात्यवादी विवाद पर मध्यस्थता करना था। वर्ष 1835 में लॉर्ड मैकाले ने अपना प्रसिद्ध स्मरण-पत्र (Minute) गवर्नर जनरल की परिषद के समक्ष प्रस्तुत किया जिसे लॉर्ड विलियम बैंटिक ने स्वीकार करते हुए अंग्रेजी शिक्षा अधिनियम, 1835 पारित किया। मैकाले के स्मरण-पत्र के मुख्य प्रावधान निम्नलिखित थे: इसके तहत पाश्चात्य शिक्षा का समर्थन करते हुए यह प्रावधान किया गया कि सरकार के सीमित संसाधनों का प्रयोग पश्चिमी विज्ञान तथा साहित्य के अंग्रेज़ी में अध्यापन हेतु किया जाए। सरकार स्कूल तथा कॉलेज स्तर पर शिक्षा का माध्यम अंग्रेज़ी करे तथा इसके विकास के लिये कई प्राथमिक विद्यालयों के स्थान पर कुछ स्कूल तथा कॉलेज खोले जाएँ।

टाइगर स्टेट, तेंदुआ स्टेट, घड़ियाल स्टेट, गिद्ध स्टेट, सोया स्टेट के बाद अब मध्य प्रदेश बना वुल्फ स्टेट।
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Group_3_RuleBook_2022.pdf भोपाल:- सब-इंजीनियर के 3435 पदों के लिए व्यापम बोर्ड ने जारी किया भर्ती विज्ञापन। JOIN NOW @MPEXAMGURUJIOFFICIAL

भोपाल:- सब-इंजीनियर के 3435 पदों के लिए व्यापम बोर्ड ने जारी किया भर्ती विज्ञापन। JOIN NOW @MPEXAMGURUJIOFFICIAL
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TET परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों पर बोले गृह मंत्री, "परीक्षा 25 मार्च को थी, पेपर 26 को लीक हुआ"... #TETPaperLeak #MPNews #MPTETSCAM

अब जब साथी मंत्री जी के कॉलेज का नाम आया तो ये बोल🧐 अब भी आप लोगो को लगता है की ट्वीट् करना जरूरी नहीं है!! आज शाम 6 बजे mpt
अब जब साथी मंत्री जी के कॉलेज का नाम आया तो ये बोल🧐 अब भी आप लोगो को लगता है की ट्वीट् करना जरूरी नहीं है!! आज शाम 6 बजे mptet वर्ग 3 के लिए #MPTETSCAM के साथ आप सब ट्वीट जरूर करें 🙏👍

पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा अपडेट भोपाल:- पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा को मिली क्लीन चिट मैप आईटी ने अपनी जांच रिपोर्ट गृह विभाग को सौंपी पास करने के बाद अयोग्य बताने वाली शिकायत झूठी:- map it की रिपोर्ट जल्दी ही आएगी फिजिकल टेस्ट की डेट Zee न्यूज़ मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ JOIN NOW @MP_POLICE_EXAMS

डेंटल सर्जन पद के साक्षात्कार आयोजन की तिथि की सूचना।
डेंटल सर्जन पद के साक्षात्कार आयोजन की तिथि की सूचना।

आज शाम 6 बजे mptet वर्ग 3 के लिए #MPTETSCAM के साथ आप सब ट्वीट जरूर करें 🙏👍 MPPEB के द्वारा हर परीक्षा में गड़बड़ियां की जा रही है और मध्य प्रदेश के बेरोजगार छात्रों के साथ धोका किया जा रहा है इसलिए 1अप्रैल शाम 6 बजे #MPPEBScam ट्विटर पर ट्रेंड कराना बहुत जरूरी है 1 अप्रैल को 6 बजे #MPPEBScam के साथ ट्वीट जरूर करें कृपया आप सभी अपने टेलीग्राम व्हाट्सएप फेसबुक ग्रुप में इस message को जरूर शेयर करें और आप सभी इसमें सहयोग जरूर करें धन्यवाद🙏🙏

मंत्री राजपूत के बेटे के काॅलेज से लिया था पेपर का स्क्रीन शॉट, सागर से हुआ था वायरल https://dainik-b.in/WQGlg2miOob JOIN NOW
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मंत्री राजपूत के बेटे के काॅलेज से लिया था पेपर का स्क्रीन शॉट, सागर से हुआ था वायरल https://dainik-b.in/WQGlg2miOob JOIN NOW @MPEXAMGURUJIOFFICIAL

कल शाम 6 बजे mptet वर्ग 3 के लिए #MPTETSCAM के साथ आप सब ट्वीट जरूर करें🙏👍 1 अप्रैल को 6 बजे #MPPEBScam के साथ ट्वीट करके माननीय मुख्यमंत्री जी को याद दिलाना है कि वो किस तरह भांजे भंजियो को april fool बना रहे है हर भर्ती मे होने वाली घोटाले/ गड़बड़ी को नजरअंदाज़ कर रहे है आप सभी से सहयोग की अपेक्षा है🙏 आप सभी अपने सुझाव जरूर दे

बेसिक स्ट्रक्चर के विकास का कालक्रम
बेसिक स्ट्रक्चर के विकास का कालक्रम

यदि आपको लगता है कि मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा वर्ग 3 मैं चीटिंग हुई है और उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए तो आप सभी शिक्षा मंत्री इंदिर सिंह परमार जी के इस ट्वीट पर रिप्लाई जरूर करें #varg3_ghotala https://twitter.com/Indersinghsjp/status/1508782108872826883?s=20&t=MF9w51OaS5Sq1ODCY0iMDw JOIN NOW @MPEXAMGURUJIOFFICIAL

**Peb ने पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा को लेकर अपना ऑफिसियल बयान जारी किया **1. पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा-2020 जनवरी-फरवरी 2022 में आयोजित की गई एवं उसका प्रथम चरण का परिणाम भी पुलिस मुख्यालय मध्यप्रदेश द्वारा हस्ताक्षरित नियम पुस्तिका के आधार पर ही दिनांक 24 मार्च 2022 को घोषित कर दिया गया है । 2.6000 पदों के विरुद्ध प्रथम चरण में 05 गुना अर्थात् लगभग 30000 अभ्यर्थियों की लिस्ट पुलिस विभाग को उपलब्ध कराई गई है। 3. प्रथम चरण के रिजल्ट के आधार पर सूची उपलब्ध कराते समय यह ध्यान रखा जाता है कि रेंडम लिस्ट हो, जिससे वास्तव में यह पता नहीं लगाया जा सके कि मेरिट में कौन अभ्यार्थी ऊपर है और कौन नीचे है। 4. प्रथम चरण के रिजल्ट में कटऑफ कभी नहीं बताया जाता है और यह प्रक्रिया वर्ष 2016 एवं 2017 के पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा में भी अपनाई गई थी । प्रथम चरण में कट ऑफ या मेरिट लिस्ट के अंक बता देने से फिजिकल टेस्ट की भी शुचिता प्रभावित होने की संभावना रहती है । 5. फिजिकल टेस्ट में क्वालीफाईड पाए जाने के आधार पर फाइनल रिजल्ट पी.ई.बी. द्वारा निकाला जाता है। जिसमें कट ऑफ मार्क्स एवं अभ्‍यर्थी द्वारा प्राप्त मार्कस भी दर्शाये जाते हैं। 6. कुछ समाचारों में पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा-2020 के अभ्‍यर्थियों के परिणाम में कुछ अभ्‍यर्थियों को पहले क्‍वालीफाईड एवं बाद में नॉटक्‍वालीफाईड अंकित होने का उल्‍लेख किया जा रहा है। इस संबंध में अवगत कराया जाता है कि पी.ई.बी. द्वारा परीक्षा परिणाम एक ही बार जारी किया गया है। 7.आवेदक स्‍वयं ऑनलाईन अपना परीक्षा परिणाम देख सकते है। यदि किसी भी प्रकार की कोई शंका है तो वे समुचित सा‍क्ष्‍यों के साथ अपना आवेदन बोर्ड कार्यालय में प्रस्‍तुत करें, जिससे शंका का समाधान किया जा सके। 8.फाइनल रिजल्ट वर्गवार एवं आरक्षण नियमों के आधार पर होता है। अतः पी.ई.बी. द्वारा कराई गई पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा एवं प्रथम चरण के जारी रिजल्ट में कोई शंका करने की आवश्यकता नहीं है। 9. पी.ई.बी. यह आश्वस्त करता है कि परीक्षा नियम पुस्तिका के अनुसार पूर्ण शुचितापूर्वक संपन्न कराई गई है एवं परिणाम भी पूर्णत: फेयर एवं पारदर्शी होगा।** संचालक प्रोफेशनल एग्‍जामिनेशन बोर्ड भोपाल JOIN NOW @MP_POLICE_EXAMS**

ये अच्छी पहल है 👌👌 अब उच्च शिक्षण संस्थानों में मेरिट के आधार पर एडमिशन नही होगा ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ Join 🔜 @MP_PSC_NOTES ➖➖➖➖➖➖➖
ये अच्छी पहल है 👌👌 अब उच्च शिक्षण संस्थानों में मेरिट के आधार पर एडमिशन नही होगा ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ Join 🔜 @MP_PSC_NOTES ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖

राज्य सेवा मुख्य परीक्षा-2020 के लिए आयोग ने अभ्यर्थियों को आवेदन का दिया एक ओर मौका। 3 हजार रुपये लेट फ़ीस के साथ 31 मार्च तक
राज्य सेवा मुख्य परीक्षा-2020 के लिए आयोग ने अभ्यर्थियों को आवेदन का दिया एक ओर मौका। 3 हजार रुपये लेट फ़ीस के साथ 31 मार्च तक कर सकेंगे आवेदन।