शारीरिक शिक्षक समूह, राजस्थान
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T20 World- 2024
में आज़ हुए मैच में अफगानिस्तान टीम ने बांग्लादेश को हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया।
• आस्ट्रेलिया T20 World कप से हुई बाहर।😄
शानदार खेल दिखाया अफगानिस्तान👍
#sportsDuniya 💗
हमारे वंचित रहें साथियों के वास्ते मेरी स्वयं की कलम से उनका दर्द साझा कर रहा हू उसमें कोई गलत लगे तो माफ करना...
अभी पिछले 2-3 महीने से फर्जी तरीके से नोकरी लगे हुए कैंडिडेट्स के नाम सोशल मीडिया प्लेटफार्म ऒर बोर्ड/विभाग/SOG की रडार पर चल रहें है
- कुछ को कर दिया है ऒर कुछ को आने वाले दिनों में बोर्ड/आयोग द्वारा उनको जिंदगी भर के लिए डिबार कर दिया जाएगा उसकी गांव/परिवार में बदनामी होगी वो अलग।
- नोकरी लगने के पैसे भी दिए, खूब बदनामी भी हुई ओर अब जेल भी गए ऒर भी कतार में है जाने के लिए लिस्ट बण रही है वो भी जायेंगे।
मारवाड़ी म्हाई केबत है - "।माल र माजनो दोन्यु गया"।
'एक बात की गांठ बांध लो'
मेहनत करके हासिल की गई सफलता का एक अलग ही मज़्जा है। उसको जो खुशी मिलती है वो उसके चेहरे और बॉडी लैंग्वेज में साफ-साफ झलकती रहती है उसकी बातें / लहजा / हाव भाव सब बता देते है कि मेहनत हुई है ऒर माँ-पाप री खरी कमाई के बलबूते संघर्ष कर के लगे है।
'इसके उल्ट ऒर जो फर्जी लगे है वो'
-उसके मन में हमेशा डर रहता है कि
कही कभी कोई जांच ना हो जाए।
-कही कोई इस नौकरी कि बात ना चला दें कि कैसे लगे हो।
- कहीं कोई अपने से परीक्षा की तैयारी के बारे में ना पूछ लें।
- कही कोई फर्जी अभ्यार्थी पकड़ में तो नहीं आया गया…।
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ऐसे तमाम तरह के डर उसे जिंदगीभर डराते रहते है ऒर कभी भी सकूनभरी चैन से नींद नहीं ले पाते।
मेरा तो कहना है—
फर्जी डिग्री लेकर / पैसे देकऱ पेपर खरीदना / डमी कैंडिडेट बैठाकर कोई नौकरी हासिल करनी ही क्यों है?
- सरकारी नौकरी ही सब कुछ थोड़ी है?
सरकारी नौकरी को नाक का सवाल बनाना ही क्यों? जितने पैसे देकर नौकरी लगोगे उतने में खुद का कोई धंधा शुरु हो जाएगा। माँ-बाप री इज्जत और जमीन बिकने से बच सी बा अलग।
- सरकारी नौकरी के वास्ते जो प्रॉपर दिल से तैयारी कर रहे है उनसे पूछो एक नंबर से मेरिट में रहने का दर्द क्या होता है? आपके द्वारा फर्जी तरीके से लिया गया एक पद किसी दूसरे की जिंदगीभर की मेहनत पर पानी फेर देता है अगर आप ऐसा ना करें तो हो सकता है वो पद उस योग्य / मेहनती को मिल जाता।
- मोटा-मोटी बात रा सार योही स कि
'मेहनत की कमाईयोडी दाल रोटी, लूट र खायोडी बर्फी सु बढ़िया लागे'
इतना ही टेलेंट है तो मेहनत कर र नौकरी हासिल करके दिखाओ?
- जो कोई रो हक मार र खावे झका मिनखा आरी भर्ती में कोनी आया कर... म्हे तो बाने मारवाड़ी में गंडक किया करा। बाक़ी थाकी थे जानों।
आपका अपना संघर्ष का छोटा-सा सारथी
Mukesh Sinwar P T I री...✍️ से
#sportsDuniya 💗
'अकेला अध्यापक ही दोषी क्यों?'
विचारणीय | संकलित | सोशल मीडिया पोस्ट
10 मिनट लेट हो जाने पर मास्टरों पर ऊँगली उठाने वाले लोग बताएं कि किस अधिकारी के कार्यालय में जाने पर आपको उसके आने का घंटो इन्तजार नहीं करना पड़ता ?किस कार्यालय में जाने के बाद आपको यह सुनने को नही मिलता कि साहब आज नहीं हैं ? हफ्तों इन्तजार करने के बाद जब साहब के किसी दिन आने की सूचना मिलती है तो आप समय से कार्यालय पहुँच जाते हैं और 12 बजे तक साहब के आने का इंतजार करते हैं, जब साहब गाड़ी से उतरते हैं तो रस्ता छोड़कर झुककर हाथ जोड़कर उनके सम्मान में अपना सम्मान गिरवी रखते हैं।
फिर साहब आसन ग्रहण करते हैं और आप अपनी बारी का इंतजार बारी आने पर हाथ जोड़कर जी हुजूर, जी हुजूर कहते हुए काँपते हाथों से अपनी फरियाद सुनाते हैं कि साहब कुछ दया कर दें। आधी अधूरी फरियाद सुनने के बाद साहब आपको जाने का हुक्म देते हैं और लौटते समय आप हाथ जोड़कर 3 बार झुक झुककर सलामी ठोंकते हैं इस उम्मीद में कि साहब एक बार आपकी सलामी स्वीकार कर लें। लेकिन साहब कोई जवाब नहीं देते और उनका अर्दली आपको धकियाते हुए कहता है कि चलिये अब बाहर निकलिये ।
इतनी दीनता दिखाने के बाद और इतना सम्मान पाने के बाद आप खुशी-खुशी घर जाते हैं कि आज साहब मिल तो गये और उनसे बात हो गयी।
• यही लोग स्कूल में आकर शेर बनते हैं और उस मास्टर के सामने अपना पराक्रम दिखाते हैं जो उनके बच्चों का भविष्य संवारने के लिये गेंहू तक पिसवाकर रोटी खिलाता है। हाथ पकड़कर लिखना सिखाता है। डर से आँसु निकलने पर आपके बच्चे को गोदी में बैठाकर आँसु तक पोछता है। गली में जुआ खेलते दिख जाने पर आपके बच्चे को डाँटता भी है और ऐसे शिक्षक पर आपको धौंस जमाते हुए तनिक भी लज्जा नहीं आती।
• आपके बच्चे को डाँट देने पर आप स्कूल में सवाल करने चले आते हैं कि 'मास्टर तुमने मेरे बच्चे को डाँटा क्यों ?' भले ही आप किसी पुलिस वाले से अक्सर बिना वजह डाँट खाते रहते हों। उनसे तो बिन गलती लाठी खाने पर भी आप माफी मांगने लगते हैं किन्तु मास्टर द्वारा अनुशासन बनाये रखने के लिए दी गयी डॉट पर भी आपको जवाब चाहिए।
• आप ये भूल जाते हैं कि जब आप अपने बच्चे का रोना सुनकर उसकी पैरवी करने स्कूल आते हैं तो उसी समय आपके बच्चे के मन से अनुशासन के नियमों का भय निकल जाता है और वह और भी अनुशासनहीन हो जाता है। उसके मन से दंड का भय निकल जाता है और वह और भी उद्दंड हो जाता है। वह ये सोचने लगता है कि गलती करने पर उसके पापा उसका पक्ष लेंगे इसलिए गुरुजी से डरने की जरूरत नहीं। फिर तो वह स्कूल का कोई भी कार्य न करेगा। आप अपने बच्चे की पढ़ाई चाहते हैं या उसकी स्वच्छन्दता ?
कानून का भय यदि समाप्त हो जाय तो हर कोई कानून का उल्लंघन करने लगेगा, ठीक उसी प्रकार यदि अनुशासन का भय यदि खत्म हो जाय तो बच्चा स्वच्छन्द हो जाएगा। विद्यालय की शैक्षिक व्यवस्था खतरे में पड़ जाएगी।" ये हमारा दुर्भाग्य है कि बेसिक में पढ़ने वाले कई बच्चों के माता-पिता अनुशासन के महत्त्व से बिलकुल अनजान हैं और हर दंड को नकारात्मक ही लेते हैं।
जबकि गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है भय बिन होय न प्रीति।' भय बिना अनुशासन भी सम्भव नहीं है और बिन अनुशासन शिक्षक छात्र सम्बन्धों की कल्पना बेईमानी-सी होगी।
आप अपने परिवार को ही लीजिये, क्या आप बच्चे की गलती पर उसे दंड नहीं देते ? समझाने का असर एक सीमा तक ही होता है, वो भी हर एक पर असर भी नहीं करता । दंड का आशय सदैव उत्पीड़न नहीं होता, विद्यालय में तो हरगिज नहीं। विद्यालय में दंड का आशय अनुशासन स्थापित करने से होता है। यहाँ दंड का आशय पिटाई से न लगाएँ।
शिक्षक को सदैव खुशी होती है जब उसका कोई शिष्य उससे भी आगे निकलता है और इसी उद्देश्य से वह शिक्षा भी देता है कि उसका प्रत्येक शिष्य सफल हो। इसलिए आप शिक्षक के कार्यों का छिद्रान्वेषण न करें, न ही उस पर शंका.....
दास्तां के शब्दों को दूसरी जगह से ऒर कुछ स्वयं द्वारा मिश्रण करके पेश किया Mukesh(शा.शि.)की ✍️ने।🙏
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