2 372
订阅者
无数据24 小时
-67 天
-1630 天
帖子存档
2 372
प्रतियोगिता दर्पण अगस्त 2021..pdf
प्रतियोगिता दर्पण
┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈
Join 🔜 @Bihar_Special
Join 🔜 @Bihar_Special
2 372
प्रतियोगिता दर्पण जुलाई 2021..pdf
प्रतियोगिता दर्पण
┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈
Join 🔜 @Bihar_Special
Join 🔜 @Bihar_Special
2 372
प्रतियोगिता दर्पण जून 2021..pdf
प्रतियोगिता दर्पण
┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈
Join 🔜 @Bihar_Special
Join 🔜 @Bihar_Special
2 372
प्रतियोगिता दर्पण मई 2021..pdf
प्रतियोगिता दर्पण
┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈
Join 🔜 @Bihar_Special
Join 🔜 @Bihar_Special
2 372
प्रतियोगिता दर्पण अप्रैल 2021..pdf
प्रतियोगिता दर्पण
┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈
Join 🔜 @Bihar_Special
Join 🔜 @Bihar_Special
2 372
प्रतियोगिता दर्पण मार्च 2021..pdf
प्रतियोगिता दर्पण
┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈
Join 🔜 @Bihar_Specisl
Join 🔜 @Bihar_Special
2 372
प्रतियोगिता दर्पण फरवरी 2021..pdf
प्रतियोगिता दर्पण
┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈
Join 🔜 @Bihar_Special
Join 🔜 @Bihar_Special
2 372
प्रतियोगिता दर्पण जनवरी 2021..pdf
प्रतियोगिता दर्पण
┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈
Join 🔜 @Bihar_Special
Join 🔜 @Bihar_Special
━━━━━━━━━━━━━
2 372
बिहार विशेष मैप
#handwritten
This is a very good source to understand geography of Bihar
2 372
Important for #bpsc_uppcs_jpsc
#modernhistory
प्रथम कर्नाटक युध्द का प्रारम्भ 👍
-फ्रेंच और अंग्रेजो के बीच तीन युध्द हुए जिन्हें कर्नाटक युध्द के नाम से जाना जाता है।
-प्रथम कर्नाटक युध्द 1746 से 1748 तक चला .ये ऑस्ट्रिया के अधिकार युध्द जो कि 1740में प्रारम्भ हुआ था उसी का विस्तार था।
फ्रेंच गवर्नर
-डूपले 1741 ई. में पाण्डिचेरी का गवर्नर बन के आया तथा 1742 में अपनी भारतीय सेना का गठन किया। डूपले फ्रेंच गवर्नर था।
अंग्रेजों की सेना का गठन
-अंग्रेजों ने 1746 ई. में अपनी सेना का गठन किया ।1746 में एक सेनापति बारनेट ने फ्रांसिसियों के कूछ जहाज पकड लिए।
मद्रास पर फ्रेंचों का अधिकार
-डूपले के आमंत्रण पर 3000 सैनिकों को ले के मॉरिशियस के फ्रेंच गवर्नर लाबुंडो ने मद्रास को घेर लिया परंतु उसने कुछ राशि देकर मद्रास नगर अंग्रेजों को लौटा दिया,
परंतु डूप्ले ने इसकी मान्यता नहीं ली और मद्रास को अपने अधिकार में ले लिया परंतु पाण्डिचेरी से 18 मील दूर सेंट डेविड पर वह अधिकार नहीं कर सका।
अलबरुद्दीन का आदेश
-दोनों कम्पनियों के आपसी टकराव से भंग हो रही ।शांति को कायम करने के उद्देश्य से कर्नाटक के नबाब अलबरुद्दीन ने दोनों कम्पनियों को युध्द बंद करने का आदेश दिया।
डूप्ले की मद्रास पर विजय
-डूपले ने मद्रास जीत कर अलबरुद्दीन को सौंपंने का प्रस्ताव दिया था, परंतु बाद में उसके द्वारा ऐसा नहीं किये जाने पर अंडियार नदी के किनारे सेंट टॉमे नामक स्थान पर नबाब की सेना महफूज खाँ के नेतृत्व में तथा फ्रेंच सेना कैप्टन पैराडाइज के नेतृत्व में वहाँ पहुँची तथा उनके बीच युध्द हुआ।
इस युध्द में अंग्रेजों ने नबाब की मदद की।
फ्रांसिसियों की विजय
- फ्रांसिसियों की लगभग 1000 संख्या वाली छोटी सेना ने 10,000 संख्या वाली नवाब की सेना को परास्त कर दिया।
इसके बाद एक संधि हुयी एक्सला सापेल की संधि 1748 में। इसके द्वारा यूरोप में फ्रांस एवं बिट्रेन की बीच युध्द समाप्त हो गया इसके साथ ही भारत में प्रथम कर्नाटक युध्द समाप्त हो गया।
Quick Notes
कार्नेटिक युद्ध – I (1746-48 ई०)
-यह युद्ध ऑस्ट्रिया के उत्तराधिकार युद्ध, जो कि 1740 ई० में आरंभ हुआ, का विस्तार मात्र था |
-डूप्ले 1741 ई० में पांडिचेरी का गवर्नर बनकर आया तथा 1742 ई० में अपनी भारतीय सेना का गठन किया।
-अंग्रेजों ने 1746 ई० में अपनी भारतीय सेना का गठन किया।
-1746 ई० में एक अंग्रेज सेनापति बारनेट ने फ्रांसीसियों के कुछ जहाज पकड़ लिये।
डूप्ले के आमंत्रण पर 3000 सैनिकों को लेकर मारीसस के फ्रेंच गवर्नर ला-बुर्डीने ने मद्रास को घेर लिया। परंतु, उसने कुछ राशि लेकर मद्रास नगर अंग्रेजों को लौटा दिया।
परंतु डूप्ले ने इसकी मान्यता नहीं दी एवं मद्रास को अपने अधिकार में कर लिया, परंतु पांडिचेरी से 18 मील दूर सेंट डेविड पर अधिकार न कर सका।
दोनों कंपनियों के आपसी टकराव से भंग हो रही शांति को कायम रखने के उद्देश्य से कर्नाटक के नवाब अनवरूद्दीन ने दोनों कंपनियों को युद्ध बंद करने का आदेश दिया।
डूप्ले ने मद्रास जीतकर अनवरूद्दीन को सौंपने का प्रस्ताव दिया था, परंतु बाद में उसके द्वारा ऐसा नहीं किये जाने पर अड्यार नदी के किनारे सेंट टॉमे नामक स्थान पर नवाब की सेना (महफूज खाँ के नेतृत्व में) तथा फ्रेंच सेना (कैप्टन पेराडाइज के नेतृत्व में) के बीच युद्ध हुआ इस युद्ध में अंग्रेजों ने नवाब को मदद की।
फ्रांसीसियों की लगभग 1000 की छोटी संख्या वाली सेना ने 10000 की बड़ी संख्या वाली नवाब की सेना को परास्त कर दिया।
एक्स-ला-शॉपल संधि (1748 ई०) के द्वारा यूरोप में फ्रांस एवं ब्रिटेन के बीच युद्ध समाप्त हो गया तथा साथ ही भारत में भी प्रथम कार्नेटिक युद्ध भी समाप्त हो गया।
2 372
#Modern_history
Important for all One day exams...
(#Bpsc_uppcs_jpsc, railway ssc)
पुर्तगालियों का भारत आगमन
पुर्तगालियों को समुद्री व्यापार का एकाधिकार
भारत आने वाली यूरोपीय कम्पनीयों में पुर्तगाली प्रथम थे। पोप एलेक्जेंडर 4 ने 1492 ई. में एक आज्ञापत्र के द्वारा पुर्तगाल को समुद्री व्यापार का एकाधिकार सौंपा।
वास्कोडिगामा का भारत आगमन
इसके पश्चात पुर्तगाली यात्री वास्कोडिगामा ने 8 जुलाई 1497को भारत की अपनी खोज यात्रा आरम्भ की। ये पहले ब्राथलोम्यू डियास द्वारा खोजे गये मार्ग का अनुसरण करते हुए मुजाम्बिक पहुँचा।
मोजाम्बिक में एक भारतीय व्यापारी के साथ 17 मई 1498 को कलीकट पहुँचा ।कलीकट में उस वक्त एक हिंदू राजा थे ‘जमोरिन’ (जमोरिन एक पैतृक उपाधि थी )। इसने वास्कोडिगामा का स्वागत किया और अपने राज्य में रहने व व्यापार करने की अनुमति भी दी।
वास्कोडिगामा ने वहाँ से लाये हुये सामान यहाँ बेचे, जिससे उसको 60 गुना ज्यादा लाभ प्राप्त हुआ।
पुर्तगालियों की पहली कोठी
-भारत में पुर्तगालियों ने अपनी पहली कोठी कोचीन में स्थापित की.
-फारस की खाडी पर अधिकार
- उन्होंने व्यापार की दृष्टि से महत्वपूर्ण फारस की खाडी में स्थित हरमुज पर 1515में अधिकार कर लिया
पुर्तगाली बस्तियों का गवर्नर
-1500 ई. में ब्रेडो अल्बरे कबराल को पुर्तगाली बस्तीयों का गवर्नर बनाया गया
-पुर्तगाली साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक
-1509 ई. में अलफांसो-डी-अलबुकर्क भारत में पुर्तगाली प्रदेशों का गवर्नर बनके आया। इसे भारत में पुर्तगाली साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक भी माना जाता है।
पुर्तगालियों की कोठियाँ
-अलबुकर्क ने 1510 ई. में बीजापुर के सुल्तान यूसुफ आदिल शाह से गोवा छीन लिया और उसे अपनी राजधानी बनाया। धीरे-धीरे पुर्तगालियों ने दीव से लेकर बंगाल में और हुगली तक अपनी कोठीयां स्थापित कर ली।
कोलम्बो तथा मलक्का पर अधिकार
पुर्तगालियों ने 1518 ई. में कोलम्बो तथा मलक्का पर भी अधिकार कर लिया। परंतु डचों के आने के बाद पुर्तगालियों की सत्ता सिर्फ गोवा तक सिमट कर रह गयी।
डचों का शासन 1961 तक रहा।
पुर्तगालियों की भारत को देन
-स्थापत्य कला का पुर्तगालियों के समय में ही प्रचलन में आयी थी।
-पुर्तगालियों ने ही गोवा में 1556 ई. में भारत में प्रथम प्रिंटिंग प्रेस की भी स्थापना की थी।
-तम्बाकू, आलू की खेती और जहाज निर्माण, ये भी भारत को पुर्तगालियों की ही देन है।
अतिरिक्त जानकारी- 👍
-वास्कोडिगामा के नाम पर पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में पुल बनाया गया है जो “यूरोप का सबसे लम्बा पुल” है, जिसकी लम्बाई 17.2 किमी है।
-इस पुल का निर्माण कार्य 1995 में शुरु हुआ था और इसे 1998 में आवागमन के लिये खोल दिया गया।
-इसे ठीक उसी समय खोला गया था जिस समय वास्कोडिगामा के समुद्र मार्ग से भारत की खोज की 500th Anniversary मनायी जा रही थी।
