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भरोसे की नींव अक्सर उस मुकाम पर आकर टूटती है
जब हम यकीन की आखिरी हद पर होते है
#Thakur
शब्दो की परिभाषा ही अब समझ नही आती है मुझे।
आंखो की गुफ्तगू मे दिल अब यकीन नही करता।
#Thakur
कितना कुछ छोड़ दिया जो हासिल ना हो सका
और एक तेरी तमन्ना है जो खत्म नही होती
#Thakur
ना रख इतना गुरूर अपने नशे पर
ऐ शराब!
तुझसे ज्यादा नशा रखती है आंखे किसी की
#thakur
सफर-ए-मोहब्बत अब खत्म ही समझिए
साहब
उनके रवैये से अब जुदाई की महक आने लगी है
#Thakur
