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| 2 | आयुर्वेद एक तरह की प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति है जो गैर एलोपैथिक विधि के माध्यम से रोगों की पहचान,उपचार एवं निदान में प्रभावशाली है। आयुर्वेद का विकास ब्रह्मा जी से राजा दक्ष तदुपरांत अश्विनी कुमारों, ऋषियों से होते हुए वैद्यों तक पहुँचा। धन्वंतरी जी को जहाँ देवताओं का वैद्य कहा जाता है वही चरक आयुर्वेद के जनक के रूप में लोकप्रिय है। सुश्रुत ने शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में कार्य किया इसी कारण वह शल्य चिकित्सा के जनक के तौर पर प्रसिद्ध है।
आयुर्वेद में अश्वगंधा,मुलेठी,तुलसी एवं गिलोय जैसी औषधियों के माध्यम से बीमारी का इलाज किया जाता है। इसमें त्रिदोष, पंचमहाभूत, आयर्वेद के तीन स्तंभों आदि सभी आयामों की विस्तार से चर्चा की गई है।
आयुर्वेद आयुष पद्धति का ही भाग है सर्वप्रथम 2003 में स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत आयुष विभाग का गठन किया गया तत्पश्चात वर्ष 2014 में भारत सरकार द्वारा पृथक रूप से आयुष मंत्रालय बन दिया गया। राष्ट्रीय आयुष मिशन (2014) आयुष मंत्रालय द्वारा ही संचालित है जिसे 2026 तक प्रभावी किया गया है जिससे आयुर्वेद पद्धति का विकास एवं आयुर्वेदिक औषधियों का संरक्षण किया जा सके।
Gaurav Mishra
Educator✍ | 370 |
| 3 | आप सभी को छठ पूजा की हार्दिक बधाई🌸🌸 🎊🙏
लोक आस्था का महापर्व छठ मुख्य रूप से तीन - चार दिनों तक मनाया जाता है, यह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को आरंभ होता है, षष्ठी को छठ पूजा विशेष महत्व रखती है, सप्तमी को उगते सूर्य देव को अर्ध्य देकर समाप्त होता है। पूर्वांचल संस्कृति एवं समाज से, गहरा लगाव होने के कारण यह मेरे दिल के अत्यधिक करीब है। सूर्योपासना का यह अनुपम पर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, पूर्वी उत्तरप्रदेश एवं नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है परंतु अब इसका प्रचलन देश के अन्य हिस्सों के अलावा विश्व भर में हो गया है।
सूर्य को अर्ध्य देना, छठी मईया की पूजा करना, महिलाओं का लगभग 36 घण्टे तक निर्जला व्रत रखना, ठेकुआ (छठ पूजा के लिए विशेष प्रसाद) एवं कचवनिया (चावल के लड्डू)बनाना तथा खरना प्रक्रिया को पूर्ण करना इस पर्व की मुख्य विशेषताएं हैं।
माना जाता है की सर्वप्रथम यह व्रत माता सीता ने किया था तत्पश्चात द्वापर युग में माता कुन्ती ने किया था जिसके बाद सूर्य देव से उन्हें कर्ण की प्राप्ति हुई। यह व्रत कठिन तपस्या की तरह है व्रत रखने वाली महिलाओं को 'परवैतिन' कहा जाता है। यह पर्व सहनशीलता एवं समर्पण का प्रतीक है। जहाँ एक तरफ पुत्र प्राप्ति एवं उसकी कुशलता के लिए यह व्रत किया जाता है, वहीं व्रत की समाप्ति के पश्चात पुत्री के जन्म की कामना की जाती है।पुनः सभी को छठ पूजा की बधाई🙏
Gaurav Mishra
Educator✍️ | 500 |
| 4 | 没有文字... | 474 |
| 5 | 没有文字... | 524 |
| 6 | 没有文字... | 483 |
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| 8 | स्वतंत्रता दिवस पर विशेष 🇮🇳 | 581 |
| 9 | https://youtu.be/Sbx451NRU-k?si=SmZFyGfuYpjqTCfC | 569 |
| 10 | https://youtu.be/M7tSdcvEfdc?si=zD437-x2yodx-74E | 699 |
| 11 | 没有文字... | 546 |
| 12 | 没有文字... | 541 |
| 13 | 没有文字... | 541 |
| 14 | 没有文字... | 772 |
| 15 | दोस्तों नमस्कार,
आज हम संकल्पना एवं विचार के अंतर्गत अहम व्यक्तित्व 'रावण' अर्थात 'दशासन' पर चर्चा करते हैं जो ज्ञानी, पराक्रमी तो था परंतु दुराचारी भी सिद्ध हुआ।
रावण (परिचय):-
रावण का जन्म ऋषि कुल में हुआ था वह ब्रह्मा जी के दसवें पुत्र ऋषि पुलत्स्य का पौत्र एवं ऋषि विश्रवा का पुत्र था जो महाज्ञानी थे। रावण के पिता ने दो विवाह किए थे, पहली पत्नी का नाम वरवणिनी था जिनसे कुबेर का जन्म हुआ तो वहीं दूसरी पत्नी का नाम केकेसी था जिनसे रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण एवं शूर्पनखा का जन्म हुआ।
ज्ञानी रावण:-
रावण वेद ज्ञाता था खासकर सामवेद में वह पारंगत था। इसके अलावा वह वास्तुशास्त्र, ज्योतिष शास्त्र, संगीत शास्त्र तथा आयुर्वेद शास्त्र में भी दक्ष था। उसने 'शिव ताण्डव स्त्रोत' की भी रचना की। उसने नाड़ी परीक्षा इंद्रजाल एवं कुमार तंत्र जैसे ग्रंथ लिखे थे। कहा जाता है कि रुद्र वीणा में रावण को हराना संभव नहीं था।
रावण की मुक्ति:-
तमिल भाषा में महर्षि कम्बन ऋषि की 'रामावतारम' या 'कम्ब रामायण' में उल्लेखित है कि रावण ने राम को विजय श्री का आशीर्वाद दिया था(इस प्रसंग पर कभी विस्तार से चर्चा करूँगा) इस कारण वह युद्ध में पराजित हुआ। वाल्मीकि कृत 'रामायण' एवं गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित 'रामचरितमानस' में उद्धरित प्रसंगों से स्पष्ट होता है वह 'श्री राम' से ही मुक्ति पाना चाहता था।
इस प्रकार कहा जा सकता है कि रावण ज्ञानी या महाज्ञानी था परंतु सीता हरण एवं अहंकार जैसे अवगुणों के कारण दुराचारी हो गया। रावण का इतिहास सामान्य ऐतिहासिक वर्गीकरण में तालमेल नहीं बैठा पाता परंतु ज्ञान परंपरा में उसका अध्यनन आवश्यक है।
रावण से जुड़े हुए अन्य प्रसंग कभी विस्तार से लेकर पुनः आपके समक्ष उपस्थित होऊंगा।
Gaurav Mishra
(GS Faculty)✍ | 522 |
| 16 | https://youtu.be/mvKT8ydfqrg?si=4VzQWM-RqJVcszNS | 599 |
| 17 | 没有文字... | 793 |
| 18 | 没有文字... | 726 |
| 19 | 没有文字... | 818 |
| 20 | दोस्तों नमस्कार🙏
मध्य प्रदेश दर्शन की श्रृंखला में आज हम एक और ऐतिहासिक स्थल लाल-बाग़ महल पर चर्चा करते हैं-
लाल-बाग़ महल:
ब्रिटिश शासन काल के दौरान अपनी प्रतिष्ठा प्रदर्शित करने हेतु बकिंघम पैलेस के अनुरूप इस महल का निर्माण इंदौर में होल्कर वंश के दो राजाओं तुकोजीराव द्वितीय एवं शिवाजीराव होल्कर के समय हुआ। यह महल लगभग 72 एकड़ भू-क्षेत्र में फैला हुआ है 04 एकड़ में महल की मुख्य संरचना है जिसमें लगभग 45 कमरे हैं। 1877 से 1884 के मध्य में लगभग इसका निर्माण हुआ, इसे बनाने में 36 लाख रुपये खर्च हुए थे।
1926 में राजगद्दी त्यागने के पश्चात तुकोजीराव तृतीय आजीवन लालबाग में ही रहे। 1987 तक लालबाग राजकुमारी उषा ट्रस्ट के स्वामित्व में रहा परंतु 1988 में 14 नवंबर को मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह जी ने नेहरू केंद्र के रूप में इसका उद्घाटन किया। इस प्रकार लालबाग पैलेस सांस्कृतिक समन्वय, भव्यता, कलात्मक सुंदरता का जीवंत उदाहरण है। लाल गुलाबों के कारण यह महल लालबाग कहलाया।
Gaurav Mishra
(GS Faculty)✍ | 900 |
