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राष्ट्रीय एआई पोर्टल और 'रिस्पॉन्सिबल एआई फॉर यूथ' कार्यक्रम चर्चा में क्यों? हाल ही में श्री रविशंकर प्रसाद ने भारत के राष्ट्रीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पोर्टल और 'रिस्पॉन्सिबल एआई फॉर यूथ' कार्यक्रम का शुभारंभ किया। क्या होता है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-AI? साधारण शब्दों में AI का मतलब है इंसान की सोचने, समझने एवं भावनाओं को मशीनों के अंदर डाल देना। दूसरे शब्दों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक है जिसके तहत मशीनों को इंसानों की तरह सोचने, निर्णय लेने, समस्या समाधान और सीखने की क्षमता का विकास करना है। क्या है राष्ट्रीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पोर्टल? इस पोर्टल को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय (MeitY) और आईटी उद्योग द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है। MeitYका राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन और आईटी उद्योग का नैसकॉम संयुक्त रूप से मिलकर इस पोर्टल को चलाएगा। यह पोर्टल भारत में एआई से संबंधित विकास के लिए एक स्टॉप डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में काम करेगा। भारत में एआई से संबंधित लेखों, स्टार्ट-अप, एआई में निवेश फंडों, संसाधनों, कंपनियों और शैक्षिक संस्थानों जैसे संसाधनों को साझा करेगा। इसके द्वारा पोर्टल पर दस्तावेजों, केस स्टडी, अनुसंधान रिपोर्ट आदि को भी साझा किया जाएगा। इसमें एआई से संबंधित शिक्षा और नई नौकरी की भूमिकाओं के बारे में एक संभाग भी होगा। क्या है'रिस्पॉन्सिबल एआई फॉर यूथ'? इस कार्यक्रम का उद्देश्य, देश के युवा छात्रों को एक मंच प्रदान करना और उन्हें नए युग के तकनीकी मांइड-सेट, प्रासंगिक एआई कौशल-सेट और आवश्यक एआई टूल-सेट तक पहुंच प्रदान करने के साथ-साथ सशक्त बनाना है जिससे उन्हें भविष्य के लिए डिजिटल रूप से तैयार किया जा सके। इस कार्यक्रम को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन,MeitYद्वारा इंटेल इंडिया के सहयोग से, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (डीओएसईएंडएल), मानव संसाधन विकास मंत्रालय के समर्थन से शुरू किया गया है। डीओएसईएंडएल राज्य शिक्षा विभागों को पात्रता मानदंडों के अनुसार शिक्षकों को मनोनीत करने में मदद करेगा। 'रिस्पॉन्सिबल एआई फॉर यूथ', युवाओं को एआई के लिए तैयार होने और उनके कौशल-गैप को कम करने में मदद करके युवाओं को सशक्त बनाएगा, जबकि युवाओं को सार्थक रूप से प्रभावी सामाजिक समाधान बनने के लिए सक्षम बनाएगा। यह कार्यक्रम सरकारी स्कूलों के छात्रों को पूरे देश तक पहुंच बनाने और उन्हें समावेशी रूप से कुशल कार्यबल का हिस्सा बनने का अवसर प्रदान करने के लिए बनाया गया है

विश्व दुग्ध दिवस प्रत्येक वर्ष 1 जून को वैश्विक खाद्य पदार्थ के रूप में दूध के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है। यह दिन डेयरी सेक्टर से जुड़े गतिविधियों पर ध्यान देने का अवसर प्रदान करता है। इस दिवस की अपनी कोई वैश्विक थीम नहीं होती है बल्कि विभिन्न देशों की सरकार, गैर सरकारी संस्थाएं और इसकी अलग अलग थीम तय करते हैं। दूध में कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन B2, पोटैशियम, आयोडीन आदि पाए जाते हैं। खाद्य व कृषि संगठन (FAO) यह एक संयुक्त राष्ट्र की संस्था है, यह संयुक्त राष्ट्र आर्थिक व सामजिक परिषद् के अधीन कार्य करती है। इसकी स्थापना 16 अक्टूबर, 1945 को की गयी थी। इसका मुख्यालय इटली के रोम में स्थित है। वर्तमान में इसके कुल 194 सदस्य हैं।

केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन के तहत बिहार को 1,832 करोड़ रुपये और असम को 1,407 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। असम असम में, जल जीवन मिशन का लक्ष्य 2020-21 तक 13 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन प्रदान करना है। राज्य का उद्देश्य कमजोर और हाशिए पर पड़े वर्गों को प्राथमिकता के आधार पर रखना है। ग्रामीण समुदाय की सक्रिय भागीदारी के साथ ग्राम कार्य योजनाएं बनाई गई हैं। इस मिशन के तहत, राज्य घरों में लौटने वाले प्रवासी श्रमिकों को रोजगार प्रदान करने के लिए भी प्रयास करेगा। यह मिशन फिटिंग, प्लंबिंग और जल संरक्षण जैसे कार्य प्रदान करेगा। बिहार आवंटित धन की मदद से, बिहार सरकार 50 लाख से अधिक घरों में नल कनेक्शन प्रदान करेगी। सरकार आकांक्षी जिलों और एससी और एसटी गांवों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। जल जीवन मिशन इस मिशन का लक्ष्य 2024 तक देश के सभी घरों में अच्छी गुणवत्ता का पेयजल उपलब्ध कराना है। इसे प्राप्त करने के लिए, भारत सरकार ने 3.6 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।

THAAD का पूर्व स्वरुप Terminal High Altitude Area Defense है। यह एक परिवहन योग्य और जमीन पर आधारित मिसाइल रक्षा प्रणाली है। मुख्य बिंदु चीन का मानना ​​है कि दक्षिण कोरिया और जापान पर अमेरिका अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। यह क्षेत्र में चीन के दीर्घकालिक राजनयिक, सैन्य और आर्थिक हितों को बाधित कर सकता है। चीन दक्षिण कोरिया में अमेरिकी THAAD मिसाइल रक्षा प्रणाली की उपस्थिति के बारे में लंबे समय से अपनी आपत्तियों को दोहरा रहा है। दक्षिण कोरिया-चीन अमेरिका ने घोषणा की कि दक्षिण कोरिया में संचालित THAAD मिसाइल प्रणाली उत्तर कोरिया के हमलों के खिलाफ एक प्रतिरोधी उपाय है। 2017 में इस क्षेत्र में तनाव बढ़ गया था जब उत्तर कोरिया ने जापान में अमेरिकी ठिकानों की दिशा में अपनी मिसाइलों का परीक्षण किया। THAAD THAAD एक बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली है। यह खाड़ी युद्ध 1991 में अमेरिका के अनुभवों के बाद विकसित किया गया था। THAAD को इजरायल, यूएई, रोमानिया और दक्षिण कोरिया में तैनात किया गया है। THAAD मिसाइलों को नष्ट करने में सक्षम है। इसमें काइनेटिक किल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है।

अंतरिक्ष यात्रियों ने हाल ही में एक दुर्लभ अंतरिक्ष पिंड की खोज की है। यह ऑब्जेक्ट क्षुद्रग्रह और धूमकेतु दोनों की तरह दिखता है। इस नए अंतरिक्ष पिंड को सक्रिय क्षुद्रग्रह कहा जाता है मुख्य बिंदु इस क्षुद्रग्रह को 2019 LD2 नाम दिया गया है। इसमें एक क्षुद्रग्रह की तरह एक कक्षा और धूमकेतु की तरह एक पूंछ है। 2019 LD2 बृहस्पति की कक्षा को साझा करता है और बृहस्पति ट्रोजन नामक क्षुद्रग्रह झुंड का एक हिस्सा है। यह ऐसा पहला अंतरिक्ष पिंड है जो एक धूमकेतु की तरह गैस का उत्सर्जन करता है। इस क्षुद्रग्रह की खोज Asteroid Terrestrial-impact Last Alert System (ATLAS) द्वारा की गई थी। निष्कर्ष इस खोज स्पष्ट होता है कि बृहस्पति ट्रोजन की सतह के नीचे बड़ी मात्रा में बर्फ है। अब तक, उनकी सतह के नीचे बर्फ की उपस्थिति के बारे में कोई सबूत नहीं था। सक्रिय क्षुद्रग्रह सक्रिय क्षुद्रग्रह एक प्रकार खगोलीय पिंड हैं जो धूमकेतु की तरह दिखता हैं। पहले सक्रिय क्षुद्रग्रह की खोज एल्स्ट पिजारो ने की थी।

1 जून, 2020 को प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्र ने वित्तीय वर्ष 2020-21 के पहले दो महीनों में 100.40 करोड़ रुपये तक की बिक्री हासिल की। यह बिक्री वर्ष 2019-20 में इन दो महीनों की बिक्री की तुलना में अधिक है। मुख्य बिंदु प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्र ने वित्तीय वर्ष 2020-21 के दो महीनों में दवाओं की बिक्री के माध्यम से 800 करोड़ रुपये की बचत की है। ब्यूरो ऑफ फार्मा पीएसयू ऑफ इंडिया (BPPI) की सफलता के लिए जिम्मेदार हैं। यह BPPI है जो प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र के नेटवर्क के माध्यम से प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि योजना को लागू करता है। BPPI की भूमिका वर्तमान में BPPI COVID-19 के खिलाफ लड़ने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है। यह उन दवाओं का पर्याप्त भंडार बनाए हुए है जो हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वाइन, एज़िथ्रोमाइसिन और पेरासिटामोल जैसी बड़ी मांग के अधीन हैं। इसमें हैंड सैनिटाइज़र और फेस मास्क के पर्याप्त स्टॉक हैं।

वन नेशन, वन कार्ड योजना में तीन और राज्य शामिल किए गए खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री ने सभी 20 राज्यों को वन नेशन वन कार्ड योजना के तहत प्रवासियों को लाभ पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय / अंतर-राज्यीय पोर्टेबिलिटी सुविधा शुरु करने को कहा प्रवासी इन 20 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में कहीं भी राशन ले सकते हैं: श्री राम विलास पासवान केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री राम विलास पासवान ने आज 'एकीकृत सार्वजनिक वितरण प्रणाली' (आईएम-पीडीएस) की योजना में तीन और राज्यों - ओडिशा, सिक्किम और मिजोरम को शामिल करने की घोषणा की। “वन नेशन वन राशन कार्ड” योजना राष्ट्रव्यापी पोर्टेबिलिटी के माध्यम से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के पात्र राशन कार्ड धारकों को किसी भी सार्वजनिक वितरण केन्द्र से सब्सिडी वाले खाद्यान्न अपने कोटे के हिसाब से प्राप्त करने के लिए लागू की गई है। लाभार्थी इन केन्द्रों पर इलेक्ट्रानिक प्वाइंट आफ सेल (ईपीओएस) पर आधार प्रमाणीकरण के बाद अपने मौजूदा राशन कार्ड का उपयोग कर इस सुविधा का लाभ ले सकते हैं। अब तक यह सुविधा आंध्र प्रदेश, बिहार, दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, केरल, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, पंजाब, तेलंगाना, त्रिपुरा और उत्तर प्रदेश,महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे 17 राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों में उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा, खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग अन्य राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों के लाभार्थियों के लिए भी राष्ट्रीय पोर्टेबिलिटी की पहुंच का विस्तार करने के लिए संबंधित राज्य / केन्द्र शासित प्रदेशों की सरकारों के साथ सहयोग करने का प्रयास कर रहा है। इस प्रयास में तीन नए राज्यों को राष्ट्रीय क्लस्टर के साथ एकीकृत करने के लिए आवश्यक प्रारंभिक गतिविधियाँ जैसे इपीओएस सॉफ़्टवेयर का उन्नयन, केंद्रीय आईएम .पीडीएस और अन्नवितरण पोर्टलों के साथ एकीकरण, केंद्रीय भंडार में राशन कार्ड / लाभार्थियों के डेटा की उपलब्धता और राष्ट्रीय पोर्टेबिलिटी के तहत लेनदेन के आवश्यक परीक्षण को भी केंद्रीय एनआईसी टीम के समर्थन से पूरा किया गया है। ये सभी इंतजाम पूरा करने के बाद इन राज्यों में ‘वन नेशन वन राशन कार्ड ’योजना के तहत राष्ट्रीय / अंतर-राज्यीय पोर्टेबिलिटी के तहत राशन की दुकानों से जून 2020 से अनाज मिलना शुरु हो गया है। अगस्त 2020 तक तीन और राज्य अर्थात् उत्तराखंड, नागालैंड और मणिपुर भी इस सुविधा से जुड़ जाएंगे। शेष 13 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों , पश्चिम बंगाल, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, दिल्ली, जम्मू कश्मीर, लद्दाख, चंडीगढ़, पुदुचेरी, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, अंडमान और निकोबार और लक्षद्वीप द्वीप को राष्ट्रीय क्लस्टर में शामिल करने के लिए विभाग सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ कर रहा है। यह तय है कि 31 मार्च 2021 तक सभी राज्यों को वन नेशन वन राशन कार्ड योजना के साथ जोड़ दिया जाएगा और यह योजना पूरे भारत में लागू हो जाएगी। श्री पासवान ने कहा कि योजना को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए केंद्रीय तकनीकी टीम ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबधित राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों के तकनीकी और संबंधित अधिकारियों को अपेक्षित प्रशिक्षण प्रदान किया है और योजना से संबधित आवश्यक दिशानिर्देश / निर्देश भी जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 6 महीनों के दौरान जिन एनएफएसए राशन कार्डों में एक आधार प्रमाणित लेन-देन दर्ज किया गया है, वे राष्ट्रीय पोर्टेबिलिटी योजना की सुविधा के लिए पात्र होंगे। इस सुविधा को एनआईसी द्वारा राशन कार्ड लाभार्थियों की बनाई गई रिपॉजिटरी के माध्यम से सक्षम बनाया गया है। इसके अलावा, केंद्रीय डैशबोर्ड पर पोर्टेबिलिटी लेन-देन के विवरण की रिपोर्टिंग के लिए आवश्यक वेब-सेवाएं भी इन राज्यों के लिए तत्काल प्रभाव से सक्षम बनाई गई हैं और केंद्रीय एनआईसी टीम राज्य सरकारों को 'वन नेशन वन राशन कार्ड' के निर्बाध रोलआउट में लगातार मदद करती रहेंगी। श्री पासवान ने इन सभी राज्यों से जून 2020 से राष्ट्रीय / अंतर-राज्यीय पोर्टेबिलिटी सेवा आरंभ कर देने का अनुरोध किया। यह सुविधा राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों के राष्ट्रीय क्लस्टर में कहीं भी इन राज्यों के लाभार्थियों को तत्काल प्रभाव से राष्ट्रीय पोर्टेबिलिटी के माध्यम से खाद्यान्न का कोटा प्राप्त करने में सक्षम बनाएगी। उन्होंने कहा कि इस संबंध में, एनएफएसए लाभार्थियों और एफपीएस डीलरों को सभी तरह की आवश्यक जानकारियां उपलब्ध कराने के प्रयास और गतिविधियां प्राथमिकता के आधार पर की जाएंगी।

ईपीएफओ पेंशनभोगियों को बढ़ी हुई पेंशन मिलेगी ईपीएफओ द्वारा पेंशन के परिवर्तित मूल्य की बहाली के लिए, पेंशन की मद में 868 करोड़ रुपये और साथ में 105 करोड़ रुपये बकाया जारी किए गए हैं। केंद्रीय न्यासी बोर्ड (ईपीएफओ) की सिफारिश के आधार पर, भारत सरकार ने श्रमिकों द्वारा लंबे समय से की जा रही मांगों में से एक को स्वीकार कर लिया है, जिससे उन्हें 15 वर्ष के बाद पेंशन के परिवर्तित मूल्य को बहाल करने की अनुमति प्रदान की जा सके। इससे पहले, परिवर्तित पेंशन को बहाल करने का कोई प्रावधान नहीं था और पेंशनभोगियों को आजीवन कम पेंशन मिल रही थी। ईपीएस-95 के अंतर्गत, पेंशनरों के हितों को ध्यान में रखते हुए यह एक ऐतिहासिक कदम है। ईपीएफओ के पास 135 क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से 65 लाख से ज्यादा पेंशनभोगी हैं। ईपीएफओ के अधिकारियों और कर्मचारियों ने इस कोविड-19 लॉकडाउन की अवधि के दौरान, सभी बाधाओं को पार किया और मई, 2020 के लिए पेंशन भुगतान की राशि में परिवर्तन करवाया, जिससे पेंशनभोगियों के बैंक खाते में समय पर उनके पेंशन का भुगतान सुनिश्चित किया जा सके।

आर. के. चतुर्वेदी ने रसायन और पेट्रो रसायन विभाग के सचिव का पदभार संभाला मध्य प्रदेश कैडर के 1987 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी श्री आर. के. चतुर्वेदी ने रसायन और उर्वरक मंत्रालय, के रसायन और पेट्रो रसायन विभाग के सचिव के रूप में पदभार संभाल लिया है। सचिव के पद पर नियुक्त किए जाने से पहले श्री चतुर्वेदी संस्कृति मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव और वित्तीय सलाहकार के रूप में सेवारत थे। वे केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष और राष्ट्रीय कौशल विकास प्राधिकरण में महानिदेशक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। श्री चतुर्वेदी ने श्री पी राघवेंद्र राव का स्थान लिया है, जो 31 मई, 2020 को सेवानिवृत हुए

सरकार ने कृषि और उससे संबधित गतिविधियों के लिए बैंक से लिए अल्‍पकालिक कर्ज को चुकाने की समय सीमा 31 अगस्त 2020 तक बढ़ाई प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने कृषि और उससे संबंधित गतिविधियों के लिए बैंक से तीन लाख रूपए तक की अल्‍पकालिक ऋणों को चुकाए जाने की समय सीमा बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। यह रियायत 1 मार्च 2020 से 31 अगस्त 2020 के बीच चुकाए जाने वाले ऋणों के लिए दी गई है। ये ऋण अब 31 अगस्त 2020 तक चुकाए जा सकते हैं। कर्ज चुकाने की समय अवधि बढ़ाए जाने के बावजूद इन ऋणों पर बैंको को मिलने वाली वाली 2 प्रतिशत की ब्याज छूट तथा किसानों को समय रहते ऋण चुकाने पर मिलने वाली तीन प्रतिशत की छूट सुविधा यथावत जारी रहेगी। लाभ: बैंकों द्वारा कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए दिए गए 3 लाख रुपये तक के मानक अल्‍पकालिक ऋणों, जो 1 मार्च 2020 और 31 अगस्त 2020 के बीच देय हैं, के पुनर्भुगतान की तारीख को 31 अगस्त 2020 तक बढ़ा देने से किसानों को 4 प्रतिशत की सालाना ब्याज दर से बिना किसी जुर्माने के इस तरह के कर्ज को 31 अगस्त 2020 तक की बढ़ी हुई अवधि तक चुकाने या नवीकरण कराने में मदद मिलेगी। इसके तहत बैंकों के लिए 2 प्रतिशत ब्‍याज सब्सिडी (आईएस) और किसानों के लिए 3 प्रतिशत पीआरआई का निरंतर लाभ मिलता रहेगा। यही नहीं, इससे किसानों को कोविड-19 महामारी के मौजूदा समय में इस सुविधा का लाभ लेने के लिए बार-बार बैंक जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पृष्ठभूमि: सरकार बैंकों के माध्यम से किसानों को अल्‍पकालिक कृषि ऋण उपलब्ध कराती है। इन ऋणों पर बैंकों को 2 प्रतिशत की ब्याज छूट दी जाती है। समय रहते ऋण चुकाने पर किसानों को 3 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट मिलती है। ​इस प्रकार से किसानों को तीन लाख तक का कर्ज समय रहते चुकाने पर सालाना चार प्रतिशत की ब्याज दर पर ऋण की सुविधा मिलती है। कोविड-19 के कारण हुए लॉकडाउन की वजह से लोगों की आवाजाही पर कई तरह की पाबंदिया लगाई गई हैं जिसकी वजह से अल्‍पकालिक ऋण चुकाने के लिए कई किसान बैंक तक नहीं जा पा रहे हैं। इसके अतिरिक्त समय पर उत्पादों की बिक्री नहीं हो पाने, ​बिक्री के भुगतान की रसीद नहीं मिल पाने तथा सामाजिक दूरी के नियमों का कड़ाई से पालन किए जाने की वजह से किसानों के लिए बैंक में जमा की जाने वाली ऋण की रकम जुटाने में दिक्कत आ रही है।

प्रधान मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने हाल ही में 50 से अधिक विभिन्न संबद्ध और हेल्थकेयर पेशेवरों की शिक्षा के विस्तार के लिए एक नया कानून लाने की मंजूरी दी है, जो देश में पैरा-मेडिकल कर्मियों की कमी को दूर करेगा। उन्होंने एकत्र लोगों से आग्रह किया कि वे तीन मुद्दों पर विचार करें और संकल्‍प करें कि टेली-मेडिसिन में प्रगति कैसे की जा सकती है; मेक इन इंडिया ’के माध्यम से स्वास्थ्य क्षेत्र में कैसे लाभ कमाया जाए और कैसे आईटी से संबंधित सेवाओं को स्वास्थ्य देखभाल में लाया जाए। उन्‍होंने मेक इन इंडिया के क्षेत्र में शुरूआती लाभ की सराहना करते हुए कहा कि किस प्रकार घरेलू निर्माताओं ने पीपीई और एन -95 मास्क का उत्पादन शुरू किया और पहले ही 1 करोड़ पीपीई और 1.5 करोड़ से अधिक मास्क की आपूर्ति कर चुके हैं । प्रधान मंत्री ने कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में आरोग्यसेतु ऐप कैसे मदद कर रहा है, इसकी भी सराहना की।

प्रधानमंत्री ने राजीव गांधी स्‍वास्‍थ्‍य विज्ञान विश्‍वविद्यालय के 25वें स्थापना दिवस को संबोधित किया कोविड-19 से अडिग होकर मुकाबला करने के लिए डॉक्‍टरों और स्‍वास्‍थ्‍य देखरेख कर्मियों की सराहना की यह अदृश्‍य और अजेय के बीच जंग है और हमारे चिकित्‍सा कर्मी अवश्‍य जीतेंगे-प्रधानमंत्री देश में चिकित्‍सा देखभाल को बढ़ावा देने के लिए समन्वित, विस्‍तृत दृष्टिकोण की घोषणा की स्वास्थ्य क्षेत्र और आईटी आधारित स्वास्थ्य सेवाओं में टेली-मेडिसिन, मेक इन इंडिया में सुधार के तरीकों की तलाश प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज बेंगलुरु में राजीव गांधी स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के 25 वें स्थापना दिवस को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने कोविड-19 की स्थिति को संभालने में कर्नाटक सरकार के प्रयासों की सराहना की। श्री मोदी ने कहा कि दुनिया दो विश्व युद्धों के बाद एक सबसे बड़े संकट का सामना कर रही है। उन्होंने कहा, जिस तरह दुनिया में विश्‍व युद्ध से पहले और विश्‍व युद्ध के बाद बदलाव आया, उसी तरह से कोविड से पूर्व और इसके बाद की दुनिया अलग होगी । श्री मोदी ने कहा कि कोविड -19 के खिलाफ भारत की साहसपूर्ण लड़ाई की जड़ में हमारा चिकित्सा समुदाय और हमारे कोरोना योद्धाओं की कड़ी मेहनत है। उन्होंने डॉक्टरों और चिकित्साकर्मियों को सैनिकों की उपमा दी जो बिना वर्दी के सैनिक हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि वायरस अदृश्य शत्रु हो सकता है लेकिन हमारे कोरोना योद्धा अजेय हैं और अदृश्य बनाम अजेय के खिलाफ लड़ाई में हमारे चिकित्‍सा कार्यकर्ताओं की जीत सुनिश्चित हैं। प्रधानमंत्री ने अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं के खिलाफ भीड़ की मानसिकता के कारण होने वाली हिंसक घटनाओं पर चिंता व्यक्त की और कहा कि सरकार ने इन्हें रोकने के लिए अनेक कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने अग्रिम पंक्ति के उन लोगों को 50 लाख रुपये का बीमा कवर भी प्रदान किया। प्रधानमंत्री ने वैश्वीकरण के युग में आर्थिक मुद्दों पर बहस के बजाय विकास के मानव केंद्रित पहलुओं पर ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, स्वास्थ्य क्षेत्र में जो राष्‍ट्र उन्नति करते है उसके पहले से कहीं अधिक मायने होंगे और सरकार ने पिछले 6 वर्षों में स्वास्थ्य-देखभाल और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अनेक पहल की है। प्रधान मंत्री ने स्वास्थ्य देखभाल, बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए समन्वित, विस्‍तृत दृष्टिकोण अपनाने और सभी लोगों तक इसकी पहुंच वाली रणनीति अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पहला स्तंभ रोग निरोधी स्वास्थ्य सेवा होगा जिसमें योग, आयुर्वेद और सामान्य स्वास्थ्य के महत्व पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि 40,000 से अधिक तंदुरूस्‍ती केन्‍द्र जीवन शैली से संबंधित बीमारियों को नियंत्रित करने की दृष्टि से खोले गए थे। स्वच्छ भारत मिशन की सफलता रोग निरोधी स्वास्थ्य सेवा का एक और महत्वपूर्ण क्षेत्र है। दूसरा स्तंभ है – किफायती स्‍वास्‍थ्‍य सेवा। प्रधान मंत्री ने दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य सेवा योजना- आयुष्मान भारत की सफलता पर प्रकाश डाला और बताया कि किस प्रकार दो साल से कम समय में, एक करोड़ लोगों ने इसका लाभ उठाया है, विशेष रूप से महिलाओं और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों ने। तीसरा स्तंभ है- आपूर्ति पक्ष में सुधार। प्रधान मंत्री ने कहा कि भारत जैसे देश के पास उचित चिकित्सा बुनियादी ढांचा और चिकित्सा शिक्षा बुनियादी ढांचा होना चाहिए। उन्होंने कहा, देश के हर जिले में मेडिकल कॉलेज या पोस्ट-ग्रेजुएट मेडिकल संस्थान सुनिश्चित करने के लिए काम चल रहा है। प्रधान मंत्री ने इस तथ्य को रेखांकित किया कि देश ने 22 और एम्स स्थापित करने में तेजी से प्रगति देखी है। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में, हम एमबीबीएस में 15,000 सीटें और पोस्ट-ग्रेजुएशन में 30,000 से अधिक सीटें जोड़ने में सक्षम हुए हैं। आजादी के बाद से किसी भी सरकार के पांच साल के कार्यकाल में यह सबसे बड़ी वृद्धि है। प्रधान मंत्री ने संसद में एक अधिनियम के जरिये द मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को बदलने के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की स्थापना की भी बात की। चौथा स्तंभ, उन्होंने कहा कि सभी योजनाओं का मिशन मोड कार्यान्वयन होगा और यह एक अच्छे विचार की सफलता के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने उद्धृत किया कि राष्ट्रीय पोषण मिशन के कार्यान्वयन से युवाओं और माताओं की मदद हो रही है और किस प्रकार भारत 2025 तक तपेदिक (टीबी) को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो 2030 के वैश्विक लक्ष्य से 5 साल पहले है। उन्होंने मिशन इन्द्रधनुष की भी चर्चा की, जहाँ टीकाकरण कवरेज में चार गुना वार्षिक वृद्धि हुई है।

चैंपियन्स’ से बनेगा एम.एस.एम.ई सेक्टर चैंपियन! प्रधानमंत्री ने किया लॉन्च देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लॉकडाउन के दौरान आपदा को अवसर बनाने की बात यूं ही नहीं की है। उनकी सरकार में इस आपदा को अवसर बनाकर देश के आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी शुरु की जा चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी दिशा में एक और महत्वपूर्ण यात्रा की शुरुआत की है। उन्होंने चैंपियन्स यानी क्रिएशन एंड हार्मोनियस एप्लीकेशन ऑफ मार्डन प्रोसेसेज फॉर इंक्रीजिंग द आउटपुट एंड नेशनल स्ट्रेंथ नाम के पोर्टल को लॉन्च किया। इस मौके पर उनके साथ भूतल परिवहन और एमएसएमई मंत्री नितिन गडकरी भी मौजूद रहे। ये पोर्टल अपने नाम की तरह ही एमएसएमई की छोटी-छोटी इकाइयों की हर तरह से मदद कर उन्हें चैंपियन बनाएगा। चैंम्पियन्स पोर्टल को एमएसएमई का इन छोटी इकाइयों के लिए वन स्टॉप साल्यूशन माना जा रहा है। चैंपियन्स को यूं ही ये मुकाम हासिल नहीं हुआ है। चैंपियन्स देश का पहला ऐसा पोर्टल है जिसे भारत सरकार की मुख्य केन्द्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली यानी सीपी ग्राम्स से जोड़ा गया है। यानी अगर किसी ने सीपीग्राम्स पर शिकायत कर दी तो ये सीधे चैंपियन्स पोर्टल पर आ जाएगी। पहले ये शिकायत मंत्रालयों को भेजी जाती थी जिसे मंत्रालय के सिस्टम पर कापी किया जाता था। इससे शिकायतों को निपटाने की व्यवस्था तेज होगी। इसके साथ ही चैंपियन्स पोर्टल आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स और मशीन लर्निंग से लैस किया गया है। इससे कारोबारियों की शिकायत के बिना भी उनकी समस्या निपटाई जा सकेगी। उदाहरण के लिए अगर कोई एक बैंक कारोबारियों के लोन आवेदन को बार-बार रद कर रहा है या किसी एक क्षेत्र में एक ही तरह की समस्या ज्यादा हो रही है तो आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस से ये समस्या चैंपियन्स पोर्टल पर दिखने लगेगी जिसे अधिकारी निपटा सकते हैं। ये पोर्टल टेक्नोलॉजी पर आधारित मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम है। साथ ही ये पोर्टल सेक्टर की प्रशासनिक बाधाओं को दूर कर हर चुनौती को अवसर में बदलने का जरिया बन सकता है। आपदा को अवसर बनाने का सबसे पहला उदाहरण इस पोर्टल का कंट्रोल रूम है। ये कंट्रोल रूम कार्यालय के एक ऐसे कमरे में बनाया गया है जो पहले गोदाम था। दो दिन से कम समय गोदाम की में कायापलट कर उसे कंट्रोल रुम में बदल दिया। इसके लिए मंत्रालय के कर्मचारियों, आई टी टीम और मजदूरों ने लगातार 38 घंटे तक लगातार काम किया यानी जिस कमरे में अब तक कार्यालय का कोई कर्मचारी झांकने तक नहीं जाता था वहीं से अब देश भर की एमएसएमई यूनिट्स की समस्या का समाधान होगा। इस प्रणाली को 9 दिन में बनाकर इसका ट्रायल शुरु भी कर दिया गया है। चैंपियन्स पोर्टल के जरिए सेक्टर की कई तरह की समस्याओं की शिकायतों का निवारण किया जाएगा। कोरोना के दौरान पूंजी की कमी, श्रमशक्ति की किल्लत, जरुरी अनुमतियों जैसी समस्या निपटाई जा सकेगी। इसके साथ ही नए अवसर जैसे पीपीई किट बनाना, मास्क बनाना और राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उसे सप्लाई करने में मदद की जाएगी। इसके साथ ही ये पोर्टल उन यूनिट्स की पहचान कर उनकी मदद करेगा जो आज जैसी विषम परिस्थितियों से निकल कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चैंपियन बन सके। पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से बने चैंपियंस पोर्टल के कंट्रोल रूम का एक नेटवर्क हब एंड स्पोक मॉडल में बनाया गया है।यह हब नई दिल्ली में एमएसएमई सचिव के कार्यालय में स्थित है और राज्यों में मंत्रालय के विभिन्न कार्यालयों को इससे जोडा गया है। अब तक 66 राज्यों में स्थानीय स्तर के नियंत्रण कक्ष बनाए जा चुके हैं जिन्हें इस पोर्टल के सिस्टम से जोड़ दिया गया है। किसी भी सिस्टम की कामयाबी उसके चलाने वालों की नीयत पर बहुत हद तक निर्भर करती है। ऐसे में इस पोर्टल के लॉन्च होने के साथ ही सभी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि कोई भी फाइल 72 घंटे से ज्यादा समय तक उनके पास ना रहे। उन्हें जो भी फैसला लेना है वो फैसला लें पर ये फाइल 3 दिन से ज्यादा अटकी नहीं रहनी चाहिए। गांधी जी मानते थे कि भारत का विकास उनके गांव की स्थिति तय करेंगे। वो विकेंद्रीकरण और क्षेत्रीय आत्मनिर्भरता से जोड़ने के हामी थे जिसके लिए एमएसएमई सेक्टर एक महत्वपूर्ण कड़ी है। चैंपियन्स पोर्टल अगर इस सेक्टर को चैंपियन बना सका तो ये कई विभागों, मंत्रालयों के लिए नज़ीर बन सकता है।

प्रधानमंत्री ने स्पिक मैके अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित किया प्रधानमंत्री ने कहा कि जब 130 करोड़ लोग एक साथ आ जाते हैं तो संगीत बन जाता है प्रधानमंत्री ने कहा, संगीत देश की सामूहिक ताकत का स्रोत बन चुका है प्रधानमंत्री, श्री नरेन्द्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से स्पिक मैके के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने इस वास्तविकता की सराहना की कि इतनी कष्टकारी परिस्थितियों में, संगीतकारों का मिजाज़ नहीं बदला और सम्मेलन की विषय वस्तु इस बात पर केन्द्रित है कि कोविड-19 महामारी के कारण युवाओं के बीच उत्पन्न तनाव को कैसे कम किया जा सकता है। उन्होंने याद किया कि युद्ध और संकट के समय ऐतिहासिक दृष्टि से किस प्रकार संगीत ने प्रेरणा प्रदान करने और लोगों को आपस में जोड़ने की भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि कवियों, गायकों और कलाकारों ने हमेशा ऐसे समय में लोगों की बहादुरी को बाहर लाने के लिए गीत और संगीत की रचना की। प्रधानमंत्री ने कहा कि अब भी, ऐसे कष्टकारी समय में जब दुनिया एक अदृश्य शत्रु से लड़ रही है, गायक, गीतकार, और कलाकार पंक्तियों की रचना कर रहे हैं और गाने गा रहे हैं जिससे लोगों का आत्मविश्वास बढ़ेगा। प्रधानमंत्री ने याद किया कि किस प्रकार इस देश के 130 करोड़ लोग महामारी से मुकाबला करने के लिए पूरे देश में जोश भरने के लिए ताली बजाने, घंटियां और शंख बजाने के लिए एकजुट हो गए। उन्होंने कहा कि जब समान सोच और भावना के साथ 130 करोड़ लोग एकजुट हो जाते हैं तो यह संगीत बन जाता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार संगीत में सामंजस्य और अनुशासन की जरूरत होती है, वैसे ही कोरोना से लड़ाई में हर नागरिक में सामंजस्य, संयम और अनुशासन की जरूरत है। उन्होंने इस साल स्पिक मैके सम्मेलन में योग और नाद योग के अलावा नेचर वॉक, हेरिटेज वाक, साहित्य और समग्र भोजन (होलिस्टिक फूड) जैसे तत्वों को शामिल किए जाने की सराहना की। नाद योग का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में नाद को संगीत की बुनियाद और आत्म ऊर्जा के आधार के रूप में देखा जाता है। उन्होंने कहा कि जब हम योग और संगीत के माध्यम से अपनी आंतरिक ऊर्जा का नियंत्रित करते हैं तो यह नाद अपने स्वरोत्कर्ष या ब्रह्मनाद की स्थिति में पहुंच जाती है। प्रधानमंत्री ने कहा, यही वजह कि संगीत और योग दोनों में ध्यान और प्रेरणा देने की शक्ति है, दोनों ही ऊर्जा के बड़े स्रोत हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि संगीत न सिर्फ आनंद का स्रोत है, बल्कि वह सेवा का एक माध्यम और तपस्या का एक रूप है। उन्होंने कहा कि हमारे देश में कई महान संगीतज्ञ रहे हैं, जिन्होंने अपना पूरा जीवन मानवता की सेवा में बिता दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि तकनीक के साथ प्राचीन कला और संगीत का सम्मिश्रण भी समय की मांग है। राज्यों और भाषाओं की सीमाएं से ऊपर आज संगीत ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के आदर्श को भी मजबूत बना रहा है, जैसा पहले कभी नहीं हुआ। प्रधानमंत्री ने इस तथ्य की सराहना की कि लोग अपनी रचनात्मकता के माध्यम से सोशल मीडिया पर नए संदेश दे रहे हैं, साथ ही कोरोना के खिलाफ देश के अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने उम्मीद जाहिर की कि यह सम्मेलन कोरोना वायरस के खिलाफ हमारी लड़ाई को नई दिशा भी देगा।