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📗 सामान्य ज्ञान दर्पण 2020
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✅ हिन्दी माध्यम || 60 MB
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📚 मई 2020 || HD Print
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📮 By : samanya Gyan Darpan
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Desh Deshantar: Cooperative Banks under RBI | RBI के नए अधिकार और सहकारी बैंक
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❄️सूडान, इथियोपिया और इजिप्ट के बीच 9 वर्षों से चल रहा विवाद अगले सप्ताह समाप्त होने की संभावना
पिछले कुछ महीने से, इथियोपिया और सूडान के बीच सीमा क्षेत्र पर गंभीर झड़पें और अभूतपूर्व वृद्धि के बारे में जानकारी मिल रही थी. अब आने वाले कुछ सप्ताह में इन तीन देशों के बीच एक समझौते होने की संभावना जताई जा रहा है जिससे आने वाले वर्षों में अफ्रीका के इस क्षेत्र में क्षेत्रीय स्थिरता अधिक बढ़ सकती है.
इथियोपिया के जल मंत्री ने 26 जून 2020 को बताया है कि तीन देशों (इथियोपिया, सूडान और इजिप्ट) के बीच 4.5 बिलियन अमरीकी डालर मूल्य के जाइंट इथियोपियन रेनेसांस डैम के संबंध में एक समझौता हुआ है और यह डैम केवल इथियोपिया के द्वारा अकेले इस्तेमाल नहीं किया जायेगा. इस समझौते के लिए कई वर्षों से इन तीनों देशों के बीच कई वर्षों से लगातार बातचीत चल रही थी.
पिछले कुछ महीने से, इथियोपिया और सूडान के बीच सीमा क्षेत्र पर गंभीर झड़पें और अभूतपूर्व वृद्धि के बारे में जानकारी मिल रही थी. अब आने वाले कुछ सप्ताह में इन तीन देशों के बीच एक समझौते होने की संभावना जताई जा रहा है जिससे आने वाले वर्षों में अफ्रीका के इस क्षेत्र में क्षेत्रीय स्थिरता अधिक बढ़ सकती है.
नील नदी
नील नदी अफ़्रीकी महाद्वीप की सबसे बड़ी नदी है. इस नदी की दो प्रमुख सहायक नदियां - वाइट नील और ब्लू नील हैं. नील नदी की ये दोनों सहायक नदियां सूडान की राजधानी, खार्तूम के पास मिलती हैं. वाइट नील और ब्लू नील दक्षिणी सुडान और इथियोपिया की तरफ़ से बहकर खार्तूम के उत्तर में आपस में मिलने से पहले ही सूडान में प्रवेश करती हैं. खार्तूम से यह नदी नीचे की तरफ़ बहती हुई इजिप्ट में जाती है.
पृष्ठभूमि
वर्ष 2011 में जब इथियोपिया ने ब्लू नील पर यह डैम बनाना शुरू किया था तो इजिप्ट ने इसका तुरंत विरोध किया था क्योंकि ब्लू नील, जो इथियोपिया में ताना लेक से निकली थी, नीचे की तरफ़ बहती हुई सुडान से इजिप्ट (मिस्र) तक जाती है. इजिप्ट जो ताज़े जल के लिए नील नदी पर निर्भर है, उसने अनुमान लगाया कि यह डैम बनने पर उसका 55.5 बिलियन क्यूबिक मीटर्स जल संसाधनों का वार्षिक हिस्सा अवरुद्ध हो सकता है.
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❄️पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज में आतंकी हमला, जानें क्या हुआ?
स्थानीय मीडिया के अनुसार, पाकिस्तान के कराची स्टॉक एक्सचेंज पर आतंकियों ने ग्रेनेड से हमला किया और फायरिंग कर दी.
पाकिस्तान के कराची स्थित स्टॉक एक्सचेंज (pakistan stock exchange attacked) बिल्डिंग पर 29 जून 2020 को आतंकी हमला हुआ है, जिसे समय रहते नाकाम कर दिया गया. स्थानीय मीडिया के अनुसार, पाकिस्तान के कराची स्टॉक एक्सचेंज पर आतंकियों ने ग्रेनेड से हमला किया और फायरिंग कर दी.
स्थानीय मीडिया के अनुसार, हमले को अंजाम देने वाले चारों आतंकियों को मार गिराया गया है जबकि 2 नागरिक भी मारे गए हैं. इस घटना में 6 लोग घायल हो गए हैं. इमारत में मौजूद सभी लोगों को फिलहाल निकाला जा रहा है. स्थानीय मीडिया के अनुसार, मारे गए लोगों की संख्या में अभी और इजाफा हो सकता है.
स्थानीय मीडिया के अनुसार, सुबह करीब 9 बजे इन आतंकियों ने स्टॉक एक्सचेंज के गेट से अन्दर जाने की कोशिश की और गोलियां बरसानी शुरू कर दीं. उन्होंने अन्दर घुसने के लिए गेट पर ही ग्रेनेड के लिए एक धमाका भी किया. इस ग्रेनेड की चपेट में आकर 2 आम नागरिकों की मौके पर ही मौत हो गयी है. लगभग छह घायलों को सिविल हॉस्पिटल कराची में एडमिट कराया गया है.
सर्च ऑपरेशन जारी
हमले की जानकारी मिलने के बाद पहुंचे पाकिस्तानी रेंजर्स और सिंध पुलिस के जवानों ने बिल्डिंग में फंसे लोगों को बाहर निकाला. इस दौरान मेन गेट को सील कर दिया गया है. फिलहाल स्टॉक एक्सचेंज कि बिल्डिंग में सर्च ऑपरेशन जारी है. सुरक्षाबलों ने बिल्डिंग के आस-पास का इलाका भी सील कर दिया है.
सिंध प्रांत के गवर्नर इमरान इस्माइल ने क्या कह?
सिंध प्रांत के गवर्नर इमरान इस्माइल ने घटना की निंदा की है। उन्होंने ट्विटर पर कहा, 'पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज पर किए गए हमले की कड़ी निंदा करता हूं. उन्होंने कहा कि आईजी और सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिया है कि घटना को अंजाम देने वालों को जिंदा पकड़ा जाये और उनके आकाओं को कड़ी सजा मिले.
हमले की जिम्मेदारी किसने ली
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कराची स्थित पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज पर हमले की जिम्मेदारी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने ली है. बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के माजिद बिग्रेड ने आतंकी हमले को अंजाम दिया. उसका कहना है कि सभी आतंकी सुसाइड बॉम्बर थे. कराची पुलिस और रेंजर्स ने चारों आतंकियों को मार गिराया है. यह आतंकी संगठन बलूचिस्तान की पाकिस्तानी से आजादी के लिए लड़ाई लड़ रहा है. यह आतंकी संगठन 2000 में उस वक्त सुर्खियों में आया था, जब इसने पाकिस्तान में सिलसिलेवार धमाके किए थे.
पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज के बारे में
पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज की यह बिल्डिंग 8 से 10 मंजिला है. इसमें शेयर मार्केट, कारोबार से जुड़ा काम होता है. बड़ी तादाद में वहां लोग मौजूद रहते हैं. कराची स्टॉक एक्सचेंज देश का सबसे बड़ा स्टॉक मार्केट है और यह कराची के सबसे व्यस्त हाइवे के एक कोने में स्थित है. ये कराची के वॉल स्ट्रीट पर एक रोड में स्थित है. इसके साथ ही यहां एसबीपी पाकिस्तान के दफ़्तर, पुलिस हेडक्वाटर और कई अन्य बैंक और मीडिया हाउस हैं.
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पीओके में हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट हेतु पाकिस्तान ने चीन के साथ 2.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर के समझौते पर किये हस्ताक्षर
हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट पाकिस्तान अधिग्रहित कश्मीर के मुज़फ़राबाद जिले में सिरान और बर्सला गावों के निकट स्थित है. यह हाइड्रो पावर प्रोएज्क्ट झेलम नदी पर स्थित है.
इस 25 जून 2020 को 1124 मेगावाट कोहला हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट (जलविद्युत परियोजना) के निर्माण के लिए एक तीन पक्षीय पावर खरीद समझौते (TPPA) पर हस्ताक्षर किये गये. पाकिस्तान सरकार, चीनी कंपनी - चाइना थ्री गोर्जेस कॉर्पोरेशन (चीनी सरकार की स्टेट ओन्ड कंपनी) और आज़ाद कश्मीर की सरकार (पाकिस्तान अधिग्रहित कश्मीर का एक हिस्सा) के बीच इस समझौते पर हस्ताक्षर किये गये.
कोहला हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट👇
हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट पाकिस्तान अधिग्रहित कश्मीर के मुज़फ़राबाद जिले में सिरान और बर्सला गावों के निकट स्थित है. यह हाइड्रो पावर प्रोएज्क्ट झेलम नदी पर स्थित है.
यह प्रोजेक्ट चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का एक हिस्सा है. इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागर 2,364 मिलियन अमेरिकन डॉलर है और यह प्रोजेक्ट वर्ष 2026 तक पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है. यह हाइड्रो पावर प्लांट कोहला हाइड्रोपावर कंपनी लिमिटेड (KHCL) द्वारा तैयार किया जाएगा. KHCL चाइना थ्री गोर्जेस कॉर्पोरेशन की एक सहायक कंपनी है.
चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC)👇
पाकिस्थान की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पाकिस्तान के बुनियादी ढांचे का विकास करने के इरादे से CPEC की स्थापना 22 मई, 2013 को हुई थी.
CPEC पाकिस्तान के लिए चीन का एक ऋण जाल है. यह तब साबित हुआ जब पाकिस्तान सरकार द्वारा वर्ष 2018 में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ अपने देश की अर्थव्यवस्था के लिए 6 बिलियन अमरीकी डालर के बेलआउट पैकेज के लिए बातचीत करनी शुरू की.
पाकिस्तान के योजना और विकास मंत्रालय द्वारा IMF को जमा करवाए गए दस्तावेजों से यह खुलासा हुआ है कि CPEC के तहत 26.5 बिलियन निवेश के लिए पाकिस्तान चीन को ऋण और लाभांश के तौर पर 40 बिलियन अमेरिकी डॉलर का भुगतान करेगा. CPEC प्रोजेक्ट की असली लागत शुरू में 46 बिलियन अमेरिकी डॉलर आंकी गई थी लेकिन वर्ष 2017 के अंतिम अपडेट के मुताबिक CPEC की कुल लागत 62 बिलियन अमेरिकी डॉलर (26.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर की दोगुनी राशी से अधिक) तक पहुंच गई.
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Current Affairs Quiz 30 Jun 2020 दैनिक सामान्य ज्ञान क्विज
https://www.simplifiedshiksha.com/current-affairs-quiz-30-jun/
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चल दर बचत ऋणपत्र, 2020 (कराधीन)
केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने चल दर बचत ऋणपत्र, 2020 (कराधीन) का शुभारंभ किया है। इससे सुरक्षित सरकारी साधनों में निवेश करने का अवसर मिलेगा।
current affairs image
इसके बारे में:
सरकार ने 28 मई, 2020 को बैंकिंग व्यवसाय बंद होने से सदस्यता के लिए स्थगित हो चुकी 75 प्रतिशत बचत (कर योग्य) ऋणपत्र, 2018 योजना के स्थान पर नई चल दर बचत ऋणपत्र, 2020 (कर योग्य) योजना को अधिसूचित किया है।
सात साल के ऋणपत्र पर ब्याज हर वर्ष पहली जनवरी और पहली जुलाई (अर्ध-वार्षिक) को देय होगा।
पहली जनवरी 2021 को 15 प्रतिशत की दर से भुगतान किया जाएगा। अगली छमाही के लिए ब्याज दर को हर छह महीने में पुन: नियोजित किया जाएगा, पहला नियोजन 01 जनवरी 2021 को होगा।
ऋणपत्र जारी होने की तिथि से 7 वर्ष की समाप्ति पर प्रतिदेय होंगे। वरिष्ठ नागरिकों की निर्दिष्ट श्रेणियों के लिए समय से पहले भुगतान की अनुमति दी जाएगी।
ऋणपत्र पर ब्याज आयकर अधिनियम, 1961 के तहत लागू किया जाएगा।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) सरकार की ओर से ऋणपत्र जारी करेगा।
ऋणपत्र भारत के निवासी और एक अविभाजित हिंदू परिवार के पास हो सकता है।
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🔰 पुराना नाम – परिवर्तित नाम 🔰
◆हबीबगंज रेलवे स्टेशन – अटल बिहारी वाजपेयी रेलवे स्टेशन
◆फ़िरोजशाह कोटला स्टेडियम – अरुण जेटली स्टेडियम
◆भोपाल मेट्रो रेल – राजा भोज
◆बोगीबील पुल – अटल सेतू
◆नया रायपुर – अटल नगर
◆रोहतांग सुरंग (हिमाचल प्रदेश) – अटल सुरंग
◆बुंदेल खण्ड एक्सप्रेस-वे – – अटल पथ
◆हजरतगंज चौराहा – अटल चौक
◆देवधर हवाई अड्डा (प्रस्ता.) – अटल बिहारी वाजपेयी हवाई अड्डा
◆साहिबगंज हार्बर – अटल बिहारी वाजपेयी हार्बर
◆अगरतला हवाई अड्डा – महाराजा बीर बिक्रम हवाई अड्डा
◆छत्रपति शिवाजी एयरपोर्ट – छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशल एयरपोर्ट
◆कांडला बंदरगाह – दीनदयालबंदरगाह
◆साबरमती घाट – अटल घाट
◆भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना – भामाशाह सुरक्षा कवच
◆मुगल सराय रेलवे स्टेशन – प. दीनदयाल उपध्याय रेलवे स्टेशन
◆बल्लभगढ़ मेट्रो स्टेशन – अमर शहीद राजा नाहरसिंह मैट्रो स्टेशन
◆गोरखपुर हवाई अड्डा – महायोगी गोरखनाथ हवाई अड्डा
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Current Affairs Quiz 29 Jun 2020 दैनिक सामान्य ज्ञान क्विज
https://www.simplifiedshiksha.com/current-affairs-quiz-29-jun/
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🎙 BBC विवेचना 🎙
मध्यम वर्ग क्यों नहीं पसंद करता पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह को?किसी के लिए वो हीरो थे तो किसी के लिए समाज को बांटने वाला विलेन।किस तरह से बिजूपटनायक और अरूण नेहरू ने एक चाल चली और वीपी सिंह और चंद्रशेखर को अंधेरे में रखकर चौधरी देवीलाल ( हरियाणा के गांव चौटाला के रहने वाले, पूर्व उपप्रधानमंत्री) को मनाकर वीपी सिंह को प्रधानमंत्री बनाया।किस तरह राजीव गांधी के ख़ास माने जाने वाले वीपी सिंह को कांग्रेस से निकाला गया।इन सभी बातों की पड़ताल कर रहे है रेहान फ़ज़ल अपनी विवेचना में
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🌺 भारत के प्रमुख भौगोलिक उपनाम 🌺
★ ईश्वर का निवास स्थान →प्रयाग
★ पांच नदियों की भूमि →पंजाब
★ सात टापुओं का नगर →मुंबई
★ बुनकरों का श हर →पानीपत
★ अंतरिक्ष का शहर →बेंगलुरू
★ डायमंड हार्बर →कोलकाता
★ इलेक्ट्रॉनिक नगर →बेंगलुरू
★ त्योहारों का नगर →मदुरै
★ स्वर्ण मंदिर का शहर →अमृतसर
★ महलों का शहर →कोलकाता
★ नवाबों का शहर →लखनऊ
★ इस्पात नगरी →जमशेदपुर
★ पर्वतों की रानी →मसूरी
★ रैलियों का नगर →नई दिल्ली
★ भारत का प्रवेश द्वार →मुंब
★ पूर्व का वेनिस →कोच्चि
★ भारत का पिट्सबर्ग →जमशेदपुर
★ भारत का मैनचेस्टर →अहमदाबाद
★ मसालों का बगीचा →केरल
★ गुलाबी नगर →जयपुर
★ क्वीन ऑफ डेकन →पुणे
★ भारत का हॉलीवुड →मुंबई
★ झीलों का नगर →श्रीनगर
★ फलोद्यानों का स्वर्ग →सिक्किम
★ पहाड़ी की मल्लिका →नेतरहाट
★ भारत का डेट्राइट →पीथमपुर
★ पूर्व का पेरिस →जयपुर
★ सॉल्ट सिटी →गुजरात
★ सोया प्रदेश →मध्य प्रदेश
★ मलय का देश →कर्नाटक
★ दक्षिण भारत की गंगा →कावेरी
★ काली नदी →शारदा
★ ब्लू माउंटेन →नीलगिरी पहाड़ियां
★ एशिया के अंडों की टोकरी →आंध्र प्रदेश
★ राजस्थान का हृदय →अजमेर
★ सुरमा नगरी →बरेली
★ खुशबुओं का शहर →कन्नौज
★ काशी की बहन →गाजीपुर
★ लीची नगर →देहरादून
★ राजस्थान का शिमला →माउंट आबू
★ कर्नाटक का रत्न →मैसूर
★ अरब सागर की रानी →कोच्चि
★ भारत का स्विट्जरलैंड →कश्मीर
★ पूर्व का स्कॉटलैंड →मेघालय
★ उत्तर भारत का मैनचेस्टर →कानपुर
★ मंदिरों और घाटों का नगर →वाराणसी
★ धान का डलिया →छत्तीसगढ़
★ भारत का पेरिस →जयपुर
★ मेघों का घर →मेघालय
★ बगीचों का शहर →कपूरथला
★ पृथ्वी का स्वर्ग →श्रीनगर
★ पहाड़ों की नगरी →डुंगरपुर
★ भारत का उद्यान →बेंगलुरू
★ भारत का बोस्टन →अहमदाबाद
★ गोल्डन सिटी →अमृतसर
★ सूती वस्त्रों की राजधानी →मुंबई
★ पवित्र नदी →गंगा
★ बिहार का शोक →कोसी
★ वृद्ध गंगा →गोदावरी
★ पश्चिम बंगाल का शोक →दामोदर
★ कोट्टायम की दादी →मलयाला
★ जुड़वा नगर --हैदराबाद →सिकंदराबाद
★ ताला नगरी →अलीगढ़
★ राष्ट्रीय राजमार्गों का चौराहा →कानपुर
★ पेठा नगरी →आगरा
★ भारत का टॉलीवुड →कोलकाता
★ वन नगर →देहरादून
★ सूर्य नगरी →जोधपुर
★ राजस्थान का गौरव →चित्तौड़गढ़
★ कोयला नगरी →धनबाद
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Current Affairs Quiz 28 Jun 2020 दैनिक सामान्य ज्ञान क्विज
https://www.simplifiedshiksha.com/current-affairs-quiz-28-jun/
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🚀 S 400 मिसाइल
S-400 डिफेन्स सिस्टम की डिलीवरी में 18 से 19 महीने लगेंगे यह जानकारी रूस के उप प्रधानमंत्री युरी बोरीसोव ने 8 सितम्बर 2019 को दी थी
भारत, रूस से वर्तमान समय की आधुनिकतम वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली S-400 ‘ट्रायम्फ़ (Triumf) हासिल करने जा रहा है
रूस से S-400 प्रणाली की डिलीवरी के लिए 05 अक्टूबर 2018 को भारत और रूस ने एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे
इस सिस्टम की डिलीवरी अक्टूबर 2020 से शुरू होगा और अप्रैल 2023 तक पूरा हो जाएगी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस यात्रा के दौरान इस सौदे को अंतिम रूप दिया गया
इस समझौते की संभावित कीमत 5.5 बिलियन डॉलर या 36 हजार करोड़ रुपये के लगभग बताई जा रही है
समझौते के तहत रूस, भारत को पांच ‘S-400 एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम’ 40 हेलिकॉप्टर और 200 ‘कामोव KA- 226-T’ हेलिकॉप्टर देगा
रूस द्वारा वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली S-300 के विकास के प्रयास रूस और अमेरिका के बीच जारी शीत युद्ध के समय से जारी हैं
इस समय रूस को अमेरिका से परमाणु हमले का डर सता रहा था इसलिए रूस ने S-300 वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली को विकसित किया था
S-300 शुरूआत में हमले के लिए आने वाली क्रूज मिसाइलों और विमानों के खिलाफ रक्षा करने के लिए विकसित की गयी थी, लेकिन बाद वाले संस्करण बैलिस्टिक मिसाइलों को भी रोक सकते हैं
S-300 रक्षा मिसाइल प्रणाली को 1970 के दशक में सोवियत संघ में प्रमुख औद्योगिक परिसरों, शहरों और अन्य रणनीतिक संपत्तियों की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया था
रूस ने इसका एडवांस्ड वर्जन तैयार किया है जो कि 2007 से सेवा में है और दुनिया की सर्वश्रेष्ठ प्रणालियों में से एक मानी जाती है
रूसी सेनाओं ने कम से कम आधा दर्जन S-400 रेजिमेंट तैनात किए हैं, उनमें से कम से कम दो मास्को की सुरक्षा के लिए हैं
इसके अलावा सतह से हवा में प्रहार करने में सक्षम S-400 को रूस ने सीरिया में भी तैनात किया है
S-400 प्रणाली को रूस ने चीन को सप्लाई भी शुरू कर दी है और यह टर्की और भारत को बेचने के समझौते कर चुका है
S-400 वर्तमान में दुनिया की सबसे उन्नत वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली है जो कि एक साथ कई हमला करने वाली वस्तुओं जैसे सभी प्रकार के विमान, मिसाइल और ड्रोन को 400 किमी की रेंज तक पता लगाकर खत्म कर सकता है
● S-400; वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली की विशेषताएं इस प्रकार हैं;
> S-400 प्रणाली S-300 का उन्नत संस्करण है
> S-400 लगभग 10,000 फीट (30 किमी) की ऊंचाई तक निशाना साध सकता है
> इसकी तैनाती में केवल 5 से 10 मिनट का समय लगता है
> यह डिफेंस सिस्टम एक साथ 36 मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम है
> इस प्रणाली में एक साथ तीन मिसाइलें दागी जा सकती हैं और इसके प्रत्येक चरण में 72 मिसाइलें शामिल हैं
> S-400 को सतह से हवा में मार करने वाला दुनिया का सबसे सक्षम मिसाइल सिस्टम माना जाता है
> यह सिस्टम इतनी उन्नत है कि 400 किमी. की रेंज में आने वाली मिसाइलों एवं पाँचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को नष्ट कर सकता है इसमें अमेरिका के सबसे उन्नत फाइटर जेट F-35, F-16 और F-22 को भी गिराने की क्षमता है
> S-400 प्रणाली से विमानों सहित क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों तथा ज़मीनी लक्ष्यों को भी निशाना बनाया जा सकता है
> मिसाइल सिस्टम की अधिकतम रफ्तार 4.8 किलोमीटर प्रति सेकंड तक है जबकि इसके नवीनतम संस्करण में यह हाइपरसोनिक गति से हमला कर सकती है
S-400 रक्षा मिसाइल प्रणाली का भारत के लिए महत्व:-
जैसा कि ऊपर बताया गया है कि चीन इस रक्षा प्रणाली को रूस से हासिल कर चुका है
भारत लगभग 4000 किलोमीटर लंबी भारत- चीन सीमा पर अपनी वायु रक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए लंबी दूरी की मिसाइल प्रणालियां खरीदना चाहता है
S-400 ट्रियंफ एंटी मिसाइल सिस्टम से भारत को एक ऐसा कवच मिल जाएगा जो किसी भी मिसाइल हमले को नाकाम कर सकता है
इस सिस्टम से भारत पर होने वाले परमाणु हमले का भी जवाब दिया जा सकेगा अर्थात यह डिफेंस सिस्टम भारत के लिए चीन और पाकिस्तान की न्यूक्लियर सक्षम बैलिस्टिक मिसाइलों से कवच की तरह काम करेगा
यहाँ तक कि यह सिस्टम पाकिस्तान की सीमा में उड़ रहे विमानों को भी ट्रैक कर सकेगा
