ch
Feedback

不要被骗子欺骗!Telemetrio 会找到并标记这些频道 👉 如果想查看标记,请订阅

I.A.S.(हिंदी माध्यम)

I.A.S.(हिंदी माध्यम)

前往频道在 Telegram

🚩 Channel was restricted by Telegram

显示更多
印度187 457未指定类别
2 554
订阅者
无数据24 小时
无数据7 天
无数据30 天
帖子存档
उपराष्ट्रपति ने जल शक्ति मंत्रालय और नीति आयोग से आंध्र प्रदेश में उदयगिरी के लिए पेयजल परियोजना की संभाव्यता पर विचार करने को कहा उपराष्ट्रपति ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ क्षेत्रीय पेयजल समस्याओं पर बातचीत की भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम वेंकैया नायडू ने आज नीति आयोग के सीईओ श्री अमिताभ कांत, पेयजल एवं सफाई सचिव श्री परमेश्वरन अय्यर और जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण सचिव श्री यू पी सिंह के साथ बैठक की और आंध्र प्रदेश में नेल्लोर जिले के सूखाग्रस्त उदयगिरि इलाके में पेयजल एवं सिंचाई से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न संभव उपायों पर चर्चा की। उपराष्ट्रपति ने इन अधिकारियों के साथ इस इलाके के लोगों की चिंताएं साझा की। हाल के दिनों में उपराष्ट्रपति उदयगिरि विधानसभा क्षेत्र के लोगों से बातचीत करते रहे हैं जहां से श्री वेंकैया नायडू पहली बार 1978 में विधायक निर्वाचित हुए थे। बातचीत में उनका सामान्य हाल-चाल पूछने के दौरान वहां के लोगों ने उपराष्ट्रपति को बताया कि इलाके में भूमिगत जलस्तर तेजी से कम हुआ है जिससे ज्यादातर सरोवर/नलकूप सूख चुके हैं और जलापूर्ति की विभिन्न योजनाओं से इलाके के लोगों की पानी की जरूरतें पूरी नहीं हो पाती हैं। वहां के लोगों ने उपराष्ट्रपति को यह भी बताया कि लगातार 7 वर्षों से यहां पर्याप्त बारिश नहीं हुई है। उन लोगों में से ज्यादातर लोगों ने उपराष्ट्रपति श्री नायडू से कृष्णा बेसिन या सोमासिला परियोजना से पानी दिलाने के लिए कोई उपाय तलाशने का आग्रह किया। उपराष्ट्रपति के साथ आज की बातचीत में अधिकारियों ने सुझाव देते हुए कहा कि वे आंध्र प्रदेश सरकार से बातचीत कर विभिन्न विकल्पों का पता लगाएंगे और देखेंगे कि सबसे अधिक संभव विकल्प क्या हो सकता है। उपराष्ट्रपति ने जल संसाधन सचिव को केंद्रीय जल आयोग से इस बारे में बातचीत करने और तकनीकी संभाव्यता का पता लगाने का सुझाव दिया। उन्होंने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) और जल संकट को कम करने के लिए जल ग्रिड परियोजना सहित राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न प्रयासों का अध्ययन करने का भी सुझाव दिया। प्राथमिक आकलन करने के बाद उपराष्ट्रपति ने सुझाव दिया कि नीति आयोग और केंद्रीय जल आयोग के साथ ही जल शक्ति मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल इलाके के दौरे पर जाए और जमीनी हकीकत जानने के लिए संबंधित हितधारकों के साथ बातचीत करें और फिर कोई उपाय सुझाए। उपराष्ट्रपति ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री से भी इस बारे में बातचीत की और उनसे उदयगिरि में अपने परिचितों से बातचीत के दौरान इलाके में विकट पेयजल की स्थिति को लेकर मिले फीडबैक को साझा किया। उपराष्ट्रपति ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री को आज सुबह वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बैठक के बारे में जानकारी दी और उनसे कहा कि अच्छा होता यदि इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए राज्य सरकार और केंद्र सरकार एक साथ मिलकर काम करती। मुख्यमंत्री ने सकारात्मक रुख दिखाया और इस समस्या के सहयोगपूर्ण समाधान के लिए काम करने का वादा भी किया।

Current Affairs Quiz 25 May 2020 दैनिक सामान्य ज्ञान क्विज https://www.simplifiedshiksha.com/current-affairs-quiz-25-may/
Current Affairs Quiz 25 May 2020 दैनिक सामान्य ज्ञान क्विज https://www.simplifiedshiksha.com/current-affairs-quiz-25-may/

Vision IAS PT 365 ECONOMY 2020 - HINDI MEDIUM.pdf5.63 MB

the institute economics(hindi).pdf1.31 MB

🎙 BBCदुनिया जहान 🎙 क्या मानव जाति धरती से लुप्त हो सकती है? कोरोना वायरस से दुनियाभर में मचे हाहाकार के बीच ये सवाल एक बार फिर से सामने कि क्या कभी ऐसा भी हो सकता है कि धरती से इंसान का अस्तित्व ही खत्म हो जाए। इतिहास के पन्नों में ऐसा बहुत कुछ है जिससे इस आशंका को बल मिलता है।दुनिया जहान में मोहन लाल शर्मा इसी विषय की पड़ताल कर रहे है

sticker.webp0.06 KB

Corona_100_News_|_May_24,_2020(128k).mp38.24 MB

1576573909514.webp0.24 KB

#Aajtakआजतक_#Latestnewsaajtak_देश_दुनिया_की_इस_वक्त_की_100_बड़ी.mp312.83 MB

1576573970629.webp0.40 KB

कार्सियोजेनिक एवं म्युटैजेनिक यौगिकों की जांच के लिए इलेक्ट्रोकैमिकल सेंसिंग प्लेटफार्म गुवाहाटी स्थित विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी उन्नत अध्ययन संस्थान (आईएएसएसटी) ने कभी कभी क्योर्ड मीट, बैकोन कुछ पनीर एवं कम वसा वाले दूध जैसी खाद्य वस्तुओं में कार्सियोजेनिक एवं म्युटैजेनिक यौगिकों एन-नाइट्रोसोडिमेथिलामाइन (एनडीएमए) और एन-नाइट्रोसोडिथैनोलामाइन (एनडीईए) का पता लगाने के लिए इलेक्ट्रोकैमिकलसेंसिंग प्लेटफार्म का विकास किया है। इसे डीएनए में कार्बन नैनोमैटेरियल्स (कार्बन डौट्स) को स्थिर कर देने के जरिये एक मोडिफायड इलेक्ट्रोड विकसित करने के द्वारा अर्जित किया गया। क्यों चिंता की बात है? वैज्ञानिकों ने बताया कि शहरों में रहने वाले भारतीयों की बदलती भोजन शैली के कारण उन पर क्योर्ड मीट, बैकोन कुछ पनीर एवं कम वसा वाले सूखे दूध और मछली जैसी खाद्य वस्तुओं में नाइट्रोसैमीन परिवार से संबंधित हानिकारक रसायनों का खतरा मंडराने लगता है। ऐसे रसायनों में एनडीएमए एवं एनडीईए जैसे कार्सियोजेनिक शामिल होते हैं जो हमारे डीएनए की रसायनिक संरचना को भी बदल सकते हैं। इसलिए, उनका पता लगाने के लिए अनुसंधान तकनीकों का विकास किया जाना महत्वपूर्ण है। क्या है इस नवीन तकनीक की विशेषता? नाइट्रोसैमीन का पता लगाने के लिए प्रयुक्त अधिकांश तकनीकों में μM अनुसंधान सीमाएं होती हैं। जर्नल एसीएस एैपल बायो मेटर में प्रकाशित इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने एन- नाइट्रोसैमीन के संवेदनशील और चयनात्मक अनुसंधान के लिए कार्बन डौट्स के सतह पर स्थिर किए गए डीएनए का उपयोग करने के जरिये एक इलेक्टोकैमिकल सेंसिंग प्लेटफार्म का निर्माण किया है। एनडीएमए एवं एनडीईए के लिए क्रमशः 9.9×10−9 M और 9.6×10−9 M अन्वेषण सीमा निर्धारित की गई। इलेक्टोकैमिकल बायोसेंसर प्लेटफार्म का विकास डीएनए को बदलने के लिए एनडीएमए एवं एनडीईए की क्षमता का उपयोग करने के द्वारा किया गया। एक कार्बन आधारित नैनोमैटेरियल, कार्बन डौट्स (सीडीएस) का उपयोग किया गया जो एक जैवसंगत तथा पर्यावरण के लिए हितैषी मैटेरियल के रूप में पहले से ही स्थापित है। प्राकृतिक रूप से व्युत्पन्न चितोसन ( श्रृम्प, लोबस्टर एवं क्रैब के शेल से प्राप्त प्राकृतिक बायोपोलीमर) एक पर्यावरण के लिए अनुकूल टिकाऊ मैटेरियल है जिसका उपयोग सीडी को संश्लेषित करने के लिए किया गया। चूंकि यह एक इलेक्टोकैमिकल सेंसर है, इलेक्ट्रोड का विकास कार्बन डौट्स (कार्बन नैनोपार्टिकल्स) को डिपोजिट करने के द्वारा और फिर उन पर बैक्टेरियल डीएनए को स्थिर करने के जरिये किया गया। इस इलेक्ट्रोड प्रणाली का उपयोग वर्तमान पीक के मापन के लिए किया गया। एनडीएमए एवं एनडीईए दोनों ही इलेक्ट्रोड में उपस्थित डीएनए की रसायनिक संरचना को बदल देते हैं जिससे यह अधिक संवाही हो जाता है जिसका परिणाम अंततोगत्वा सवंर्द्धित वर्तमान पीक के रूप में आता है। संरचनागत रूप से समान कुछ ऐसे ही रसायनिक यौगिकों को यह जांच करने के लिए जोड़ा गया कि क्या वे प्रणाली में हस्तक्षेप कर सकते हैं। लेकिन ये रसायन डीएन क्रम को नहीं बदल सकते, इसलिए वे प्रणाली को प्रभावित नहीं करते।

नियामकीय उपायों के लिए 3 माह का और समय विस्तार आरबीआई ने पूर्व में घोषित किए गए कुछ नियामकीय उपायों की प्रयोज्यता या स्‍वीकार्यता को 1 जून, 2020 से तीन माह और बढ़ाकर अब 31 अगस्त, 2020 तक कर दिया है। ये उपाय अब कुल छह महीनों (यानी 1 मार्च, 2020 से लेकर 31 अगस्त, 2020 तक) के लिए लागू माने जाएंगे। संबंधित नियामकीय उपाय ये हैं: (ए) सावधि ऋणों की किस्तों की अदायगी पर 3 माह की मोहलत; (बी) कार्यशील पूंजी सुविधाओं के ब्याज पर 3 माह का स्थगन; (सी) मार्जिन कम करके या कार्यशील पूंजी चक्र का फि‍र से आकलन करके कार्यशील पूंजी वित्तपोषण संबंधी आवश्यकताओं को सुगम बनाना; (डी) पर्यवेक्षी रिपोर्टिंग और क्रेडिट सूचना कंपनियों को रिपोर्टिंग में ‘डिफॉल्टर’ के रूप में वर्गीकृत होने से छूट देना; (ई) फंसे कर्जों के लिए समाधान समयसीमा का विस्तार; और (एफ) ऋण संस्थानों द्वारा 3 माह की मोहलत अवधि, इत्‍यादि को हटाते हुए संपत्ति वर्गीकरण पर विराम। ऋण देने वाले संस्थानों को यह अनुमति दी गई है कि वे 31 मार्च, 2021 तक कार्यशील पूंजी के लिए मार्जिन को उनके मूल स्तर पर बहाल कर सकते हैं। इसी तरह कार्यशील पूंजी चक्र का फि‍र से आकलन करने से संबंधित उपायों का समय विस्‍तार 31 मार्च, 2021 तक किया जा रहा है। कार्यशील पूंजी पर ब्याज को ब्याज सावधि ऋण में परिवर्तित करने का प्रावधान ऋण देने वाले संस्थानों को 6 माह (अर्थात 1 मार्च, 2020 से लेकर 31 अगस्त, 2020 तक) की कुल स्‍थगन अवधि के दौरान कार्यशील पूंजी सुविधाओं पर संचित ब्याज को एक वित्तपोषित ब्याज सावधि ऋण में परिवर्तित करने की अनुमति दी गई है, जिसे 31 मार्च 2021 को समाप्त होने वाले चालू वित्त वर्ष के दौरान पूरी तरह से चुकाना होगा। कंपनियों को धन प्रवाह बढ़ाने के लिए ग्रुप एक्सपोजर लिमिट में वृद्धि बैंक द्वारा किसी विशेष कॉरपोरेट समूह को दिए जाने वाले अधिकतम ऋण को उसके उपयुक्‍त पूंजी आधार के 25% से बढ़ाकर 30% कर दिया गया है। वर्तमान में कंपनियों को बैंकों से धन जुटाने में हो रही कठिनाइयों को ध्‍यान में रखते हुए कंपनियों को बैंकों से अपनी वित्तपोषण आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम बनाने के लिए ऐसा किया गया है। बढ़ी हुई सीमा 30 जून, 2021 तक लागू रहेगी। राज्य सरकारों की मौजूदा वित्तीय मुश्किलों को कम करने के उपाय राज्यों को ‘कंसोलिडेटेड सिंकिंग फंड’ से अधिक उधार लेने की अनुमति कंसोलिडेटेड सिंकिंग फंड’ को राज्य सरकारों द्वारा अपनी देनदारियों के पुनर्भुगतान के लिए एक बफर के रूप में बनाया गया है। इस कोष से धन निकासी को नियंत्रित करने वाले नियमों में अब ढील दी गई है, ताकि राज्यों को वर्ष 2020-21 में देय अपनी बाजार उधारी को चुकाने में सक्षम बनाया जा सके। धन निकासी मानदंडों में बदलाव तत्काल प्रभाव से लागू होगा और 31 मार्च, 2021 तक मान्‍य रहेगा। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि यह सुनिश्चित करते हुए ही ढील या छूट दी जा रही है कि इस कोष में उपलब्‍ध शेष राशि में कमी विवेकपूर्ण तरीके से हो।

आरबीआई ने अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए नौ और अहम उपायों की घोषणा भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर श्री शक्तिकांत दास ने राष्ट्रपिता के वर्ष 1929 के इस अनमोल विचार से आशा एवं प्रेरणा लेते हुए वित्त के प्रवाह को सुचारू बनाने और कोविड से उत्‍पन्‍न अशांत एवं अनिश्चित माहौल में वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए नौ और अहम उपायों की घोषणा की है। आरबीआई ने इससे पहले 17 अप्रैल, 2020 को और 27 मार्च, 2020 को अनेक महत्‍वपूर्ण उपायों की घोषणा की थी। आरबीआई गवर्नर ने एक ऑनलाइन संबोधन के माध्यम से घोषणाएं करते हुए कहा कि हमें भारत की सुदृढ़ता के साथ-साथ सभी बाधाओं को दूर करने की इसकी क्षमता पर अवश्‍य ही भरोसा होना चाहिए। यह विश्वास व्यक्त करते हुए कि हम आज की कष्‍टदायक मुसीबतों से पार पा लेंगे, आरबीआई गवर्नर ने आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्थिति ऐसी है कि ‘केंद्रीय बैंकों को अर्थव्यवस्था के बचाव में अग्रिम पंक्ति को जवाब देना होगा।’ रेपो रेट में 0.40 प्रतिशत की कमी आरबीआई गवर्नर ने महंगाई दर को निर्धारित दायरे में ही रखते हुए विकास की गति को फि‍र से तेज करने और कोविड-19 के प्रभाव को कम करने के लिए प्रमुख नीतिगत दरों (पॉलिसी रेट) में कमी करने की घोषणा की है। रेपो रेट को 4.4% से 0.40 प्रतिशत घटाकर 4.0% पर ला दिया गया है। सीमांत स्थायी सुविधा (एमएसएफ) दर और बैंक रेट को भी 4.65% से घटाकर 4.25% कर दिया गया है। इसी तरह रिवर्स रेपो रेट को 3.75% से घटाकर 3.35% पर ला दिया गया है। आरबीआई गवर्नर ने कहा, ‘यह देखते हुए कि विकास से जुड़े जोखिम अत्‍यधिक हैं, जबकि महंगाई से जुड़े जोखिम के अल्पकालिक होने की संभावना है, इसलिए मौद्रिक नीति समिति का यह मानना है कि अब आत्मविश्वास बढ़ाना एवं वित्तीय परिस्थितियों को और भी अधिक आसान बनाना आवश्यक हो गया है। यह किफायती दरों पर धन के प्रवाह को सुगम करेगा और फि‍र से निवेश का माहौल बनाएगा। इसे ही ध्‍यान में रखते हुए एमपीसी ने नीतिगत रेपो रेट को 4.4% से 0.40 प्रतिशत घटाकर 4.0% पर ला दिया है। श्री दास ने अनेक नियामकीय एवं विकासात्मक उपायों की भी घोषणा की जो नीतिगत दर में की गई कमी के लिए पूरक साबित होंगे और एक दूसरे को मजबूत भी करेंगे। घोषित किए जा रहे उपायों के लक्ष्य: वित्तीय प्रणाली और वित्तीय बाजारों को सुदृढ़ एवं तरल रखना और सुचारू रूप से चलाना सभी, विशेषकर उन लोगों की वित्त तक पहुंच सुनिश्चित करना, जिन्‍हें वित्तीय बाजार अपने से दूर रखने की कोशिश करते हैं वित्तीय स्थिरता को बनाए रखना बाजारों के कामकाज को बेहतर करने के उपाय सिडबी को पुनर्वित्त सुविधा 90 दिन और बढ़ा दी गई है लघु उद्योगों को किफायती ऋण की आपूर्ति को सक्षम बनाने के लिए आरबीआई ने 17 अप्रैल, 2020 को सिडबी को 90 दिनों की अवधि के लिए आरबीआई के नीतिगत रेपो रेट पर 15,000 करोड़ रुपये की विशेष पुनर्वित्त सुविधा देने की घोषणा की थी। इस सुविधा को अब 90 दिन और बढ़ा दिया गया है। स्वैच्छिक प्रतिधारण मार्ग के तहत विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के लिए नियमों में ढील स्वैच्छिक प्रतिधारण मार्ग (वीआरआर) दरअसल एक निवेश सुविधा है जो आरबीआई द्वारा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को प्रदान की जाती है और जो ज्‍यादा निवेश करने की प्रतिबद्धता के बदले में आसान नियमों की पेशकश करती है। नियमों में बताया गया है कि आवंटित निवेश सीमा का कम से कम 75% निवेश तीन माह के भीतर किया जाना चाहिए; निवेशकों और उनके संरक्षकों (कस्‍टोडियन) के सामने आ रही कठिनाइयों को देखते हुए अब समय सीमा को संशोधित कर छह माह कर दिया गया है। निर्यात और आयात में सहयोग करने के उपाय निर्यातक अब अधिक अवधि के लिए बैंक ऋणों का लाभ उठा सकते हैं बैंकों द्वारा निर्यातकों के लिए मंजूर लदान-पूर्व और लदान-बाद निर्यात ऋण की अधिकतम स्‍वीकार्य अवधि को 31 जुलाई, 2020 तक वितरण के लिए मौजूदा एक साल से बढ़ाकर 15 माह कर दिया गया है। एक्जिम बैंक के लिए ऋण की सुविधा आरबीआई गवर्नर ने भारत के विदेश व्यापार के वित्तपोषण, इसे सुविधाजनक बनाने और बढ़ावा देने हेतु एक्जिम बैंक के लिए 15,000 करोड़ रुपये के ऋण (लाइन ऑफ क्रेडिट) की घोषणा की है। ऋण की सुविधा 90 दिनों की अवधि के लिए दी गई है, जिसे एक वर्ष बढ़ाने का प्रावधान भी है। एक्जिम बैंक को विदेशी मुद्रा संसाधन संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने, विशेषकर अमेरिकी डॉलर अदला-बदली (स्वैप) सुविधा का लाभ उठाने में सक्षम बनाने के लिए ऋण दिया जा रहा है। आयातकों को आयात हेतु भुगतान करने के लिए अधिक समय भारत में सामान्य आयात (यानी सोने/हीरे और कीमती पत्थरों/आभूषणों के आयात को छोड़कर) के भुगतान की समयावधि को शिपमेंट की तारीख से छह माह से बढ़ाकर बारह माह कर दिया गया है। यह 31 जुलाई, 2020 को या उससे पहले किए गए आयात के लिए लागू होगा। वित्तीय मुश्किलें कम करने के उपाय

मुक्त आकाश निगरानी संधि चर्चा में क्यों? ट्रंप प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय भागीदारों को सूचित किया कि वह उस संधि से बाहर हो रहा है जिसके तहत 30 से अधिक देशों को एक-दूसरे के क्षेत्र में हथियारों के बिना निगरानी उड़ानों की अनुमति है। दशकों पहले यह व्यवस्था परस्पर विश्वास बढ़ाने और संघर्ष को टालने के लिए शुरू की गयी थी। अमेरिका का कहना है कि वह मुक्त आकाश संधि से बाहर होना चाहता है क्योंकि रूस समझौते का उल्लंघन कर रहा है। इसके अलावा उड़ानों के दौरान एकत्र तस्वीरें अमेरिका या वाणिज्यिक उपग्रहों से काफी कम लागत पर तुरंत प्राप्त की जा सकती हैं। हालांकि ऐसे आसार हैं कि संधि से अलग होने पर रूस के साथ अमेरिका के संबंधों में तनाव बढ़ सकता है। इसके अलावा उसके यूरोपीय सहयोगी और कांग्रेस के कुछ सदस्य भी नाराज हो सकते हैं। मुक्त आकाश निगरानी संधि की पृष्ठभूमि अमेरिकी राष्ट्रपति डी आइजनहावर ने पहली बार जुलाई 1955 में प्रस्ताव दिया था कि अमेरिका और तत्कालीन सोवियत संघ एक दूसरे के क्षेत्र में हवाई टोही उड़ानों की अनुमति दें। मास्को ने पहले उस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था। लेकिन राष्ट्रपति जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश ने मई 1989 में फिर से यह प्रस्ताव किया और जनवरी 2002 में यह संधि लागू हो गयी। अभी 34 देशों ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं। किर्गिस्तान ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं लेकिन उसने अभी तक इसकी अभिपुष्टि नहीं की है।इस संधि के तहत 1,500 से अधिक उड़ानों का संचालन किया गया है जिसका उद्देश्य सैन्य गतिविधि के बारे में पारदर्शिता को बढ़ावा देना और हथियारों के नियंत्रण तथा अन्य समझौतों की निगरानी करना है। संधि में सभी देश अपने सभी क्षेत्रों को निगरानी उड़ानों के लिए उपलब्ध कराने पर सहमत हैं, फिर भी रूस ने कुछ क्षेत्रों में उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिया है।

भारत मौसम विज्ञान की 7 सेवाओं को उमंग एप्‍लीकेशन पर प्रारंभ यूनीफाइड मोबाइल एप्‍लीकेशन फॉर न्‍यू-एज गवर्नेंस (उमंग) का 22 मई 2020 को पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय में सचिव डॉ एम.राजीवन ने आईएमडी के महानिदेशक डॉ. एम.मोहापात्र और एनईजीडी के अध्‍यक्ष एवं मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी श्री अभिषेक सिंह की मौजूदगी में उद्घाटन किया। क्या है उमंग उमंग भारत सरकार का ऑल-इन-वन एकल, एकीकृत, सुरक्षित, मल्‍टी-चैनल, मल्‍टी-प्‍लेटफॉर्म, बहु-भाषी, बहु-सेवा मोबाइल एप है, जिसे विभिन्‍न संगठनों (केंद्र और राज्‍य) की अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण सेवाओं तक पहुंच प्रदान करने वाले एक प्रबल बैक-एंड प्‍लेटफॉर्म द्वारा सक्षम बनाया गया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने समस्‍त सरकारी सेवाओं को एकल मोबाइल एप पर लाते हुए 2017 में उमंग एप का शुभारंभ किया था। इसका लक्ष्‍य सरकार को नागरिकों के मोबाइल फोन पर सुगम्‍य बनाना था। 127 विभागों और 25 राज्‍यों की उपयोगिता भुगतानों सहित लगभग 660 सेवाएं इस पर उपलब्‍ध हैं और कई अन्‍य को इस पर लाने की योजना है। भारत मौसम विभाग (आईएमडी) ने नवीनतम उपकरणों और प्रौद्योगिकियों के आधार पर मौसम पूर्वानुमान और चेतावनी सेवाओं के प्रसार में सुधार लाने के लिए हाल के वर्षों में विविध कदम उठाए हैं। इस पहल को और ज्‍यादा संवर्धित करने के लिए आईएमडी ने ‘’उमंग एप’’ का उपयोग करने के लिए डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का लाभ उठाया। निम्‍नलिखित 7 सेवाओं को उमंग एप्‍लीकेशन पर ऑनबोर्ड कराया गया है : वर्तमान मौसम : दिन में 8 बार वर्तमान तापमान, आर्द्रता, हवा की गति, 150 शहरों के लिए दिशा को अपडेट किया जाता है। सूर्योदय/सूर्यास्त और चन्‍द्रोदय/ चंद्रमा के अस्‍त होने की जानकारी भी दी जाती है। नाओकास्‍ट : आईएमडी के राज्य मौसम विज्ञान केंद्रों द्वारा भारत के लगभग 800 स्टेशनों और जिलों के लिए स्थानीय मौसम संबंधी घटनाओं और उनकी गहनता की तीन घंटे पर चेतावनी दी जाती है। गंभीर मौसम के मामले में, इसका प्रभाव भी चेतावनी में शामिल किया जाता है। शहर पूर्वानुमान : भारत के लगभग 450 शहरों के पिछले 24 घंटे और 7 दिन के मौसम के हालात का पूर्वानुमान दिया जाता है। वर्षा की सूचना : अखिल भारतीय जिला वर्षा सूचना दैनिक, साप्‍ताहिक, मासिक और संचयी श्रृंखलाएं उपलब्‍ध हैं। पर्यटन पूर्वानुमान : पर्यटन की दृष्टि से महत्‍वपूर्ण भारत के लगभग 100 शहरों के पिछले 24 घंटे और 7 दिन के मौसम के हालात का पूर्वानुमान दिया जाता है। चेतावनियां : नागरिकों को आसन्‍न खतरनाक मौसम की चेतावनी देने के लिए अलर्ट जारी किए जाते हैं। ये अलर्ट कलर कोड में होते हैं। रेड, ऑरेंज और येलो अलर्ट लेवल हैं, जिनमें रेड सबसे ज्‍यादा गंभीर श्रेणी है। सभी जिलों के लिए अगले पांच दिनों के लिए दिन में दो बार जारी किए जाते हैं। चक्रवात : चक्रवात संबंधी चेतावनियां और अलर्ट चक्रवाती तूफान का मार्ग और तट पार करने का संभावित समय और स्‍थान उपलब्‍ध कराते हैं। प्रभाव आधारित चेतावनियां, क्षेत्र/जिला वार जारी की जाती हैं, ताकि असुरक्षित स्‍थानों से लोगों को सुरक्षित स्‍थानों पर भिजवाने की उपयुक्‍त तैयारियां की जा सकें।

भारतीय रेलवे ने 24 मई 2020 की सुबह 10 बजे तक 2813 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई हैं, 37 लाख से भी अधिक यात्रियों ने सफर किया रेलवे नेटवर्क पर ट्रैफिक जाम की स्थिति काफी सुधर गई है और ट्रेनें चलने की गति भी अत्‍यंत तेज हो गई है 80 प्रतिशत श्रमिक स्पेशल ट्रेनें उत्तर प्रदेश और बिहार के विभिन्न गंतव्यों के लिए रवाना हुई हैं इन्‍हीं गंतव्यों की ओर अधिकतर ट्रेनों का परिचालन होने से रेलवे नेटवर्क पर जाम की स्थिति बन गई रेलवे स्टेशनों पर स्वास्थ्य और सामाजिक दूरी संबंधी विभिन्न प्रोटोकॉल के कारण यात्रियों के उतरने में ज्‍यादा समय लगने से भी टर्मिनलों पर भीड़ बढ़ गई और नेटवर्क पर जाम जैसी स्थिति बन गई रेलवे नेटवर्क पर जाम को कम करने के लिए कुछ ट्रेनों को मथुरा, झारसुगुड़ा के रास्ते चलाया गया रेलवे बोर्ड स्तर, जोनल रेलवे स्तर और संभागीय स्तर पर चौबीसों घंटे निगरानी आईआरसीटीसी और रेलवे ने श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में भोजन एवं पानी की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने और यात्रियों की असुविधा को कम करने के लिए संसाधन जुटाए हैं भारतीय रेलवे ने 24 मई 2020 की सुबह 10 बजे तक 37 लाख से भी अधिक यात्रियों को लेकर 2813 से ज्‍यादा श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई हैं। लगभग 60 प्रतिशत ट्रेनें गुजरात, महाराष्ट्र एवं पंजाब से रवाना हुईं और ये मुख्‍य रूप से उत्तर प्रदेश एवं बिहार की तरफ जा रही हैं। 80 प्रतिशत श्रमिक स्पेशल ट्रेनें उत्तर प्रदेश और बिहार के विभिन्न गंतव्यों (उत्तर प्रदेश के लिए 1301 और बिहार के लिए 973) के लिए रवाना हुई हैं। उत्तर प्रदेश में ज्‍यादातर गंतव्य लखनऊ-गोरखपुर सेक्टर और बिहार में अधि‍कतर गंतव्य पटना के आसपास हैं। कल से ही चल रही 565 रेलगाड़ियों में से 266 ट्रेनें बिहार और 172 ट्रेनें उत्तर प्रदेश जा रही थीं। इन्‍हीं गंतव्यों की ओर अधिकतर ट्रेनों का परिचालन होने से रेलवे नेटवर्क पर जाम की स्थिति बन गई। इसके अलावा, रेलवे स्टेशनों पर स्वास्थ्य और सामाजिक दूरी संबंधी विभिन्न प्रोटोकॉल के कारण यात्रियों के उतरने में ज्‍यादा समय लगने से भी टर्मिनलों पर भीड़ बढ़ जाती है और इस वजह से भी रेलवे नेटवर्क पर जाम की स्थिति बन जाती है। रेलवे नेटवर्क पर जाम को कम करने के लिए कुछ ट्रेनों को मथुरा, झारसुगुड़ा के रास्ते चलाया गया। इसके अलावा, भारी यातायात वाले मार्गों पर भीड़ या जाम से बचने के लिए रूट युक्तिकरण आदेश जारी किया गया है। रेलवे बोर्ड स्तर, जोनल रेलवे स्तर और संभागीय स्तर पर चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ट्रेनें देरी से न चलें। श्रमिक स्‍पेशल ट्रेनों का समय पर चलना सुनिश्चित करने के लिए ट्रेन चलाने वाले कर्मचारियों को भी हिदायत दी गई है। इन प्रयासों की बदौलत रेलवे नेटवर्क पर ट्रैफिक जाम की स्थिति काफी सुधर गई है और ट्रेनें चलने की गति भी अत्‍यंत तेज हो गई है। पूरब की ओर जाने वाली ट्रेनों की संख्‍या में काफी वृद्धि होने के कारण रेलवे नेटवर्क पर जाम की स्थिति बन गई एवं ट्रेनें चलने में देरी हुई और इस कारण भोजन वितरण की निर्धारित समय-सारणी प्रभावित हुई। आईआरसीटीसी और रेलवे ने श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में भोजन एवं पानी की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने और यात्रियों की असुविधा को कम करने के लिए संसाधन जुटाए हैं।

डिजिटल इंडिया की सफलता गरीब और विकासशील देशों के लिए आशा की किरण: कॉमनवेल्थ महासचिव प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किये गए डिजिटल इंडिया कार्यक्रम की सफलता को हाल ही में कॉमनवेल्थ की महासचिव पैट्रिशिया स्कॉटलैंड ने जम कर सराहा है। उन्होंने भारत द्वारा डिजिटल टेक्नोलॉजी के द्वारा आम लोगों के जीवन में लाये सुधारों को गरीब और विकासशील देशों के लिए आशा और उम्मीद की नई किरण बताया है। एक निजी चैनल को दिए एक इंटरव्यू में कॉमनवेल्थ की महासचिव पैट्रिशिया स्कॉटलैंड ने बताया कि जिस प्रकार से भारत ने डिजिटल इंडिया के द्वारा जनता की आकांक्षाओं को तकनीक के नए प्रयोगों के द्वारा नए अवसर सृजित कर और डिजिटल सेवाओं को कम दाम में लोगों तक पहुंचा कर सफलता पाई है वो गरीब और विकासशील देशों के लिए उम्मीद की नई किरण ले कर आया है। उन्होंने कहा, "यदि आप देखें तो हमारे गरीब देश, हमारे छोटे देश और हमारे विकासशील देश विकसित देशों की सफलता को आशा भरी नज़रों से देखते तो हैं लेकिन इन सफलताओं का अपने देशों में अनुसरण करने से डरते हैं क्योंकि इनकी कीमत बहुत अधिक होती है। लेकिन जब वे भारत की ओर देखते हैं और पाते हैं कि भारत ने इन सफलताओं को कम कीमत वाली टेक्नोलॉजी के साथ हासिल किया है तो उन्हें बड़ी उम्मीद दिखाई देती है। ये आशा का संचार करता है।" उन्होंने बताया कि जनवरी 2020 में अपने भारत दौरे के समय उन्होंने भारत सरकार के मंत्रियों और टेक्नोलॉजी से जुड़े विशेषज्ञों से बात की थी। इस दौरान उन्होंने पाया की भारत गरीब और कमजोर लोगों को सहायता करने के लिए कई प्रयास कर रहा है। "मैं इन सभी प्रयासों का स्वागत करती हूँ", - उन्होंने बताया। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री रवि शंकर प्रसाद के डिजिटल इंडिया को सफल बनाने में दिए योगदान की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें श्री प्रसाद की अग्रणी भूमिका रही है। उन्होंने ये भी कहा कि श्री प्रसाद के प्रयासों ने कॉमनवेल्थ के देशों में एक नई ऊर्जा का संचार किया है।

एचआईएल (इंडिया) ईरान को टिड्डी नियंत्रण कीटनाशक उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह से तैयार इस केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम की क्रेडिट रेटिंग ‘बीबी’ से बढ़ाकर ‘बीबीबी- ’ कर दी गई है कोविड-19 के कारण किए गए लॉकडाउन से उत्‍पन्‍न लॉजिस्टिक्स एवं अन्य चुनौतियों के बावजूद रसायन और उर्वरक मंत्रालय के रसायन एवं पेट्रोरसायन विभाग के अधीनस्‍थ सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (पीएसयू) ‘एचआईएल (इंडिया) लिमिटेड’ ने कृषक समुदाय के लिए बिल्‍कुल ठीक समय पर कीटनाशकों का उत्पादन और आपूर्ति सुनिश्चित की है। एचआईएल अब भारत और ईरान के बीच सरकारी स्‍तर पर हुई व्यवस्था के तहत ईरान को टिड्डी नियंत्रण कार्यक्रम के लिए 25 एमटी मैलाथियान टेक्निकल का उत्पादन और आपूर्ति करने की प्रक्रिया में है। केंद्रीय विदेश मंत्रालय (एमईए) ने इस वस्तु यानी कीटनाशक का उत्‍पादन कर इसकी आपूर्ति ईरान को करने के लिए एचआईएल से संपर्क किया है। यही नहीं, इस केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम की क्रेडिट रेटिंग ‘बीबी’ से बढ़ाकर ‘बीबीबी- ’ कर दी गई है, जो एक ‘स्थिर निवेश ग्रेड’ को दर्शाती है। इस कंपनी ने लैटिन अमेरिकी देश पेरु को 10 मीट्रिक टन फफूंद नाशक ‘मैंकोजेब’ का निर्यात किया है। इतना ही नहीं, 12 और मीट्रिक टन मैंकोजेब का निर्यात अगले एक सप्ताह में किया जाएगा। इसके अलावा, एचआईएल ने टिड्डी नियंत्रण कार्यक्रम के लिए राजस्थान और गुजरात को मैलाथियान टेक्निकल की आपूर्ति करने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। एचआईएल ने पिछले सप्ताह तक 67 मीट्रिक टन मैलाथियान टेक्निकल का उत्‍पादन और आपूर्ति की थी। इतना ही नहीं, एचआईएल ने डेंगू और चिकनगुनिया नियंत्रण कार्यक्रम के लिए नगर निगमों को मैलाथियान टेक्निकल की आपूर्ति की। परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा एनवीबीडीसीपी कार्यक्रमों के तहत दिए गए आपूर्ति संबंधी ऑर्डर के अनुसार राजस्थान, पंजाब, ओडिशा एवं आंध्र प्रदेश जैसे विभिन्न राज्यों को 314 मीट्रिक टन डीडीटी 50% डब्‍ल्‍यूडीपी की आपूर्ति की गई। कंपनी 252 मीट्रिक टन की शेष मात्रा को अन्य राज्य को आपूर्ति करने की प्रक्रिया में है। एचआईएल ने लॉकडाउन की अवधि के दौरान 15 मई 2020 तक 120 मीट्रिक टन मैलाथियान टेक्निकल, 120.40 मीट्रिक टन डीडीटी टेक्निकल, 288 मीट्रिक टन डीडीटी 50% डब्‍ल्‍यूडीपी, 21 मीट्रिक टन एचआईएलगोल्ड (जल में घुलनशील उर्वरक), 12 मीट्रिक टन ‘मैंकोजेब’ फफूंद नाशक (निर्यात के लिए) और 35 मीट्रिक टन कृषि रसायन फॉर्मूलेशनों का उत्पादन किया, ताकि कृषक समुदाय यानी किसानों और स्वास्थ्य विभाग को लॉकडाउन की वजह से परेशानी का सामना न करना पड़े।