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निसर्ग ही क्यों ? किस देश ने रखा नाम और क्या होती है प्रक्रिया आइये जानते हैं....
तूफ़ान का नाम तय करने की एक पूरी प्रक्रिया होती है और भारतीय मौसम विभाग के भीतर रिजनल स्पेशलाइज़्ड मेटेरोलॉजिकल सेंटर तूफ़ानों का नामकरण करता है. ये सेंटर तूफ़ानों और उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के नाम रखने वाली युक्त राष्ट्र संघ की एजेंसी वर्ल्ड मेटीरियोलॉजिकल ऑर्गनाइज़ेशन (डब्लूएमओ) अप्रूव्ड है.
लेकिन उत्तरी हिंद महासागर में उठने वाले चक्रवातों जो देश तूफ़ान से प्रभावित होते हैं वो तूफ़ानों के लिए नाम सुझाते हैं.
जब डब्लूएमओ ने सितंबर 2004 में संबंधित देशों से अपने-अपने क्षेत्र में आने वाले चक्रवात का नाम ख़ुद रखने को कहा तब भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, मालदीव, म्यांमार, ओमान, श्रीलंका और थाईलैंड को मिलाकर कुल आठ देशों ने एक बैठक में हिस्सा लिया और तूफ़ानों के नाम तक करने की प्रक्रिया शुरू की.
उस समय हर देश ने आने वाले चक्रवात के लिए आठ नाम सुझाए और इस तरह तूफ़ानों के लिए 64 नामों की एक सूची तैयार हुई थी.
नाम देने की शर्त ये होती रही है कि ये नाम छोटे, समझ आने लायक, सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील और भड़काऊ नहीं हों.
लेकिन बाद में इस समूह में और देश शामिल हुए और देशों की कुल संख्या 13 हो गई. और सूची में संभावित तूफ़ानों के और नाम जुड़ते गए.
सूची के अनुसार अंफन के साथ सूची के सभी 64 नाम ख़त्म हो गए. तूफ़ान निसर्ग 65वां तूफ़ान है यानी 64 तूफानों के नामों के बाद जो नई लिस्ट बनी उसमें ये पहला तूफ़ान है.
तूफ़ान निसर्ग बांग्लादेश का सुझाया नाम है जो एक कमिटी के फ़ैसले के बाद सुझाया गया था.
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