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RAJASTHANI

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थार 🥰😍

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RBSC क्लास 6-10 राजस्थान इतिहास कला कुल प्रश्न-2029 RPSC & RSSB बोर्ड की सभी भर्तियों के लिए उपयोगी मुक्ति का मार्ग है इसका प्रिंट लेकर पढ़ लो चतुर्थ श्रेणी भर्ती अध्यापक भर्ती इस पीडीएफ से पशु परिचभर्ती में कुल 131 प्रश्न में से 125 प्रश्न आए थे

RBSC क्लास 6-10 राजस्थान इतिहास कला कुल प्रश्न-2029 RPSC & RSSB बोर्ड की सभी भर्तियों के लिए उपयोगी मुक्ति का मार्ग है इसका प्रिंट लेकर पढ़ लो चतुर्थ श्रेणी भर्ती अध्यापक भर्ती इस पीडीएफ से पशु परिचभर्ती में कुल 131 प्रश्न में से 125 प्रश्न आए थे

एकीकरण लाइन - राजधानियां ( अलवर , कोटा , उदयपुर , जयपुर ) 2nd लाइन - उद्घाटन कर्ता ( गाडविल , गाडविल , नेहरू , वल्लभ भाई पटेल
एकीकरण लाइन - राजधानियां ( अलवर , कोटा , उदयपुर , जयपुर ) 2nd लाइन - उद्घाटन कर्ता ( गाडविल , गाडविल , नेहरू , वल्लभ भाई पटेल ) 3rd लाइन - राजप्रमुख ( उदयभान सिंह , भीम सिंह , भूपाल सिंह , मानसिंह ) 4th लाइन - मुख्यमंत्री ( शोमाराम , गोकुल लाल असावा , माणिक्यलाल वर्मा , हीरालाल शास्त्री )

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नवीन_हिंदी_व्याकरण_BOOK_RBSE_2022_69ab93e3_8bbe_4b0c_a774_dabf1cd9bdbc.pdf

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चलती फिरती हुई आंखो से अजां देखी है, मैंने जन्नत तो नहीं देखी, मां देखी है। Happy Mother's Day❤️

राजस्थानी भाषा का साहित्यिक रूप – डिंगल और पिंगल • मध्यकालीन राजस्थानी भाषा में गीत & दूहा प्रमुख छंद थे।
राजस्थानी भाषा का साहित्यिक रूप – डिंगल और पिंगल • मध्यकालीन राजस्थानी भाषा में गीत & दूहा प्रमुख छंद थे।

राजस्थानी साहित्य में प्रथम
राजस्थानी साहित्य में प्रथम

राजस्थानी साहित्य की प्रमुख विधाएँ – गद्य , पद्य , गद्य-पद्य (चंपू)
राजस्थानी साहित्य की प्रमुख विधाएँ – गद्य , पद्य , गद्य-पद्य (चंपू)

घर में बैठे है , सीमावर्ती है तो ये खतरा तो सदैव रहता है । इस समय ये खतरा काफ़ी अधिक है। यहाँ नागरिक बिल्कुल भयभीत नहीं है , और होना भी नहीं चाहिए और होंगे भी नहीं । हमें सीमावर्ती होने का गर्व है । हाँ उम्मीद करते है लापरवाह न बनें । क्योंकि लापरवाही जीवन को ले जा सकती है। इस समय कोरोना समय की फीलिंग आ रही है , उस समय भयभीत थे , मगर इस समय जोश और उत्साह में है , शत्रु के प्रति क्रोध है , सेना पर भरोसा और गर्व है। राष्ट्र के नेतृत्व पर विश्वास है । इस समय सभी साथियों से निवेदन की सरकारी गाइडलाइंस का अनुसरण करें , न्यूज़ चैनल और वाहियात से सस्ते यूट्यूबर और ट्विटर पर गंदगी फैलाने वाले नमूनों का पर बिल्कुल भरोसा न करें , ये लोग व्यूज़ के चक्कर में कुछ भी लिख लेते है । इस कारण ख़बरें न फॉरवर्ड करें न ख़बरों के पढ़कर पैनिक होवें । जय हिन्द व हिन्द की सेना ❤️

महाराणा प्रताप जयंती विशेष • महाराणा प्रताप ने "स्वभूमिध्वंस की नीति" का अनुसंरण किया था [Jail Parhari 2018] स्वभूमिध्वन्स का अर्थ है कि हल्दीघाटी युद्ध के बाद महाराणा ने अपने आसपास के खेतों की जमीन नष्ट कर दिया जिससे मुगलों को राशन नहीं मिल सके। • राणा प्रताप ने 1585 में अपनी नई राजधानी चावण्ड में स्थापित की। जो राणा प्रताप के काल में 12 वर्षो तक यानी 1597 ई. तक राजधानी रही थी। बाद में उनके सुपुत्र अमरसिंह प्रथम के काल में 18 वर्षों तक चावंड की राजधानी रही थी, इस प्रकार चावंड 1585 से 1615 ई. तक यानी 30 वर्षो तक मेवाड़ की राजधानी रही थी।

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*दुआ कीजिए उन माँ के वीर सपुतों के लिए जो आज आपकी सुरक्षा के लिए बॉर्डर पर डटे हैं* 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳 *जय जवान जय जवान* 🫂🫂🫂🫂🫂🫂🫂

एक जिम्मेदार नागरिक बनें...!! भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना देश की सुरक्षा में हर पल सतर्क हैं। यदि आपके क्षेत्र में सैन्य मूवमेंट — जैसे सेना के काफिले, वाहन या विमान — दिखाई दें, तो कृपया: • उसका वीडियो या फोटो न बनाएं। • उसे सोशल मीडिया पर साझा न करें। • और सबसे जरूरी — ऐसी किसी भी जानकारी को फॉरवर्ड न करें। इस तरह की जानकारियाँ दुश्मन देशों के लिए एक साधन बन सकती हैं, जिससे वे हमारी सुरक्षा व्यवस्था का विश्लेषण कर सकें। साथ ही, मीडिया या सोशल मीडिया पर फैल रही किसी भी अपवाह (rumor) पर ध्यान न दें। बिना आधिकारिक पुष्टि के कोई भी खबर न मानें और न फैलाएं। अफवाहें भ्रम फैलाती हैं और देश की सुरक्षा को नुकसान पहुंचा सकती हैं। देशभक्ति का मतलब है — जागरूकता, जिम्मेदारी और संयम। चलो, एक सच्चे देशभक्त बनें — सोच-समझकर ही बोलें और साझा करें। जय हिंद !! वंदे मातरम् !!

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*मुंशी प्रेमचंद जी की एक "सुंदर कविता", जिसके एक-एक शब्द को, बार-बार "पढ़ने" को "मन करता" है-_* ख्वाहिश नहीं, मुझे मशहूर होने की," _आप मुझे "पहचानते" हो,_ _बस इतना ही "काफी" है।_😇 _अच्छे ने अच्छा और_ _बुरे ने बुरा "जाना" मुझे,_ _जिसकी जितनी "जरूरत" थी_ _उसने उतना ही "पहचाना "मुझे!_ _जिन्दगी का "फलसफा" भी_ _कितना अजीब है,_ _"शामें "कटती नहीं और_ -"साल" गुजरते चले जा रहे हैं!_ _एक अजीब सी_ _'दौड़' है ये जिन्दगी,_ -"जीत" जाओ तो कई_ -अपने "पीछे छूट" जाते हैं और_ _हार जाओ तो,_ _अपने ही "पीछे छोड़ "जाते हैं!_😥 _बैठ जाता हूँ_ _मिट्टी पे अक्सर,_ _मुझे अपनी_ _"औकात" अच्छी लगती है।_ _मैंने समंदर से_ _"सीखा "है जीने का तरीका,_ _चुपचाप से "बहना "और_ _अपनी "मौज" में रहना।_ _ऐसा नहीं कि मुझमें_ _कोई "ऐब "नहीं है,_ _पर सच कहता हूँ_ _मुझमें कोई "फरेब" नहीं है।_ _जल जाते हैं मेरे "अंदाज" से_, _मेरे "दुश्मन",_ -एक मुद्दत से मैंने_ _न तो "मोहब्बत बदली"_ _और न ही "दोस्त बदले "हैं।_ _एक "घड़ी" खरीदकर_, _हाथ में क्या बाँध ली,_ _"वक्त" पीछे ही_ _पड़ गया मेरे!_😓 _सोचा था घर बनाकर_ _बैठूँगा "सुकून" से,_ -पर घर की जरूरतों ने_ _"मुसाफिर" बना डाला मुझे!_ _"सुकून" की बात मत कर- -बचपन वाला, "इतवार" अब नहीं आता!_😓😥 _जीवन की "भागदौड़" में_ _क्यूँ वक्त के साथ, "रंगत "खो जाती है ?_ -हँसती-खेलती जिन्दगी भी_ _आम हो जाती है!_😢 _एक सबेरा था_ _जब "हँसकर "उठते थे हम,_😊 -और आज कई बार, बिना मुस्कुराए_ _ही "शाम" हो जाती है!_😓 _कितने "दूर" निकल गए_ _रिश्तों को निभाते-निभाते,_😘 _खुद को "खो" दिया हमने_ _अपनों को "पाते-पाते"।_😥 _लोग कहते हैं_ _हम "मुस्कुराते "बहुत हैं,_😊 _और हम थक गए_, _"दर्द छुपाते-छुपाते"!😥😥 _खुश हूँ और सबको_ _"खुश "रखता हूँ,_ _ *"लापरवाह" हूँ ख़ुद के लिए_* *-मगर सबकी "परवाह" करता हूँ।_😇🙏* *_मालूम है_* *कोई मोल नहीं है "मेरा" फिर भी_* *कुछ "अनमोल" लोगों से_* *-"रिश्ते" रखता हूँ।*