ar
Feedback
वैदिक श्रौतस्मार्त्त-कोशः 🌼

वैदिक श्रौतस्मार्त्त-कोशः 🌼

الذهاب إلى القناة على Telegram

श्रुतिस्तु वेदो विज्ञेयो धर्मशास्त्रं तु वै स्मृतिः। ते सर्वार्थेष्वमीमांस्ये ताभ्यां धर्मो हि निर्बभौ॥ (मनु० २.१०)

إظهار المزيد
2 296
المشتركون
-224 ساعات
لا توجد بيانات7 أيام
-130 أيام
أرشيف المشاركات
॥ जय श्रीजगन्नाथ ॥ ॥ श्रीहरिहरौ विजयतेतराम् ॥ महत्त्वपूर्ण सूचना :– सन् 1484 में मेहमूद बेगाड़ द्वारा ध्वस्त किए गए देवालयके पुनर्निर्माणका कार्य सकलकल्याणस्वरूप, साक्षाच्छ‌ङ्कररूप, धर्मब्रह्मके मूर्तिमान् विग्रह, पूज्यपादधर्महृदयमहाभाग श्रीसद्गुरुदेव भगवान् ऋग्वेदीय-पूर्वाम्नाय श्रीपुरुषोत्तमपुरीक्षेत्रस्थ श्रीगोवर्द्धनमठ-भोगवर्द्धनपीठाधीश्वर, श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्यवर्य श्रीमज्जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वामिश्रीनिश्चलानन्दसरस्वतीजीमहाराज जी @govardhanmath के दिव्यातिदिव्य मङ्गलमय आशीर्वाद, प्रेरणा, मार्गदर्शन एवं सानिध्यमें 'रामदूत पुनर्निर्माण समिति' (रामदूत-रीस्टोर्स)‌ @ramdootrestrore संस्था द्वारा सम्पन्न हो रहा है। जगत्प्रभवके कारण, जटाजूटमें चन्द्रावलि धारण करनेवाले चन्द्रकलाधर त्रिपुरारि प्रभु श्रीमहादेव शिवशङ्करके लिङ्गस्वरूपकी प्राण-प्रतिष्ठाके इस महा-महोत्सवमें, जोकि आङ्ग्ल दिनाङ्क अनुसार 8 मार्च, 2026 को होना सुनिश्चित हुआ है, श्रीमज्जगद्गुरुमहाभाग सपरिकर-सपार्षद स्वयं पधार रहे हैं, जोकि क्षेत्रके एवं समस्त आस्तिक सनातनधर्मावलम्बी महानुभावोंके लिए अत्यन्त हर्ष, गौरव एवं सौभाग्य का विषय है। यह ध्यान देना आवश्यक है कि इस क्षेत्रके आसपास वनाञ्चलमें निवास करने वाले, जिन्हें आधुनिककालके मेषीप्रापातान्धपरम्परानुयाईजन 'आदिवासी' कहते हैं, ऐसे हिन्दुधर्मावलम्बी वनवासी बहुतायत संख्यामें हैं। परमपूज्य श्रीमज्जगद्गुरु-शङ्कराचार्य महाभागके आदेशानुसार इस मन्दिरको 'धार्मिक-दुर्ग' बनानेके लिए यहाँ वैदिकक्रमसे सञ्चालित होने वाले गुरुकुल, श्रीअन्नपूर्णाक्षेत्र, शास्त्र-शाला, सन्त-निवास, यात्री-निवास, यज्ञ-शाला तथा गोशाला की स्थापना भी होगी। 540 वर्षोंतक यह जो दिव्य-मन्दिर अपने बृहद्-इतिहासको कुछ टीलोंपर संजोये रहा; वह परमपूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य भगवान् के मार्गदर्शनमें शीघ्र ही अपने प्राच्य स्वरूपको प्राप्तकर, वेदमार्तण्डस्वरूप श्रीमज्जगद्‌गुरु श्रीमच्छङ्करभगवत्पादाचार्य की अखण्ड एवं अविच्छिन्न परम्पराके निर्वहन् हेतु देदीप्यमान् दीपस्तम्भके रूपमें स्थापित होगा। 'हर घर हिन्दुराष्ट्र' महा-अभियान के अन्तर्गत 18 ग्राम तथा निकटवर्ती क्षेत्रके लगभग 5000 हिन्दुधर्मावलम्बी बान्धव इस महायज्ञमें सम्मिलित होकर श्रीशङ्कराचार्यके सैनिकके रूपमें वैदिकधर्म-ज्योतिके प्रचार-प्रसारके लिए कृतसङ्कल्पित होंगे। @govardhanmath ॥ श्रीशङ्कराचार्यो विजयतेतराम् ॥ ॥ हर हर शङ्कर, जय जय शङ्कर ॥

हर हर शङ्कर। जय जय शङ्कर॥ श्रीशङ्कराचार्यो विजयतेतराम्।
हर हर शङ्कर। जय जय शङ्कर॥ श्रीशङ्कराचार्यो विजयतेतराम्।

ऋग्वेदीय पूर्वाम्नाय श्रीगोवर्द्धनमठ पुरीपीठ द्वारा सञ्चालित वेदपाठशाला में प्रवेश हेतु इच्छुक अभ्यर्थी 15 जून 2026 तक आवेदन
ऋग्वेदीय पूर्वाम्नाय श्रीगोवर्द्धनमठ पुरीपीठ द्वारा सञ्चालित वेदपाठशाला में प्रवेश हेतु इच्छुक अभ्यर्थी 15 जून 2026 तक आवेदन कर सकते है।

जगत्पिता सच्चिदानन्दस्वरूप सर्वेश्वर भगवान् श्रीशिवके निर्गुण-निराकार-स्वरूपसे सगुण-साकार ज्वालामालासहस्राढ्य ज्योतिर्मय-शिवल
जगत्पिता सच्चिदानन्दस्वरूप सर्वेश्वर भगवान् श्रीशिवके निर्गुण-निराकार-स्वरूपसे सगुण-साकार ज्वालामालासहस्राढ्य ज्योतिर्मय-शिवलिङ्ग रूपमें भक्तानुग्रार्थ अवतरित होनेकी पावन तिथि - श्रीश्रीमहाशिवरात्रिकी समस्त सनातनवैदिकधर्मावलम्बियोंको अनन्तानन्त मङ्गलमय शुभकामनाएँ। आज येन-केन-प्रकारेण यथासामर्थ्य शास्त्रोक्त विधि-विधानपूर्वक शिवदर्शन, शिवपूजन, शिवलिङ्गार्चन, अभिषेकादि करके सभी कृतार्थता प्राप्त करें। सबका मङ्गल हो... 🪷 नमः शिवाय शान्ताय त्रिपुरालिङ्गिताय च। प्रत्यक्चैतन्यरूपाय महते परमात्मने॥

Varṇārthapārijāta.pdf1.36 MB

Repost from N/a
जगद्गुरु श्रीशङ्कराचार्य गोवर्द्धनमठ-पुरीपीठाधीश्वरजी महाराज के सानिध्य में अखण्ड भारत के प्रथम ग्राम हिन्दुराष्ट्र के रूप में घोषित होने जा रहे हैं 🔥🔥🚩 https://www.instagram.com/reel/DUCiXTGEu8l/

📌 ध्यातव्य तथ्य: वर्तमानमें केवल दो ही मान्य प्रामाणिक जगद्गुरु श्रीशङ्कराचार्य आम्नायपीठाधीश्वर महाराज हैं – अनन्तश्रीसमलङ्
+1
📌 ध्यातव्य तथ्य: वर्तमानमें केवल दो ही मान्य प्रामाणिक जगद्गुरु श्रीशङ्कराचार्य आम्नायपीठाधीश्वर महाराज हैं – अनन्तश्रीसमलङ्कृत ऋग्वेदीय पूर्वाम्नाय श्रीगोवर्द्धनमठ-पुरीपीठाधीश्वर श्रीमज्जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वामिश्रीनिश्चलानन्दसरस्वतीजी महाभाग। अनन्तश्रीसमलङ्कृत यजुर्वेदीय दक्षिणाम्नाय श्रीशृङ्गेरी-शारदापीठाधीश्वर श्रीमज्जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वमिश्रीभारतीतीर्थजी महाभाग।

📌 ध्यातव्य तथ्य: वर्तमानमें केवल दो ही मान्य प्रामाणिक जगद्गुरु श्रीशङ्कराचार्य आम्नायपीठाधीश्वर महाराज हैं – अनन्तश्रीसमलङ्
+1
📌 ध्यातव्य तथ्य: वर्तमानमें केवल दो ही मान्य प्रामाणिक जगद्गुरु श्रीशङ्कराचार्य आम्नायपीठाधीश्वर महाराज हैं – अनन्तश्रीसमलङ्कृत ऋग्वेदीय पूर्वाम्नाय श्रीगोवर्द्धनमठ-पुरीपीठाधीश्वर श्रीमज्जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वामिश्रीनिश्चलानन्दसरस्वतीजी महाभाग। अनन्तश्रीसमलङ्कृत यजुर्वेदीय दक्षिणाम्नाय श्रीशृङ्गेरी-शारदापीठाधीश्वर श्रीमज्जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वमिश्रीभारतीतीर्थजी महाभाग।

“धर्म पर संकट उपस्थित होने की स्थिति में हिमालय में बैठे सिद्ध पुरुषों को भी राजनीति से निडर होकर आगे आना चाहिए। कोई कारण नही
“धर्म पर संकट उपस्थित होने की स्थिति में हिमालय में बैठे सिद्ध पुरुषों को भी राजनीति से निडर होकर आगे आना चाहिए। कोई कारण नहीं है कि जब नास्तिकों को भी सफलता मिलती है तब धर्मनिष्ठ भगवत्परायण भक्तों को सफलता नहीं मिलेगी। केवल उत्साह एवं तीव्र प्रयत्न की कमी है। उसके सम्पन्न होते ही सफलता निश्चित है।” – अनन्तश्रीविभूषित यतिचक्रचूडामणि अभिनवशङ्कर सर्वभूतहृदय वेदभाष्यकार धर्मसम्राट् परमपूज्य स्वामी श्रीकरपात्रीजी महाराज।

“धर्म पर संकट उपस्थित होने की स्थिति में हिमालय में बैठे सिद्ध पुरुषों को भी राजनीति से निडर होकर आगे आना चाहिए। कोई कारण नही
“धर्म पर संकट उपस्थित होने की स्थिति में हिमालय में बैठे सिद्ध पुरुषों को भी राजनीति से निडर होकर आगे आना चाहिए। कोई कारण नहीं है कि जब नास्तिकों को भी सफलता मिलती है तब धर्मनिष्ठ भगवत्परायण भक्तों को सफलता नहीं मिलेगी। केवल उत्साह एवं तीव्र प्रयत्न की कमी है। उसके सम्पन्न होते ही सफलता निश्चित है।” – अनन्तश्रीविभूषित यतिचक्रचूडामणि अभिनवशङ्कर सर्वभूतहृदय वेदभाष्यकार धर्मसम्राट् परमपूज्य स्वामी श्रीकरपात्रीजी महाराज।