𝗩𝗶𝗸𝗿𝗮𝗺 𝗦𝗶𝗹𝗮𝘆𝗰𝗵
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📈 نظرة تحليلية على قناة تيليجرام 𝗩𝗶𝗸𝗿𝗮𝗺 𝗦𝗶𝗹𝗮𝘆𝗰𝗵
تُعد قناة 𝗩𝗶𝗸𝗿𝗮𝗺 𝗦𝗶𝗹𝗮𝘆𝗰𝗵 (@vikramsilaych) في القطاع اللغوي الهندية لاعباً نشطاً. يضم المجتمع حالياً 17 117 مشتركاً، محتلاً المرتبة 11 729 في فئة التعليم والمرتبة 24 533 في منطقة الهند.
📊 مؤشرات الجمهور والحراك
منذ تأسيسه في невідомо، حقق المشروع نمواً سريعاً وجمع 17 117 مشتركاً.
بحسب آخر البيانات بتاريخ 31 يوليو, 2026، تحافظ القناة على نشاط مستقر. خلال آخر 30 يوماً تغيّر عدد الأعضاء بمقدار -320، وفي آخر 24 ساعة بمقدار -18، مع بقاء الوصول العام مرتفعاً.
- حالة التحقق: غير موثّقة
- معدل التفاعل (ER): يبلغ متوسط تفاعل الجمهور 77.03%. وخلال أول 24 ساعة من النشر يحصد المحتوى عادةً 29.46% من ردود الفعل نسبةً إلى إجمالي المشتركين.
- وصول المنشورات: يحصل كل منشور على متوسط 13 184 مشاهدة. وخلال اليوم الأول يجمع عادةً 5 042 مشاهدة.
- التفاعلات والاستجابة: يتفاعل الجمهور بانتظام؛ متوسط التفاعلات لكل منشور يبلغ 12.
- الاهتمامات الموضوعية: يركز المحتوى على مواضيع رئيسية مثل सेना, सिंह, परीक्षा, युद्ध, आयोग.
📝 الوصف وسياسة المحتوى
يصف المؤلف القناة بأنها مساحة للتعبير عن الآراء الذاتية:
“All Rajasthan competition exam”
بفضل وتيرة التحديث المرتفعة (أحدث البيانات بتاريخ 01 أغسطس, 2026) تحافظ القناة على حداثتها ومستوى وصول مرتفع. وتُظهر التحليلات تفاعلاً نشطاً من الجمهور، ما يجعلها نقطة تأثير مهمة ضمن فئة التعليم.
17 117
المشتركون
-1824 ساعات
-927 أيام
-32030 أيام
أرشيف المشاركات
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स्टुअर्ट एलफिंस्टन - यह 1819 में मुंबई का गवर्नर बना था इसने मुंबई में कंपनी के भू राजस्व वसूली का काम किया था
चैपलिन रिपोर्ट जो 1822 में आई थी का संबंध मुंबई के भू राजस्व प्रणाली से था
1824-28 के मध्य आर के प्रिगंल के नेतृत्व में मुंबई प्रांत का भू सर्वेक्षण करवाया गया तत्पश्चात मुंबई में इस प्रणाली को व्यापक पैमाने पर लागू किया गया इसमें कुल उपज का 55% राजस्व तय किया गया था
1835 में विगनेट तथा गोल्डस्मिथ के नेतृत्व में दोबारा भूमि का सर्वेक्षण करवाया गया तथा कर निर्धारण को बदला
पहले जहां उपज के आधार पर भू राजस्व वसूल किया गया था अब इसे बदलकर भूमि के मूल्य के आधार पर कर दिया गया
1847 में विगनेट, डेविडसन तथा गोल्ड स्मिथ ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की
3.महालवाडी व्यवस्था
इस व्यवस्था में भूमि का सर्वेक्षण करके तथा महाल को एक इकाई मानकर , महाल को भूमिपति माना जाता था तथा समूहिक लगान तय की जाती थी जिसे चुकाने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान/ ताल्लुकदार की होती थी इस व्यवस्था को महालवाड़ी व्यवस्था कहा जाता था
हाल्ट मैकेंजी को महालवाड़ी व्यवस्था का जनक कहा जाता है
1819 में मैकेंजी ने इस व्यवस्था का प्रस्ताव कंपनी निदेशक को भेजो जिसे 1822 में रेग्युलेशन एक्ट 7 के अंतर्गत कानूनी रूप दिया गया
इस व्यवस्था में राजस्व दर कुल उत्पादन का 80% तय किया गया था
तथा राजस्व वसूली की जिम्मेदारी महाल प्रधान की होती थी
इस प्रणाली की वीसांतियों को दूर करने के लिए तत्कालीन गवर्नर जनरल लार्ड विलियम बेंटिक के द्वारा इलाहाबाद में बैठक बुलाई गई तथा इस बैठक के बाद रेगुलेशन 9 ,1833 पारित किया गया इसके तहत राजस्व दर 66% निश्चित की गई
मार्टिन बर्ड - इसने उत्तर भारत में भूमि का सर्वेक्षण करवाया था इस कारण इसे उत्तर भारत में भूमि व्यवस्था का प्रवर्तक माना जाता है
महालवाडी व्यवस्था को उत्तरी पश्चिमी प्रांत , अवध, मध्य प्रांत तथा पंजाब के कुछ हिस्सों में लागू किया गया इसके अंतर्गत ब्रिटिश भारत का 30% भाग शामिल था
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ब्रिटिश शासन में भू राजस्व व्यवस्था
सरकार की आय का सबसे प्रमुख स्रोत भू राजस्व ही था ब्रिटिश शासन में सर्वप्रथम वारेन हेस्टिंग्स ने 1772 में इजारेदारी व्यवस्था की शुरुआत की
पंचशाला- 1772 में वारेन हेस्टिंग्स की अध्यक्षता में एक सर्किट समिति का गठन किया गया जिसमें मिडलटन, लारेल ग्राहम सदस्य शामिल थे इसके सुझाव पर पंचशाला प्रणाली अस्तित्व में आई जिसे सर्वप्रथम बंगाल के नदिया जिले कृष्णा नगर में लागु किया गया
इसमें ऊंची बोली लगाने वाले जमीदार को 5 वर्ष के लिए जमीदारी दी जाती थी तथा उनके निरीक्षण के लिए कोलकाता में राजस्व बोर्ड का गठन भी किया गया था
जब जमीन की नीलामी शुरू हुई तब अधिकांश नीलामी अंग्रेजों ने जीती स्वयं वारेन हेस्टिंग्स ने अपने नौकर कुन्तू बाबु के पुत्र के नाम पर इजारेदारी ले ली इस प्रकार इस प्रणाली में कई विसंगतिया आई जिसके कारण 1776 में अमीनी आयोग का गठन किया गया
1777 में पंचशाला को समाप्त कर दिया गया तथा इसके स्थान पर एकसाला का निर्धारण किया गया
1.स्थायी बन्दोबस्त- स्थाई बंदोबस्त प्रणाली का जनक फिलिप फ्रांसिस को माना जाता है
फिलिप फ्रांसिस, अलेक्जेंडर डोव, थामस ला तथा हैनरी पेटुला ने सर्वप्रथम स्थाई बंदोबस्त का सुझाव दिया था
इसके पश्चात जब कार्नवालिस गवर्नर जनरल बनकर आया तब उसने राजस्व बोर्ड की अध्यक्ष सर जान शोर की अध्यक्षता में इस समिति का गठन किया था इसके अंतर्गत जमीदारों को भूमिपति बनाया जाना था तथा उनके साथ 10 वर्षीय बंदोबस्त किया जाना था , उसके सुझाव पर लॉर्ड कॉर्नवालिस ने इसे 1790 में लागू कर दिया और 1793 में इसे स्थाई कर दिया
( जेम्स ग्रांट ने जमीदारों को भूमिपति बनाने का विरोध किया था)
1793 में लॉर्ड कार्नवालिस के द्वारा बंगाल और बिहार में स्थाई बंदोबस्त की शुरुआत की गई थी
इस प्रणाली में जमींदार और राजस्व संग्रहकृता अपनी ज़मीदारी की पूरी भूमि के स्वामी बन गए और किसानों को जमीदारों की दया पर छोड़ दिया गया
जमीदारों को किसानों से प्राप्त किराये का 10/11 वा हिस्सा कंपनी को देना होता था तथा 1/11 हिस्सा स्वयं रखते थे
इस बंदोबस्त ने काश्तकार को निम्न स्थिति में ला दिया और लंबे समय से प्राप्त प्रथागत अधिकारों से वंचित कर दिया
स्थाई बंदोबस्त प्रणाली बंगाल, बिहार, उड़ीसा ,असम ,उत्तरी कर्नाटक तथा उत्तर प्रदेश के बनारस क्षेत्र में लागू की गई जिसमें ब्रिटिश भारत के क्षेत्रफल का लगभग 19% हिस्सा शामिल था
स्थाई बंदोबस्त की प्रणाली से कंपनी को लाभ यह हुआ की कंपनी की आय निश्चित हो गयी , कंपनी का प्रशासनिक व्यय बच गया तथा अकाल पड़ने या फसल खराब होने की स्थिति में भी कंपनी को निश्चित हिस्सा मिलना तय हो गया
सूर्यास्त कानून,1794- वर्ष के अंतिम सूर्यास्त तक निर्धारित राशि न देने की स्थिति में जमींदारी जब्त कर नीलाम कर दी जाती थी
टी आर होम्स ने स्थाई बंदोबस्त को एक भयंकर भूल करार दिया
वही रमेश चंद्र दत्त इस व्यवस्था की प्रशंसा की थी
2.रैयतवाड़ी व्यवस्था-
यह व्यवस्था सर्वप्रथम 1792 में बारामहल (मद्रास )में लागू की गई थी जिसमें किसानों को भूमि का मलिक मानकर उनके साथ तीन से 10 वर्ष तक का समझौता किया गया लेकिन यह योजना असफल रही थी
इसके पश्चात थॉमस मुनरो ने इसे वास्तविक रूप देने का कार्य किया इसने मद्रास में इसे व्यवस्थित रूप से लागू किया इस कारण इसे रैयत्तवाडी व्यवस्था का जनक कहा जाता है थामस मुनरो 1820 से 1827 तक मद्रास का गवर्नर रहा था इस अवधि में इन्होंने निम्न कार्य किया
1. प्रत्येक गांव का सर्वेक्षण करवाया
2. प्रत्येक किसान की जमीन का विस्तृत ब्यौरा तैयार करवाया
3. सभी जोतो को नंबर तथा पहचान दी गई
4. जोत के मालिक का नाम तथा उसमें मलिक को जोत का स्वामित्व अधिकार यानी पट्टा लिखा गया
5. प्रत्येक खेत का अलग-अलग राजस्व तय किया गया
रैयतवाड़ी व्यवस्था मद्रास ,मुंबई ,पूर्वी बंगाल, असम, कुर्ग तथा सिंध क्षेत्र में लागू की गई जो ब्रिटिश भारत के 51% भाग में लागू थी
यह व्यवस्था लगभग 30 वर्षों तक सफलतापूर्वक मद्रास प्रांत में संचालित होती रही तब संपूर्ण दक्षिण भारत में लागू करने हेतु प्रयास शुरू हुए
वर्ष 1855 में दक्षिण में विस्तृत भू सर्वेक्षण करवाया गया तथा 30% कर तय करके 1858 में इसे दक्षिण भारत में लागू करना शुरू किया
1861 में यह संपूर्ण दक्षिण भारत में लागू की गई
1864 में कुल उपज का 50% लगान तय किया गया
स्टुअर्ट एलफिंस्टन - यह 1819 में मुंबई का गवर्नर बना था इसने मुंबई में कंपनी के भू राजस्व वसूली का काम किया था
चैपलिन रिपोर्ट जो 1822 में आई थी का संबंध मुंबई के भू राजस्व प्रणाली से था
1824-28 के मध्य आर के प्रिगंल के नेतृत्व में मुंबई प्रांत का भू सर्वेक्षण करवाया गया तत्पश्चात मुंबई में इस प्रणाली को व्यापक पैमाने पर लागू किया गया इसमें कुल उपज का 55% राजस्व तय किया गया था
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सोवियत संघ के विघटन से संबंधित उपर्युक्त नीतियों का अवलंबन मिखाइल गोर्बाचोव ने किया था
पेरेस्त्रोईका का अर्थ होता है पुनर्गठन तथा ग्लासनोस्त का अर्थ होता है खुलापन...
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विजय स्तंभ चित्तौड़गढ़ में स्थितहैं। इस स्तम्भ का निर्माण महाराणा कुम्भा ने सारंगपुर विजय की स्मृति में 1440-1448 ई. में करवाया था। यह स्तम्भविजय स्तम्भ के नाम से भी जाना जाता है। इसकी ऊँचाई 122 फीट एवं यह 9 मंजिल का बना है। इसके वास्तुकार-जैता, नापा एवं पुंजा थे। यह राजस्थान पुलिस एवं माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का प्रतीक चिन्ह भी है।
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1.सगुण भक्ति : इसमें ईश्वर के मूर्ति रुप
की पूजा अर्थात ईश्वर को साकार रुप में पूजा जाता है।
2 .निर्गुण भक्ति : ईश्वर की निराकर रुप में पूजा अर्थात मूर्ति पूजा का विरोध ।
सगुण भक्ति:
रामानुज/सामानंदी, वल्लभ, गौड़ीय, निम्बार्क, नाथ, पाशुपात, मीरादासी, गवरी बाई, भक्त कवि दुर्लभ
निर्गुण भक्ति:
जांभोजी, जसनाथ जी, दादू, रामस्नेही, परनामी, कबीर पंथी, लालदासी, दरियाव जी, हरिराम जी, रामदास जी, पीपा जी, धन्ना जी, संत रैदास, बखना जी, सुंदरदास, रज्जब जी, नवलदास जी, लालगिरी जी, परनामी सम्प्रदाय
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राजस्थान में रामसर स्थल - 5
1. केवलादेव राष्ट्रीय अभ्यारण (1981)
2. सांभर झील (1990)
3. मेनार गांव (उदयपुर) - 5 जून 2025
4. खीचन (फलोदी) - 5 जून 2025
5. सिलीसेढ़ झील (अलवर)-12 दिसंबर 2025
रामसर दिवस - 2 फरवरी
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साक्षात्कार
बोर्ड - श्री सुशील कुमार बिस्सु
पहले बोर्ड पर टॉपिक पढ़ाया।
1. राजस्थान में पाषाण काल से संबंधित स्थान पूछे
2. भारत का कौनसा काल स्वर्णयुग कहलाता है और क्यूं।
3. ब्रह्मगुप्त, कवि माघ के बारे में पूछा
4. शीत युद्ध क्या था, उसके पतन के कारण
5. सोनार का किला जैसलमेर
6. चितौड़गढ़ का किला
7. विजय स्तंभ, किसने बनाया, क्यूं बनाया, किसके मध्य युद्ध
8. राजस्थान में रामसर साइट
9. जालौर का किला, युद्ध, वीरमदेव और फिरोजा
10. रैयतवादी, महलवाडी, स्थाई बंदोबस्त
11. अकबर की भूराजस्व व्यवस्था
12. राजस्थान में लिविंग फोर्ट कौनसे है और क्यूं
13. ग्लासनोस्त और पेरेस्त्रोइका नीति
14. राजस्थान के कोई एक निर्गुण संत के बारे में
