ᴇʟɪxɪʀ ᴡʀɪᴛᴇꜱ 💜
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बहुत दिनों के बाद
स्कूल के सामने से गुजरा
तो स्कूल ने पूछा
मुझसे तो बहुत परेशान था
अब बता
ज़िंदगी का इम्तिहान
कैसा चल रहा है...!!
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नई किताब
और उसके पन्नों की खुशबू....
वाह.....
क्या लाजवाब वक्त था बचपन...!!
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इश्क़ का रंग लाल नहीं
सफेद होता तो सुकून होता
कम से कम
उनके किसी और रंग से
मिलने की ख़बर तो होती...!!
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हो मुकम्मल हर दास्तान
ये मुमकिन तो नही.....
कुछ कहानियां
अधूरी ही लाजवाब होती है.......!!
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जो वादे
वक्त के साथ मुकर जाएं
उन्हें फिर दोहराने से
क्या फ़ायदा...
जो शख्स
आंखें बचाकर गुज़र जाए
उन्हें वापस बुलाने से
क्या फ़ायदा...!!
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ये वो लोग.....
जो चंद लम्हों में नाप लेते हैं
औकात किसी की.....
शायद.....
देखा नहीं हैं उन्होंने
कुदरत का कायदा......!!
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हर पल में प्यार है
हर लम्हे में खुशी है
खो दो तो याद है
जी लो तो जिंदगी है...!!
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अपने
किरदार से
महकता है इन्सान...
चरित्र को
पवित्र करने का
इत्र नहीं होता...!!
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कट ही जाएगी जुदाई भी
बिछड़ने से थोड़ी ना मर जाएंगे...
तेरे भी दिन गुजर जाएंगे
मेरे भी दिन गुजर जाएंगे...!!
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निगाहों की बेचैनी
समझ आती है मुझे....
तेरा
बार बार मेरी तरफ देखना
एक दिन
मार देगा मुझे....!!
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ऐ चांद की किरणों जाओ ना
तुम उस को छू कर आओ ना
वो कब कब क्या क्या करता है
वो जागता है या सोता है
वो किस से बातें करता है
वो शाम को कैसा लगता है
जब जागे कैसा दिखता है
तुम चुपके चुपके जाओ ना
तुम उसको छू कर आओ ना
हम उसके बिना अधूरे हैं
और जाना मुश्किल लगता है
तुम कान में उसके कह देना
कोई याद तुम्हें बहुत करता है
ऐ चांद की किरणों जाओ ना
तुम उसको छू कर आओ ना...!!
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रंगतों पे जानें का
फायदा नहीं है...
साफ बादल से.....
बारिश की
उम्मीद नहीं होती.....!!
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हाए......
ये ज़ुल्फ़ें यूँ सँवार के चलना
बड़ा कहर ढ़ाता है...
ज़रा कभी तो
समेट लो इनको
एक बार हमें देख कर......!!
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रूह से हो होकर गुज़रती है
इश्क़ की महीन रेखा....
जिस्म वालों को
पता ही नहीं
क्या होता है
दिल का लगा लेना.....!!
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गज़ब का जलवा है
सर उठा के देख ज़रा....
भीड़ जो लगी है सरे बाज़ार.....
सब तेरी जुल्फों से
घायल नज़र आते हैं हमें...!!
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तुम्हें देखने के बाद
कुछ इस तरह बेबस
मेरे ख़्याल हो गए...
कि तुमसे अलग
कुछ सोचना भी चाहूं
तो सोचा नहीं जाता...!!
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तेरी आहट से
बढ़ जाती हैं
धड़कनें मेरे दिल की...
इसे गर इश्क़ न कहें...
जो ज़्यादती होगी...!!
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काजल भला
कोई इतना धार-दार होता है...?
निगाहों को चीरते
हलक से उतर कर...
कलेजे को ज़ख्मी कर गया...!!
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हया की शर्त
अब मोहब्बत में
कौन रख़ता है...
शहर में
तन ढकने को
पिछड़ा समझतें हैं लोग...!!
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