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ᴇʟɪxɪʀ ᴡʀɪᴛᴇꜱ 💜

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न जीत मिली न प्रीत मिली और समय भी बह गया कल ही कल की चिंता में , आज भी जीना रह गया ।। 🙂

उत्साह है , उम्मीद है , ताकत है , लक्ष्य है ..... तब डर किसका ? हार जायेंगे तो ईश्वर है और जीत जायेंगे तो पूरी दुनिया ।। 🙂🌸

बादलों की ओट से सूरज निकलने वाला है सफ़र जारी रखो , वक्त बदलने वाला है ।। ❤️

I don't have anything to write right now. 🥲 It's your turn , aapki bari kuj likhne ki ,🤌 Give me some best motivation lines u have ever heard. 🥹

ये कौन सी ख़ुशबू है पूछते हैं लोग... मैनें आज़माया है कि तुझसे मिलनें के बाद... मेरे ज़हन महकनें लगता है...!!! ——————🖤🖤——————

वो जो नहीं जानते कुछ भी, कुछ लोग कहेंगें कहने देना, बातें हैं जो बीच हमारे, तुम बीच हमारे रहने देना। ~Amit Pandey 💟

......और फिर वो मेरी पसंद की किताब का मनपसंद किस्सा है वो मेरी नापसंद ज़िंदगी का मनपसंद हिस्सा है ।। 🥹❤️

I can turn you into poetry , but I cannot make you love me. 🙂💔

एक कहानी यूं परवानों की हो गई ना हर जीत सयानों की हो गई होश वाले संभालते रहे कदमों को और मंज़िल दीवानों की हो गई 🌸😌

हम हैं लफ्ज़ों की किफायत के हुनर में माहिर हम रोएं भी तो..... आंसू कम आते हैं ।। 🍂

मुझे लगाना है गुलाल तुम्हे ज़रा खुद को छूने की इजाज़त दो मुस्कुराओ , मुझे हां ! कहो ज़रा बैचैन सी ज़िंदगी को राहत दो कुछ सवाल है , इश्क़ का ख़्याल है और गुलाल है ज़रा खुद को छूने की इजाज़त दो ...❤️

आसमान में उड़ने वाले परिंदो सी मैं , मगर मैंने ज़िंदगी एक पिंजरे में फंसी देखी है छिपाए आंसू बहुत , मैंने किश्तों में हंसी देखी है और मौत बेहद आसान होती है मैंने तो जिंदा रह कर खुदकुशी देखी है ।। 🍂💔

खामखां मैंने गहराई पसंद की कोई उतरा ही नहीं मेरी सोच तक 🍂....

तरल अनल गगन पवन ... धरा धरा शिवः शिवम् 🌙
तरल अनल गगन पवन ... धरा धरा शिवः शिवम् 🌙

मैंने कह कर भी देखा और चुप रह कर भी तुम दोनों सूरतों में नासमझ ही निकले 🍂🦋

मिलेंगे नये आसमां तुम्हे मेरे बाद तुम्हारे बाद संग मुस्कुराने वाले मुझे भी मिलेंगे कसक रहेगी एक के जो चाहा सो नहीं मिलेगा ज़माना भर भले साथ हो मैंने उसे चाहा , मुझे वो नहीं मिलेगा 🦋🐸

मुश्किलें हैं कि मुझे सताने में लगी है दुआएं हैं कि मुझे बचाने में लगी है एक दिल है , जो छिपाए बैठा गम हज़ार है और ये आंखें हैं कि सब बताने में लगी है।। 💔

जिंदा हूं मगर ज़िंदगी से दूर हूं आज क्यूं आखिर इस कदर मजबूर हूं बिना गलती की मिली है ये सज़ा मुझे किससे कहूं कि मैं बेकसूर हूं 🥺

अंत का भी अंत होता है कुछ भी कहां अनंत होता है पतझड़ भी आयेगी ही बारह महीने कहां बसंत होता है ....🌸🍂

काबिलियत की दस्तक दूर तक जाएगी जनाब बुलंदियों से कहना , सिफारिशों से पल्ला झाड़ लें ।।🦋🌈