अल्लामा इक़बाल रह०
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منشورات القناة
किताबें सैकड़ों पढ़ लीं मगर ये रम्ज़ ना आया
कोई अपना बिछड़ जाये तो सब्र कैसे करते हैं
کتابیں سینکڑوں پڑھ لیں مگر یہ رمز نہ آیا
کوئی اپنا بچھڑ جائے تو صبر کیسے کرتے ہیں
| 2 | ठीक है ख़ुद को हम बदलते हैं
शुक्रिया मश्वरत का चलते हैं
हो रहा हूँ मैं किस तरह बरबाद
देखने वाले हाथ मलते हैं
है वो जान अब हर एक महफ़िल की
हम भी अब घर से कम निकलते हैं
क्या तकल्लुफ़ करें ये कहने में
जो भी ख़ुश है हम उस से जलते हैं
है उसे दूर का सफ़र दर-पेश
हम सँभाले नहीं सँभलते हैं
तुम बनो रंग तुम बनो ख़ुश्बू
हम तो अपने सुख़न में ढलते हैं
मैं उसी तरह तो बहलता हूँ
और सब जिस तरह बहलते हैं
है अजब फ़ैसले का सहरा भी
चल न पड़िए तो पाँव जलते हैं
जौन एलिया
#शायरी #गम #घर #महफिल #रंग #सुखन #पांव #फैसले #mushaironkidunia | 0 |
| 3 | غزل/ ग़ज़ल
مُجھ سے بھی آگے مرے غم کا فسانہ ہوگا۔
اور پھر میرا جنوں شانہ بہ شانہ ہوگا۔
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मुझसे भी आगे मेरे ग़म का फ़साना होगा।
और फिर मेरा जुनू शाना ब शाना होगा।
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میرے وعدوں پہ یکایک ہی لگی چپ کی مہر،
جب کہا اسنے میری جان نبھانا ہوگا۔
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मेरे वादों पे यका यक ही लगी चुप की मुहर,
जब कहा उसने मेरी जान, निभाना होगा।
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ہم تو اس آخری تارے کی طرح ہیں جسکو،
دیر ہو جائے گی لیکن اسے جانا ہوگا۔
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हम तो उस आख़िरी तारे की तरह हैं जिसको,
देर हो जाएगी लेकिन उसे जाना होगा।
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ہر دفعہ تم سے ملونگا میں نئے کپڑوں میں،
پر میرا لہجہ و انداز پرانا ہوگا۔
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हर दफ़ा तुमसे मिलूंगा मैं नए कपड़ो में,
पर मेरा लहजा ओ अंदाज़ पुराना होगा।
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کیا خبر تھی کہ تجھے پانے کی خاطر مجھ کو،
میرے اپنوں کو کئی بار گنوانا ہوگا۔
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क्या ख़बर थी कि तुझे पाने की ख़ातिर मुझको,
मेरे अपनो को कई बार गंवाना होगा।
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تُجھکو پانا تو میرا پیار نہیں تھا، ضد تھی
دل نے ایک بار کہا تھا، اسے پانا ہوگا۔
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तुझको पाना तो मेरा प्यार नही था, ज़िद थी,
दिल ने इक बार कहा था, उसे पाना होगा।
Sayyed Nawaaz Quamar | 0 |
| 4 | عشق میں کوئی بھی تدبیر نہیں ہے میری
اب تو دل بھی مرا جاگیر نہیں ہے میری
इश्क़ में कोई भी तदबीर नहीं है मेरी
अब तो दिल भी मेरा जागीर नहीं है मेरी
ساری دنیا نظر آتی ہے مرے البم میں
اک ترے ساتھ ہی تصویر نہیں ہے میری
सारी दुनिया नज़र आती है मेरे एल्बम में.
इक तेरे साथ ही तस्वीर नहीं है मेरी
اس کے ہاتھوں کے سوا دوسرا پہنائے اگر
میں بتا دیتا ہوں زنجیر نہیں ہے میری
उस के हाथों के सिवा दूसरा पहनाए अगर
मैं बता देता हूँ ज़ंजीर नहीं है मेरी.
میرے چہرے پہ زرا پڑھ تو لکیریں غم کی
لفظ سب میرے ہیں تحریر نہیں ہے میری
मेरे चहरे पे ज़रा पढ तो लकीरें ग़म की.
लफ्ज़ सब मेरे हैं तहरीर नहीं है मेरी
کیا کسی آنکھ سے بچھڑا ہوا اک خواب ہوں میں
اس جہاں میں کوئی تعبیر نہیں ہے میری
क्या किसी आँख से बिछड़ा हुआ इक ख्वाब हूँ मैं
इस जहाँ में कोई ताबीर नहीं है मेरी
تجھ سے جب چاہوں جہاں چاہوں ملوں بات کروں
اس قدر اچھی تو تقدیر نہیں ہے میری
तुझ से जब चाहूँ जहाँ चाहूँ मिलूं बात करूं
इस क़दर अच्छी तो तक़दीर नहीं है मेरी
اس نے نفرت کی بنائی. ہے جو. بستی کاشف
اس میں اک اینث بھی تعمیر نہیں ہے میری
उस ने नफरत की बनाई है जो बस्ती काशिफ
उस में इक ईंट भी तामीर नहीं है मेरी
کاشف سید
काशिफ सय्यद.
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| 5 | दिन अब ये आ गए हैं तो कहना पड़ा मुझे
मरहम किसी भी ज़ख़्म को भरता नहीं मिरा
मुझको वो देख देख के रोती है रात दिन
माँ कह रही है सबसे ये लड़का नहीं मिरा
Sagar Sahab Badayuni
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| 6 | मुद्दतों बाद इक शख्स से मिलने के लिए,,
आईना देखा गया बाल सँवारे गए..
जॉन एलिया | 0 |
| 7 | इल्म की हद से परे है बन्दा ए मोमिन के लिए
लज़्ज़त ए शौक़ भी है नेमत ए दीदार भी है
(((अल्लामा मोहम्माद इक़बाल रह०))) | 0 |
| 8 | तुझे ना आएंगी मुफ़्लिस की मुश्किलात समझ
मैं छोटे लोगों के घर का बड़ा हूं बात समझ
मेरे अलावा हैं छ: लोग मुनहसिर मुझ पर
मेरी हर एक मुसीबत को जर्ब सात समझ
दिल ओ दिमाग ज़रूरी हैं ज़िंदगी के लिए
ये हाथ पांव इज़ाफ़ी सहूलियात समझ
फ़लक से कट के ज़मीं पर गिरी पतंगें देख
तू हिज्र काटने वालों की नफ़सियात समझ
किताब-ए-इश्क़ में हर आह एक आयत है
और आंसुओं को हुरूफ़-ए-मुक़त्तेआत समझ
उमैर नजमी
#मुफ्लिस #लोगों #घर #मुसीबत #दिल #ज़मीं #किताब #इश्क #शायरी #मोहब्बत #mushaironkidunia | 0 |
| 9 | सारे पेड़ जला दो जिनसे हवा लगे अफसानों को
इक दीवार बनाओ उसमें चुन दो सब दीवानों को
अगर फरिश्ते भी आ जाए उनके संग न जाए वो
जिसको लाने राजा तू ने भेजा है दरबानों को
प्यार ने मुझको दर्द दिया है वहशत दी और फुरक़त दी
तिरे पीर ने मेरे ऊपर छोड़ दिया शैतानों को
इतनी छोटी सी हरकत पर कितना वो शरमाई है
बाली पहनाते पहनाते चूम लिया था कानों को
फिर देखूँ मेरे आगे किस की सेना टिक पाती है
अभी पेड़ से अगर उतारूँ अपने तीर कमानों को
– विष्णु विराट ❤️ | 0 |
| 10 | याद उस की इतनी ख़ूब नहीं 'मीर' बाज़ आ
नादान फिर वो जी से भुलाया न जाएगा..!!
मीर तक़ी मीर | 0 |
| 11 | वो लोग जो ज़िंदा हैं वो मर जाएँगे इक दिन
इक रात के राही हैं गुज़र जाएँगे इक दिन
यूँ दिल में उठी लहर यूँ आँखों में भरे रंग
जैसे मिरे हालात सँवर जाएँगे इक दिन
दिल आज भी जलता है उसी तेज़ हवा में
ऐ तेज़ हवा देख बिखर जाएँगे इक दिन
यूँ है कि तआक़ुब में है आसाइश-ए-दुनिया
यूँ है कि मोहब्बत से मुकर जाएँगे इक दिन
यूँ होगा कि इन आँखों से आँसू न बहेंगे
ये चाँद सितारे भी ठहर जाएँगे इक दिन
अब घर भी नहीं घर की तमन्ना भी नहीं है
मुद्दत हुई सोचा था कि घर जाएँगे इक दिन
साक़ी फ़ारूक़ी
#लोग #राही #जिंदा #दिल #दुनिया #मोहब्बत #चांद #सितारे #घर #गजल #शायरी #mushaironkidunia | 0 |
| 12 | सूफ़ी कलाम/ सूफ़ी तबस्सुम
वफ़ा सुनाती है दिल के क़िस्से कभी ज़बाँ से कभी नज़र से
जो बात लब तक न आ सकी थी नज़र ने कह दी मिरी नज़र से
न जाने कितनी जुदाइयों के उठाए सदमे दिल-ए-हज़ीं ने
न जाने कितनी क़ियामतें थीं गुज़र गईं जो मिरी नज़र से
#sufinama #sufism #sufi #sufitabassum #Sufikalaam | 0 |
| 13 | सलाम उसपर कि जिसका नाम लेकर उसके शैदाई
उलट देते हैं तख़्त ए क़ैसरियत, औज ए दाराई
सल्लल्लाहु तअला अलैहि वसल्लम 🌺
#MiladUnNabiMubarak | 0 |
| 14 | محمد مصطفی صلی اللہ علیہ وسلم
शिराजा हुआ मिल्लत ए मरहूम का अबतर
अब तू ही बता, तेरा मुसलमान किधर जाए!
वो लज़्ज़त आशोब नहीं बहर ए अरब में
पोशीदा जो है मुझ में, वो तूफ़ान किधर जाए!
(अल्लामा इक़बाल रहo) | 0 |
| 15 | क्या ज़माना था कि हम रोज़ मिला करते थे
रात-भर चाँद के हमराह फिरा करते थे
जहाँ तन्हाइयाँ सर फोड़ के सो जाती हैं
इन मकानों में अजब लोग रहा करते थे
कर दिया आज ज़माने ने उन्हें भी मजबूर
कभी ये लोग मिरे दुख की दवा करते थे
देख कर जो हमें चुप-चाप गुज़र जाता है
कभी उस शख़्स को हम प्यार किया करते थे
इत्तिफ़ाक़ात-ए-ज़माना भी अजब हैं ‘नासिर’
आज वो देख रहे हैं जो सुना करते थे
नासिर काज़मी
#जमाना #रात #चांद #तन्हाई #मकान #लोग #दवा #प्यार #गजल #शायरी #mushaironkidunia | 0 |
| 16 | अल्लाह को आजिज़ी, इंकसारी, दरगुज़र और तौबा करने वाले बहुत पसंद आते हैं अल्लाह की क़ुर्बत का बेहतरीन रास्ता आजिज़ी है। | 0 |
| 17 | کسی کے تیر مجھے چھو بھی نہیں پاتے تھے
کسی کے جملے جگر چیر دیا کرتے تھے
किसी के तीर मुझे छू भी नहीं पाते थे
किसी के जुमले जिगर चीर दिया करते थे
Ali Shariq | 0 |
| 18 | यूं भी आवाज़ को ऊंचा नहीं कर पाए हम
अपने गुस्से पे भरोसा नहीं कर पाए हम
आ बदन को ही तेरे हाथ लगा कर देखें
आग पत्थर से तो पैदा नहीं कर पाए हम
शक्ल दुनिया की बदलना तो बहुत दूर की बात
एक कमरे को भी कमरा नहीं कर पाए हम
जिसमे हर बात कही जाती है आसानी से
ऐसे हालात ही पैदा नहीं कर पाए हम
कोई सिक्का नही चादर पे तो हैरत क्या है
इक तमाशा कभी पूरा नहीं कर पाए हम
वो भी उन चंद मरीज़ों में है शामिल शारिक
मुस्कुराकर जिन्हें अच्छा नहीं कर पाए हम
Shariq kaifi | 0 |
| 19 | जिन्हें मैं ढूंढता था आसमानों में जमीनों में
वह निकले मेरे जुल्मत खाना ए दिल के मक़िनों में
हकीकत अपनी आंखों पर नुमाया जब हुई अपनी
मकॉ निकला हमारे खाना दिल के मकिनों में
कभी अपना भी नजारा किया है तूने ए मजनूं
की लैला की तरह तू खुद भी है मह़मिल नशीनों में
हम महीने विस्ल़ के घड़ियों की सूरत उड़ते जाते हैं
मगर घड़ियां जुदाई की गुजरती है महीनों में
छुपाया हुस्न को अपने कलीमुल्लाह से जिसने
वहीं आज आफरी है जलवा पींर नाजनीनों में
जला सकती है शम्म़-ए-कुश़्त को मौज-ए-नफ़स उनकी
ईलाही! क्या छुपा होता है अहले दिल के सीनों मैं
तमन्ना दर्द-ए-दिल की हो तो कर ख़िदमत फकीरों की
नहीं मिलता ये गौहर बादशाहो के खज़ीनों में
मोहब्बत के लिए दिल ढूंढ कोई टूटने वाला
यह वो मय़ है जिसे रखते हैं आब़गिनो में
सरापा हुस्न बन जाता है जिसके हुस्न का आशिक
भला ए दिल ऐसा भी है कोई हसीनों में
नुमाया होकर दिखला दे कभी इनको जमाल अपना
बहुत मुद्दत से है चर्चे तेरे बारीकबीनों में
खामोश ऐ दिल भरी महफिल में चिल्लाना नहीं अच्छा
अद़ब पहला करिंना है मोहब्ब़त के करिनों में
बुरा समझूं उन्हें मुझसे तो ऐसा हो नहीं सकता
कि मैं खुद भी तो हूं "इक़बाल" अपने नुक्ताचीनों में
((Allama Muhammad Iqbal)) | 0 |
| 20 | क्या कहें कौन सी बस्ती में कहां रहते हैं
जितने नादान हैं सब अपने यहां रहते हैं
मैं ये सुनता हूं कि कुछ लोग अभी ज़िंदा हैं
हां मगर ये नहीं मालूम कहां रहते हैं
पहले रहते थे मकानों में बड़े चैन से लोग
और अब ज़हन में लोगों के मकां रहते हैं
ये फ़सादात ये मज़हब के भयानक झगड़े
कैसा माहौल है हम लोग कहां रहते हैं
सबने देखी है तबाही बड़ी खामोशी से
तुम तो कहते थे वहां अहल ए जुबां रहते हैं
जो न सोचें कभी अपने लिए दुनिया में `शजर’
ऐसे ही लोगों के बस नामो निशां रहते हैं
सुरेंद्र सिंह शजर
#शायरी #बस्ती #मकान #मजहब #माहौल #दुनिया #mushaironkidunia | 0 |
