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यहाँ पर कोई 16 संस्कार की पुस्तक मांगा था। https://t.me/gitapresspdfbooks/253

॥ श्री हरिः ॥ 🙏 “हे नाथ! हे मेरे नाथ!! मैं आपको भूलूँ नहीं!!” “एक सत्ता होती है, जिसको होनापन कहते हैं; वह सत्ता आपका स्वरूप
॥ श्री हरिः ॥ 🙏 “हे नाथ! हे मेरे नाथ!! मैं आपको भूलूँ नहीं!!” “एक सत्ता होती है, जिसको होनापन कहते हैं; वह सत्ता आपका स्वरूप है।” — श्रद्धेय स्वामीजी श्रीरामसुखदासजी अपने वास्तविक स्वरूप का स्मरण ही आत्मचिंतन की शुरुआत है। #श्रीहरि #आत्मचिंतन #भक्ति #सत्संग #सनातनधर्म

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Hing Powder Benefits in देवताओं का भोजन है हींग पेट की समस्याओं को दूर करती है हींग नेचुरल ब्लड थिनर है हींग हींग के सेवन से मासिक धर्म के दर्द में मिलती राहत सिरदर्द को कम करने में मददगार खांसी, अस्थमा से राहत दिला सकती है हींग शरीर में गांठ, पथरी, बवासीर और डायबिटीज में हींग से मिलता है लाभ अन्य प्रयोग : हींग को जल में घिसकर आंख में काजल की तरह लगाने से पीलिया रोग में लाभ होता है । हींग, तुम्बरु तथा सोंठ का काढ़ा बना लें । इसे सरसों के तेल में पका लें । इसे 1-2 बूंद की मात्रा में कान में डालें । इससे कानदर्द, कान में सनसनाहट तथा कान में घाव आदि में लाभ होता है । स्वर्जिका क्षार, सूखी मूली, हींग, काली मिर्च, सोंठ तथा शतपुष्पा के काढ़ा को तेल में पका लें । इसे 1-2 बूंद की मात्रा में कान में डालें । इससे कान में सनसनाहट, बहरापन तथा कान बहने आदि रोगों में लाभ होता है । हिंग्वादि तेल को 1-2 बूंद कान में डालने से कर्णशूल (कान के दर्द) ठीक होता है । हींग को पानी में घिसकर गुनगुना करके 1-2 बूंद कान में डालने से कान के रोग ठीक होते हैं । हींग को जल में पीसकर गुनगुना कर लें । इसे छाती पर लगाने से दमा, कुक्कुरखांसी, फेफड़े की सूजन में लाभ होता है । हींग में पाये जाने वाले औषधि तत्व मासिक धर्म के समय होने वाले दर्द के साथ -साथ अन्य तकलीफों को भी कम करने में मदद करते हैं । हींग में दर्दनिवारक गुण के साथ -साथ एन्टीबैक्ट्रिअल का भी गुण पाया है जो कि दांत दर्द कम करने में मदद करती है । आयुर्वेद के अनुसार हींग में वातानुलोमक का गुण होता है जो कि कोलिक दर्द को कम करने में मदद करता है । हींग में कैंसर रोधी क्रियाशीलता पायी जाती है जो कि कैंसर को फैलने से रोकती है । हींग में कृमिघ्न का गुण पाया जाता है जो पेट में कीड़ों की समस्या दूर कर सकता है। हींग को थोड़ा गर्म कर लें। इसे जिस दांत पर कीड़े लगे हों वहां लगाकर थोड़ी देर के लिए दबा लें । इससे कीड़े नष्ट होने लगते हैं । हींग में कफ को शांत करने के साथ -साथ एंटी बैक्ट्रियल गुण भी होता है जो कि निमोनिया, काली खांस के लक्षण को कम करने में मदद करते हैं । How To Use Hing Powder – उपयोग विधि [Kaise Upyog Karein] – Dosage हींग, अपामार्ग तथा खदिर सार चूर्ण को मिलाकर चने के समान (लगभग 250 मि.ग्रा.) वटी (गोली) बना लें । इसे जल के साथ सेवन करने से पेचिश में शीघ्र लाभ होता है । 2 ग्राम शमी चूर्ण, 500 मिग्रा हींग तथा 1 ग्राम बनाएं मिलाकर कांजी के साथ पीने से सामान्य प्रसव होता है । बेहतर परिणाम के लिए किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से जरूर परामर्श लें । हींग, हींग के पत्ते, छोटी इलायची, ब्राह्मी तथा चोर पुष्पी का काढ़ा तथा पेस्ट लें । इसे घी (पुराना घी बेहतर होगा) में पका लें । इसे 5 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से मैनिया रोग ठीक होता है । तीव्र उन्माद (मैनिया) रोग से पीड़ित व्यक्ति को बकरे के 25-50 मि.ली. मूत्र में 125 मिग्रा हींग मिलाकर पिलाना चाहिए । हींग को पीसकर दाद पर लगाएं । दाद ठीक होता है । कपूर तथा हींग को मिलाकर पीस लें । इसे नहरुआ (स्नायुक) पर बांध देने से लाभ होता है । आप इस रोग में हींग को उपयोग में लाने से पहले किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से जरूर परामर्श लें । आप किसी व्यक्ति को बेहोशी की अवस्था से होश में लाने के लिए हींग का इस्तेमाल कर सकते हैं । 100 मि.ली. कांजी में 1 ग्राम सौवर्चल नमक, 1 25 मि.ग्रा. हींग, सोंठ, एक ग्राम मिर्च लें । इसके साथ ही 1 ग्राम पिप्पली मिलाकर मात्रानुसार पिलाने से लाभ होता है । हींग, निम्बू फल के गुदे तथा पीपर को गोमूत्र में पीसकर काजल की तरह लगाने से बुखार ठीक होता है । अजवायन, हरड़, हींग, चित्रक, सोंठ, यवक्षार, सज्जी क्षार, सफेद जीरा, पीपर, हरड़, बहेड़ा, आँवला, सौवर्चल तथा सेंधा नमक को बराबर मात्रा में पीस लें । इसे 1-2 ग्राम मात्रा में सेवन करने से बुखार ठीक होता है । पुराने घी में हींग मिलाकर नस्य (नाक में डालने) लेने से चौथे स्तर के टॉयफॉयड में लाभ होता है ।

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Jay Shri Hari 🙏

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