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काम संहिता🙏
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सेक्स से जुड़ी हुई प्रेम से जुड़ी हुई सभी जानकारी के लिए सन्देश भेजे जय कामदेव कामसूत्र यौन स्थानों का सच्चा गुरु ग्रंथ है। अपने यौन जीवन में विविधता लाने के तरीके खोज रहे हैं? तब आप सही जगह पर आए हैं .. !!
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प्रेम इस तरह किया जाए
कि प्रेम शब्द का कभी ज़िक्र तक न हो
चूमा इस तरह जाए
कि होंठ हमेशा गफ़लत में रहें तुमने चूमा
या मेरे ही निचले होंठ ने
औचक ऊपरी को छू लिया
हुआ इस तरह जाए
कि मीलों दूर तुम्हारी त्वचा पर
हरे-हरे सपने उग आयें
तुम्हारी देह के छज्जों के नीचे
मुँह अन्धेरे जलतरङ्ग बजायें ...
💋🙏🙏
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वासना उम्र नहीं देखती सरकार,
चेहरा बता देता है प्यास कितनी है।
वैसे बड़े उम्र की स्त्रियां अनुभव बहुत दे जाती है।
उनका शरीर चंचल और कामुक होता है।। 💘
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Somone has told that they sleep on 10:30 but I saw regular twits of them on 11 :15 pm very good
Reltion brokers 😢
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Sexual Meditation :
मेडिटेशन तो आप करते ही होंगे। यह मानसिक विकारों को दूर करने में मदद करता है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि सेक्सुअल समस्याओं को दूर करने के लिए भी मेडिटेशन किया जाता है? जी हां, इसे सेक्सुअल मेडिटेशन नाम दिया गया है। इसका नियमित अभ्यास करने से आप और आपकी पार्टनर दोनों को ही सेक्सुअल सैटिस्फैक्शन मिलेगा। इससे आप एक-दूसरे से अच्छी तरह से जुड़ सकते हैं। सेक्सुअल मेडिटेशन करने से सेक्स (sexual meditation benefits) का आनंद भी अच्छी तरह से उठा सकते हैं। यदि आपने अब तक सेक्सुअल मेडिटेशन (Sexual meditation) नहीं किया तो जरूर करें और फिर देखें आपको कैसा महसूस होता है। जानें, सेक्सुअल मेडिटेशन कैसे किया जाता है...
शांत जगह बैठें
अपने बेडरूम की रोशनी धीमी कर दें। इलेक्ट्रॉनिक चीजों को हटा दें जैसे- फोन, टीवी और लैपटॉप। ये सारी चीजें आपके ध्यान को भटका सकती हैं। अपने रूम को नॉर्मल तापमान पर रखें, क्योंकि बहुत ज्यादा गर्मी या ठंड दोनों आपके ध्यान को भटका सकती है।
आराम की मुद्रा में बैठ जाएं
ऐसी अवस्था में आ जाएं जो आपके और आपके साथी के लिए आरामदायक हो। चाहे आप अपने पैरों के बल बैठ जाएं या फिर कमल की मुद्रा में बैठें। अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें। मेडीटेशन करते समय आपको हल्के कपड़े पहनने चाहिए।आंखों को बंद करके सेक्सुअल मेडिटेशन करें जब आप मेडिटेशन (sexual meditation tips) करने के लिए तैयार होते हैं तो आप और आपके साथी की आंखें बंद होनी चाहिए। अपने शरीर और आपनी सांसों पर पूरा ध्यान दें। इधर-उधर की बातें सोचने की बजाय अपने वर्तमान के बारे में सोचें। आखें बंद करने के बाद सिर्फ उन बातों को ध्यान में रखें जो आपके और आपके साथी के लिए फायदेमंद हों।
सॉफ्ट गाने सुनें
अगर आपके कानों में तेज और ध्यान भ्रमित करने वाली आवाज गूंज रही है तो आपके लिए मेडिटेशन करना बहुत मुश्किल हो सकता है। ऐसे गाने या ध्वनि को सुनें जिससे आप अपना पूरा ध्यान मेडिटेशन पर लगा सकें। कोशिश करें की मेडिटेशन या सेक्स करते समय सॉफ्ट गाने सुनें।
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सेक्स (sex) से जुड़ी 23 बातें
1. सेक्स (sex) करने के दौरान हमारे शरीर से ऑक्सीटोसिन रिलीज होता हैं, जो अच्छी नींद के लिए बेहतर हैं।
2. सेक्स (sex) करने से हमें कभी भी तनाव महसूस नहीं होता हैं।
3. रोजाना सेक्स (sex) करने से जिंदगी लंबी होती हैं, और हर वक्त खुशी का अहसास होता हैं।
4. हफ्ते में 1या 2बार सेक्स करने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता हैं।
5. नियमित रूप से सेक्स (sex) करने वाले लोग कम बीमार होते हैं।
6. ज्यादा सेक्स (sex) करने से कामुकता में व्रृद्धि होती हैं।
7. सेक्स (sex) करने से हमारा blood pressure भी नियंत्रित रहता हैं।
8. सेक्स करते समय हर मिनट में 5 कैलोरी जलती हैं, जिससे हमारे शरीर की अच्छी कसरत होती हैं।
9. यह देखा गया हैं, कि सेक्स (sex) करने से सिरदर्द जैसी बीमारियां ठीक हो जाती हैं।.
10. जो लोग महीने में कम से कम 15 बार ईजैक्यूलेट करते हैं, उनको प्रोस्टेट कैंसर नहीं होता हैं।
11. नियमित तरीके से सेक्स (sex) करने से दिल की बीमारी नहीं होती हैं, और हड्डियाँ भी मजबूत रहती हैं।
12. यह माना गया हैं, कि सेक्स (sex) करने से हमारे शरीर में ऐसे harmons बनते हैं, जिनसे हमारी त्वचा में निखार आता हैं।
13. सेक्स (sex) करने के जरिए हम अपनी आँखों का टेस्ट भी कर सकते हैं, अगर सेक्स करने के बाद आपकी आंखें ब्लर विजन फेस करे, तो आपकी आंखे कमजोर हैं।
14. हफ्ते में 1 या 2 बार सेक्स करने से हीमोग्लोबिन की मात्रा भी बढती हैं।
15. सेक्स (sex) करने से मोटापा भी घटता हैं, क्योंकि 1 घंटा सेक्स करने से हमारी 300 कैलोरी बर्न होती हैं, जो कसरत करने के समान हैं।
16. सुबह के समय सेक्स (sex) करने से वीर्य की गुणवत्ता 12% तक बढ़ जाती हैं।
17. सेक्स (sex) करने से पेट गैस की समस्या भी दूर हो जाती हैं।
18. रोजाना सेक्स (sex) करने से हमारी पीठ मजबूत होती हैं, जिससे कभी भी पीठदर्द नहीं होता हैं।
19. जो लोग हफ्ते में 1 या 2 बार सेक्स करते हैं, उनको स्ट्रोक होने के चांस भी कम रहते हैं।
20. रोजाना सेक्स करने से चेहरे की झुर्रियां गायब हो जाती हैं।
21. सेक्स करने से बुखार और जुकाम जैसे रोग से छुटकारा मिलता हैं।
22. रोजाना सेक्स से शरीर की धमनियों में खून का सर्कुलेशन अच्छे से होता हैंं।
23. सेक्स ( *Sëx* ) करने से हमारा _*Stämínå*_ भी सुधरता है।।
👍🙏👍
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भाग्य भी उससे रूठ जाता है।
5. पांचवां नियम : यदि कोई संतान के रूप में पुत्रियों के बाद पुत्र चाहता है तो उसे महर्षि वात्स्यायन द्वारा प्रकट किए गए प्राचीन नियमों को समझना चाहिए। इस नियम के अनुसार स्त्री को हमेशा अपने पति के बाईं ओर सोना चाहिए। कुछ देर बाईं करवट लेटने से दायां स्वर और दाहिनी करवट लेटने से बायां स्वर चालू हो जाता है। ऐसे में दाईं ओर लेटने से पुरुष का दायां स्वर चलने लगेगा और बाईं ओर लेटी हुई स्त्री का बायां स्वर चलने लगता है। जब ऐसा होने लगे तब संभोग करना चाहिए। इस स्थिति में गर्भाधान हो जाता है।
6. छठा नियम : आयुर्वेद के अनुसार स्त्री के मासिक धर्म के दौरान अथवा किसी रोग, संक्रमण होने पर सेक्स नहीं करना चाहिए। यदि आप खुद को संक्रमण या जीवाणुओं से बचाना चाहते हैं, तो सहवास के पहले और बाद में कुछ स्वच्छता नियमों का पालन करना चाहिए। जननांगों पर किसी भी तरह का घाव या दाने हो तो सहवास न करें। सहवास से पहले शौचादि से निवृत्त हो लें। सहवास के बाद जननांगों को अच्छे से साफ करें या स्नान करें। प्राचीनकाल में सहवास से पहले और बाद में स्नान किए जाने का नियम था।
7. सातवां नियम : मित्रवत व्यवहार न होने पर, काम की इच्छा न होने पर, रोग या शोक होने पर भी संभोग नहीं करना चाहिए। इसका मतलब यह कि यदि आपकी पत्नी या पति की इच्छा नहीं है, किसी दिन व्यवहार मित्रवत नहीं है, मन उदास या खिन्न है तो ऐसी स्थिति में यह कार्य नहीं करना चाहिए। यदि मन में या घर में किसी भी प्रकार का शोक हो तब भी संभोग नहीं करना चाहिए। मन:स्थिति अच्छी हो तभी करना चाहिए।
8. आठवां नियम : पवित्र माने जाने वाले वृक्षों के नीचे, सार्वजनिक स्थानों, चौराहों, उद्यान, श्मशान घाट, वध स्थल, चिकित्सालय, औषधालय, मंदिर, ब्राह्मण, गुरु और अध्यापक के निवास स्थान में सेक्स करने की मनाही है। यदि कोई व्यक्ति ऐसा करता है तो उसको इसका परिणाम भी भुगतना ही होता है।
9 नोहवा नियम : गर्भकाल के दौरान दंपति को सहवास नहीं करना चाहिए। गर्भकाल में संभोगरत होते हैं, तो भावी संतान के अपंग और रोगी पैदा होने का खतरा बना रहता है। हालांकि कुछ शास्त्रों के अनुसार 2 या 3 माह तक सहवास किए जाने का उल्लेख मिलता है लेकिन गर्भ ठहरने के बाद सहवास नहीं किया जाए तो ही उचित है।
10 दसवां नियम : शास्त्रसम्मत है कि सुंदर, दीर्घायु और स्वस्थ संतान के लिए गडांत, ग्रहण, सूर्योदय एवं सूर्यास्तकाल, निधन नक्षत्र, रिक्ता तिथि, दिवाकाल, भद्रा, पर्वकाल, अमावस्या, श्राद्ध के दिन, गंड तिथि, गंड नक्षत्र तथा 8वें चन्द्रमा का त्याग करके शुभ मुहुर्त में संभोग करना चाहिए। गर्भाधान के समय गोचर में पति/पत्नी के केंद्र एवं त्रिकोण में शुभ ग्रह हों,
तीसरे, छठे ग्यारहवें घरों में पाप ग्रह हों, लग्न पर मंगल, गुरु इत्यादि शुभकारक ग्रहों की दॄष्टि हो और मासिक धर्म से सम रात्रि हो, उस समय सात्विक विचारपूर्वक योग्य पुत्र की कामना से यदि रतिक्रिया की जाए तो निश्चित ही योग्य पुत्र की प्राप्ति होती है। इस समय में पुरुष का दायां एवं स्त्री का बायां स्वर ही चलना चाहिए, यह अत्यंत अचूक उपाय है। कारण यह है कि पुरुष का जब दाहिना स्वर चलता है तब उसका दाहिना अंडकोश अधिक मात्रा में शुक्राणुओं का विसर्जन करता है जिससे कि अधिक मात्रा में पुल्लिंग शुक्राणु निकलते हैं अत: पुत्र ही उत्पन्न होता है।
11 ग्यारव नियम : मासिक धर्म शुरू होने के प्रथम 4 दिवसों में संभोग से पुरुष रुग्णता को प्राप्त होता है। पांचवीं रात्रि में संभोग से कन्या, छठी रात्रि में पुत्र, सातवीं रात्रि में बंध्या पुत्री, आठवीं रात्रि के संभोग से ऐश्वर्यशाली पुत्र, नौवीं रात्रि में ऐश्वर्यशालिनी पुत्री, दसवीं रात्रि के संभोग से अतिश्रेष्ठ पुत्र, ग्यारहवीं रात्रि के संभोग से सुंदर पर संदिग्ध आचरण वाली कन्या, बारहवीं रात्रि से श्रेष्ठ और गुणवान पुत्र, तेरहवीं रात्रि में चिंतावर्धक कन्या एवं चौदहवीं रात्रि के संभोग से सद्गुणी और बलवान पुत्र की प्राप्ति होती है। पंद्रहवीं रात्रि के संभोग से लक्ष्मीस्वरूपा पुत्री और सोलहवीं रात्रि के संभोग से गर्भाधान होने पर सर्वज्ञ पुत्र संतान की प्राप्ति होती है। इसके बाद की अक्सर गर्भ नहीं ठहरता।
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सहवास के प्राचीन नियम, पालन करने से मिलते हैं कई फायदे
प्राचीन नियमों के अनुसार सहवास से वंशवृद्धि, मैत्रीलाभ, साहचर्य सुख, मानसिक रूप से परिपक्वता, दीर्घायु, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य सुख की प्राप्ति हासिल की जा सकती है। यदि व्यक्ति नियमों में बंधकर सहवास करता है, तो वह संस्कारी होकर आपदाओं से बचा रहता है। पशुवत सहवास से वह अपना जीवन नष्ट कर लेता है। पुरातन काल में दंपति आज की तरह हर रात्रि को नहीं मिलते थे। उनका सहवास सिर्फ संतान प्राप्ति के उद्देश्य के लिए होता था। शुभ दिन और शुभ मुहुर्त के संभोग से वे योग्य संतान प्राप्त कर लेते थे। वर्तमान काल में युवा पीढ़ी उद्दंड और अनुशासनहीन है। कंडोम के दौर में किसी भी समय संभोग करके गर्भ धारण करके संतान पैदा कर लेती है।
पति और पत्नी के बीच सहवास भी रिश्तों को मजबूत बनाए रखने का एक आधार होता है, बशर्ते कि उसमें प्रेम हो, काम-वासना नहीं। हालांकि वर्तमान में ऐसा नहीं होता। इसका कारण है सहवास के प्राचीन नियमों की समझ का नहीं होना। आधुनिक युग में संस्कार तो समाप्त हो ही गए हैं, साथ ही व्यक्ति स्वार्थी अधिक हो चला है। आओ जानते हैं कि सहवास के वे कौन से नियम हैं जिन्हें जानकर लाभ उठाया जा सकता है और सुख को अधिक बढ़ाया जा सकता है।
1. पहला नियम : हमारे शरीर में 5 प्रकार की वायु रहती है। इनका नाम है- 1. व्यान, 2. समान, 3. अपान, 4. उदान और 5. प्राण। उक्त 5 में से एक अपान वायु का कार्य मल, मूत्र, शुक्र, गर्भ और आर्तव को बाहर निकालना है। इसमें जो शुक्र है वही वीर्य है अर्थात यह वायु संभोग से संबंध रखती है। जब इस वायु की गति में फर्क आता है या यह किसी भी प्रकार से दूषित हो जाती है तो मूत्राशय और गुदा संबंधी रोग उत्पन्न होते हैं। इससे संभोग की शक्ति पर भी असर पड़ता है। अपान वायु माहवारी, प्रजनन और यहां तक कि संभोग को भी नियंत्रित करने का कारक है। अत: इस वायु को शुद्ध और गतिशील बनाए रखने के लिए आपको अपने उदर को सही रखना होगा और सही समय पर शौचादि से निवृत्त होना होगा।
2. दूसरा नियम : कामसूत्र के रचयिता आचार्य वात्स्यायन के अनुसार स्त्रियों को कामशास्त्र का ज्ञान होना बेहद जरूरी है, क्योंकि इस ज्ञान का प्रयोग पुरुषों से अधिक स्त्रियों के लिए जरूरी है। हालांकि दोनों को ही इसका भरपूर ज्ञान हो, तभी अच्छे सुख की प्राप्ति होती है। वात्स्यायन के अनुसार स्त्री को विवाह से पहले पिता के घर में और विवाह के पश्चात पति की अनुमति से काम की शिक्षा लेनी चाहिए। वात्स्यायन का मत है कि स्त्रियों को बिस्तर पर गणिका की तरह व्यवहार करना चाहिए। इससे दांपत्य जीवन में स्थिरता बनी रहती है और पति अन्य स्त्रियों की ओर आकर्षित नहीं हो पाता तथा पत्नी के साथ उसके मधुर संबंध बने रहते हैं। इसलिए स्त्रियों को यौनक्रिया का ज्ञान होना आवश्यक है ताकि वह काम कला में निपुण हो सके और पति को अपने प्रेमपाश में बांधकर रख सके।
आचार्य वात्स्यायन के अनुसार एक कन्या के लिए सहवास की शिक्षा देने वाले विश्वसनीय व्यक्ति हो सकते हैं- दाई, विश्वासपात्र सेविका की ऐसी कन्या, जो साथ में खेली हो और विवाहित होने के पश्चात पुरुष समागम से परिचित हो। विवाहिता सखी, हमउम्र मौसी या बड़ी बहन, अधेड़ या बुढ़िया दासी, बड़ी बहन, ननद या भाभी जिसे संभोग का आनंद प्राप्त हो चुका हो। उसका स्पष्ट बोलने और मधुर बोलने वाली होना जरूरी हो ताकि वह काम का सही-सही ज्ञान दे सके।
3. तीसरा नियम : शास्त्रों के अनुसार कुछ ऐसे दिन भी हैं जिस दिन पति-पत्नी को किसी भी रूप में शारीरिक संबंध स्थापित नहीं करने चाहिए, जैसे अमावस्या, पूर्णिमा, चतुर्थी, अष्टमी, रविवार, संक्रांति, संधिकाल, श्राद्ध पक्ष, नवरात्रि, श्रावण मास और ऋतुकाल आदि में स्त्री और पुरुष को एक-दूसरे से दूर ही रहना चाहिए। इस नियम का पालन करने से घर में सुख, शांति, समृद्धि और आपसी प्रेम-सहयोग बना रहना है अन्यथा गृहकलह और धन की हानि के साथ ही व्यक्ति आकस्मिक घटनाओं को आमंत्रित कर लेता है।
4. चौथा नियम : रात्रि का पहला प्रहर रतिक्रिया के लिए उचित समय है। इस प्रहर में की गई रतिक्रिया के फलस्वरूप ऐसी संतान प्राप्त होती है, जो अपनी प्रवृत्ति एवं संभावनाओं में धार्मिक, सात्विक, अनुशासित, संस्कारवान, माता-पिता से प्रेम रखने वाली, धर्म का कार्य करने वाली, यशस्वी एवं आज्ञाकारी होती है। शिव का आशीर्वाद प्राप्त ऐसी संतान की लंबी आयु एवं भाग्य प्रबल होता है।
प्रथम प्रहर के बाद राक्षसगण पृथ्वीलोक के भ्रमण पर निकलते हैं। उसी दौरान जो रतिक्रिया की गई हो, उससे उत्पन्न होने वाली संतान में राक्षसों के ही समान गुण आने की प्रबल आशंका होती है। पहले प्रहर के बाद रतिक्रिया इसलिए भी अशुभकारी है, क्योंकि ऐसा करने से शरीर को कई रोग घेर लेते हैं। व्यक्ति अनिद्रा, मानसिक क्लेश, थकान का शिकार हो सकता है एवं माना जाता है कि
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स्त्री में प्रेम की तीव्रता नही जबकि पुरुष सिर्फ़ प्रेम की तीव्रता से ही संचालित।
स्त्री बिना प्रेम के भी पुरुष के साथ रह जाती है जबकि पुरुष बिना प्रेम के नही रह सकता विद्रोही हो जाता है।
पुरुष सहज निर्लिप्त होता है जबकि स्त्री के प्रेम में अनेकों लिप्ततांए होती है। शायद यही वजह है कि पुरुष प्रेम में प्राणोत्सर्ग तक कर देता है
मगर स्त्री सामान्यतः नहीं।
कई वर्षों तक प्रेम में बने रहने और फिर ब्रेकअप होने के बाद ये अनुभव हुआ है मुझे की लगता है कि प्रेम मात्र पुरुष का अत्यंत सघन विषय है।
पुरुष का मस्तिष्क एक खुमारी व दीवानगी का शिकार हो जाता है एवं चेतन मस्तिष्क की गतिविधियां सीक्रेशन इम्पैक्ट को फोलो करने लगती है। ‘सेंसेस आफ एबसेंस व गेट इट एचीव ‘ का भाव इतना तीव्र हो जाता है कि पुरुष आत्महत्या अथवा हत्या जैसे कदम उठा लेता है। अधिक संवेदना तो शायद नहीं पर हाँअधिक मजबूती के साथ स्त्री तसल्ली से जिंदा रहती है।
तभी वो पति व प्रेम में से किसी एक को चुनना हो तो पति को चुनती है प्रेम को नहीं। प्रेम ना होने के उपरांत भी पति को शारीरिक संसर्ग के लिए आमंत्रण भी देती है व संतानोत्पति भी करती है। वह केवल तात्कालिक अवस्था मे भाव मे जीती है बस
प्रेम को पाने के लिए मरने मारने तक नहीं जाती क्योंकि प्रेम एक आवेग के साथ बहता है। स्त्री मात्र प्राप्त वर्तमान में जीना पसंद करती है ।
स्त्री का प्रेम अंगीठी की आँच सा सीमित और अपने वस मे होता है , जबकि पुरुष का प्रेम दावानल सा होता है सब कुछ स्वाहा करने सा
क्या स्त्रियों में यह आवेग संभव है.... ?
पता नहीं... शायद नहीं ....!
यहां स्त्री माने दो लोगों के प्रेम में जो चलायमान प्रवृत्ति है वह स्त्री भी हो सकती है पुरुष भी....
अतः स्त्री पुरुष के संदर्भ में ऐसा देख सकती है तथा पुरुष स्त्री के संदर्भ में जिनके प्रति उनको गहरा समर्पण हुआ हो तथा उनका प्रियतम बिल्कुल ऐसा रहा ।
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रस एक ही है कामातुर स्त्री के यौवन रस ।। छलकती हुई जवानी महकती हुई यौवन और टपकती हुई रस जिस पुरुष को मिले उसे ग्रहण करे प्रेम से सम्मान के साथ।
स्त्री का कोई जाति नहीं है । स्त्री सिर्फ प्रेम है । चाणक्य ने कहा है की स्त्री की योनि सबसे पवित्र स्थल है क्योंकि एक तो यहां से सृष्टि का निर्माण होता है ,दूसरा पुरुष की आग को शांत यही योनि करती है। इसलिए प्रेम से यौवन को प्यार करो सम्मान दो और कामसूत्र के अनुसार उसके प्रवाह को शांत करो ।
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क्या करें अगर बच्चा सेक्स करते समय अचानक कमरे में आ जाए ?
मेरे मित्र और उनकी पत्नी सुबह के समय में अपने अंतरंग पलों का आनंद( उठा रहे थे की इसी बीच पास के कमरे में सो रही उनकी 4 साल की बेटी अचानक जग गई और इनके कमरे में आ गई। जाहिर है कि दोनों कपल को इस बात का एहसास तक नहीं हुआ कि उनकी बेटी कमरे में प्रवेश कर चुकी है। फिर जब उनकी बेटी ने मम्मी पुकारा तब ये दोनों ही निस्तब्ध रह गए। किसी प्रकार से दोनों चादर में छुप गए और फिर उन्होंने पहले अपनी बेटी को कमरे में जाने को कहा और कहा कि मैं आपके पास ही आ रही हूं। इसके बाद से उनकी पत्नी को आत्मग्लानि महसूस हो रही है और वे अपनी बेटी से न जाने किस अपराधबोध को लेकर नजरें तक नहीं मिला पा रही हैं। लेकिन क्या ये उचित है? पति-पत्नी के बीच में सेक्स के लिए अपराध बोध कैसा? इसके अलावा ये जानना भी आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है कि अगर आपका बच्चा सेक्स से संबंधित कुछ सव Related Questions) पूछ ले तो आपको इस पर क्या प्रतिक्रिया देनी चाहिए
घबराएं नहीं - आपने कोई गुनाह नहीं किया है और ना ही चोरी की है। सामने आपका अपना बच्चा है ना कि कोई पुलिसवाला तो इसलिए बिल्कुल भी घबराएं नहीं। अगर अंतरंगता के इन क्षणों में अचानक से आपका बच्चा आ जाए तो एक दूसरे के पीछे छुपने का प्रयास नहीं करें। सबसे पहले एक गहरी सांस लें। फिर आहिस्ते से अपने साथी के बाजू में जाएं और ऐसा अनुभव कराएं कि जैसे आप एक दूसरे के पास सो रहे हैं।
क्रोध ना करें - कुछ पैरेंट्स ऐसी गलती कर जाते हैं कि वे बच्चे को तत्काल डांट कर दूसरे कमरे में जाने को कह देते हैं लेकिन हमारा सुझाव ये है कि आप अपने बच्चे पर इस परिस्थिति में क्रोधित ना हों। अगर आप अपने बच्चे पर गुस्सा करेंगे तो आपका बच्चा खुद को दोषी और शर्मिंदा महसूस कर सकता है। ऐसा भी मुमकिन है कि आपका बच्चा सेक्स को लेकर अपने मन में गलत भावना ना पाल ले। मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक कोई बच्चा भले कितना भी छोटा क्यों ना हो, यौन दृष्य कों जब वह पहली बार देखता है तो ये उसके जहन में रह जाते हैं।
अपने बच्चे की उपेक्षा ना करें - आप अपने बच्चे को सीधे यह ना कह दें कि अभी तुम अपने कमरे में चले जाओ। अगर आप ऐसा कह देंगे तो आपके बच्चे के लिए यह एक सजा के समान होगा और बच्चे के मन में डर पैदा हो सकता है। इसके बदले में आप कुछ ऐसा कह सकते हैं कि क्या तुम ये देख कर बता सकते हो कि दूध या अखबार आज आया है या नहीं?
प्रश्नों का सही तरह से जवाब दें - ये भी मानकर चलें कि आपका बच्चा कुछ ऐसे प्रश्न भी पूछ सकता है जिनका जवाब देने में आप असहज महसूस करती हों। लेकिन अगर बच्चे ने सवाल पूछ दिया है तो इसे टालिए नहीं बल्कि जवाब देने का हर संभव प्रयास करें। मैं ये मानता हूं कि आप कुछ चिंतित या शर्मिंदगी महसूस कर रहे होंगे लेकिन आप बच्चे को डांटिए नहीं और उसको सवाल पूछने दे। अगर आपको उनके सवालों का त्वरित जवाब देना नहीं आ रहा हो तब आप उनसे थोड़ा समय मांग लें और ये कह दें कि मैं सोच विचारकर आपके सवाल का जवाब दूंगा।
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प्यार और सेक्स में अंतर:
हमारे समाज में पहले ज्यादातर लोग प्यार के बाद सेक्स करते थे लेकिन आज का समय बहुत बदल गया है। बहुत से लोग ऐसे भी होते हैं जो सिर्फ सेक्स के लिए अपने साथी के साथ रहते हैं। इसलिए यह सवाल बनता है कि जो लोग सेक्स के लिए राजी हो जाते हैं, तो क्या यह प्यार का इशारा है ? सबसे पहले तो आपको बता दें कि प्यार और सेक्स दोनों अलग-अलग चीजें हैं। अगर आप इन्हें एक ही मानते हैं तो यह गलत है। प्यार शब्द के कई मायने हैं। वहीं, सेक्स एक बायोलॉजिकल घटना है।
बहुत से लोग आज के समय में ऐसे हैं, जो सोचते हैं कि उनका पार्टनर उनसे प्यार करता है। लेकिन भावनात्मक रूप से टूटने के बाद ही उन्हें पता चलता है कि वह प्यार नहीं है, बल्कि उनका पार्टनर उनसे सिर्फ सेक्स चाहता था। इसलिए वह नाटकीय प्यार जता रहा था। ऐसा किसी एक व्यक्ति के साथ नहीं हो रहा है बल्कि ऐसे बहुत से लोग हैं जो इस तरह के जाल में फंस जाते हैं। आइए जानते हैं कि क्या सेक्स का मतलब प्यार होता है ?
सेक्स का मतलब:
जो लोग प्यार करते हैं वह सेक्स तो करते ही हैं, लेकिन वे लोग सेक्स को ज्यादा तवज्जो नहीं देते। ऐसे लोग प्यार को ज्यादा तवज्जो देते हैं। वह अपने पार्टनर के साथ भावनात्मक रूप से ज्यादा जुड़े हुए होते हैं। जबकि जो लोग अपने पार्टनर से प्यार नहीं करते, वह लोग सेक्स को ज्यादा तवज्जो देते हैं। ऐसे लोग प्यार का नाटक करते हैं और अपने पार्टनर से सिर्फ सेक्स चाहते हैं। इसलिए सेक्स का मतलब प्यार है, यह जरूरी बिल्कुल नहीं है।
बहुत से लोग ऐसे हैं जो पहले अपने पार्टनर के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ते हैं फिर उसके बाद वह उनके साथ शारीरिक संबंध भी बनाते हैं। लेकिन कुछ समय बाद जब उन्हें कोई दूसरा अच्छा पार्टनर मिल जाता है तो वह अपने उस पार्टनर को छोड़ देते हैं। इसलिए प्यार और सेक्स दोनों अलग अलग चीजें हैं। इन्हें एक तराजू में तौल कर नहीं देखना चाहिए।
ऐसे पहचानें कि कोई शख्स आपसे सिर्फ सेक्स चाहता है
love
आज के समय में बहुत से लोग यह मान चुके हैं कि प्यार बहुत बदल चुका है। पहले लोग अलग तरीके से प्यार करते थे और अब लोगों का प्यार करने का तरीका बदल गया है। आइए जानते हैं कि आपको कैसे पता चलेगा कि आपका पार्टनर आपसे प्यार नहीं, बल्कि सिर्फ सेक्स चाहता है।
जब व्यक्ति आपके बारे में ज्यादा न जानना चाहे
kiss
जब कोई व्यक्ति प्यार करता है तो वह अपने पार्टनर के बारे में सब कुछ जानना चाहता है। वह यह तक जानना चाहता है कि आप खाने में क्या पसंद करते हैं या आपके परिवार में कौन-कौन लोग हैं और उनकी पसंद क्या क्या है? वह आपके बारे में सब कुछ जानना चाहेंगे। लेकिन अगर कोई व्यक्ति आपसे प्यार नहीं करता है तो वह आपके बारे में सब कुछ नहीं जानना चाहेगा। ऐसा व्यक्ति सिर्फ आपसे शारीरिक संबंध बनाना चाहेगा। वह व्यक्ति घुमा फिरा कर टॉपिक सेक्स पर लेकर आ जाते हैं। अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है तो आप समझ जाएं कि यह प्यार नहीं है।
जब कोई व्यक्ति फोरप्ले न करे
बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो सिर्फ अपने पार्टनर से सेक्स चाहते हैं। ऐसे लोग सिर्फ सेक्स पर ध्यान देते हैं और वह फोरप्ले नहीं करना चाहते। मौका मिलते ही वह सीधा आपके साथ सेक्स करेंगे, लेकिन वह फोरप्ले नहीं करते। ऐसे व्यक्ति से मिलने के बाद आप भी इस दुविधा में रहेंगे कि यह प्यार है या आपका पार्टनर सिर्फ सेक्स चाहता है? ऐसे व्यक्ति सेक्स करने के बाद आपको अनदेखा भी करते हैं। लेकिन जो व्यक्ति आपको सिर्फ प्यार करेगा वह कभी आपको सेक्स करने के बाद अनदेखा नहीं करता।
जबरदस्ती नहीं करने वाला साथी
अगर आपका पार्टनर आपसे प्यार नहीं करता और वह सिर्फ आपके साथ सेक्स चाहता है तो आपके मना करने के बावजूद भी वह आपसे शारीरिक संबंध बनाने के लिए जबरदस्ती करेगा। लेकिन अगर कोई व्यक्ति आपसे प्यार करता है तो वह सबसे पहले आपकी भावनाओं को समझेगा। वह आपके साथ जबरदस्ती नहीं करेगा।
प्यार और सेक्स में अंतर
प्यार और सेक्स में भावनात्मक रूप से अंतर होता है। यह अंतर हर किसी को पता नहीं चल पाता है। लेकिन अगर कोई किसी व्यक्ति से भावनात्मक रूप से बहुत जुड़ा हुआ है तो वह आसानी से पहचान लेता है कि यह प्यार है या कुछ और।
अगर कोई व्यक्ति आपसे प्यार करता है, तो वह सेक्स के बाद भी आपको उतना ही प्यार करेगा जितना वह पहले करता था। लेकिन अक्सर देखा गया है कि जो व्यक्ति प्यार नहीं करते हैं, वह सेक्स करने के बाद बहुत बदल जाते हैं और आपको अनदेखा करते हैं। यह बदलाव प्यार नहीं कहलाता है।
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कामना में डूबी स्त्री की.....
आँखें लाल
और होंठ नीले होते हैं
जब तुम इन नीले होंठों को चूमते हो
तो नाभि के पास खिंच जाती हैं दो लकीरें
एक होती है लज्जा
और एक अधैर्य की
वो चाहती है कि आप उसे अपने बाहो मे शमा जाने दे
बाहो मे लेने के बाद आप उसे ये एहसास दिलाये की आप भी कितने अधूरे है उनके बिना एक स्त्री यही चाहती है
उसके अकेलेपन को दूर करें
उसके अंदर कि तड़प को महसूस करें
वो क्या चाहती है आपसे उसे सुनो
फिर उसके चलते हुए साँसो को महसूस करो उसके दिल कि धड़कन को अपने साँसों के द्वारा स्पर्श करो
तुम्हारे स्पर्श से उपजी कंपकपाहट
और श्वास की सित्कार से
स्त्री एक स्वप्न को जन्म देती है
उस स्वप्न में वो तुम्हारा हाथ पकड़
पानी पर चल रही है नंगे पाँव
सुनो पुरुष
नदी पार करने के बाद
स्त्री के पैरों को भी चूम लेना
ये पैर तुम्हारे पास
सदियों की दूरी नापकर आये हैं....
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💕💕 सम्भोग 💕💕
❤️❤️
💘 हे आदिम पुरुष!
अपनी सहचरी इस आदिम स्त्री को
एक जवाब दोगे ?
भूख क्या सिर्फ तुम्हारी ही होती है
क्यों भूल जाते हो -
तुम्हारी इस भूख के समानांतर जागती
एक भूख, उसकी भी होती है
जिससे बेखबर, तुम तृप्त हो, उठ जाते हो
थाली से,
वह हतप्रभ थाली में बचे
अपनी चाह के कुछ टुकड़ों को
अधखाया देखती है,
सर झुकाए समेटती है,
आस-पास बिखरी तुम्हारी
बेपरवाही की जूठन
अपनी भूख वहीं दबा, उठ जाती है
हताशा, ग्लानि और वितृष्णा के
मिले जुले भाव से
और भोर होने तक सोचा करती है
इस अजनबी रवायत पर
जो एक की भूख को भूख समझती है
दूसरे की भूख को चरित्र - हीनता
एक हक़ से खाता है उसी थाली से
दूसरा महज़ साथ देने को
फिर यह कैसा सम्भोग है
किसने दिया है, यह नाम इसे?
❤️❤️❤️मनीषा कुलश्रेष्ठ ❤️❤️
चर्चित हिन्दी रचनाकार
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।। प्रियतमा ।।
मेरी अलिंगन में आओ
सुबह की महक बनकर
यौवन की रस से मुझे
रसमय कर दो तुम
अपनी होठों की मद को पिलाकर
मदहोश कर दो तुम ।
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आप जानकर हैरान होंगे , प्रेम औरकाम , प्रेम और सेक्स विरोधी चीजें हैं। जितना प्रेम विकसित होता है , सेक्स क्षीण हो जाता है। और जितना प्रेम कम होता है , उतना सेक्स ज्यादा हो जाता है। जिस आदमी में जितना ज्यादा प्रेम होगा , उतना उसमें सेक्स विलीन हो जाएगा। अगर आप परिपूर्ण प्रेम से भर जाएंगे , आपके भीतर सेक्स जैसी कोई चीज नहीं रह जाएगी। और अगर आपके भीतर कोई प्रेम नहीं है , तो आपके भीतर सब सेक्स है।
सेक्स की जो शक्ति है , उसका परिवर्तन , उसका उदात्तीकरण प्रेम में होता है। इसलिए अगर सेक्स से मुक्त होना है , तो सेक्स को दबाने से कुछ भी न होगा। उसे दबाकर कोई पागल हो सकता है। और दुनिया में जितने पागल हैं , उसमें से सौ में से नब्बे संख्या उन लोगों की है , जिन्होंने सेक्स की शक्ति को दबाने की कोशिश की है। और यह भी शायद आपको पता होगा कि सभ्यता जितनी विकसित होती है , उतने पागल बढ़ते जाते हैं , क्योंकि सभ्यता सबसे ज्यादा दमन सेक्स का करवाती है।
सभ्यता सबसे ज्यादा दमन , सप्रेशन सेक्स का करवाती है! औरइसलिए हर आदमी अपने सेक्स को दबाता है , सिकोड़ता है। वह दबा हुआ सेक्स विक्षिप्तता पैदा करता है , अनेक बीमारियां पैदा करता है , अनेक मानसिक रोग पैदा करता है। सेक्स को दबाने की जो भी चेष्टा है , वह पागलपन है। ढेर साधु पागल होते पाए जाते हैं। उसका कोई कारण नहीं है सिवाय इसके कि वे सेक्स को दबाने में लगे हुए हैं। और उनको पता नहीं है , सेक्स को दबाया नहीं जाता। प्रेम के द्वार खोलें , तो जो शक्ति सेक्स के मार्ग से बहती थी , वह प्रेम के प्रकाश में परिणत हो जाएगी। जो सेक्स की लपटें मालूम होती थीं , वे प्रेम का प्रकाश बन जाएंगी। प्रेम को विस्तीर्ण करें। प्रेम सेक्स का क्रिएटिव उपयोग है , उसका सृजनात्मक उपयोग है।
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