879
المشتركون
-124 ساعات
-47 أيام
-1730 أيام
أرشيف المشاركات
मेरे लफ़्ज़ों की पहचान अगर वह कर लेता.....
उसे मुझसे ही नहीं खुद से ही मुहब्बत हो जाती...
प्यार हो या परिंदा दोनो को आज़ाद
छोड दो अगर लौट आया तो तुम्हारा
नहि तो समज लेना तुम्हारा था ही नहि
*सब नही करते, ना कर सकेंगे.. नशा शायरी का,*
*ये तो वो जाम है यारों, जो एहसासों के नवाब पीते हैं,,,,*
हंसना -हंसाना आता है मुझे,मुझसे गम की बात नहीं होती,
मेरी बातों में मज़ाक होता है, मेरी हर बात मज़ाक नहीं होती....
*💞दिल लगाओ तो जुदा होने की हिम्मत भी रखना*
*क्युकी जिंदगी में तकदीर के साथ सौदे नही होते.....!!*💞
मेरी खामोशियों के राज मुझे खुद नहीं मालूम......
ना जाने ये लोग क्यों मुझे मगरूर समझते हैं।।^Thakur Sahab
जब वो मुझे देखकर पहली बार मुस्कुराया था
मैं तो उसी वक्त समझ गयी की ये मुझे मुद्दतों तक
रुलायेगा...
