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SOG ने पेपरलीक करने वाले कटारा के बेटे को पकड़ा: टीचर दोस्त को भी ले गई साथ, दामाद सहित तीन अन्य से भी पूछताछ📚✅
डूंगरपुर
सीनियर टीचर भर्ती पेपरलीक मामले में एसओजी ने RPSC सदस्य बाबूलाल कटारा के बेटे डॉ. दीपेश और उसके टीचर दोस्त को पकड़ लिया है। जांच टीम ने 3 अन्य लोगों से भी पूछताछ की है। हालांकि एसओजी और बाबूलाल कटारा के परिवार के लोग इस बारे में कुछ भी जानकारी नहीं दे रहे हैं। सूत्रों के अनुसार कटारा, उसके भानजे विजय कटारा और ड्राइवर गोपाल सिंह की गिरफ्तारी के बाद अब एसओजी पारिवारिक सदस्यों और दोस्तों से पूछताछ करने में जुटी है। एसओजी की टीम बुधवार रात को डूंगरपुर पहुंची और सुभाष नगर स्थित बाबूलाल कटारा के घर से उनके बेटे डॉ. दीपेश कटारा और दीपेश के दोस्त सरकारी टीचर गौतम कटारा निवासी भाटपुर को पकड़कर अपने साथ ले गई। वहीं कटारा के दामाद डॉ. रवि घोघरा, दीपेश के दोस्त भारतेंदु और विनय ताबियार से भी पूछताछ की गई।
बाबूलाल कटारा को लेकर डूंगरपुर पहुंची एसओजी
एसओजी की टीम गुरुवार देर शाम को आरपीएससी सदस्य बाबूलाल कटारा को लेकर डूंगरपुर शहर में सुभाषनगर स्थित उनके घर लेकर पहुंची। शाम 6 बजे बाद 4 गाड़ियों में आए एसओजी के अफसर बाबूलाल कटारा को लेकर अंदर चले गए। इसके बाद एसओजी की टीम उनके घर में अलमारियां समेत कई दस्तावेज खंगाल रही है। घर के अंदर किसी को एंट्री नहीं दी जा रही है।
बाबूलाल कटारा के घर में उनके परिवार के सदस्यों के होने की सूचना है। एसओजी की टीम के कटारा के भांजे विजय डामोर को भी लेकर आने की सूचना है। एसओजी के अधिकारियों की ओर से घर में किस तरह की जांच चल रही है। जांच पूरी होने के बाद ही एसओजी अधिकारियों की ओर से जानकारी देने की संभावना है।
देर शाम एसओजी की टीम बाबूलाल कटारा को लेकर सुभाष नगर स्थित उनके आवास पर पहुंची, जहां दस्तावेज खंगाल रही है। जानकारी के अनुसार कटारा के बेटे डॉ. दीपेश ने एमबीबीएस की है, लेकिन अभी कहीं प्रैक्टिस या जॉब नहीं कर रहा। दीपेश का दोस्त गौतम कटारा गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडर स्कूल, शीशोद में टीचर के पद पर तैनात हैं। गौतम ने डूंगरपुर एसबीपी कॉलेज में छात्रसंघ अध्यक्ष का चुनाव भी लड़ा था। 2017-18 में उसकी सरकारी नौकरी लगी थी।
एसओजी डॉ. दीपेश और दोस्त गौतम को पकड़कर कहां ले गई, इसके बारे में किसी को भी कोई जानकारी नहीं है। स्थानीय पुलिस भी एसओजी की इस कार्रवाई को लेकर अनजान है। दीपेश ने जयपुर के महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज से 2021-22 में एमबीबीएस पूरी की है। वहीं, गौतम की 2 महीने पहले शादी हुई है।
उदयपुर के पॉश इलाके में बाबूलाल कटारा का आलीशान बंगला
पेपरलीक कर बेचने के मामले में मुख्य आरोपी बाबूलाल कटारा का उदयपुर के पॉश इलाके में 2 मंजिला आलीशान बंगला है। डूंगरपुर निवासी कटारा का उदयपुर में हॉस्पिटल रोड पर 2 मंजिला कॉम्प्लेक्स भी है। फिलहाल कटारा को आरपीएससी सदस्य रहते हुए अजमेर में टोडरमल लाइन स्थित सरकारी आवास मिला हुआ था।
एक दिन पहले ही उदयपुर कोर्ट में पेशी के बाद कटारा को 10 दिन के लिए रिमांड पर भेजा गया है। अब एसओजी रिमांड के दौरान बाबूलाल कटारा प्रदेशभर में संपत्तियों का पता लगाएगी। साथ ही ये पता लगाएगी कि बाबूलाल कटारा के पास टीचर भर्ती का पेपर कहां से और किस तरह पहुंचा।
चाबी, प्रश्नपत्र की प्रतियां, डोंगल, डायरी, 2 मोबाइल बरामद
एसओजी ने शेरसिंह से पूछताछ में उसके दोस्त श्रीराम शर्मा के किराए के मकान से कई अहम दस्तावेज बरामद किए हैं। उसके सीकर रोड, अजमेर स्थित फ्लैट नम्बर ए-314 से 2 मोबाइल फोन, एक डोंगल, एक डायरी, प्रश्न पत्र की फोटो प्रतियां जब्त की गई हैं। शेरसिंह की पूछताछ के आधार पर आरपीएससी सदस्य बाबूलाल कटारा के अजमेर स्थित सरकारी आवास से डबल बैडशीट व एक लॉक, 3 चाबियां, कम्प्यूटर सेट बरामद किया गया।
अनिता मीणा की जमानत अर्जी खारिज
पुलिस रिमांड पर चल रहे पेपरलीक के आरोपी शेरसिंह मीणा की गर्लफ्रेंड अनिता मीणा की कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज कर दी। एसबीआई बैंक में डिप्टी मैनेजर अनिता मीणा की अर्जी पर सरकारी वकील का तर्क था कि अनिता ने शेरसिंह की अवैध आय को अलग-अलग जगह निवेश किया है। साथ ही पेपर लीक मामले में उसका सहयोग रहा है। ऐसे में अनिता की ओर से पेश जमानत अर्जी को कोर्ट ने खारिज कर दिया।
- कटारा ने परीक्षा से पेपर फाइनल करने के बाद 3 पेपर के 6 सेट घर ले गया। जहां पर भांजे से हाथ से लिखवाने के बाद 60 लाख रुपए में शेर सिंह को फोटो खिंचवाई। शेर सिंह जयपुर आकर टाइप करवाकर पैन ड्राइव में रख लिए।
- Q. तीन महीने तक उदयपुर पुलिस केे पास जांच थी, एसओजी के पास शेर सिंह और अब कटारा को गिरफ्तार किया गया है। ऐसे में सवाल है कि एसओजी ने जांच देर से क्यों ली?
- पेपर लीक का खुलासा उदयपुर पुलिस ने किया था। वहीं पर प्रकरण् दर्ज किया था। उसके बाद जोधपुर ग्रामीण पुलिस से मिले इनपुट को डवलप करके एसओजी ने भूपेन्द्र सारण को पकड़वाया था। उसके बाद पुलिस मुख्यालय ने फाइल यहां ट्रांसफर कर दी। तब से लगातार कार्रवाई जारी है।
सियासी सिफारिश से बढ़ा कटारा का प्रभाव
कांग्रेस सरकार ने कटारा काे प्रदेश की सबसे बड़ी भर्ती एजेंसी आरपीएससी का सदस्य बनाया। लेकिन नियुक्ति के पीछे सियासी सिफारिश और जाति-क्षेत्र के समीकरण रहे। साल 2020 में कांकरी डूंगरी प्रकरण के बाद सरकार को जनजाति वर्ग के नेताओं की नाराजगी झेलनी पड़ी थी। इसे शांत करने के लिए डूंगरपुर से कटारा काे सदस्य बनाया गया। वागड़ के दाेनाें जिलाें के दिग्गज *कांग्रेस नेताओं* ने इसकी सिफारिश की थी।
आरपीएससी मेंबर बाबूलाल कटारा की पेपर माफिया शेर सिंह मीणा से चार साल पहले दोस्ती हुई थी। शेर सिंह मीणा ने बाबूलाल को आरपीएससी से भर्ती परीक्षाओं के पेपर आउट कर मुनाफा कमाने के लिए मना लिया था। कटारा के मन में पेपर लीक से मिलने वाले पैसों का लालच तो था, लेकिन डर भी था। कटारा पेपर माफिया के ज्यादा संपर्क में नहीं रह सकता था।
RPSC के अधिकारियों और दूसरे कर्मचारियों को उस पर शक हो सकता था। ऐसे में कटारा को किसी विश्वासपात्र की जरूरत थी। डूंगरपुर में रहने वाला कटारा का भांजा विजय डामोर बेरोजगार था। उसे काम की जरूरत थी, इसलिए बाबूलाल ने भांजे विजय को अपने साथ मिला लिया। बाबूलाल अपने घर या बाहर के सभी जरूरी काम विजय से ही करवाता था।
सुरेश ढाका की तलाश में छापे शुरू
अब फरार चल रहे पेपर लीक के मास्टरमाइंड सुरेश ढाका की तलाश में डूंगरपुर और चित्तौड़गढ़ में छापेमारी शुरू कर दी गई है। एसओजी को उसके बारे में कुछ जानकारी मिली है। उसके बाद बुधवार सुबह से सर्च शुरू कर दिया गया है। इस पूरे मामले में अब तक करीब पचास से ज्यादा लोगों को पकड़ा जा चुका है। इसमें बड़ी संख्या में वे अभ्यर्थी हैं, जिन्होंने पेपर के लिए पैसा दिया था।
RPSC मेंबर ने वाइस प्रिंसिपल को बेचा था पेपर: शेरसिंह ने 80 लाख में आगे बेच दिया; कटारा के भांजे को सोने का कड़ा किया था गिफ्ट📚✅
जयपुर
सीनियर टीचर भर्ती पेपर लीक मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने बुधवार को बड़ा खुलासा किया। राजस्थान लोक सेवा आयोग(आरपीएससी) के मेंबर बाबूलाल कटारा ने ही पेपर लीक किया था। कटारा ने वाइस प्रिंसिपल शेरसिंह मीणा को 60 लाख रुपए में पेपर बेचा। शेरसिंह ने 80 लाख रुपए में भूपेंद्र सारण को यह पेपर दिया। एसओजी अफसरों का दावा है कि मामले में फरार चल रहे सुरेश ढाका को भी जल्द ही अरेस्ट कर लिया जाएगा। एसओजी एडीजी अशोक राठौड़ ने बताया कि शुरुआती जांच में हम लोगों को पता चल गया था कि किसी परीक्षा केंद्र से पेपर लीक नहीं हुआ है।
बल्कि आरपीएससी ये ही पेपर लीक हुआ था। इसके बाद इनपुट मिलने के आधार पर विशेष टीम का गठन कर कड़ी से कड़ी जोड़कर कार्रवाई को अंजाम दिया। आखिरी मोहरे तक हम लोग पहुंच सके। गिरफ्तार आरपीएससी के मेंबर बाबूलाल कटारा, उसके भांजे विजय डामोर और ड्राइवर गोपाल को आज कोर्ट में पेश किया गया। 29 अप्रैल तक रिमांड पर भेजा गया है। एसओजी ने मंगलवार को आरपीएससी के मेंबर बाबूलाल कटारा, उसके भांजे विजय डामोर और ड्राइवर को गोपाल सिंह को गिरफ्तार किया था।
एग्जाम से 2 हफ्ते पहले दे दिया था पेपर
राठौड़ ने बताया कि पेपर सेट करने का जिम्मा बाबूलाल कटारा के पास था। कटारा ने पेपर शुरू होने से 2 हफ्ते पहले ही शेर सिंह को हाथ से लिखा पेपर दे दिया था। शेर सिंह ने दो किस्तों में 60 लाख रुपए कटारा को दिए।
शेर सिंह ने इस पेपर को जयपुर के शास्त्री नगर थाना इलाके में टाइप करा कर भूपेंद्र सारण को बेच दिया। भूपेंद्र फिर इस पेपर को आगे सर्कुलेट करता चला गया। पेपर को 5 लाख रुपए तक में बेचा गया।
आरपीएससी चेयरमैन से पूछा पेपर का एक्सेस किस-किस व्यक्ति के पास था
एडीजी ने बताया कि जांच के दौरान पुलिस टीम ने हर जगह सर्च किया। परीक्षा केंद्र से लीक होने का कोई इनपुट नहीं मिला। इस पर आरपीएससी चेयरमैन से संपर्क किया गया। उन्हें कहा- पेपर की चैन ऑफ कस्टडी देखी जाए। इससे पता चल सकेगा की किस-किस व्यक्ति के पास पेपर की एक्सेस था।
राठौड़ ने बताया कि दिसंबर से लेकर अप्रैल तक हमारी टीम ने एक-एक कर इस गिरोह के सदस्यों को पकड़ना शुरू कर दिया। इस गिरोह के सदस्यों से हुई पूछताछ के बाद एसओजी को पता चल सका की आरपीएससी के सदस्य ने पेपर लीक किया है। जिस पर मंगलवार सुबह टीम को अजमेर भेजा गया। इसके बाद तीनों आरोपियों की गिरफ्तार हुई।
ड्राइवर ने कटारा और शेर सिंह को मिलवाया
अशोक राठौड़ ने बताया कि पेपर सेट करने की जिम्मेदारी आरपीएससी ने सदस्यों को दी थी। सदस्यों ने पेपर को सेट करवाया। पेपर को प्रिंटिग प्रेस में भेजने की कॉपी सदस्यों के पास थी। जिन्हे कटारा के हाथ से लिख लिया। कटारा का ड्राइवर के जरिए शेर सिंह से संपर्क हुआ था। इसके बाद शेर सिंह पेपर लेकर जयपुर आया।
आरपीएससी ने 6 पेपर एक ही सदस्य से कराए सेट
अशोक राठौड़ ने बताया- जांच के दौरान उन्हें पता करने में बड़ी परेशानी हुई की पेपर किसने सेट किया। आरपीएससी का कहना था कि पेपर सेट करने वालों को गोपनीय रखते हैं। जब जांच की गई तो पता चला कि शेर सिंह को पता था कि पेपर बाबूलाल सेट कर रहा है। इसलिए ड्राइवर के जरिए कटारा से संपर्क किया। इससे आरपीएससी की गोपनीयता का आप पता लगा सकते हैं। हैरानी की बात है कि एक ही सदस्य छह के छह पेपर को सेट कर रहा था। गोपनीयता यहीं खत्म हो जाती है।
शेर सिंह ने कटारा के भांजे को दिया था सोने का कड़ा
एडीजी ने बताया कि जांच के दौरान पता चला कि बाबूलाल कटारा का भांजा विजय कटारा भी एक्टिव है। विजय ने शेर सिंह से एक सोने का कड़ा लिया था। सोने का कड़ा पेपर लीक की प्लानिंग करने के लिए लिया था। शेर सिंह और विजय कटारा के संबंध अच्छे थे। इसलिए विजय ने शेर सिंह से पैसा न लेकर सोने का कड़ा लिया। एसओजी ने वह ज्वेलरी शॉप भी तलाश ली, जिस से विजय के लिए सोने का कड़ा खरीदा गया था।
कटारा को गिरफ्तारी का पहले से था अंदेशा
अशोक राठौड़ ने बताया कि बाबूलाल कटारा यह जान चुका था कि कभी भी उसकी गिरफ्तारी हो सकती है। जब एसओजी के डीआईजी सतवीर सिंह उसके अजमेर स्थित घर पहुंचे तो उसने किसी भी प्रकार का कोई रिएक्शन नहीं किया। प्रारंभिक पूछताछ में कई खुलासे किए हैं। अभी भी पेपर लीक मामले में 10 से अधिक लोग एसओजी की गिरफ्त में नहीं आए हैं। इनकी तलाश की जा रही है।
अब बाबूलाल कटारा समेत तीनों को एक साथ वाइस प्रिंसिपल शेर सिंह मीणा के सामने बैठाकर पूछताछ की जाएगी। शेर सिंह को पहले ही दस दिन की रिमांड पर लिया जा चुका है। रिमांड पूरी होने के बाद फिर से तीन दिन की रिमांड पर लेने की तैयारी है।
बेरोजगार भांजे को अपने यहां काम पर रखा
एग्जाम से 2 हफ्ते पहले दे दिया था पेपर
राठौड़ ने बताया कि पेपर सेट करने का जिम्मा बाबूलाल कटारा के पास था। कटारा ने पेपर शुरू होने से 2 हफ्ते पहले ही शेर सिंह को हाथ से लिखा पेपर दे दिया था। शेर सिंह ने दो किस्तों में 60 लाख रुपए कटारा को दिए।
शेर सिंह ने इस पेपर को जयपुर के शास्त्री नगर थाना इलाके में टाइप करा कर भूपेंद्र सारण को बेच दिया। भूपेंद्र फिर इस पेपर को आगे सर्कुलेट करता चला गया। पेपर को 5 लाख रुपए तक में बेचा गया।
शिक्षक भर्ती पेपर लीक : खुला रहस्य, निकला सदस्य, RPSC से लीक हुआ था पेपर, सदस्य कटारा, ड्राइवर और भांजा गिरफ्तार📚 ✅️
प्रसिद्ध कुएं
🔸जैसलू कुंआ - जैसलमेर
🔸बाटाडू का कुंआ - बाडमेर
🔹राजाजी का कुंआ - दौसा
🔹गडरिया कुआँ - भरतपुर
🔸ननद भौजाई का कुआं - करौली
🔹रामसर कुंआं - बीकानेर
🔹मेनाल कुंआ - भीलवाड़ा
नौलखा (नवलखा) बावड़ी -- डूंगरपुर
नौलखा (नवलखा) दरवाजा -- रणथंबोर
नौलखा (नवलखा) बुर्ज -- चित्तौड़गढ़
नौलखा (नवलखा) महल -- उदयपुर
नौलखा (नवलखा) मंदिर -- पाली
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राजस्थान का प्रथम विजय स्तंभ- बयाना भरतपुर (सुंदर गुप्त)
राजस्थान का दूसरा विजय स्तंभ- मंडोर जोधपुर
राजस्थान का तीसरा व सबसे बड़ा विजय स्तंभ- चित्तौड़गढ़ (राणा कुंभा)
राजस्थान का चौथा विजय स्तंभ- आहुआ पाली (कुशाल सिंह)
राजस्थान का पांचवा विजय स्तंभ- जैसलमेर
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सावन भादो झरना -- जोधपुर
सावन भादो परियोजना -- कोटा
सावन भादो महल -- डीग (भरतपुर)
सावन भादो झील -- अचलगढ़ (सिरोही)
जयसमंद बांध -- अलवर
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बिना ईश्वर की गणगौर -- जैसलमेर
बिना पार्वती की गणगौर -- बीकानेर
गुलाबी गणगौर -- नाथद्वारा
इंदिरा गाँधी मातृत्व पोषण योजना🔰
▪️शुरुआत - 19 नवंबर 2020
▪️New update :- 2nd सन्तान होने पर तीन किस्तों में सहायता....
▪️लड़के का जन्म - 6000 रुपये
▪️लड़की का जन्म - 8000 रुपये
▪️अनिवार्य शर्तें
▪️dusri संतान हेतु महिला द्वारा गर्भाधरण - जून 2021 के बाद
▪️dusri संतान का जन्म - अप्रैल 2022 के बाद ही लाभान्वित होगी!
▪️नोट ➖ गौरतलब है कि इस योजना को वर्ष 2022 का स्कोच सिल्वर अवार्ड से नवाजा गया है !
