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भारत में 103 रामसर साइट
👉 भारत में रामसर स्थलों की कुल संख्या 103 हो गई है।
नवीनतम आर्द्रभूमि हैं :
1. सुखना आर्द्रभूमि, चण्डीगढ़ (102)
2. सौज झील, मैनपुरी, उत्तरप्रदेश (103)
👉 सर्वाधिक रामसर स्थल तमिलनाडु (20) और उत्तर प्रदेश (14) में
👉 99 से 101 तक के रामसर साइट
99 शेखा झील पक्षी अभ्यारण्य उत्तर प्रदेश अप्रैल 2026
100 जयप्रकाश नारायण पक्षी अभ्यारण्य (सुरहा ताल) उत्तर प्रदेश जून 2026
101 गलाव झील अरुणाचल प्रदेश अगस्त 2026
👉 भारत में दो रामसर स्थल दर्जा प्राप्त शहर है
1. इंदौर (MP)
2. उदयपुर (RJ)
👉 मॉन्टेक्स रिकॉर्ड में भारत की दो रामसर साइट है
1. केवलादेव घाना पक्षी विहार भरतपुर (राजस्थान)
2. लोकतक झील (मणिपुर)
👉 राजस्थान में पांच रामसर साइट है
1. केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, भरतपूर (1981)
2. सांभर झील जयपुर (1990)
3. खीचन वेटलैंड, फलोदी (जून 2025)
4. मेनार वेटलैंड कॉम्प्लेक्स, उदयपुर (जून 2025)
5.सिलीसेढ़ झील, अलवर (12 दिसंबर 2025)
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♦️ *विजय स्तम्भ : भगवान विष्णु को समर्पित*
✔️इस स्तम्भ का निर्माण ( *1440-1448 ई.)* *महाराणा कुम्भा द्वारा मालवा (सुल्तान महमूद खिलजी) सारंगपुर युद्ध की विजय की स्मृति में करवाया गया।*
✔️इसको प्रशस्तियों में 'कीर्ति स्तम्भ' कहा गया है। इसका निर्माण कार्य लाल बलुआ पत्थर एवं सफेद संगमरमर से *जैता तथा उसके पुत्र नामा, पोमा तथा पूंजा के निर्देशन में किया गया तथा* *कीर्ति स्तम्भ प्रशस्ति* का प्रशस्तिकार *कवि अत्रि था।*
⭐ *122 फीट ऊँचे (9 मंजिला, 157 सीढ़ियाँ* स्तंभ के प्रवेश द्वार पर जनार्दन
की मूर्ति उत्कीर्ण है।
⭐इसकी दूसरी एवं पाँचवी मंजिल पर इसके निर्माता कलाकारों की आकृतियाँ बनी हैं। इस स्तम्भ की *नौ मंजिलों में स्थित मूर्तियाँ -*
➖प्रथम मंजिल - अनंत, ब्रह्मा और रूद्र
➖द्वितीय मंजिल - अर्द्धनारीश्वर तथा हरिहर
➖तीसरी मंजिल - विंरचि, जयंत, नारायण और पितामह की मूर्तियाँ। यहीं अरबी में *9 बार 'अल्लाह' खुदा हुआ है।*
➖चौथी मंजिल - त्रिखण्डा, हरिसिद्ध, पार्वती, हिंगलाज, गंगा, यमुना, सरस्वती, गंधर्व, कार्तिकेय एवं विश्वकर्मा
➖पाँचवीं मंजिल-लक्ष्मी-नारायण, उमा-महेश्वर और ब्रह्मा - सावित्री आदि की युग्म मूर्तियाँ उत्कीर्ण।
➖छठी मंजिल-सरस्वती, महालक्ष्मी और महाकाल
➖सातवीं मंजिल - वाराह, नृसिंह, रामचन्द्र, बुद्ध, आदि विष्णु के अवतारों की मूर्तियाँ
➖ *आठवीं मंजिल पर कोई मूर्ति नहीं है।*
➖नवीं मंजिल बिजली गिरने से टूट गयी थी जिसे राणा स्वरूप सिंह ने पुनः निर्मित करवाया। इस पर अत्रि एवं महेश द्वारा रचित कीर्ति स्तम्भ प्रशस्ति उत्कीर्ण है।
जेम्स टॉड ने इसे 'कुतुबमीनार से श्रेष्ठ इमारत' माना है। इसे 'भारतीय मूर्तिकला का विश्वकोष' कहा जाता है।
विजय स्तम्भ पर 15 अगस्त, 1949 को 1 रुपये का डाक टिकट जारी किया गया।
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Struggle hi to h
Lifetime thodi h
Sbki life me struggle rhta h kisi ki me km kisi ki me jyada
Kuch saal acche se ragad liye to jeevan bhr sukoon rhega
Or abhi nhi ragde to jeevan bhr afsos rhega ki kaash me pdh leta pdh leti
So dont waste your time
Jeevan me kabhi bhi kisi bhi cheez ke liye kaashhhh …. Nhi hona chaiye
well said 👍🏻✌🏻
Navneet Sharma RAS Rank 3
