ar
Feedback

لا تقع ضحية للمخادعين! تيليمتريو يكتشف ويُميّز هذه القنوات 👉 إذا كنت تريد رؤية العلامة، اشترك

I.A.S.(हिंदी माध्यम)

I.A.S.(हिंदी माध्यम)

الذهاب إلى القناة على Telegram

🚩 Channel was restricted by Telegram

إظهار المزيد
الهند187 457الفئة غير محددة
2 554
المشتركون
لا توجد بيانات24 ساعات
لا توجد بيانات7 أيام
لا توجد بيانات30 أيام
أرشيف المشاركات
महाजनपद काल.....pdf3.53 KB

भारतीय_इतिहास_के_प्रमुख_आंदोलन.pdf2.40 KB

प्राचीन_भारतcomplete_राज_होलकर.pdf41.49 MB

गौतम_बुद्ध_और_बौद्ध_धर्म_शॉर्ट_नोट्स.pdf3.52 KB

कलिंग_का_युद्ध_शार्ट_नोट्स_.pdf2.66 KB

अशोक_के_अभिलेख_शॉर्ट_नोट्स_.pdf7.10 KB

अशोक का धम्म.....pdf6.14 KB

Shunga Dynasty - Mind map.pdf11.03 MB

RS sharma Hindi.pdf22.98 MB

ncert ancient history.pdf20.43 MB

GS_Pointer_1_प्राचीन_व_मध्यकालीन_इतिहास.pdf8.11 MB

ancient history class 11 th(hindi).pdf18.03 MB

'इंडिया ऑब्ज़र्वेटरी' (India Observatory) जो कि एक ओपन-सोर्स डेटाबेस के रूप में कार्य करती है, ने एक 'भौगोलिक सूचना तंत्र' (Geographic Information System- GIS) आधारित डैशबोर्ड का निर्माण किया है जो प्रवासियों की आवाजाही को दर्शाने में सक्षम है। प्रमुख बिंदु: इस मंच का निर्माण गैर-लाभकारी संगठन ‘वन पारिस्थितिक सुरक्षा’ (Forest Ecological Security- FES) आनंद, गुजरात के सहयोग से किया गया है, जिसे 'CoAST इंडिया' (Collaboration/Covid Action Support Group) कहा जाता है। यह मंच 55 संगठनों के माध्यम से जमीनी स्तर पर; विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के बारे में जानकारी प्राप्त करता है। वेब आधारित भौगोलिक सूचना तंत्र (GIS): वेब आधारित भौगोलिक सूचना तंत्र (GIS) में वेब तथा अन्य परिसंचालनों का उपयोग कर स्थानिक जानकारी का अनुप्रयोग, सूचनाओं को संसाधित एवं प्रसारित किया जाता है। यह उपयोगकर्त्ताओं को आँकड़ों के एकत्रीकरण, विश्लेषण एवं परिणामों को अधिक से अधिक व्यक्तियों तक प्रसारित करने में मदद करता है तथा नीति निर्माताओं के लिये उपयुक्त आँकड़ों को उपलब्ध कराने में मदद करता है। प्राकृतिक संसाधनों की निगरानी में प्रयुक्त GIS में बदलाव : वन पारिस्थितिक सुरक्षा (FES) संगठन मुख्यतः वनों, जल निकायों, संरक्षण आदि पारिस्थितिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करता है। जो 'उपग्रह आधारित निगरानी' के माध्यम से इनकी निगरानी करता है। पारिस्थितिक निगरानी के लिये 1,800 से अधिक मापदंडों का उपयोग किया जाता है। FES द्वारा इसी प्रणाली में आवश्यक बदलाव करके प्रवासियों की वास्तविक समय पर ट्रैकिंग (Real Time Tracking) की जाएगी। उत्तर प्रदेश द्वारा प्रवासी श्रमिकों का कौशल मानचित्र: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 25 मई, 2020 को लॉकडाउन के दौरान राज्य में लौटने वाले प्रवासी श्रमिकों के लिये कौशल मानचित्र को जारी किया गया। कौशल आधारित मानचित्र का उपयोग करके सरकार इन श्रमिकों को इनके कौशल और अनुभव के अनुसार राज्य में रोज़गार प्रदान करेगी तथा इसके लिये एक प्रवासी आयोग का गठन करेगी। प्रवासी GIS डैशबोर्ड के मुख्य तत्त्व: प्रवासियों को डैशबोर्ड पर वास्तविक समय निगरानी के लिये चार प्रकार के तत्त्वों की जानकारी होना आवश्यक है: प्रवासियों और समाज के सुभेद्य लोगों के स्थान की जानकारी; उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं की पहचान; मार्गों में महत्त्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे की उपलब्धता, गैर-सरकारी संगठन तथा नागरिक समाज संगठन को जोड़ना। प्रवासी मानचित्रण की कार्यप्रणाली: COVID-19 महामारी के व्यापक प्रसार के बाद 'रैपिड कम्युनिटी रिस्पॉन्स COVID' (Rapid Community Response to Covid- RCRC) नामक एक समूह का गठन किया गया तथा प्रवसियों की निगरानी की लिये डैशबोर्ड का निर्माण किया गया। लोगों की आवाजाही, भोजन की आवश्यकता, वित्तीय सहायता, चिकित्सा देखभाल आदि की नियमित सूचना डैशबोर्ड के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती है तथा सूचनाओं को नियमित रूप से अद्यतन किया जाता है। 15 अप्रैल को प्रवासियों की आवाजाही को दर्शाने वाले 'प्रवासी मानचित्र' (Migrant Map) कार्य कर रहा है। आँकड़ों का डैशबोर्ड पर मानचित्रण करने के लिये संकटग्रस्त लोगों द्वारा की जाने वाली फोन कॉल का उपयोग किया गया। प्रवास से संबंधित आँकड़ों को सरकारों और छोटे स्थानीय नागरिक समूहों को उपलब्ध कराया जाता है ताकि प्रवासियों को वास्तविक समय पर सहायता उपलब्ध कराई जा सके। ‘प्रवासी मानचित्र’ के माध्यम से, वास्तविक समय प्राप्त प्रवास संबंधी स्थानिक आँकड़ों की क्षेत्र में उपलब्ध प्रशासनिक सुविधाओं यथा परिवहन, स्वास्थ्य सुविधाओं, वायु परिवहन आदि से मेल किया जाता है तथा आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाया जाता है। GIS प्रणाली में ओपन-सोर्स डेटा का महत्त्व: ओपन-सोर्स डेटा का महामारी प्रबंधन की दृष्टि से बहुत अधिक महत्त्व है क्योंकि ये आँकड़े स्थानीय रूप से उपलब्ध होते हैं तथा इन आँकड़ों की प्राप्ति के लिये किसी बड़े संगठन या सरकार की अनुमति की आवश्यकता नहीं होती है। भू-स्थानिक आँकड़ों की सरकार, नागरिक समाज और उद्योग सभी के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। हालाँकि वर्तमान समय में भारत में 'राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण' या 'भारतीय सर्वेक्षण' के पास उपलब्ध आँकड़ों को 'रणनीतिक' दृष्टि से महत्त्वपूर्ण माना जाता है तथा ये आँकड़े बड़े पैमाने पर जनता के लिये उपलब्ध नहीं होते है। निष्कर्ष: वेब आधारित GIS, स्थानीय सूचना के प्रसार एवं उनकी विशिष्टताओं एवं सम्बद्ध कार्यों के लिये उपयोगी है। प्राकृतिक अनुसंधान स्थानिक आँकड़ों के प्रदर्शन हेतु भारत में अनेक महत्त्वपूर्ण अनुप्रयोग विकसित किये हैं। पारंपरिक रूप में स्थानिक आँकड़ों को GIS आँकड़ों के प्रसार के लिये तैयार किया जाता है।

रियाणा के किसानों द्वारा राज्य सरकार द्वारा हाल ही में शुरू की गई ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ (Mera Pani Meri Virasat) योजना के विरुद्ध ‘ट्रैक्टर मार्च’ निकाला गया। किसानों द्वारा इस विरोध प्रदर्शन को 'किसान बचाओ-खेती बचाओ' (Kisan Bachao-Kheti Bachao) अभियान नाम दिया गया है। ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ योजना (Mera Pani Meri Virasat) Scheme हरियाणा राज्य सरकार द्वारा जल संरक्षण के उद्देश्य से ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ (Mera Pani Meri Virasat) योजना की शुरुआत की गई है। इस योजना के माध्यम से राज्य सरकार पानी की अधिक खपत वाले धान के स्थान पर ऐसी फसलों को प्रोत्साहित करेगी जिनके लिये कम पानी की आवश्यकता होती है। योजना के तहत, आगामी खरीफ सीजन के दौरान धान के अलावा अन्य वैकल्पिक फसलों की बुवाई करने वाले किसानों को प्रोत्साहन राशि के रूप में प्रति एकड़ 7,000 रुपए भी दिये प्रदान किये जाएंगे। योजना में शामिल क्षेत्र: इस योजना में रतिया, सीवन, गुहला, पिपली, शाहाबाद, बाबैन, इस्माइलाबाद और सिरसा सहित आठ ब्लॉक शामिल हैं। ये आठ ब्लॉक धान समृद्ध क्षेत्रों में शामिल है जहाँ भूजल स्तर की गहराई 40 मीटर से अधिक है। वर्ष 2019 में इन आठ ब्लॉकों द्वारा कुल 2,06,000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती की गई थी। वर्ष 2020 में सरकार का लक्ष्य इन ब्लॉकों के 50% धान क्षेत्र (1,03,000 हेक्टेयर) में धान को मक्का, कपास, बाजरा और दलहन सहित वैकल्पिक फसलों के साथ प्रतिस्थापित करना है। किसानों द्वारा योजना के विरोध के कारण: विरोध प्रदर्शन करने वाले किसानों का मत है कि राज्य सरकार को यह तय करने का निर्णय किसानों पर छोड़ देना चाहिये कि वी अपने खेत में कौन-सी फसल फसल उगाएँ। इसके अलावा किसानों का तर्क यह भी है कि मक्का जैसी वैकल्पिक फसल बोने के लिये ब्लॉक के अधिकांश हिस्सों की मिट्टी/मृदा और जलवायु अनुकूल स्थितियाँ विद्यमान नहीं है। इसके अलावा, सरकार द्वारा दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि भी पर्याप्त नहीं है।

पुंटियस सैंक्टस Puntius Sanctus तमिलनाडु के वेलनकन्नी (Velankanni) में साइप्रिनिडे (Cyprinidae) परिवार के ताजे पानी की एक छोटी मछली की एक नई प्रजाति ‘पुंटियस सैंक्टस’ (Puntius Sanctus) का पता चला है। प्रमुख बिंदु: इस मछली की पहचान एवं नामकरण कोल्लम (तमिलनाडु) में बीजेएम गवर्नमेंट कॉलेज के प्राणी विज्ञान विभाग के प्रमुख ‘मैथ्यूज़ प्लामूत्तिल’(Mathews Plamoottil) द्वारा किया गया है। यह मछली अत्यंत छोटी होती है जो 7 सेमी. की लंबाई तक बढ़ती है। पुंटियस प्रजाति को स्थानीय रूप से केरल में 'पाराल' (Paral) और तमिलनाडु में 'केंडे' (Kende) के नाम से जाना जाता है। वे विशुद्ध रूप से ताजे जल की मछलियाँ हैं। हालाँकि केरल और तमिलनाडु में पाई जाने वाली इस मछली में लगभग समानता दिखाई देती है किंतु वेलंकन्नी में पाई गई इस मछली में शेष प्रजाति से अंतर है। शारीरिक विशेषताएँ: इसकी शारीरिक विशेषताओं में एक ‘फैला हुआ मुँह’ (Protractible Mouth), ‘मैक्सिलरी बार्बल्स’ (Maxillary Barbels) (मुँह के पास एक संवेदी अंग) की एक जोड़ी, 24-25 पार्श्व रेखा अनुमाप और 10 पूर्व-पृष्ठीय अनुमाप शामिल हैं।

शाही लीची और जर्दालु आम Shahi Lichi & Zardalu Mango भारत सरकार के डाक विभाग और बिहार सरकार के बागवानी विभाग ने लोगों के दरवाज़ों तक ‘शाही लीची’ (Shahi Lichi) और ‘जर्दालु आम’ (Zardalu Mango) की आपूर्ति करने के लिये समझौता किया है। गौरतलब है कि COVID-19 के कारण हुए राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन में लीची एवं आम उत्पादकों को बाज़ार तक अपने उत्पादों को ले जाने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शाही लीची: मई से जून तक उपलब्ध होने वाली शाही लीची की खेती मुख्य रूप से बिहार में मुजफ्फरपुर एवं उसके आसपास के ज़िलों में की जाती है। शाही लीची की खेती में लगभग 25,800 हेक्टेयर का क्षेत्र शामिल है जो प्रत्येक वर्ष लगभग 300,000 टन का उत्पादन करता है। वर्ष 2018 में इस प्रसिद्ध शाही लीची को GI टैग प्रदान किया गया। जर्दालु आम: बिहार के भागलपुर का ‘जर्दालु आम’ अपनी अनोखी खुशबू के कारण दुनिया भर में प्रसिद्ध है। आम की यह किस्म (जर्दालु आम) हल्की पीली परत और मिठास के लिये जानी जाती है। जर्दालु आम को सबसे पहले खड़गपुर के महाराजा रहमत अली खान बहादुर द्वारा भागलपुर क्षेत्र में लगाया गया था। वर्ष 2018 में जर्दालु आम को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्रदान किया गया। ग्राहक ‘शाही लीची’ और ‘जर्दालु आम’ को मंगाने के लिये ऑनलाइन वेबसाइट "horticulture.bihar.gov.in" पर ऑर्डर दे सकते हैं।

वर्ल्ड स्टील एसोसिएशन ने वर्ल्ड स्टील रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत में क्रूड स्टील में 65% की गिरावट आई है। अप्रैल 2020 के दौरान, भारत का इस्पात उत्पादन 3.13 मिलियन टन था। मुख्य बिंदु अप्रैल 2019 में भारत ने 9.02 मिलियन टन का उत्पादन किया। मार्च 2020 में, भारत को मार्च 2019 की तुलना में 14% इस्पात उत्पादन में गिरावट का सामना करना पड़ा। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक इस्पात उत्पादन में 13% की गिरावट आई है। अप्रैल 2019 में, वैश्विक इस्पात उत्पादन 157.67 मिलियन टन था। अप्रैल 2020 में, उत्पादन घटकर 137.09 मिलियन टन रह गया। रिपोर्ट की मुख्य बातें चीन ने इस्पात उत्पादन में 1.7% की गिरावट दर्ज की है। यह पहली बार है जब चीन उत्पादन में गिरावट का सामना कर रहा है। अमेरिका को 32% की गिरावट का सामना करना पड़ा। दक्षिण कोरिया के इस्पात उत्पादन में 8.4% की गिरावट आई है। यूरोपीय संघ, फ्रांस, इटली, तुर्की, स्पेन, रूस, यूक्रेन और ब्राजील जैसे अन्य वैश्विक इस्पात उत्पादकों को भी अपने उत्पादन में गिरावट का सामना करना पड़ा। राष्ट्रीय इस्पात नीति भारत वर्तमान में अपनी राष्ट्रीय इस्पात नीति 2017 के तहत काम कर रहा है। इस नीति के तहत, भारत को 2030 तक अपने इस्पात उत्पादन को 300 मिलियन टन तक बढ़ाना है। इसका उद्देश्य भारत को इस्पात में आत्मनिर्भर बनाना है। इसका उद्देश्य देश में वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी स्टील औद्योगिक उत्पादन सुनिश्चित करना है

नासा के शोधकर्ताओं ने अंटार्कटिक क्षेत्र में बर्फ से उच्च ऊर्जा वाले कणों का पता लगाया है। शोधकर्ताओं का मानना ​​है कि ये कण समानांतर ब्रह्मांड के प्रमाण हैं। ANTIA यह हाई-एनर्जी कॉस्मिक न्यूट्रिनो है जो रेडियो पल्सेस का पता लगाता है जो अंटार्कटिक बर्फ की चादर से उत्सर्जित हो रहे हैं। बर्फ में न्युट्रीनो अस्केरियन प्रभाव के कारण रेडियो पल्सेस का उत्पादन करते हैं। ANTIA उपकरण अंटार्कटिका के क्षेत्र में उड़ान भरने वाले वैज्ञानिक बैलून के माध्यम से कॉस्मिक-रे न्यूट्रिनो का पता लगाता है। यह नासा की पहली न्यूट्रिनों वेधशाला है। अस्केरियन प्रभाव यह वह घटना है जहां एक घने विद्युत माध्यम में प्रकाश से तेज वेग से यात्रा करने वाला एक कण, द्वितीयक आवेशित कणों की बौछार करता है। यह घने विद्युत माध्यम बर्फ, चंद्र रेगोलिथ हो सकते हैं। ANTIA की खोज ANTIA ने अब तक चार प्रमुख ब्रह्मांडीय किरणों का पता लगाया है। आकाश से आने वाली ब्रह्मांडीय किरणें बर्फ से परावर्तित होती हैं।नासा के शोधकर्ताओं ने अंटार्कटिक क्षेत्र में बर्फ से उच्च ऊर्जा वाले कणों का पता लगाया है। शोधकर्ताओं का मानना ​​है कि ये कण समानांतर ब्रह्मांड के प्रमाण हैं। ANTIA यह हाई-एनर्जी कॉस्मिक न्यूट्रिनो है जो रेडियो पल्सेस का पता लगाता है जो अंटार्कटिक बर्फ की चादर से उत्सर्जित हो रहे हैं। बर्फ में न्युट्रीनो अस्केरियन प्रभाव के कारण रेडियो पल्सेस का उत्पादन करते हैं। ANTIA उपकरण अंटार्कटिका के क्षेत्र में उड़ान भरने वाले वैज्ञानिक बैलून के माध्यम से कॉस्मिक-रे न्यूट्रिनो का पता लगाता है। यह नासा की पहली न्यूट्रिनों वेधशाला है। अस्केरियन प्रभाव यह वह घटना है जहां एक घने विद्युत माध्यम में प्रकाश से तेज वेग से यात्रा करने वाला एक कण, द्वितीयक आवेशित कणों की बौछार करता है। यह घने विद्युत माध्यम बर्फ, चंद्र रेगोलिथ हो सकते हैं। ANTIA की खोज ANTIA ने अब तक चार प्रमुख ब्रह्मांडीय किरणों का पता लगाया है। आकाश से आने वाली ब्रह्मांडीय किरणें बर्फ से परावर्तित होती हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने हाल ही में आठ उम्मीदवारों के मानव परीक्षण में प्रवेश करने की घोषणा की है। कई लोग ‘ह्यूमन चैलेंज ट्रायल’ में भाग लेने के लिए आगे आये हैं। ह्यूमन चैलेंज ट्रायल क्या है? इस परीक्षण में वालंटियर को COVID-19 वायरस के साथ संक्रमित किया जाता है। यह टीका विकास की प्रक्रिया को गति देने के लिए किया जाता है। टीके का विकास टीके का विकास नैदानिक ​​परीक्षणों के तीन चरणों के माध्यम किया जाता है, इसे विकसित होने में कई साल लगते हैं। चरण 1: इस चरण के दौरान लोगों के छोटे समूह टीका प्राप्त करते हैं चरण 2: वैक्सीन उन लोगों को दी जाती है जिनकी विशेषताएं उन लोगों के समान होती हैं जिनके लिए नया वैक्सीन बनाया जा रहा है। चरण 3: सुरक्षा और प्रभावकारिता का परीक्षण करने के लिए टीका हजारों को दिया जाता है। इस चरण के दौरान, प्रतिभागियों को या तो प्लेसीबो या टीका प्राप्त होता है। ह्यूमन चैलेंज ट्रायल नया नहीं है। इससे पहले, मलेरिया के लिए भी इसी तरह के परीक्षण किए गए थे। लाभ ह्यूमन चैलेंज ट्रायल का मुख्य लाभ यह है कि यह परीक्षण को तेज करता है। कई प्रभावकारी टीके अधिक तेज़ी से उपलब्ध होंगे। साथ ही, इन परीक्षणों के चरण 3 में आवश्यक लोगों की संख्या नियमित परीक्षणों से कम है।

भारतीय रेलवे ने 25 मई, 2020 तक देश भर में 3274 “श्रमिक स्‍पेशल” ट्रेनें चलाई और 25 दिन में श्रमिक स्‍पेशल ट्रेनों के जरिये 44 लाख से अधिक यात्रियों को उनके गृह राज्‍यों तक पहुंचाया यात्रा करने वाले प्रवासियों के बीच 74 लाख से अधिक मुफ्त भोजन और 1 करोड़ से अधिक पानी की बोतलें वितरित की गई आज चल रही ट्रेनों में कोई भीड़भाड़ नहीं श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के अलावा, रेलवे 12 मई से नई दिल्ली से 15 जोड़ी स्पेशल ट्रेनें चला रहा है और 1 जून, 2020 से उसकी समय सारणी के साथ 200 और ट्रेनें चलाने की योजना विशेष रेलगाड़ियों द्वारा विभिन्न स्थानों पर फंसे प्रवासी श्रमिकों, तीर्थयात्रियों, पर्यटकों, छात्रों और अन्य व्यक्तियों को लाने-ले जाने के संबंध में गृह मंत्रालय के आदेश के बाद, भारतीय रेलवे ने 1 मई, 2020 से “श्रमिक स्पेशल” ट्रेनें चलाने का फैसला किया था। विभिन्न राज्यों से 25 मई, 2020 तक देश भर में कुल 3274 "श्रमिक स्पेशल" ट्रेनें चलाई गई। इन "श्रमिक स्पेशल" ट्रेनों से 44 लाख से अधिक यात्री अपने गंतव्य तक पहुँच चुके हैं। 25.05.2020 को 223 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें 2.8 लाख यात्रियों को लेकर चल रही थीं। आईआरसीटीसी ने यात्रा करने वाले प्रवासियों के बीच 74 लाख से अधिक मुफ्त भोजन और 1 करोड़ से अधिक पानी की बोतलें वितरित की। यह बात गौर करने लायक है कि आज चल रही ट्रेनों को भीड़भाड़ का सामना नहीं करना पड़ा है। श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के अलावा, रेलवे 12 मई से नई दिल्ली से 15 जोड़ी स्पेशल ट्रेनें चला रहा है और उसकी 1 जून, 2020 से समय सारणी के साथ 200 और ट्रेनें चलाने की योजना है