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सल्तनत काल की प्रमुख रचनाएँ (Sultanate Period Books) पुस्तक ➖ लेखक 🔰 🔰 📙तारीख-ए-फिरोजशाही➖ जियाउद्दीन बरनी 📘फतवा-ए-जहांदारी➖जियाउद्दीन बरनी 📗तबाकर-ए-नासिर ➖मिनहाज-उस-सिराज 📕फुतूहात-उस-सलातीन➖ख्वाजा अबू वक्र इसामी 📙किताब-उल-रहला➖इब्नेबतूता 📘फुतूहात-उल-फिरोजशाही➖ फिरोजशाह तुगलक 📗तहकीक-ए-हिन्द➖अलबरूनी 📕तारीख-ए-मुबारकशाही➖याहिया बिन अहमद सरहिन्दी 📙तारीख-ए-सलातीन-ए-अफगान➖ अहमद यादगार 📘ताज-उल-मासिर➖ हसन निजामी 📗खजाय-नुल-फुतूह➖अमीर खुसरो 📕तारीख-ए-अलाई➖अमीर खुसरो 📙तुगलकनामा ➖अमीर खुसरो 📘ब्रह्मसूत्र ➖रामानुजन 📗तारीख-ए-मुहम्मदी➖मुहम्मद बिहमद खान 📕मुनशत-ए-महरू➖मुल्तानी 📙तारीख-ए-सिन्ध➖मीर मुहम्मद मसूम 📘तारीख-ए-यामिनी ➖उत्बी 📗हम्मीर मद-मर्दन➖जयसिंह सूरी 📕गीत गोविन्द➖जयदेव 📙हरकेलि नाटक➖जयदेव 📘ललित विग्रहराज➖जयदेव 📗प्रसन्न राघव➖जयदेव 📕प्रद्युम्नाभ्युदय➖रविवर्मन 📙पार्वती परिणय➖वामन भट्ट 📘पृथ्वीराज रासो➖चंद बरदाई 📗जाम्बवती कल्याणम ➖कृष्णदेव राय 📕राजतरंगिणी ➖कल्हण 📙बीसलदेव रासो➖नरपतिनाथ 📘चंदावत➖ मुल्ला दाउद 📗आल्हखंड➖ जगनिक ‍‍‌

गोवा स्थापना दिवस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोवा के स्थापना दिवस के स्थापना दिवस (30 मई) के अवसर पर राज्य के लोगों को शुभकामनाएँ दी हैं। इस दिवस का आयोजन गोवा को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने के अवसर पर किया जाता है। वर्ष 1947 में स्वतंत्रता के बाद सरदार पटेल ने सभी रियासतों को मिलाकर भारत को एक संघ राज्य का रूप दिया। वे गोवा को भी भारतीय संघ राज्य क्षेत्र में शामिल करना चाहते थे, किंतु ऐसा नहीं हो पा रहा था, क्योंकि 1510 ई से गोवा और दमन एवं दीव में पुर्तगालियों का औपनिवेशिक शासन था। भारत सरकार ने कई बार पुर्तगाली सरकार से वार्ता की, किंतु वे विफल रहीं, जिसके बाद अंततः 18 दिसंबर, 1961 को भारत की सेना ने गोवा, दमन और दीव में हमला कर दिया। 19 दिसंबर, 1961 को पुर्तगाली सेना ने आत्मसमर्पण कर दिया और गोवा को स्वतंत्रता प्राप्त हुई। इसके बाद 30 मई, 1987 को तत्कालीन प्रधानमंत्री द्वारा गोवा को आधिकारिक तौर पर भारत का 25वाँ राज्य घोषित किया गया। गोवा, भारतीय प्रायद्वीप के पश्चिमी तट पर स्थित है। इसके उत्तर में तेरेखोल नदी (Terekhol River) बहती है, जो गोवा को महाराष्‍ट्र से अलग करती है, वहीं इसके पश्चिम में अरब सागर है। गोवा का कुल क्षेत्रफल लगभग 3,702 वर्ग किलोमीटर है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, गोवा की जनसंख्या तकरीबन 1458545 है। गोवा की राजधानी पणजी (Panaji) है और यहाँ मुख्य तौर पर कोंकणी (Konkani) भाषा का प्रयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त यहाँ मराठी, हिंदी, अंग्रेजी तथा कन्नड़ आदि का भी प्रयोग होता है।

elecom Regulatory Authority of India- (TRAI) ने देश में नवीन 'राष्ट्रीय नंबरिंग योजना' (National Numbering Plan- NNP) शीघ्र लागू करने की सिफारिश की है ताकि प्रत्येक ग्राहक को ‘विशिष्ट पहचान संख्या’ (Uniquely Identifiable Number- UID) प्रदान की जा सके। प्रमुख बिंदु: दूरसंचार विभाग, (International Telecommunication Union- (ITU) के ‘दूरसंचार मानकीकरण क्षेत्र’ (Telecommunication Standardization Sector- ITU-T) अनुशंसाओं के आधार पर फिक्स्ड (लैंडलाइन) तथा मोबाइल नेटवर्क नंबरों का प्रबंधन करता है। नंबरिंग संसाधनों का प्रबंधन 'राष्ट्रीय नंबरिंग योजना' (National Numbering Plan) के तहत किया जाता है। नवीन नंबरिंग योजना की आवश्यकता: TRAI का मानना है की हाल ही में टेलीकॉम सेवाओं में व्यापक विस्तार देखने को मिला है तथा टेलीकॉम कनेक्शनों की संख्या में बहुत अधिक वृद्धि देखने को मिली है। इससे ‘उपलब्ध नंबरिंग संसाधनों’ (Availability of Numbering Resources); विशेषकर मोबाइल सेगमेंट में, इनकी पर्याप्त उपलब्धता नहीं है। वर्तमान में उपलब्ध नंबरिंग योजना को वर्ष 2003 में अपनाया गया था तथा ऐसा अनुमान था कि यह नंबरिंग प्रणाली वर्ष 2033 तक उपयुक्त रहेगी परंतु भारत में टेलीफोन ग्राहकों की कुल संख्या जनवरी, 2020 के अंत में 1,177.02 मिलियन थी। टेली-घनत्व (Tele-Density): टेलीफोन घनत्व या टेलीडेंसिटी एक क्षेत्र के भीतर रहने वाले प्रत्येक सौ व्यक्तियों पर टेलीफोन कनेक्शनों की संख्या है। जनवरी 2020 के आँकड़ों के अनुसार, भारत में टेली-घनत्व 87.45% है। TRAI द्वारा की गई प्रमुख सिफारिशें: यह सुनिश्चित करने के लिये कि दूरसंचार सेवाओं के सतत् विकास के लिये पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हों, TRAI ने सरकार को ‘राष्ट्रीय नंबरिंग योजना’ की समीक्षा करने तथा आवश्यक नीतिगत निर्णय लेने को कहा है। सरकार को नंबरिंग संसाधनों में किसी भी प्रकार के बदलाव से पूर्व निम्नलिखित तीन विकल्पों पर विचार करना चाहिये।वर्तमान 10 अंकीय मोबाइल नंबर प्रणाली के स्थान पर 11-अंकीय मोबाइल नंबर प्रणाली को अपनाना। ऑपरेटरों द्वारा बंद किये गए मोबाइल नंबरों को टेलिकॉम कंपनियों को पुन:आवंटित करना। फिक्स्ड लाइन (लैंडलाइन) से कॉल करते समयमोबाइल नंबर के आगे '0' का प्रयोग करना। यहाँ ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि वर्तमान समय में फिक्स्ड लाइन कनेक्शन से ‘इंटर-सर्विस एरिया’ में मोबाइल कॉल के लिये नंबर की शुरुआत में '0' लगाने की ज़रूरत पड़ती है। प्राधिकरण ने यह भी सिफारिश की है कि सभी मशीन-से-मशीन (M2M) कनेक्शन जो 10-अंकीय 'मोबाइल नंबरिंग शृंखला' का उपयोग करते हैं उन्हे दूरसंचार विभाग द्वारा आवंटित 13-अंकीय नंबरिंग शृंखला में स्थानांतरित कर दिया जाना चाहिये। इनमें ऐसे सिम कार्ड्स का इस्तेमाल किया जाना चाहिये जिनमें केवल डेटा में इस्तेमाल किया जा सके तथा कॉलिंग सुविधा न दी जाए। फिक्स्ड लाइन के साथ-साथ मोबाइल सेवाओं के लिये आवंटित किये जाने वाले नंबरिंग संसाधनों को प्रतिवर्ष सूचीबद्ध किया जाना चाहिये। ‘राष्ट्रीय नंबरिंग आवंटन' को कुशल तथा पारदर्शी तरीके से लागू करने के लिये 'नंबर प्रबंधन प्रणाली सॉफ्टवेयर' का उपयोग किया जाना चाहिये ताकि 'नंबरिंग संसाधनों का आवंटन' स्वचालित तरीके से हो सके। आवश्यकता हो तो आवंटन कार्य दूरसंचार विभाग के समग्र नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण में किया जा सकता है। सुधारों में आने वाली संभावित बाधाएँ: 11 अंकों की प्रणाली को अपनाने से ग्राहकों को अतिरिक्त अंक डायल करने और फोन मेमोरी को अपडेट करने की आवश्यकता होगी। इसके कारण दूरसंचार कंपनियों को नंबर डायलिंग त्रुटियों, राजस्व की हानि आदि का सामना करना पड़ सकता है। टेलीफोन नंबर व्यक्तियों की डिजिटल पहचान से जुड़े होते हैं। वित्तीय बैंकिंग सेवाओं, ई-कॉमर्स, सरकार की कल्याणकारी योजनाओं आदि में व्यक्तिगत पहचान के लिये टेलीफोन नंबर की आवश्यकता होती है। अत: इन सभी सेवाओं के डेटाबेस में परिवर्तन करने की आवश्यकता होगी। आगे की राह: वर्तमान में उपलब्ध 10 अंकों आधारित मोबाइल नंबर के स्थान पर 11 अंकों के मोबाइल नंबर प्रणाली को अपनाने में अनेक समस्याओं का सामना पड़ सकता है। अत: 11 अंकों आधारित मोबाइल प्रणाली को तभी अपनाना चाहिये जब 10-अंकों की संख्या के साथ इस प्रणाली को जारी रखने के सभी प्रयास समाप्त हो जाएँ।

मध्यप्रदेश सरकार द्वारा राज्य में देश के अन्य हिस्सों से लौटे कुशल श्रमिकों को रोज़गार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ‘रोज़गार सेतु’ (Rozgar Setu) योजना की घोषणा की है। प्रमुख बिंदु इस संबंध में घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि राज्य सरकार उन सभी कुशल श्रमिकों का सर्वेक्षण कर रही है जो महामारी से पूर्व किसी उद्योग में कार्यरत थे और महामारी के कारण राज्य में वापस लौटे हैं। इसके साथ ही श्रमिकों के कौशल की भी पहचान की जा रही है। रोज़गार की आवश्यकता वाले ऐसे श्रमिकों की पहचान करने के बाद सरकार कारखाने और कार्यशाला मालिकों तथा बुनियादी ढाँचे संबंधी विभिन्न परियोजनाओं की देख-रेख कर रहे ठेकेदारों से संपर्क करेगी। राज्य सरकार का प्रयास है कि मध्यप्रदेश में सभी कुशल श्रमिकों को एक मंच पर एकत्रित किया जाए और इसके पश्चात् इन्हें उन लोगों के साथ जोड़ा जाए जिन्हें इस कौशल की आवश्यकता है। इस प्रकार राज्य सरकार श्रमिकों और नियोक्ताओं के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करेगी ताकि दोनों को लाभ मिल सके और राज्य की अर्थव्यवस्था में भी सुधार हो सके। महत्त्व राज्य सरकार का यह निर्णय मध्यप्रदेश के उद्योगों के लिये श्रमशक्ति (Manpower) की आवश्यकता को पूरा करने के साथ-साथ कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी के दौरान श्रमिकों को रोज़गार भी प्रदान करेगा। प्रवासी संकट की चुनौती भारत में अंतर-राज्य प्रवासियों (Inter-State Migrants) का कोई आधिकारिक आँकड़ा नहीं है, किंतु वर्ष 2011 की जनगणना, NSSO के सर्वेक्षण और आर्थिक सर्वेक्षण पर आधारित अनुमानों के अनुसार, देश में कुल 65 मिलियन अंतर-राज्य प्रवासी हैं, जिनमें से 33 प्रतिशत प्रवासी श्रमिक हैं। ध्यातव्य है कि देश भर में कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी के प्रसार को रोकने के लिये केंद्र सरकार ने 25 मई को देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की थी, इस लॉकडाउन के कारण देश भर में सभी आर्थिक और गैर-आर्थिक गतिविधियाँ पूरी तरह से रुक गई थीं। ऐसे समय में देश भर के प्रवासी श्रमिकों के लिये अपनी आजीविका चलाना काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है तथा वे सभी अपने-अपने गृह राज्य वापस लौट रहे हैं, जिसके कारण गृह राज्य पर दबाव और अधिक बढ़ गया है। एक अनुमान के अनुसार, मध्यप्रदेश में इस लॉकडाउन अवधि के दौरान लगभग 1 मिलियन प्रवासी श्रमिक वापस लौटेंगे, हालाँकि राज्य सरकार के आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, अब तक 5 लाख से अधिक प्रवासी श्रमिकों को राज्य में वापस लाया जा चुका है। निष्कर्ष इतनी बड़ी संख्या में श्रमिकों को आजीविका के साधन उपलब्ध कराना राज्य सरकार के समक्ष एक बड़ी चुनौती होगी, जिसे देखते हुए सरकार के मौजूदा कदम को एक सराहनीय प्रयास माना जा सकता है।

मोंटेनेग्रो MONTENEGRO मोंटेनेग्रो/मोंटीनेग्रो (MONTENEGRO) यूरोपीय महाद्वीप का पहला ऐसा देश है जिसने स्वयं को कोरोनावायरस मुक्त घोषित किया है। प्रमुख बिंदु: मोंटेनेग्रो बाल्कन प्रायद्वीप के तट पर स्थित दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्वी यूरोप का एक देश है। इसका सीमा विस्तार उत्तर-पश्चिम में बोस्निया-हर्ज़ेगोविना, उत्तर-पूर्व में सर्बिया, पूर्व में कोसोवो, दक्षिण-पूर्व में अल्बानिया, दक्षिण-पश्चिम में एड्रियाटिक सागर और पश्चिम में क्रोएशिया तक है। मोंटेनेग्रो अपने आच्छादित पर्वतों, हिमनद झीलों और चहल-पहल वाले समुद्री तटों के लिये जाना जाता है। इसकी प्रशासनिक राजधानी पॉडगोरिका (Podgorica) है। सेटिंजे (Cetinje) को पुरानी शाही राजधानी के रूप में नामित किया गया है। मोंटेनेग्रो ‘डेन्यूब नदी के संरक्षण के लिये अंतर्राष्ट्रीय आयोग’ (International Commission for the Protection of the Danube River) का एक सदस्य देश है। गौरतलब है कि इस देश का 2,000 वर्ग किमी. से अधिक क्षेत्र ‘डेन्यूब जलग्रहण क्षेत्र’ (Danube Catchment Area) के अंतर्गत आता है। डेन्यूब नदी के संरक्षण के लिये अंतर्राष्ट्रीय आयोग’ (International Commission for the Protection of the Danube River- ICPDR): यह एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है। इसकी स्थापना ‘डेन्यूब रिवर प्रोटेक्शन कन्वेंशन’ द्वारा की गई थी जिस पर वर्ष 1994 में बुल्गारिया में डेन्यूब नदी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले देशों ने हस्ताक्षर किये थे। इसका सचिवालय वियना में है।

ऑपरेशन वॉर्प स्पीड Operation Warp Speed ‘ऑपरेशन वॉर्प स्पीड’ (Operation Warp Speed) संयुक्त राज्य अमेरिका की संघीय सरकार द्वारा COVID-19 से निपटने के लिये शुरू की गई एक सार्वजनिक-निजी साझेदारी पहल है। उद्देश्य: इसका उद्देश्य COVID-19 के टीके, चिकित्साविधान/चिकित्साशास्त्र और नैदानिकी के विकास को सुविधाजनक बनाना एवं उसमें तेज़ी लाना है। प्रमुख बिंदु: यह एक प्रकार का अंतर-संस्था कार्यक्रम है जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका के स्वास्थ्य विभाग के निम्नलिखित घटक शामिल हैं: रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (Centers for Disease Control and Prevention- CDC) खाद्य एवं औषधि प्रशासन (Food and Drug Administration- FDA) राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (National Institutes of Health) और निजी फर्म।

चंद्रपुर के जंगलों में बाघों की संख्या बढ़ने से बढ़ा वन्यजीवों और इंसानों में संघर्ष भारत में बाघों की संख्या बढ़कर 2967 हो गई है। महाराष्ट्र के चंद्रपुर जंगल में संख्या बढ़ने पर वन्यजीवों और इंसानों में संघर्ष बढ़ा है। राज्य के कुल 312 बाघों में से चंद्रपुर में ही 160 बाघ मौजूद हैं। कुछ सालों में 60 नए शावक तैयार हो जाएंगे। आपको बता दे यहाँ ताडोबा अंधारी बाघ संरक्षित क्षेत्र भी स्थित है जहाँ बड़ी संख्या में बाघ स्थित है। पिछले कुछ समय में बाघों की संख्या लगातार बढ़ी है। पिछले साल देश में बाघों की संख्या बढ़कर 2967 हो गई थी। बाघों की बढ़ती संख्या को अच्छा माना जाता है लेकिन महाराष्ट्र के एक जंगल में बाघों की संख्या परेशानी का सबब बन गई है। महाराष्ट्र के विदर्भ इलाके में चंद्रपुर के जंगालों में बाघों की संख्या 160 पहुंच गई है और आने वाले सालों में 60 बाघ शावक बड़े हो जाएंगे। इससे क्षेत्र में बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। इसके देखते हुए सरकार कुछ बाघों को यहां से दूसरे जंगलों में भेजने पर विचार कर रही है। सरकार ने इस पर विस्तार से अध्ययन करने के लिए वन विभाग के अधिकारियों को कहा है। गौरतलब है कि चंद्रपुर में मानव और बाघों के बीच संघर्ष बढ़ गया है। महाराष्ट्र के वन मंत्री संजय राठौड ने बताया कि राज्य में इस समय करीब 312 बाघ हैं, जिनमें से 160 केवल चंद्रपुर में हैं। इसके अलावा, 12 बाघ जिले के पांच किलोमीटर के दायरे में हैं। तडोबा अंधारी बाघ अभ्यारण्य ताडोबा महाराष्ट्र का सबसे पुराना और सबसे बड़ा नेशनल पार्क है। इसे ताडोबा अंधारी बाघ संरक्षित क्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है। यह महाराष्ट्र राज्य के चंद्रपुर जिले में स्थित है और नागपुर शहर से लगभग 150 किमी दूर है। बाघ रिजर्व का कुल क्षेत्र 1,727 वर्ग किमी है, जिसमें वर्ष 1955 में बनाया गया ताडोबा नेशनल पार्क शामिल है।

वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद (FSDC) पृष्ठभूमि केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने नई दिल्लीै में वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद (एफएसडीसी) की 22वीं बैठक की अध्यक्षता की। क्या थें बैठक के चर्चा के मुख्य विषय? बैठक के दौरान वर्तमान वैश्विक एवं घरेलू वृहद-आर्थिक स्थिति, वित्तीय स्थिरता तथा कमजोरी से जुड़े मुद्दों, बैंकों एवं अन्य वित्तीय संस्थानों के समक्ष उभरने वाले प्रमुख मुद्दों के साथ-साथ नियामकीय एवं नीतिगत उपायों, एनबीएफसी/एचएफसी/एमएफआई की तरलता/दिवाला संबंधी मुद्दों और अन्यी संबंधित मुद्दों की समीक्षा की गई। इसके अलावा, परिषद की बैठक के दौरान बाजार में अस्थिरता, घरेलू स्त र पर संसाधन जुटाने और पूंजी के प्रवाह से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चाएं की गईं। परिषद ने यह बात रेखांकित की कि कोविड-19 महामारी का संकट वैश्विक वित्तीय प्रणाली की स्थिरता के लिए एक गंभीर खतरा है क्योंकि संकट का संभावित अंतिम प्रभाव और अर्थव्यौवस्था में बेहतरी शुरू होने का समय फि‍लहाल अनिश्चित है। वैसे तो महामारी के प्रतिकूल प्रभावों को नियंत्रण में रखने के उद्देश्या से उठाए गए निर्णायक मौद्रिक एवं राजकोषीय नीतिगत कदमों से अल्पावधि में निवेशक भावना में स्थिरता आई है, लेकिन सरकार और सभी नियामकों द्वारा वित्तीकय स्थितियों पर निरंतर सतर्क नजर रखने की आवश्यकता है जो मध्यम और दीर्घ अवधि में वित्तीय कमजोरियों को सामने ला सकती हैं। सरकार और नियामकों के प्रयास वित्तीय बाजारों में अव्यवस्था के लंबे दौर से बचने पर केंद्रित हैं। परिषद ने अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकने में मदद करने के लिए हाल के महीनों में सरकार और नियामकों द्वारा की गई विभिन्नी पहलों को नोट किया। सरकार और आरबीआई ने आर्थिक नुकसान को पहले से ही सीमित रखने के लिए विभिन्न राजकोषीय एवं मौद्रिक उपायों की घोषणा की है और वे आगे भी वित्तीय संस्थानों की तरलता (नकदी प्रवाह) तथा पूंजी संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करना जारी रखेंगे। क्या है वि‍त्ती य स्थाेयि‍त्वन एवं विकास परिषद? रघुराम राजन समिति की सिफारिशों के अनुरूप भारत सरकार की अधिसूचना के आधार पर 30 दिसंबर, 2010 को वित्तीेय स्थारयित्वत एवं विकास परिषद का गठन किया गया था। परिषद की अध्यपक्षता वित्तद मंत्री करते हैं। इसके सदस्योंत में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर, वित्ता सचिव और या आर्थिक कार्य विभाग के सचिव, वित्ति मंत्रालय के मुख्यइ आर्थिक सलाहकार, सेबी के अध्यवक्ष और बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण के अध्यिक्ष शामिल हैं। परिषद और उसकी उपसमिति (जिसके अध्य क्ष भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर हैं) वित्ती य स्थिरता, नियामक संबंधी समन्वतय और वित्ती्य क्षेत्र के विकास से संबंधित विषयों पर विचार करते हैं।

विवादित हांगकांग सुरक्षा विधेयक चर्चा में क्यों? चीन की संसद ने हांगकांग के लिए एक नए विवादास्पद सुरक्षा कानून को मंजूरी दे दी जिससे पूर्व ब्रिटिश कॉलोनी में बीजिंग के अधिकार को कमजोर करना एक अपराध हो जाएगा।इस नए कानून से चीनी सुरक्षा एजेंसियां पहली बार हांगकांग में अपने प्रतिष्ठान खोल सकती हैं। नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (एनपीसी) ने हांगकांग के लिए नए सुरक्षा कानून समेत आखिरी दिन कई विधेयकों को मंजूरी दी।अब कम्युनिस्ट पार्टी की स्थायी समिति ने यह विधेयक पारित कर दिया है और यह अगस्त तक कानून बन सकता है। क्या होंगें विधेयक से परिवर्तन और प्रतिक्रिया? आलोचकों को डर है कि इस कानून से बीजिंग में नेतृत्व पर सवाल उठाने, प्रदर्शन में शामिल होने और स्थानीय कानून के तहत अपने मौजूदा अधिकारों का उपयोग करने के लिए हांगकांग निवासियों पर मुकदमा चलाया जा सकता है।चीन के इस कदम से हांगकांग में प्रदर्शनों का नया दौर शुरू हो गया है। हांगकांग की संसद ने जब एक अलग प्रस्तावित कानून पर चर्चा शुरू की तो बुधवार को फिर से झड़पें शुरू हो गई। इस विवादित कानून से चीन के राष्ट्रगान का अपमान करना अपराध के दायरे में आ जाएगा। अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने नए सुरक्षा कानून की निंदा करते हुए इसे हांगकांग वासियों की आजादी पर हमला बताया। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने बुधवार को कांग्रेस को सूचित किया कि ट्रम्प प्रशासन अब हांगकांग को चीनी भूभाग का स्वायत्त क्षेत्र नहीं मानता जिससे पूर्व ब्रिटिश कॉलोनी को अमेरिका द्वारा दिए व्यापार और वित्तीय दर्जे में प्राथमिकता को वापस लेने की संभावना पैदा हो गई है। चीन हांगकांग के बीच विवाद की पृष्ठभूमि चीन में 22 प्रांत, 4 प्रत्यक्ष नियंत्रण वाले नगर क्षेत्र, तिब्बत समेत 5 स्वशासी क्षेत्र तथा हांगकांग एवं मकाऊ दो विशेष प्रशासनिक क्षेत्र सम्मिलित हैं। प्रांतों एवं स्वशासी क्षेत्रों के लिए चीन की नीति ‘वन चाइना पॉलिसी’ की रही है किंतु विशेष प्रशासनिक क्षेत्रों के लिए चीन की नीति ‘वन कंट्री टू सिस्टम्स’ (One Country, two Systems) की है। ‘वन कंट्री टू सिस्टम्स’: इसके तहत प्रशासित होने वाले दोनों प्रशासनिक क्षेत्रों में से एक मकाऊ पूर्व पुर्तगाली उपनिवेश है जबकि दूसरा हांगकांग पूर्व ब्रिटिश उपनिवेश (डिपेंडेन्सी) है। दोनों प्रशासनिक क्षेत्रों में, संयुक्त राष्ट्र में पंजीकृत संयुक्त घोषणाओं के तहत ‘इंटर स्टेट ट्रीटीज’ के उपबंधों तथा अपने मौलिक कानूनों (बेसिक लॉज) के अंतर्गत, चीन के अन्य क्षेत्रों की अपेक्षा अधिक स्वायत्तता है। लेकिन यह स्वायत्तता भी इतनी अधिक नहीं है कि उसे लोकतंत्र के समकक्ष माना जा सके। हांगकांग लगभग 200 छोटे बड़े द्वीपों का समूह है जिसका शाब्दिक अर्थ है ‘सुगंधित बंदरगाह’। इस पर 1997 तक ब्रिटेन का अधिकार था लेकिन 1997 के उपरांत इसे चीन को हस्तांतरित कर दिया गया जिसमें शर्ते रखी गई की 50 वर्षों तक रक्षा व विदेश मामलों को छोड़कर हांगकांग की पूंजीवादी व्यवस्था समेत इस की प्रशासनिक व्यवस्था में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। हांगकांग के लोग चीन के निवासियों की तुलना में ज्यादा स्वतंत्रता का उपभोग करते हैं वहीं वह चीन की नीतियों के विरोध में भी ज्यादा प्रखर रहते हैं। चीन से और अधिक अधिक स्वायत्तता प्राप्ति के संदर्भ में जैसे मताधिकार को उदार बनाने को लेकर 2014 में एलो अंब्रेला मूवमेंट हुआ था। हांगकांग के बढ़ते आर्थिक महत्व और चीन के प्रति मुखर विरोध को लेकर चीन हांगकांग पर कठोर प्रशासनिक नीतियां लगाना चाहता है। इस संदर्भ में प्रत्यर्पण कानून, चीनी राष्ट्रगान और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को एक-एक करके लाया गया जिसका हांगकांग के लोगों के द्वारा व्यापक रूप से विरोध किया जा रहा है। हालांकि चीन के द्वारा लगाई जा रही है नीतियां संयुक्त राष्ट्र और ब्रिटेन के द्वारा किए गए समझौते का उल्लंघन है।

प्रवासी मजदूरों का नेशनल डेटाबेस और कानून कोराना वायरस के दौर (Coronavirus Pandemic) में जारी प्रवासी संकट से सबक लेते हुए सरकार 41 सालों बाद 'प्रवासी मजदूर' को फिर से परिभाषित करने की तैयारी कर रही है। सरकार अब प्रवासी मजदूरों को फिर से परिभाषित कर उनके पंजीकरण की योजना बना रही है ताकि उन्हें सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं के दायरे में लाया जाए। रजिस्ट्रेशन के बाद इन प्रवासी मजदूरों को इम्प्लॉयीज स्टेट इंश्योरेस कॉर्पोरेशन के तहत हेल्थ बेनिफिट भी मिल सकेगा। पृष्ठभूमि लॉकडाउन के दौरान बड़े पैमाने पर लाखों की संख्या में संगठित और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों के पैदल पलायन के बाद अब नए कानून की तैयारी की जा रही है। केंद्रीय श्रम मंत्रालय जल्द ही कैबिनेट को इस बारे में विस्तृत प्रस्ताव भेजने वाला है। केंद्र सरकार की योजना है कि प्रस्तावित कानून को इस साल के आखिर तक लागू कर दिया जाए। श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने इस बात की पुष्टि की कि कानूनी पहलुओं को मजबूत किया जा रहा है। बीजेडी सांसद भतृहरि महताब की अध्यक्षता वाली संसद की स्थायी समिति ने जिस प्रस्वावित कोड को मंजूरी दी है, उसके कुछ प्रावधानों में और बदलाव किया जा सकता है। क्या है विद्यमान कानून? मौजूदा प्रवासी संकट ने सिस्टम की कमियों को भी उजागर किया है। प्रवासी मजदूरों का कोई एकीकृत रेकॉर्ड तक नहीं है। इंटर-स्टेट माइग्रैंट वर्कमेन ऐक्ट 1979 भी सिर्फ उन संस्थानों या कॉन्ट्रैक्टरों पर लागू होता है जहां 5 या उससे ज्यादा इंटर-स्टेट प्रवासी मजदूर काम करते हैं। इसका मतलब है कि प्रवासी मजदूरों का एक बड़ा तबका इसके दायरे में आता ही नहीं है। रेहड़ी-पटरी लगाने वालों से लेकर घरों में काम करने वाली मेड तक इस कानून के दायरे में नहीं हैं। क्या किये जायेंगे बदलाव? प्रस्तावित कानून हर प्रवासी कामगार पर लागू होगा जो एक निश्चित रकम तक कमाते हैं। इसमें डोमेस्टिक हेल्प भी शामिल होंगे। सूत्रों ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि प्रस्तावित कानून में ऐसे प्रावधान किए जाएंगे जिससे प्रवासी मजदूरों को देश में कहीं भी उनके लिए सरकार की तरफ से तय किए बेनिफिट मिलें यानी बेनिफिट पोर्टेबिलिटी का लाभ मिलेगा। सबसे बड़ी बात यह है कि प्रवासी मजदूरों को साल में एक बार अपने घर जाने के लिए किराया मिलने का हकदार बनाया जाएगा। प्रस्तावित योजना का एक अहम हिस्सा असंगठित क्षेत्र के वर्करों का डेटाबेस बनाना है। ऐसे मजदूरों को एक खास तरह की पहचान संख्या दी जाएगी जिसे अनऑर्गनाइज्ड वर्कर आइडेंटिफिकेशन नंबर (U-WIN) नाम से जाना जाएगा। इस बारे में 2008 में ही प्रस्ताव तैयार किया गया था लेकिन बात आगे नहीं बढ़ पाई थी। सरकार प्रवासी मजदूरों को पेंशन और हेल्थकेयर जैसे सामाजिक सुरक्षा के लाभ के दायरे में लाने की तैयारी कर रही है। इस कवायद के जरिए प्रवासी मजदूरों का आधार कार्ड से लिंक एक नैशनल डेटाबेस बनाने का प्रस्ताव है। इस डेटाबेस तक केंद्र के साथ-साथ राज्यों की भी पहुंच होगी। इसे बनाने में राज्यों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए एक पेंशन स्कीम पहले से ही है। लेकिन अधिकारियों का कहना है कि अब उन्हें नाम मात्र की फीस पर ESIC में पंजीकरण कराने की सुविधा देने की तैयारी चल रही है। इसके जरिए उन्हें हेल्थकेयर सुविधाएं मिल सकेंगी। ESIC के दायरे को और बढ़ाया जाएगा ताकि सभी जिलों में मजदूरों को इसके दायरे में लाया जाए और उन्हें हेल्थ बेनिफिट मिल सके।

इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (आईएएसएसटी) के वैज्ञानिकों ने घावों के लिए हर्बल दवा वाली स्मार्ट बैंडेज विकसित की भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अधीनस्वायत्त संस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (आईएएसएसटी) के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी स्मार्ट बैंडेज विकसित की है, जो घाव तक दवा की सही डोज पहुंचाकर उसे ठीक कर सकती है। यह स्मार्ट बैंडेज घाव में संक्रमण की स्थिति के अनुरुप उसके पीएच स्तर को देखते हुए दवा की डोज जारी करती है। बैंडेज को नैनोटेक्नोलॉजी आधारित सूती पैच से बनाया गया है​, जिसमें कपास और जूट जैसी टिकाऊ और सस्ती सामग्रियों का इस्तेमाल किया गया है। आईएएसएसटी के एसोसिएट प्रोफेसर डाक्टर देवाशीष चौधरी द्वारा किए गए एक शोध में, जूट के कार्बन डॉट्स के साथ एक नैनोकॉम्पोजिट हाइड्रोजेल बाध्य कॉम्पैक्ट कपास पैच बनाया गया। कार्बन डाट्स, बैंडेज मे लगाई गई दवा को रिलीज करने के लिए बनाए गए हैं। जूट का उपयोग पहली बार फ्लोरोसेंट कार्बन डॉट्स को संश्लेषित करने के माध्यम के रूप में किया गया है, जबकि पानी का उपयोग फैलाव माध्यम के रूप में किया गया है। बैंडेज में इस्तेमाल हर्बल दवा में मूल रूप से अजादिराचिता इंडिका अर्थात नीम के सत का उपयोग किया गया है। एसीएस सस्टेनेबल केम इंजीनियरिंग नामक पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन रिपोर्ट में जूट और नीम जैसे प्राकृतिक उत्पादों के अर्क को दवा के रूप में बैंडेज के जरिए घाव पर रिलीज करने की एक सक्षम प्रणाली को दर्शाया गया है। इसके तहत जूट कार्बन डॉट्स को हाइड्रोजेल मैट्रिक्स-बाउंड कॉटन पैच में डुबो कर पीएच स्केल पर 5 के स्तर से नीचे तथा 7 के स्तर से उपर अलग-अलग तरीके से दवा रिलीज होनेकी विधि को दिखाया गया है। जूट और सूती कपड़े से बनायी गई यह बैंडेज घाव में बैक्टीरिया का संक्रमण किस स्तर का है, इसे देखते हुए काम करती है। संक्रमण जिस स्तर का है, दवा भी बैंडेज से उसी के अनुरूप खुद ब खुद निकलती है। यदि घाव में बैक्टीरिया का स्तर बढ़ रहा हो तो बैंडेज से दवा का रिसाव कम ​पीएच स्तर पर होता है। संक्रमण के अनुकूल दवा के रिसाव की इसकी यह विशेषता इस बैंडेज के अनूठे व्यवहार को दर्शाती है। डॉक्टर देवाशीष ने इसके पहले भी ऐसा ही एक कॉम्पैक्ट कॉटन पैच यानी कि बैंडेज तैयार किया था, जिसमें भी घाव भरने की उत्कृष्ट क्षमता थी लेकिन उसमें लोड की गई दवा के रिसाव को घाव के अनुरुप नियंत्रित करने की कोई तकनीक मौजूद नहीं थी ऐसे में दवा के अनियंत्रित रिसाव से नुकसान हुआ। इसे ध्यान में रखते हुए नए शोध में डॉक्टर देवाशीष ने बैंडेज में दवा के रिसाव को नियंत्रित करने की सक्षम प्रणाली विकसित की जिससे घाव भरने की स्मार्ट बैंडेज बनकर तैयार हो गई। किसी भी घाव के आसपास, बैक्टीरिया का संक्रमण होने पर उसके पीएच अर्थात अम्लीयता या क्षारीयता में बदलाव आ जाता है। इसलिए स्मार्ट बैंडेज में पीएच की स्थिति के अनुरूप दवा के रिसाव की प्रणाली विकसित की गई है। कार्बन डॉट्स जो कि शून्य-डायनामिक नैनोमीटर हैं,के अद्वितीय कार्बन युक्त छोर और सतह अपने कार्यात्मक समूहों के कारण विभिन्न पीएच के प्रति अलग व्यवहार प्रदर्शित करने के लिए डिज़ाइन किए जा सकते हैं। वे अपनी कम विषाक्तता और प्रचुर जैव-रासायनिक गुणों के लिए भी जाने जाते हैं। इसलिए, ड्रग रिलीज व्यवहार की जांच करने के लिए हाइब्रिड कपास पैच यानी कि स्मार्ट बैंडेज में नैनो-भराव के रूप में विभिन्न कार्बन डॉट्स का उपयोग किया गया है। घाव भरने के लिए बैंडेज का इस तरह का अनुकूल व्यवहार स्मार्ट घाव-ड्रेसिंग सामग्री के रूप में इसके इस्तेमाल का मार्ग प्रशस्त करता है। बैंडेज बनाने के लिए कपास और जूट जैसी सस्ती और टिकाऊ सामग्री का इस्तेमाल इसे जैविक रुप से दुष्प्रभाव रहित , विषाक्तता रहित, कम खर्चीला और टिकाऊ बनाता है।

डीएसटी ने संक्रमण प्रसार की निगरानी करने एवं नीति निर्माताओं को निर्णय निर्माण में सहायता के लिए कोविड-19 भारत राष्ट्रीय सुपरमॉडल की शुरुआत की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) ने संक्रमण के भविष्य में होने वाले प्रसार की निगरानी करने और इस प्रकार, स्वास्थ्य प्रणाली की तैयारी तथा संक्रमण में कमी लाने वाले अन्य उपायो से संबंधित निर्णय निर्माण में सहायता करने के लिए एक कोविड-19 भारत राष्ट्रीय सुपरमॉडल की शुरुआत की है। जहां सरकार संक्रामकता और मृत्यु दर पर करीबी नजर रख रही है, रोग के प्रसार का अनुमान लगाने के लिए एक मजबूत पूर्वानुमान मॉडल लाने तथा रोग के निरीक्षण में वृद्धि करना भी आवश्यक है। डीएसटी-एसईआरबी (विज्ञान एवं इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड) तथा अन्य एजेन्सियों द्वारा वित्तपोषित अन्वेषकों द्वारा कोविड-19 पूर्वानुमान एवं निरीक्षण के लिए अनगिनत गणीतीय मॉडलों पर कार्य किया जा रहा है। मेट्रोलोजिकल कार्यक्रमों की आपदा प्रबंधन योजनाओं के लिए गणीतीय मॉडलों के उपयोग के भारत के इतिहास से प्रेरित होकर, डीएसटी ने इस क्षेत्र की विशेषज्ञता को इकट्ठा करने में और पूरे देश के लिए एक मॉडल का निर्माण करने के लिए यह प्रक्रिया आरंभ की है जिसे साक्ष्य आधारित पूर्वानुमान, जिसका उपयोग पारंपरिक रूप से मौसम भविष्यवाणी समुदायों में किया जाता है, के लिए आवश्यक सख्त परीक्षणों के अधीन होगा। यह मॉडल पूरी तरह उस डाटा पर भरोसा करेगा जो कोविड-19 के संगत होगा और इसमें डाटा में नए रुझानों से सीखने के लिए एक अनुकूली निर्मित्त घटक भी होगा। यह सफल साक्ष्य आधारित गणीतीय और सांख्यिकीय पूर्वानुमान मॉडल को एकत्र करेगा और संक्रामक रोग के विस्तार के मजबूत पूर्वानुमान के लिए सर्वश्रेष्ठ भविष्यसूचक विश्लेषण को शामिल करेगा। इस सुपरमॉडल का उपयोग भारत एवं पूरे विश्व में संक्रमण के प्रसार की दर और किस प्रकार यह स्वास्थ्य क्षेत्र को प्रभावित करेगा, का पूर्वनुमान लगाने में आने वाली कठिनाइयों से उबरने में नीति निर्माताओें द्वारा किया जाएगा और इस प्रकार महामारी पर अंकुश लगाया जा सकेगा। इस पहल के एक हिस्से के रूप में, जवाहर लाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र (जेएनसीएएसआर) तथा आईआईएससी, बंगलुरू देश में सभी कोविड-19 मॉडेलिंग परियोजनाओं और कार्यक्रमों से संपर्क करने एवं कार्य करने के लिए समन्वय करेगा। यह विभिन्न मॉडलों का आकलन करने के लिए मानकों का एक सेट विकसित करेगा और अंतिम रूप से कोविड-19 भारत राष्ट्रीय सुपरमॉडल की प्रदायगी करेगा। समन्वय टीम मॉडलिंग में सक्रिय अनुसंधान समूहों, विभिन्न सॉफ्टवेयर डेवेलपरों एवं विख्यात कंपनियों के साथ परामर्श करेगा एवं कार्य करेगा, जिससे कि एक उपयुक्त यूजर इंटरफेस तथा सॉफ्टवेयर की प्रदायगी की जा सके। एक परामर्शी समिति डीएसटी और एसईआरबी तथा समन्वयकों (जेएनसीएएसआर और आईआईएससी बंगलुरु) एवं इस पहल के मॉडेलरों के साथ घनिष्ठतापूर्वक कार्य करेगा, जिससे कि तकनीकी समुच्चयों, दिशानिर्देश पर महत्वपूर्ण इनपुट उपलब्ध कराया जा सके तथा एक सुदृढ़ सुपरमॉडल की अंतिम प्रदायगी हो सके। डीएसटी के सचिव प्रोफेसर आशुतोष शर्मा ने कहा, ‘कोविड-19 के प्रसार के लिए गणीतीय मॉडलिंग एवं अनुरूपता तथा इसका प्रभाव केवल शैक्षणिक अभ्यास नहीं हैं, बल्कि युक्तिसंगत निर्णय निर्माण, योजन निर्माण और संसाधन प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण आवश्यकता है। इस प्रकार, यह बेहद महत्वपूर्ण है कि एक सुदृढ़ राष्ट्रीय मॉडल जिसकी जांच इस क्षेत्र में कार्य करने वाले वैज्ञानिक समुदाय के व्यापक प्रतिनिधियों द्वारा की गई है, का विकास किया जाए।

बिहार राज्‍य जल जीवन मिशन (हर घर जल) की वार्षिक कार्य योजना को मंजूरी बिहार राज्य ने अपनी जल जीवन मिशन वार्षिक कार्य योजना को जल शक्ति मंत्रालय के समक्ष विचार और अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया, जिसमें 2020-21 तक चालू नल के पानी कनेक्शन के साथ सभी परिवारों को 100% शामिल करने की योजना है। बिहार राज्य सरकार ने सभी शेष घरों को नल कनेक्शन प्रदान करने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। यह एक बहुत बड़ा लक्ष्य है, लेकिन राज्य सरकार ने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक रोडमैप तैयार किया है। वर्ष 2020-21 के दौरान सभी 38 जिलों को 100% शामिल करने के लिए एक उचित योजना बनाई जा रही है। बिहार सरकार आकांक्षी जिलों, गुणवत्ता से प्रभावित बस्तियों और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के गांवों में 100% चालू घरेलू नल कनेक्शन (एफएचटीसी) प्रदान करने पर विशेष ध्यान दे रही है। बिहार में भूजल और सतही जल की प्रचुरता के कारण, राज्य इस संबंध में सभी प्रयास कर रहा है। राज्य 2020-21 में शेष 1.50 करोड़ घरों में नल कनेक्शन देने की योजना बना रहा है। भारत सरकार ने इसके लिए वर्ष 2020-21 के दौरान 1832.66 करोड़ आवंटित किए हैं। चिलचिलाती गर्मी और कोविड-19 महामारी के दौरान, स्वच्छ पानी का महत्व और भी बढ़ गया है। हाथ धोने और अच्छी स्वच्छता बनाए रखने के लिए साफ पानी की जरूरत होती है। ज्यादातर ग्रामीण आबादी पानी के लिए हैंड पम्‍प या कुओं पर निर्भर करती है, इसके कारण जनता के लिए एक दूसरे से दूरी बनाकर रखना (सोशल डिस्‍टेंसिंग) मुश्किल हो जाता है। इस समस्‍या का एकमात्र समाधान घरेलू परिसर में पीने योग्य पानी का होना है। कोविद-19 महामारी की परीक्षा की इस घड़ी के दौरान, ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू नल कनेक्शन प्रदान करने के इस तरह के प्रयास से निश्चित रूप से महिलाओं और लड़कियों के जीवन को आसान बनाने में सुधार होगा, जिससे उनका कठिन परिश्रम कम करने और उन्हें सुरक्षित बनाने तथा सम्मानजनक जीवन जीने में मदद मिलेगी। हालांकि, पिछले कई वर्षों की तुलना में पानी की स्थिति में काफी सुधार हुआ है, लेकिन एक लंबा रास्‍ता तय करना बाकी है। इसके अलावा, प्रत्‍येक परिवार को नल कनेक्शन प्रदान करने के साथ, बिहार जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, भू-जल प्रबंधन और भूजल को अत्‍यधिक मात्रा में निकालने से रोकने पर समान जोर देना होगा। जल जीवन मिशन (जेजेएम) को राज्यों के साथ साझेदारी में शुरू किया गया है, जिससे 2024 तक गाँवों के प्रत्येक घर के परिसर को एफएचटीसी सक्षम बनाया जा सके। यह परिकल्पना की गई है कि प्रत्येक घर में नियमित और दीर्घकालिक आधार पर निर्धारित गुणवत्ता के 55 आईपीसीडी पीने योग्य पानी की आपूर्ति होगी। सरकार का प्रयास है कि ग्रामीण लोगों के जीवन में सुधार लाकर उनके द्वार पर निश्चित सेवाओं का प्रावधान किया जाए। मिशन को लागू करने के लिए, विभिन्न स्तरों पर संस्थागत व्यवस्था की गई है और राज्य के पीएचई/ग्रामीण जल आपूर्ति विभागों को स्थानीय समुदाय के साथ एक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है। ग्राम पंचायत/ग्राम जल स्वच्छता समिति/उपयोगकर्ता समिति को अपने गाँव में पानी की आपूर्ति की योजना, कार्यान्वयन, प्रबंधन, संचालन और रखरखाव के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। मिशन के केन्‍द्र में होने की वजह से ग्राम समुदाय में स्वामित्व की भावना पैदा की जानी चाहिए। उम्मीद है कि समुदाय जल गुणवत्ता निगरानी में भी बड़ी भूमिका निभाएगा। ग्रामीण महिलाएं और किशोर लड़कियां रोजमर्रा के इस्‍तेमाल के लिए पानी लाने में अपना बहुत समय और ऊर्जा खर्च करती हैं। इसका परिणाम आय सृजन में महिलाओं की भागीदारी में कमी, लड़कियों के लिए स्कूल के दिनों का नुकसान और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने के रूप में सामने आता है। जेजेएम ग्रामीण समुदाय, विशेषकर महिलाओं का जीवनयापन सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। महिलाओं को अपनी जरूरतों और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए अपने गांवों में जेजेएम का नेतृत्व करना चाहिए।

मछुआरों की सहूलियत बढ़ाने के लिए, उनको मिलने वाली सुविधाएं बढ़ाने और ब्लू इकॉनॉमी को मजबूत करने के लिए विशेष योजनाओं के साथ-साथ अलग से विभाग भी बनाया गया है। इसी तरह व्यापारियों की समस्याओं के समय पर समाधान के लिए व्यापारी कल्याण बोर्ड के निर्माण का निर्णय लिया गया है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी लगभग 7 करोड़ बहनों को भी अब ज्यादा वित्तीय सहायता दी जा रही है। हाल में ही स्वयं सहायता समूहों के लिए बिना गारंटी के ऋण को 10 लाख से बढ़ाकर दोगुना यानि 20 लाख कर दिया गया है। आदिवासी बच्चों की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए, देश में 450 से ज्यादा नए एकलव्य मॉडल रेसिडेंशियल स्कूलों के निर्माण का अभियान भी शुरू किया गया है। सामान्य जन के हित से जुड़े बेहतर कानून बनें, इसके लिए भी बीते वर्ष में तेज गति से कार्य हुआ है। हमारी संसद ने अपने कामकाज से दशकों पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इसी का परिणाम है कि चाहे कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट हो, चिटफंड कानून में संशोधन हो, दिव्यांगों, महिलाओं और बच्चों को अधिक सुरक्षा देने वाले कानून हों, ये सब तेज़ी से बन पाए हैं। सरकार की नीतियों और निर्णयों की वजह से शहरों और गांवों के बीच की खाई कम हो रही है। पहली बार ऐसा हुआ है जब गांव में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों की संख्या, शहर में इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों से 10 प्रतिशत ज्यादा हो गई है। देशहित में किए गए इस तरह के ऐतिहासिक कार्यों और निर्णयों की सूची बहुत लंबी है। इस पत्र में सभी को विस्तार से बता पाना संभव नहीं। लेकिन मैं इतना अवश्य कहूंगा कि एक साल के कार्यकाल के प्रत्येक दिन चौबीसों घंटे पूरी सजगता से काम हुआ है, संवेदनशीलता से काम हुआ है, निर्णय लिए गए हैं। प्रिय स्नेहीजन, देशवासियों की आशाओं-आकाँक्षाओं की पूर्ति करते हुए हम तेज गति से आगे बढ़ ही रहे थे, कि कोरोना वैश्विक महामारी ने भारत को भी घेर लिया। एक ओर जहां अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं और विशाल अर्थव्यवस्था वाली विश्व की बड़ी-बड़ी महाशक्तियाँ हैं, वहीं दूसरी ओर इतनी बड़ी आबादी और अनेक चुनौतियों से घिरा हमारा भारत है। कई लोगों ने आशंका जताई थी कि जब कोरोना भारत पर हमला करेगा, तो भारत पूरी दुनिया के लिए संकट बन जाएगा। लेकिन आज सभी देशवासियों ने भारत को देखने का नजरिया बदलकर रख दिया है। आपने ये सिद्ध करके दिखाया है कि विश्व के सामर्थ्यवान और संपन्न देशों की तुलना में भी भारतवासियों का सामूहिक सामर्थ्य और क्षमता अभूतपूर्व है। ताली-थाली बजाने और दीया जलाने से लेकर भारत की सेनाओं द्वारा कोरोना वॉरियर्स का सम्मान हो, जनता कर्फ्यू या देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान नियमों का निष्ठा से पालन हो, हर अवसर पर आपने ये दिखाया है कि एक भारत ही श्रेष्ठ भारत की गारंटी है। निश्चित तौर पर, इतने बड़े संकट में कोई ये दावा नहीं कर सकता कि किसी को कोई तकलीफ और असुविधा न हुई हो। हमारे श्रमिक साथी, प्रवासी मजदूर भाई-बहन, छोटे-छोटे उद्योगों में काम करने वाले कारीगर, पटरी पर सामान बेचने वाले, रेहड़ी-ठेला लगाने वाले, हमारे दुकानदार भाई-बहन, लघु उद्यमी, ऐसे साथियों ने असीमित कष्ट सहा है। इनकी परेशानियां दूर करने के लिए सभी मिलकर प्रयास कर रहे हैं। लेकिन हमें ये भी ध्यान रखना है कि जीवन में हो रही असुविधा, जीवन पर आफत में न बदल जाए। इसके लिए प्रत्येक भारतीय के लिए प्रत्येक दिशा-निर्देश का पालन करना बहुत आवश्यक है। जैसे अभी तक हमने धैर्य और जीवटता को बनाए रखा है, वैसे ही उसे आगे भी बनाए रखना है। यह एक बड़ा कारण है कि भारत आज अन्य देशों की तुलना में ज्यादा संभली हुई स्थिति में है। ये लड़ाई लंबी है लेकिन हम विजय पथ पर चल पड़े हैं और विजयी होना हम सबका सामूहिक संकल्प है। अभी पश्चिम बंगाल और ओडिशा में आए अम्फान चक्रवात के दौरान जिस हौसले के साथ वहां के लोगों ने स्थितियों का मुकाबला किया, चक्रवात से होने वाले नुकसान को कम किया, वह भी हम सभी के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। प्रिय स्नेहीजन, इन परिस्थितियों में, आज यह चर्चा भी बहुत व्यापक है कि भारत समेत तमाम देशों की अर्थव्यवस्थाएं कैसे उबरेंगी? लेकिन दूसरी ओर ये विश्वास भी है कि जैसे भारत ने अपनी एकजुटता से कोरोना के खिलाफ लड़ाई में पूरी दुनिया को अचंभित किया है, वैसे ही आर्थिक क्षेत्र में भी हम नई मिसाल कायम करेंगे। 130 करोड़ भारतीय, अपने सामर्थ्य से आर्थिक क्षेत्र में भी विश्व को चकित ही नहीं बल्कि प्रेरित भी कर सकते हैं। आज समय की मांग है कि हमें अपने पैरों पर खड़ा होना ही होगा। अपने बलबूते पर चलना ही होगा और इसके लिए एक ही मार्ग है - आत्मनिर्भर भारत। अभी हाल में आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए दिया गया 20 लाख करोड़ रुपए का पैकेज, इसी दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम है।

यह अभियान, हर एक देशवासी के लिए, हमारे किसान, हमारे श्रमिक, हमारे लघु उद्यमी, हमारे स्टार्ट अप्स से जुड़े नौजवान, सभी के लिए, नए अवसरों का दौर लेकर आएगा। भारतीयों के पसीने से, परिश्रम से और उनकी प्रतिभा से बने लोकल उत्पादों के दम पर भारत आयात पर अपनी निर्भरता कम करेगा और आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ेगा। प्रिय स्नेहीजन, बीते छह वर्षों की इस यात्रा में आपने निरंतर मुझ पर आशीर्वाद बनाए रखा है, अपना प्रेम बढ़ाया है। आपके आशीर्वाद की शक्ति से ही, देश पिछले एक साल में ऐतिहासिक निर्णयों और विकास की अभूतपूर्व गति के साथ आगे बढ़ा है। लेकिन फिर भी मुझे पता है कि अब भी बहुत कुछ करना बाकी है। देश के सामने चुनौतियां अनेक हैं, समस्याएं अनेक हैं। मैं दिन-रात प्रयास कर रहा हूं। मुझ में कमी हो सकती है लेकिन देश में कोई कमी नहीं है। और इसलिए, मेरा विश्वास स्वयं से ज्यादा आप पर है, आपकी शक्ति, आपके सामर्थ्य पर है। मेरे संकल्प की ऊर्जा आप ही हैं, आपका समर्थन, आपका आशीर्वाद, आपका स्नेह ही है। वैश्विक महामारी के कारण, यह संकट की घड़ी तो है ही, लेकिन हम देशवासियों के लिए यह संकल्प की घड़ी भी है। हमें यह हमेशा याद रखना है कि 130 करोड़ भारतीयों का वर्तमान और भविष्य कोई आपदा या कोई विपत्ति तय नहीं कर सकती। हम अपना वर्तमान भी खुद तय करेंगे और अपना भविष्य भी। हम आगे बढ़ेंगे, हम प्रगति पथ पर दौड़ेंगे, हम विजयी होंगे। हमारे यहां कहा गया है- ‘कृतम् मे दक्षिणे हस्ते, जयो मे सव्य आहितः’॥ यानि, हमारे एक हाथ में कर्म और कर्तव्य है तो दूसरे हाथ में सफलता सुनिश्चित है। देश की निरंतर सफलता की इसी कामना के साथ मैं आपको पुन: नमन करता हूं। आपको और आपके परिवार को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं। स्वस्थ रहिए, सुरक्षित रहिए !!! जागृत रहिए, जागरूक रखिए !!! आपका प्रधानसेवक नरेंद्र मोदी

माननीय प्रधानमंत्री जी का पत्र मेरे प्रिय स्नेहीजन, आज से एक साल पहले भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ा। देश में दशकों बाद पूर्ण बहुमत की किसी सरकार को लगातार दूसरी बार जनता ने ज़िम्मेदारी सौंपी थी। इस अध्याय को रचने में आपकी बहुत बड़ी भूमिका रही है। ऐसे में आज का यह दिन मेरे लिए, अवसर है आपको नमन करने का, भारत और भारतीय लोकतन्त्र के प्रति आपकी इस निष्ठा को प्रणाम करने का। यदि सामान्य स्थिति होती तो मुझे आपके बीच आकर आपके दर्शन का सौभाग्य मिलता। लेकिन वैश्विक महामारी कोरोना की वजह से जो परिस्थितियां बनी हैं, उन परिस्थितियों में, मैं इस पत्र के द्वारा आपके चरणों में प्रणाम करने और आपका आशीर्वाद लेने आया हूँ। बीते वर्ष में आपके स्नेह, शुभाषीश और आपके सक्रिय सहयोग ने मुझे निरंतर एक नई ऊर्जा, नई प्रेरणा दी है। इस दौरान आपने लोकतंत्र की जिस सामूहिक शक्ति के दर्शन कराए वह आज पूरे विश्व के लिए एक मिसाल बन चुकी है। वर्ष 2014 में आपने, देश की जनता ने, देश में एक बड़े परिवर्तन के लिए वोट किया था, देश की नीति और रीति बदलने के लिए वोट किया था। उन पाँच वर्षों में देश ने व्यवस्थाओं को जड़ता और भ्रष्टाचार के दलदल से बाहर निकलते हुए देखा है। उन पाँच वर्षों में देश ने अंत्योदय की भावना के साथ गरीबों का जीवन आसान बनाने के लिए गवर्नेंस को परिवर्तित होते देखा है। उस कार्यकाल में जहां विश्व में भारत की आन-बान-शान बढ़ी, वहीं हमने गरीबों के बैंक खाते खोलकर, उन्हें मुफ्त गैस कनेक्शन देकर, मुफ्त बिजली कनेक्शन देकर, शौचालय बनवाकर, घर बनवाकर, गरीब की गरिमा भी बढ़ाई। उस कार्यकाल में जहां सर्जिकल स्ट्राइक हुई, एयर स्ट्राइक हुई, वहीं हमने वन रैंक वन पेंशन, वन नेशन वन टैक्स- GST, किसानों की MSP की बरसों पुरानी मांगों को भी पूरा करने का काम किया। वह कार्यकाल देश की अनेकों आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए समर्पित रहा। वर्ष 2019 में आपका आशीर्वाद, देश की जनता का आशीर्वाद, देश के बड़े सपनों के लिए था, आशाओं-आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए था। और इस एक साल में लिए गए फैसले इन्हीं बड़े सपनों की उड़ान है। आज जन-जन से जुड़ी जन मन की जनशक्ति, राष्ट्रशक्ति की चेतना को प्रज्वलित कर रही है। गत एक वर्ष में देश ने सतत नए स्वप्न देखे, नए संकल्प लिए, और इन संकल्पों को सिद्ध करने के लिए निरंतर निर्णय लेकर कदम भी बढ़ाए। भारत की इस ऐतिहासिक यात्रा में देश के हर समाज, हर वर्ग और हर व्यक्ति ने बखूबी अपना दायित्व निभाया है। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ इस मंत्र को लेकर आज देश सामाजिक हो या आर्थिक, वैश्विक हो या आंतरिक, हर दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रिय स्नेहीजन, बीते एक वर्ष में कुछ महत्वपूर्ण निर्णय ज्यादा चर्चा में रहे और इस वजह से इन उपलब्धियों का स्मृति में रहना भी बहुत स्वाभाविक है। राष्ट्रीय एकता-अखंडता के लिए आर्टिकल 370 की बात हो, सदियों पुराने संघर्ष के सुखद परिणाम - राम मंदिर निर्माण की बात हो, आधुनिक समाज व्यवस्था में रुकावट बना ट्रिपल तलाक हो, या फिर भारत की करुणा का प्रतीक नागरिकता संशोधन कानून हो, ये सारी उपलब्धियां आप सभी को स्मरण हैं। एक के बाद एक हुए इन ऐतिहासिक निर्णयों के बीच अनेक फैसले, अनेक बदलाव ऐसे भी हैं जिन्होंने भारत की विकास यात्रा को नई गति दी है, नए लक्ष्य दिए हैं, लोगों की अपेक्षाओं को पूरा किया है। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पद के गठन ने जहां सेनाओं में समन्वय को बढ़ाया है, वहीं मिशन गगनयान के लिए भी भारत ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इस दौरान गरीबों को, किसानों को, महिलाओं-युवाओं को सशक्त करना हमारी प्राथमिकता रही है। अब पीएम किसान सम्मान निधि के दायरे में देश का प्रत्येक किसान आ चुका है। बीते एक वर्ष में इस योजना के तहत 9 करोड़ 50 लाख से ज्यादा किसानों के खातों में 72 हजार करोड़ रुपए से अधिक राशि जमा कराई गई है। देश के 15 करोड़ से अधिक ग्रामीण घरों में पीने का शुद्ध पानी पाइप से मिले, इसके लिए जल जीवन मिशन शुरु किया गया है। हमारे 50 करोड़ से अधिक के पशुधन के बेहतर स्वास्थ्य के लिए मुफ्त टीकाकरण का बहुत बड़ा अभियान भी चलाया जा रहा है। देश के इतिहास में यह भी पहली बार हुआ है जब, किसान, खेत मजदूर, छोटे दुकानदार और असंगठित क्षेत्र के श्रमिक साथियों, सभी के लिए 60 वर्ष की आयु के बाद 3 हज़ार रुपए की नियमित मासिक पेंशन की सुविधा सुनिश्चित हुई है।

विश्व के सात सबसे धनी देशों के समूह के नेताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर ग्लोबल पार्टनरशिप की स्थापना की। मुख्य बिंदु अमेरिका शुरू में इस साझेदारी का हिस्सा नहीं था। हालाँकि, अब संयुक्त राष्ट्र में निगरानी और फेशियल रिकग्निशन पर अंतरराष्ट्रीय मानकों को आकार देने में चीनी प्रभुत्व का मुकाबला करने के लिए अमेरिका इस समूह में शामिल हो रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर एक वैश्विक समूह शुरू करने की पहल फ्रांस और कनाडा द्वारा शुरू की गई थी। अमेरिका की स्थिति अमेरिका ने शुरू में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर G7 साझेदारी पर आपत्ति जताते हुए दावा किया था कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नियमन पर बहुत अधिक ध्यान देने से नवाचार में बाधा आएगी। अमेरिका के लिए साझेदारी में शामिल होना महत्वपूर्ण है क्योंकि गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और एप्पल जैसे कई तकनीकी कंपनियां हैं जो अमेरिका के सकल घरेलू उत्पाद में महत्वपूर्ण राशि का योगदान करते हैं। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय मानकों का सेट इन कंपनियों को बहुत प्रभावित करेगा। इसलिए, अमेरिका के लिए साझेदारी में शामिल होना महत्वपूर्ण है। G-7 G-7 अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, कनाडा, जापान और जर्मनी का समूह है, यह IMF के अनुसार विश्व की सबसे एडवांस्ड अर्थव्यवस्थाएं हैं। यह वैश्विक नेट वर्थ के 58% हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। G-7 देश वैश्विक सकल घरेलु उत्पाद के 46% का प्रतिनिधित्व करते हैं।

29 मई, 2020 को INS कलिंग में “अग्निप्रस्थ” नामक एक मिसाइल पार्क की आधारशिला रखी गई। मुख्य बिंदु इस मिसाइल पार्क का उद्देश्य आईएनएस कलिंग के इतिहास के बारे में जानकारी प्रदान करना है। इस पार्क का मुख्य आकर्षण P-70 एमेटिस्ट है। यह एक एंटी-शिप मिसाइल है जिसे पानी के नीचे लॉन्च किया जाता है। यह मिसाइल पार्क मिसाइलों और मिसाइल प्रौद्योगिकियों में रुचि रखने वाले लोगोंके लिए एक प्रेरक क्षेत्र भी होगा। इस मिसाइल पार्क को अधिकारियों, नाविकों और अन्य सहायक कर्मचारियों को समर्पित किया जायेगा जिन्होंने आईएनएस कलिंग में सेवा की है। सौर ऊर्जा संयंत्र यह पार्क सौर ऊर्जा पर काम करेगा। INS कलिंग में 2 मेगावाट का सोलर फोटो वोल्टिक संयंत्र भी लगाया गया था। यह संयंत्र भारत सरकार के राष्ट्रीय सौर मिशन का एक हिस्सा है। यह 2022 तक भारत को 100 गीगावॉट सौर ऊर्जा के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगा। आईएनएस कलिंग आईएनएस कलिंग एक भारतीय नौसेना प्रतिष्ठान है जो पूर्वी नौसेना कमान को रिपोर्ट करता है। यह विशाखापट्टनम में स्थित है।

29 मई, 2020 को केंद्र सरकार ने वर्ष 2020-21 के लिए छत्तीसगढ़ के लिए जल जीवन मिशन के तहत 445 करोड़ रुपये मंजूर किए। मुख्य बिंदु 2023-24 तक छत्तीसगढ़ राज्य के सभी घरों में नल का जल कनेक्शन प्रदान करने के लिए इस फण्ड का उपयोग किया जाएगा। राज्य में 45 लाख घर हैं। इनमें से 20 लाख परिवारों को इस मिशन के तहत नल का जल कनेक्शन प्रदान किया गया है। छत्तीसगढ़ की चुनौतियां फ्लोराइड, आर्सेनिक, आयरन आदि रसायनों के कारण छत्तीसगढ़ प्रदूषण और भूजल की कमी से जूझ रहा है। राज्य सरकार इस योजना को लागू करने के लिए वापस लौटे प्रवासी कार्यबल का उपयोग करेगी। यह मनरेगा के तहत किया जायेगा। जल जीवन मिशन इस मिशन का लक्ष्य 2024 तक देश के सभी घरों में अच्छी गुणवत्ता का पेयजल उपलब्ध कराना है। इसे प्राप्त करने के लिए, भारत सरकार ने 3.6 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।