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भीम एप (भारत इंटरफेस फॉर मोबाइल)
चर्चा में क्यों?
आनलाइन भुगतान की सुविधा देने वाले भीम एप की परिचालक ‘दि नेशनल पेमेंट्स कार्पोरेशन आफ इंडिया (एनपीसीआई) ने कहा कि एप में उपयोगकर्ताओं की जानकारी लीक नहीं हुई है।
इस एप के नेटवर्क में किसी भागीदार के छोर पर सुरक्षा चक्र में सेंध के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुये एनपीसीआई ने कहा कि इस समाचार की स्वतंत्र रूप से वैधता की जांच कराई गई जिसमें ग्राहकों की वित्तीय सूचनाओं के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ की कोई जानकारी नहीं पाई गई। भीम एप के अब तक 13.60 करोड़ डाउनलोड किये गये हैं।
पृष्ठभूमि
एक इस्राइली शोध फर्म ने यह दावा किया था कि भीम एप के 70 लाख उपयोगकर्ताओं की जानकारी को संभवत: चुरा ली गयी है। उसने इसकी वजह सीएससी (साझा सेवा केंद्रों) ई- गवर्नेंस सविर्सिज के छोर में किसी तरह की खामी की संभावना जताई है। शोध कंपनी ने कहा है कि इनमें से संभवत: कई उपयोगकर्ताओं की पैन कार्ड, वित्तीय लेनदेन के स्क्रीनशॉट की जानकारी चुरा ली गई हो।
क्या है भीम ऐप?
भीम ऐप नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा विकसित UPI आधारित भुगतान प्लेटफॉर्म है। डिजिटल इंडिया मिशन के तहत पीएम मोदी ने कैश लेन-देन को कम करने के लिए 30 दिसंबर 2016 को भीम ऐप लॉन्च किया था। भीम ऐप (BHIM App) का नया वर्जन भीम 2.0 (BHIM 2.0) लॉन्च किया गया है।
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सेंकाकू द्वीप समूह
चर्चा में क्यों?
पिछले कुछ समय में चीन के कोस्ट गार्ड (CCG) ने जापान के सेंकाकू टापू के आसपास सक्रियता तेज कर दी है। चीन इस क्षेत्र पर भी अपना हक बताता है। जापान के सबसे बड़े अखबार जापान टाइम्स में टेटसुओ कोटानी ने दावा किया है कि चीन जापान के कोरोना से निपटने में व्यस्त होने का फायदा उठाकर सेंकाकू में अपनी पैठ जमाना चाहता है।
पृष्ठभूमि
पिछले महीने 8 मई को जापान की एक फिशिंग बोट के पीछे CCG के शिप लग गए जिसके बाद जापान कोस्ट गार्ड (JCG) ने उन्हें चेतावनी दी। दोनों आमने-सामने आ गए लेकिन CCG नहीं हटा और 10 मई तक फिशिंग बोट के पास बना रहा। जापान सरकार ने इसकी शिकायत की जिस पर चीन ने उल्टा फिशिंग बोट पर चीन के इलाके में घूमने का आरोप जड़ दिया और JCG से आगे से बीच में न आने के लिए कह दिया। ऐसा पहली बार हुआ कि CCG जहाज तीन दिन वहां रहे और जापान की फिशिंग ऐक्टिविटी को गैर-कानूनी घोषित कर दिया।
चीन हर साल मई से अगस्त के बीच ईस्ट-साउथ चाइना सी और यलो सी में फिशिंग बैन लगाता है। पहले CCG सिर्फ चीन की फिशिंग बोट्स को रोका करते थे लेकिन इस साल से विदेशी बोटों को भी निशाना बनाया जा रहा है।
सेंकाकू द्वीप समूह के बारे में
जापान और चीन के बीच वैसे तो समुद्री सीमा को लेकर कई विवाद हैं। लेकिन सबसे बड़ा विवाद सेंकाकू द्वीप ले रहा है फिलहाल ये सेकांकू द्वीप जापान के नियंत्रण में है। सेंकाकू द्वीप समूहईस्ट चाइना सी में स्थित है।चीन भी इस द्वीप पर अपना दावा करता है और वह इसे दिआओयुस द्वीप कहता है।
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स्वदेस (स्किल्ड वर्कर्स अराइवल डेटाबेस फॉर एम्प्लॉयमेंट सपोर्ट)
चर्चा में क्यों?
देश में फैली महामारी के कारण देश वापस लौटने वाले हमारे कुशल कर्मचारियों के सर्वश्रेष्ठ उपयोग के लिए, भारत सरकार ने वंदे भारत मिशन के तहत लौटने वाले नागरिकों का कौशल मानचित्रण करने के लिए एक नई पहल स्वदेस (स्किल्ड वर्कर्स अराइवल डेटाबेस फॉर एम्प्लॉयमेंट सपोर्ट) शुरू की है।
क्या है स्वदेस (स्किल्ड वर्कर्स अराइवल डेटाबेस फॉर एम्प्लॉयमेंट सपोर्ट)?
यह कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय, नागरिक उड्डयन मंत्रालय और विदेश मंत्रालय की एक संयुक्त पहल है, जिसका उद्देश्य भारतीय और विदेशी कम्पनियों की मांग को समझने और उसे पूरा करने के लिए उनके कौशल और अनुभव के आधार पर योग्य नागरिकों का एक डेटाबेस बनाना है। लौटने वाले नागरिकों को एक ऑनलाइन स्वदेस कौशल कार्ड भरना आवश्यक है। कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय की शाखा राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) परियोजनाका कार्यान्वयन कर रहा है।
क्यों किया जा रहा है?
इस पहल का उद्देश्य भारतीय और विदेशी कम्पनियों की मांग को समझने और उसे पूरा करने के लिए उनके कौशल और अनुभव के आधार पर योग्य नागरिकों का एक डेटाबेस बनाना है। एकत्रित जानकारी को देश में नियोजन के उपयुक्त अवसरों के लिए कंपनियों के साथ साझा किया जाएगा। कार्ड राज्य सरकारों, उद्योग संघों और नियोक्ताओं सहित प्रमुख हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के जरिये रोजगार के उपयुक्त अवसरों के साथ लौटने वाले नागरिकों को प्रदान करने के लिए एक रणनीतिक ढांचा प्रदान करेगा।
पृष्ठभूमि
दुनिया भर में कोविड-19 के फैलने से हजारों श्रमिकों पर जबरदस्त आर्थिक प्रभाव पड़ा है, जिससे हजारों श्रमिकों को अपनी नौकरियां गंवानी पड़ी हैं और दुनिया भर में सैकड़ों कंपनियां बंद हो रही हैं। भारत सरकार के वंदे भारत मिशनके माध्यम से देश लौटने वाले हमारे अनेक नागरिक अपने भविष्य के रोजगार के अवसरों को लेकर अनिश्चितता का सामना कर सकते हैं। लाखों नागरिकों ने देश लौटने का अनुरोध करते हुए विभिन्न भारतीय मिशनों में पंजीकरण किया है और अब तक 57,000 से अधिक लोग देश में वापस आ चुके हैं।
वर्तमान स्थिति
स्वदेस कौशल फॉर्म (ऑनलाइन) को 30 मई 2020 को प्रसारित किया गया था और 3 जून 2020 (दोपहर 2 बजे) तक लगभग 7000 पंजीकरण किए हैं। अब तक एकत्र किए गए आंकड़ों में, जहां से नागरिक वापस लौट रहे हैं, उन शीर्ष देशों में संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, कतर, कुवैत और सऊदी अरब शामिल हैं। कौशल मानचित्रण के अनुसार, इन नागरिकों को मुख्य रूप से तेल और गैस, निर्माण, पर्यटन और आतिथ्य, मोटर वाहन और विमानन जैसे क्षेत्रों में नियोजित किया गया था। आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि जिन राज्यों ने सबसे ज्यादा श्रमिकों के लौटने की जानकारी दी है, वे हैं- केरल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना।
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एंटिफा
Antifa
संयुक्त राज्य अमेरिका में जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद बड़े पैमाने पर हो रहे हिंसक विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि उनकी सरकार द्वारा एंटिफा (Antifa) समूह को आतंकवादी संगठन के रूप में नामित किया जाएगा।
प्रमुख बिंदु:
‘एंटिफा’ (Antifa), फासीवाद-विरोधी (Anti-Fascists) का लघु रूप है।
यह एक एकल संगठन नहीं है बल्कि ‘फार-लेफ्ट-लीनिंग मूवमेंट्स’ के लिये एक सामूहिक शब्दावली है जो अपने प्रदर्शनों में नव-नाज़ियों एवं श्वेत वर्चस्ववादियों का विरोध करता है।
आंदोलन से संबंधित फासीवाद विरोधियों को अमेरिकी राजनीतिक परिदृश्य में वामपंथी ताकतों के रूप में वर्गीकृत किया जाता है जबकि इससे जुड़े कई लोग खुद को समाजवादी, अराजकतावादी, कम्युनिस्ट या पूंजीवाद विरोधी बताते हैं।
इस आंदोलन की उत्पत्ति का संबंध नाज़ी जर्मनी से बताया जाता है। जबकि इस आंदोलन की कई यूरोपीय देशों में उपस्थिति रही है और हाल के वर्षों में यह संयुक्त राज्य अमेरिका में चर्चा में आया है।
इसका कोई औपचारिक संगठनात्मक ढाँचा नहीं है। 1980 के दशक में संयुक्त राज्य अमेरिका में पहली बार इस आंदोलन की उपस्थिति को दर्ज किया गया था।
एंटिफा के सदस्य आमतौर पर काले रंग के कपड़े पहनते हैं तथा विरोध प्रदर्शनों पर अक्सर एक मुखौटा पहनते हैं। और ये पूंजीवाद विरोधी जैसी विभिन्न विचारधाराओं का पालन करते हैं।
वे LGBTQ और देशज अधिकारों (Indigenous Rights) जैसे मुद्दों को उठाते हैं।
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विश्व बैंक ने हाल ही में ग्लोबल इकोनॉमिक प्रॉस्पेक्ट्स रिपोर्ट, 2020 जारी की। इस रिपोर्ट में देशों पर COVID-19 के प्रभाव पर प्रकाश डाला गया।
मुख्य बिंदु
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि उभरते हुए बाज़ार और विकासशील अर्थव्यवस्थाएं अत्यधिक असुरक्षित हैं। वे स्वास्थ्य संकट, प्रतिबंध, पर्यटन, गिरते व्यापार, पूंजी के बहिर्वाह और कमोडिटी की कीमतों का सामना कर रहे हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार इन देशों में 3% से 8% उत्पादन में नुकसान होने की उम्मीद है।
इस वर्ष COVID-19 के कारण लगभग 60 मिलियन लोगों को अत्यधिक गरीबी की ओर धकेला जा सकता है। मंदी के कारण वित्तीय संकट संभावित उत्पादन को लगभग 8% कम कर देगा।
अनुशंसाएँ
यह रिपोर्ट निम्नलिखित सिफारिशें करती है :
यह रिपोर्ट बेहतर नीति विकल्प बनाने का सुझाव देती है। इसमें अधिक ऋण पारदर्शिता, नकदी सुरक्षा का विस्तार और डिजिटल कनेक्टिविटी में तेज प्रगति शामिल हैं।
स्वास्थ्य आपात स्थितियों को संबोधित करने के साथ-साथ दीर्घकालिक बढ़ावा देने की नीतियों पर भी विचार किया जाना चाहिए। इसमें व्यवसाय के लिए माहौल में सुधार, शिक्षा के परिणामों में वृद्धि और शासन में सुधार शामिल हैं।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने यह पता लगाने पर अपने नैदानिक परीक्षणों को फिर से शुरू किया कि क्या COVID-19 के उपचार में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (HCQ) दवा प्रभावी है।
मुख्य बिंदु
मलेरिया की दवा एचसीक्यू पर नैदानिक परीक्षण पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इसकी प्रभावकारिता की चिंताओं के चलते रोक दिया गया था।
ट्रायल क्यों टाल दिए गए?
मरीजों की सुरक्षा को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा क्लिनिकल परीक्षण रोक दिए गए थे। डब्ल्यूएचओ ने दुनिया के विभिन्न हिस्सों में लोगों के बारे में चिंता व्यक्त की कि वे बिना चिकित्सकीय मार्गदर्शन के यह दवा ले रहे हैं।
अब फिर से परीक्षण क्यों शुरू किए गए हैं?
दवाओं के उपयोग के परिणामों का विश्लेषण करने के लिए परीक्षणों को रोक दिया गया था। WHO द्वारा गठित बोर्ड ने COVID -19 के उपलब्ध मृत्यु आंकड़ों की समीक्षा की है और अब पाया है कि परीक्षणों को रोकने के लिए कोई कारण नहीं हैं। इस परीक्षण में 35 देशों के 400 से अधिक अस्पताल भाग ले रहे हैं। इसमें गुजरात के अस्पताल भी शामिल हैं।
मुद्दा शुरू क्यों हुआ?
अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन और लैंसेट जैसे अन्य मुख्य पत्रिकाओं ने चिकित्सा पेशेवर की सलाह के बिना दवाओं के उपयोग के बारे में चेतावनी दी थी। इस प्रकार, डब्ल्यूएचओ ने यह सुनिश्चित करने के लिए कदम बढ़ाया कि क्या अब तक दवा की सफलता दर के आधार पर परीक्षणों को आगे बढ़ाया जा सकता है।
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भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच विज्ञान के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग के लिए कोविड-19 के लिए शोध प्रस्ताव आमंत्रित किए गए
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री श्री स्कॉट मॉरिसन एमपी ने 04 जून 2020 को भारत-आस्ट्रेलिया के नेताओं के वर्चुअल शिखर सम्मेलन के दौरान वर्ष 2020 में विशेष कोविड-19 सहयोग की घोषणा की गई।
तदनुसार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार और ऑस्ट्रेलिया के उद्योग, विज्ञान, ऊर्जा एवं संसाधन विभाग ने ऑस्ट्रेलिया-इंडिया स्ट्रेटेजिक रिसर्च फंड (एआईएसआरएफ) के अंतर्गत इच्छुक वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं से कोविड-19 के संबंध में साझा शोध परियोजनाएं आमंत्रित कीं। एआईएसआरएफ विज्ञान के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग के लिए भारत और ऑस्ट्रेलिया सरकार द्वारा संयुक्त रूप से प्रबंधित एवं वित्त पोषित मंच है।
शोध प्रस्तावों से एंटीवायरल कोटिंग्स, अन्य निवारक प्रौद्योगिकियों, आंकड़ों के विश्लेषण, मॉडलिंग, एआई अनुप्रयोगों और जांच एवं निदान परीक्षण पर प्राथमिक क्षेत्रों के रूप में ध्यान केंद्रित किए जाने की अपेक्षा है। परियोजना की अवधि 12 महीने होगी जिसमें अधिकतम 6 महीने का विस्तार दिया जा सकेगा।
इस अनुदान अवसर का उद्देश्य कोविड-19 महामारी से निपटने पर केंद्रित स्पष्ट निष्कर्षों के साथ लघु सहयोगपूर्ण परियोजनाओं का वित्त पोषण करना है। इस अनुदान अवसर का अभीष्ट भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों देशों में कोविड-19 से संबंधित वैक्सीन, चिकित्सा शास्त्र और निदान जैसेक्षेत्रों और परस्पर लाभकारी परियोजनाओं में वर्तमान में कर रहे प्रमुख शोध संस्थानों और उद्योगों को एक साथ लाना है, जिनके परिणाम कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर किए जा कार्यों में योगदान दे सकेंगे।
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भारतीय रेल अपने यात्रियों को विश्व स्तरीय सुविधाएं प्रदान करने के लिएप्रतिबद्ध है
68,800 कोचों में लगाए गए जैव-शौचालयों की कुल संख्या 100 फीसदी की कवरेज के साथ 2,45,400 से भी अधिक हुई
200 रेलवे स्टेशनों को 2019-20 में पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली का कार्यान्वयन आईएसओ: 14001 तक करने के लिए प्रमाणित किया गया
अपने यात्रियों को स्वच्छ वातावरण और सुगम यात्रा का अनुभव प्रदान करने के लिए भारतीय रेल ने स्वच्छ भारत, स्वच्छ रेल पहल के तहत कई अन्य कदम उठाए हैं
भारतीय रेल दुनिया के सर्वश्रेष्ठ रेल नेटवर्कों में से एक अपने नेटवर्क के माध्यम से अपने यात्रियों को विश्व स्तर की सुविधाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। अपने यात्रियों को स्वच्छ वातावरण और सुगम यात्रा का अनुभव प्रदान करने के लिए भारतीय रेल ने ‘स्वच्छ भारत, स्वच्छ रेल’ पहल के अंतर्गत विभिन्न कदम उठाए हैं।
इनमें से कुछ महत्वपूर्ण कदम नीचे दिए गए हैं:
2019-20 के दौरान 14,916 रेल डिब्बों में 49,487 जैव-शौचालय लगाए गए। इसके साथ ही 100 फीसदी कवरेज के साथ 68,800 कोचों में लगाए गए जैव शौचालयों की संयुक्त संख्या 2,45,400 से अधिक हो गई है।
2 अक्टूबर 2019 को 150वीं गांधी जयंती के बाद से सिंगल यूज़ प्लास्टिक के किसी सामान का कोई उपयोग नहीं।
रेलवे के प्रयासों को ध्यान में रखते हुए 'स्वच्छ कार्य योजना’ के कार्यान्वयन के लिए रेल मंत्रालय को किसी मंत्रालय द्वारा किए गए सर्वश्रेष्ठ प्रयास के लिए चुना गया, और भारत के राष्ट्रपति द्वारा 06 सितंबर 2019 को सम्मानित किया गया।
200 रेलवे स्टेशनों को 2019-20 में पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली का कार्यान्वयन आईएसओ: 14001 तक करने के लिए प्रमाणित किया गया।
एकीकृत मशीनीकृत सफाई का काम अब 953 स्टेशनों में प्रदान किया जाता है।
स्वच्छता मानकों पर यात्री धारणा का स्वतंत्र, तीसरे पक्ष का सर्वेक्षण 2019-20 में 720 स्टेशनों पर किया गया जो पूर्व में 407 स्टेशनों के लिए किया गया था।
राजधानी, शताब्दी, दूरंतो और अन्य महत्वपूर्ण लंबी दूरी की मेल / एक्सप्रेस रेलगाड़ियों सहित 1100 जोड़ी से अधिक रेलगाड़ियों में यात्रा के दौरान शौचालयों, दरवाजों, गलियारों और यात्री डिब्बों की सफाई के लिए ट्रेन पर हाउस कीपिंग सेवा (ओबीएचएस) की सुविधा मौजूद है।
'कोच-मित्र' सेवा की मांग पर आधारित एसएमएस द्वारा समर्थित ओबीएचएस सेवा अब 1060 जोड़ी से अधिक ट्रेनों को कवर करेगी।
एसी कोच के यात्रियों को दी जाने वाली चद्दरों की धुलाई की गुणवत्ता में सुधार के लिए मशीनीकृत लॉन्ड्री स्थापित की जा रही है। वित्त वर्ष 2019-20 (कुल 68) में 8 मशीनीकृत लॉन्ड्री स्थापित।
स्टेशनों में उत्पन्न प्लास्टिक कचरे को कम करने, पुनर्चक्रण करने और निपटाने के लिए एक पहल के रूप में, ज़ोनल रेलवे द्वारा प्लास्टिक बॉटल क्रशिंग मशीन (पीबीसीएम) की स्थापना के लिए व्यापक नीतिगत दिशा-निर्देशों को लाया गया है। वर्तमान में, भारतीय रेलवे के कई जिला मुख्यालय रेलवे स्टेशनों सहित 229 स्टेशनों पर लगभग 315 पीबीसीएम लगाई गईं हैं।
2019-20 (कुल 20) में 8 स्थानों पर स्वचालित डिब्बे धोने के संयंत्र (एसीडब्ल्यूपी) स्थापित किए गए हैं।
स्टेशनों पर पानी भरने के समय को कम करने के लिए 2019-20 (कुल 44) में 29 स्थानों पर त्वरित जल भरने की सुविधा स्थापित की गई है
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अपशिष्ट के प्रभावकारी निपटान के जरिए जैव विविधता का संरक्षण
आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने विश्व पर्यावरण दिवस 2020 पर कई एडवाइजरी जारी कीं
आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री हरदीप सिंह पुरी ने विश्व पर्यावरण दिवस 2020 मनाए जाने के अवसर पर नई दिल्ली स्थित निर्माण भवन में कई एडवाइजरी जारी कीं। ‘अपशिष्ट के प्रभावकारी निपटान के जरिए जैव विविधता का संरक्षण’ के शीर्षक वाले कार्यक्रम को लाइव वेबकास्ट किया गया और इसमें श्री दुर्गाशंकर मिश्र, सचिव, आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय तथा श्री वी.के. जिंदल, संयुक्त सचिव एवं राष्ट्रीय मिशन निदेशक, स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (एसबीएम-यू) ने भी भाग लिया।
इस अवसर पर जारी की गई तीन प्रमुख एडवाइजरी में ये शामिल हैं: ‘नगरपालिका ठोस अपशिष्ट (एमएसडब्ल्यू) के लिए सामग्री पुन: प्राप्ति सुविधाओं (एमआरएफ) पर एडवाइजरी’; अपशिष्ट भराव क्षेत्र के पुनरुद्धार पर एडवाइजरी और ऑन-साइट एवं ऑफ-साइट सीवेज प्रबंधन प्रथाओं पर परामर्शी दस्तावेज (मसौदा) जिसे एसबीएम-यू के अधीनस्थ केंद्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण इंजीनियरिंग संगठन (सीपीएचईईओ) द्वारा तैयार किया गया है। इस अवसर पर मंत्री ने कहा, ‘इस दिन हमें जैव विविधता के संरक्षण और अपशिष्ट के प्रभावकारी निपटान के बीच के अंतर्निहित संबंध की मजबूती को रेखांकित करने का मौका मिलता है। स्वच्छता और जैव विविधता का संरक्षण वास्तव में साथ-साथ होते हैं।’ उन्होंने यह भी कहा, ‘जब माननीय प्रधानमंत्री ने वर्ष 2014 में एसबीएम-यू का शुभारंभ किया था, तो यह शहरी भारत को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) बनाने और ठोस अपशिष्ट के 100% वैज्ञानिक प्रसंस्करण के दोहरे उद्देश्य से युक्त था। हमने इन दोनों ही क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति की है। लगभग समस्त शहरी भारत आज ओडीएफ है और ठोस अपशिष्ट का वैज्ञानिक प्रसंस्करण, जो वर्ष 2014 में मिशन की शुरुआत में मात्र 18% था, अब तीन गुना से भी अधिक हो गया है और अब 65% के स्तर पर है। हालांकि, अब भी लंबा रास्ता तय करना बाकी है। मेरे मंत्रालय द्वारा आज जारी किए जा रहे दस्तावेज समग्र स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट के निपटान में बाधा डालने वाली कुछ प्रमुख समस्याओं के टिकाऊ समाधान खोजने और इन्हें सुगम बनाने का एक प्रयास है।’ मंत्रालय ने मल युक्त गाद के निपटान पर एक संचार अभियान के लिए टूलकिट भी जारी की जिसका शीर्षक है ‘मलासुर- द डेमन ऑफ डिफेका’ और इसका उद्देश्य मल युक्त गाद की जोखिम धारणा को सही ढंग से रेखांकित करना है। बीबीसी मीडिया एक्शन के सहयोग से संकल्पित और डिजाइन की गई इस टूलकिट में अंग्रेजी के साथ 10 भारतीय भाषाओं में व्यापक रचनात्मक सामग्री है।
इस दिवस के महत्व और इन दस्तावेजों की आवश्यकता के बारे में विस्तार से बताते हुए मंत्री महोदय ने कहा, ‘इन दस्तावेजों को जारी करने का इससे अच्छा अवसर कोई और नहीं हो सकता है। आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और अपशिष्ट जल के शोधन सहित समग्र स्वच्छता के विभिन्न घटकों पर फोकस करने के लिए शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) के क्षमता निर्माण पर निरंतर काम करता रहा है। मंत्रालय न केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण, बल्कि क्षमता निर्माण और व्यवहार में बदलाव संबंधी संचार के माध्यम से भी इसे संभव कर दिखाने के प्रयास करता रहा है। इन दस्तावेजों को जारी करना इस दिशा में एक और अहम कदम है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मैं एक बार फिर धरती पर जीवन के सभी स्वरूपों के संरक्षण के लिए आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दोहराना चाहता हूं। यह केवल तभी हो सकता है जब हम स्वच्छता के मिशन को आगे ले जाएं और सही मायनों में 3आर, वृत्ताकार (सर्कुलर) एवं नीली अर्थव्यवस्था की क्षमता को उन्मुक्त करें। मुझे विश्वास है कि इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं जीवन स्तर बेहतर होगा। इसके अलावा रोजगारों का सृजन होगा, औपचारिक श्रमबल में अनौपचारिक कामगारों का एकीकरण होगा और अपशिष्ट के प्रवाह से नए उत्पादों का निर्माण होगा और राजस्व का सृजन होगा जिससे अंतत: न केवल एक स्वच्छ, बल्कि एक स्वस्थ, सशक्त, सम्पन्न और आत्मनिर्भर भारत का भी मार्ग प्रशस्त होगा। अत: आइए, हम सभी एक बार फिर अपनी वायु, भूमि व जल को निर्मल करने के अपने संकल्प की पुष्टि करें और इस प्रकार वर्तमान के साथ-साथ भविष्य के लिए भी प्रकृति की अनुपम भेंट का संरक्षण करें।’
इस लॉन्चिंग के बाद ‘भारत में ऑन-साइट एवं ऑफ-साइट सीवेज प्रबंधन प्रथाओं के लिए मसौदा एडवाइजरी’ पर एक परामर्शी वर्चुअल कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें 100 से भी अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया जिसमें राज्यों और यूएलबी के प्रतिनिधियों के साथ-साथ कई शिक्षाविद और इस विषय-वस्तु के अनेक विशेषज्ञ भी शामिल थे।
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने धरती की समृद्ध जैव विविधता को संरक्षित करने का संकल्प दोहराया
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर एक ट्वीट में कहा, ‘# विश्व पर्यावरण दिवस पर हम अपनी धरती की समृद्ध जैव विविधता को संरक्षित करने का अपना संकल्प दोहराते हैं। आइए, हम सभी सामूहिक रूप से यथासंभव ठोस प्रयास कर पृथ्वी पर अपने साथ फल-फूल रही वनस्पतियों और जीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। अथक प्रयासों से हम इस धरती को आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर स्थान बना सकते हैं।’
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" सामयिकी :- कोरोना वायरस सक्रमंण पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉक्टर तनमय तारोमतार से आकाशवाणी सवांददाता आनंद श्री वास्तव की बातचीत"
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Desh Deshantar: Green Policies for Green Planet | प्रकृति और विकास के संतुलन का रास्ता
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Current Affairs Quiz 5 Jun 2020 दैनिक सामान्य ज्ञान क्विज https://www.simplifiedshiksha.com/current-affairs-quiz-5-jun/
