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UPSC PIB NEWS Hindi

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26 Sep 2026 PIB Updates   English @upsc_pib_news       Hindi @pib4upschindi #pdf  #UPSC  #GS  #CA #pib #notes ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ Share & Support Us https://whatsapp.com/channel/0029VaGeBAB3wtbAVn6GBJ3F

​🔆 स्वच्छ ऊर्जा, समुद्री बुनियादी ढांचा और व्यापार ​🌟 सारांश ✅ मंत्रालय: बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय ✅ परियोजना: भारत का पहला बंदरगाह-आधारित ई-मेथनॉल उत्पादन संयंत्र ✅ स्थान: कांडला, गुजरात ✅ उद्देश्य: वैश्विक शिपिंग मार्गों को डीकार्बोनाइज करना और भारत को हरित समुद्री ईंधन का एक प्रमुख निर्यातक बनाना। ✅ संक्षिप्त विवरण: सरकार ने कांडला बंदरगाह पर 2,300 करोड़ रुपये के ई-मेथनॉल संयंत्र की नींव रखी है, जिसका उद्देश्य वैश्विक जहाजों को प्रतिस्पर्धी मूल्य पर हरित ईंधन का उत्पादन और आपूर्ति करना है। ​♻️ मुख्य विशेषताएं 🔹 ई-मेथनॉल संयंत्र: दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी (डीपीए) और असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड (एपीसीएल) के बीच एक संयुक्त उद्यम। स्केलेबल मॉड्यूल के रूप में निर्मित, यह संयंत्र अंततः नवीकरणीय ऊर्जा, पानी और बायोजीनिक CO2 का उपयोग करके प्रतिदिन 150 टन ई-मेथनॉल का उत्पादन करेगा। 🔹 वैश्विक निर्यात प्रतिस्पर्धा: यह संयंत्र एशिया-यूरोप अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मार्ग पर चलने वाले जहाजों को ईंधन आपूर्ति करने के लिए रणनीतिक रूप से स्थित है। यह हरित मेथनॉल का उत्पादन अत्यधिक प्रतिस्पर्धी दर पर करेगा, जो कि 750 अमेरिकी डॉलर प्रति टन है (जो कि वैश्विक औसत 1,300 अमेरिकी डॉलर प्रति टन से काफी कम है)। 🔹 समुद्री विस्तार: यह परियोजना सीधे भारत की "नेट ज़ीरो 2070" प्रतिबद्धताओं और घरेलू बेड़े में 100 नए मालवाहक जहाजों को शामिल करने के रणनीतिक प्रयास के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य 2047 तक भारत को शीर्ष पांच जहाज-स्वामित्व वाले देशों में बनाना है। ​🔍 पृष्ठभूमि ✅ ई-मेथनॉल: एक कम-कार्बन, सिंथेटिक हरित ईंधन जो नवीकरणीय बिजली से प्राप्त हरित हाइड्रोजन को कैप्चर किए गए कार्बन डाइऑक्साइड के साथ मिलाकर बनाया जाता है। यह अत्यधिक प्रदूषणकारी समुद्री बंकर ईंधन का एक महत्वपूर्ण, स्वच्छ विकल्प है। ​🗿 मुख्य बिंदु ✅ 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लिए टिकाऊ वैश्विक व्यापार मार्गों की आवश्यकता है। ✅ कांडला में बंदरगाह-आधारित हरित ईंधन उत्पादन (ई-मेथनॉल) स्थापित करके, भारत न केवल अपने "नेट ज़ीरो" लक्ष्यों को पूरा करता है, बल्कि वैश्विक शिपिंग उद्योग के लिए स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर रणनीतिक रूप से अपनी पकड़ मजबूत करता है। ​🧠 प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु 🔹 बुनियादी ढांचा: पहला बंदरगाह-आधारित ई-मेथनॉल संयंत्र (कांडला, गुजरात)। 🔹 संबंधित एजेंसियां: दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी (डीपीए) और असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड (एपीसीएल)। 🔹 लक्ष्य क्षेत्र: एशिया-यूरोप अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मार्ग। ​➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ ​#️⃣Tag : #GS3 #Infrastructure #EnergySecurity #BlueEconomy #Environment #MakeInIndia #PIB #UPSC ​✨Join- https://t.me/PIB4UPSCHindi

​🔆 विज्ञान संचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता का एकीकरण और सभ्यतागत विरासत ​🌟 सारांश ✅ मंत्रालय: विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय / गृह मंत्रालय ✅ परियोजना: सीएसआईआर बहुभाषी विज्ञान पत्रिकाएं / माता अम्रितानंदमयी का 73वां जन्मदिन ✅ स्थान: नई दिल्ली / कोल्लम, केरल ✅ उद्देश्य: कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके गहन तकनीकी वैज्ञानिक ज्ञान को सभी के लिए सुलभ बनाना और भारत के सभ्यतागत और आध्यात्मिक नेताओं को सम्मानित करना। ✅ संक्षिप्त विवरण: सीएसआईआर ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता अनुवाद उपकरणों का उपयोग करके पांच क्षेत्रीय भाषाओं में लोकप्रिय विज्ञान पत्रिकाएं लॉन्च कीं, जबकि गृह मंत्री ने केरल में माता अम्रितानंदमयी के 73वें जन्मदिन समारोह में भाग लिया। ​♻️ मुख्य बातें 🔹 बहुभाषी विज्ञान प्रसार: वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के 85वें स्थापना दिवस पर, पांच लोकप्रिय विज्ञान पत्रिकाओं को आधिकारिक तौर पर तमिल, तेलुगु, मराठी, बंगाली और असमिया भाषाओं में लॉन्च किया गया। 🔹 कृत्रिम बुद्धिमत्ता-संचालित अनुवाद: *सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर* द्वारा कार्यान्वित, इस पहल में उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके पुरानी सामग्री (जैसे विज्ञान प्रगति और साइंस रिपोर्टर) का तेजी से क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद किया जाता है, जिससे वैज्ञानिक शिक्षा के लिए अंग्रेजी की बाधा को प्रभावी ढंग से तोड़ा जा सकता है। 🔹 सभ्यतागत एकीकरण: इसी दौरान, केंद्रीय गृह मंत्री ने केरल के कोल्लम में माता अम्रितानंदमयी के 73वें जन्मदिन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया, जिससे भारत के आध्यात्मिक मूल्यों और जमीनी स्तर पर राष्ट्रीय विकास के बीच निर्बाध एकीकरण को बढ़ावा मिला। ​🔍 पृष्ठभूमि ✅ सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर: राष्ट्रीय विज्ञान संचार और नीति अनुसंधान संस्थान, सीएसआईआर का एक घटक प्रयोगशाला, जिसका जनादेश जनता के बीच वैज्ञानिक जागरूकता फैलाना और वैज्ञानिक समुदाय और समाज के बीच एक सेतु बनना है। ​🗿 मुख्य बिंदु ✅ ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था अलगाव में नहीं पनप सकती। ✅ जटिल वैज्ञानिक अनुसंधान को क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का सक्रिय रूप से उपयोग करके (सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर), राज्य यह सुनिश्चित करता है कि गहन तकनीकी ज्ञान जमीनी स्तर तक पहुंचे, जिससे क्षेत्रीय जनसांख्यिकीय लाभ को बढ़ावा मिले। ​🧠 प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण 🔹 संस्था: सीएसआईआर (85वां स्थापना दिवस); सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर। 🔹 परियोजना: कृत्रिम बुद्धिमत्ता-संचालित क्षेत्रीय विज्ञान पत्रिकाएं (तमिल, तेलुगु, मराठी, बंगाली, असमिया)। ​➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ ​#️⃣Tag : #GS1 #GS3 #ScienceAndTech #ArtificialIntelligence #Education #Culture #CSIR #MoST #MHA #PIB #UPSC ​✨Join- https://t.me/PIB4UPSCHindi

​🔆 पर्यटन अवसंरचना और क्षेत्रीय आर्थिक विकास ​🌟 सारांश ✅ मंत्रालय: पर्यटन मंत्रालय ✅ पहल: विश्व पर्यटन दिवस 2026 ✅ स्थान: पूरे भारत में ✅ उद्देश्य: लक्षित पूंजी निवेश और गंतव्य-केंद्रित योजना के माध्यम से एक सुसंगत, समावेशी और टिकाऊ पर्यटन पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना। ✅ संक्षिप्त विवरण: विश्व पर्यटन दिवस 2026 पर, मंत्रालय ने 'स्वदेश दर्शन 2.0', 'प्रशाद' और 'एसएएससीआई' जैसे प्रमुख योजनाओं में किए गए बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश और संरचनात्मक सफलता पर प्रकाश डाला। ​♻️ मुख्य बातें 🔹 स्वदेश दर्शन 2.0 और सीबीडीडी: विषयगत सर्किटों से विकसित होकर, यह योजना अब एक सख्त "गंतव्य-केंद्रित" दृष्टिकोण अपनाती है। इस योजना के तहत 53 परियोजनाओं को 2,207 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी गई है। इसकी उप-योजना, चैलेंज बेस्ड डेस्टिनेशन डेवलपमेंट (सीबीडीडी), ने उच्च क्षमता वाले आध्यात्मिक और इको-पर्यटन स्थलों के लिए 37 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। 🔹 प्रशाद योजना: 2014 में शुरू होने के बाद से, 'पिलग्रिमेज रीज्यूवेनेशन एंड स्पिरिचुअल हेरिटेज ऑग्मेंटेशन ड्राइव' ने प्रतिष्ठित तीर्थ स्थलों पर घाटों, सीसीटीवी नेटवर्क और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों जैसी सुविधाओं के निर्माण के लिए 54 परियोजनाओं को 1,726 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी है। 🔹 एसएएससीआई आवंटन: स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट (एसएएससीआई) के तहत, जो 100% केंद्रीय वित्त पोषण प्रदान करता है, नागालैंड, मिजोरम और हिमाचल प्रदेश को वैश्विक मानकों के अनुरूप पर्यटन अवसंरचना विकसित करने के लिए प्रत्येक को 250 करोड़ रुपये की नई मंजूरी दी गई है। ​🗿 मुख्य बिंदु ✅ पर्यटन स्थानीय रोजगार के लिए एक उच्च-उत्पादक उत्प्रेरक है। ✅ खंडित वित्त पोषण से हटकर, एकीकृत और गंतव्य-विशिष्ट अवसंरचना विकास (स्वदेश दर्शन 2.0 और एसएएससीआई) की ओर बढ़ने से, राज्य स्थानीय पारिस्थितिकी और विरासत को संरक्षित करते हुए क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं को संरचनात्मक रूप से बढ़ावा देता है। ​🧠 प्रारंभिक परीक्षा पर ध्यान दें 🔹 कार्यक्रम: विश्व पर्यटन दिवस 2026। 🔹 योजनाएं: स्वदेश दर्शन 2.0 (गंतव्य-केंद्रित दृष्टिकोण); प्रशाद; चैलेंज बेस्ड डेस्टिनेशन डेवलपमेंट (सीबीडीडी)। ​➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ ​#️⃣Tag : #GS3 #Economy #Tourism #Infrastructure #Culture #MoT #PIB #UPSC ​✨Join- https://t.me/PIB4UPSCHindi

✨ Today's Hindi 26 sep 2026 PIB Current Affairs News https://t.me/PIB4UPSCHindi/565 ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ Get Updates on WhatsApp :- Click Here Join Our Discussion  :- Click here 🌟 For UPSC Beginners :- Click here
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25 Sep 2026 PIB Updates   English @upsc_pib_news       Hindi @pib4upschindi #pdf  #UPSC  #GS  #CA #pib #notes ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ Share & Support Us https://whatsapp.com/channel/0029VaGeBAB3wtbAVn6GBJ3F

​🔆 मैक्रो-अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचा और स्वच्छ गतिशीलता ​🌟 सारांश ✅ मंत्रालय: MoSPI / भारी उद्योग मंत्रालय ✅ पहल: PAIMANA पोर्टल / ICAT कृषि मशीनरी परीक्षण सुविधा ✅ स्थान: पूरे भारत / मानेसर ✅ उद्देश्य: उच्च मूल्य वाले राष्ट्रीय पूंजीगत व्यय की डिजिटल निगरानी करना और भारत के स्वच्छ गतिशीलता और मशीनीकृत कृषि में परिवर्तन को गति देना। ✅ संक्षेप में: MoSPI ने केंद्रीय बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की, जबकि ICAT ने प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना और एक नई कृषि परीक्षण सुविधा पर चर्चा के साथ अपनी 20वीं वर्षगांठ मनाई। ​♻️ मुख्य बातें 🔹 PAIMANA पोर्टल का डेटा: MoSPI का पोर्टल वर्तमान में 1,731 केंद्रीय क्षेत्र की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (150 करोड़ रुपये और उससे अधिक मूल्य की) की निगरानी कर रहा है, जिसका कुल संशोधित लागत 33.60 लाख करोड़ रुपये है। 🔹 क्षेत्रीय प्रभुत्व: परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र राष्ट्रीय पूंजीगत व्यय में पूरी तरह से हावी है, जो कुल परियोजना लागत का 48% है (सड़क, रेलवे और विमानन को बढ़ावा देना), इसके बाद ऊर्जा क्षेत्र 32% है। 🔹 ICAT का विस्तार: अंतर्राष्ट्रीय सेंटर फॉर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी (ICAT) ने इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में तेजी लाने के लिए नए प्रस्तावित प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना पर एक रणनीतिक उद्योग संवाद का आयोजन किया। इसने भारत की पहली स्वदेशी कृषि मशीनरी परीक्षण सुविधा का भी उद्घाटन किया, जो ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी और कृषि मशीनीकरण के बीच की खाई को पाटती है। ​🔍 पृष्ठभूमि ✅ प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना: यह प्रमुख पहल भारत को स्वच्छ, टिकाऊ और आत्मनिर्भर इलेक्ट्रिक गतिशीलता की ओर ले जाने के लिए डिज़ाइन की गई है, जो पिछली ईवी सब्सिडी योजनाओं का उत्तराधिकारी है। ​🗿 मुख्य बिंदु ✅ 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था तेजी से पूंजीगत व्यय पर बहुत अधिक निर्भर करती है। ✅ PAIMANA के माध्यम से 33.60 लाख करोड़ रुपये मूल्य की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की डिजिटल निगरानी करके और साथ ही ईवी और कृषि मशीनरी के लिए अत्याधुनिक परीक्षण सुविधाओं का निर्माण करके (ICAT), सरकार यह सुनिश्चित करती है कि भारी बुनियादी ढांचा और स्वच्छ गतिशीलता दोनों कुशलतापूर्वक और नौकरशाही देरी के बिना विकसित हों। ​🧠 प्रारंभिक परीक्षा के लिए ध्यान दें 🔹 पोर्टल: PAIMANA पोर्टल (केंद्रीय क्षेत्र की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की निगरानी करता है)। 🔹 डेटा: परिवहन (48%) और ऊर्जा (32%) केंद्रीय बुनियादी ढांचा व्यय में सबसे आगे हैं। 🔹 संस्था: ICAT (अंतर्राष्ट्रीय सेंटर फॉर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी)। ​➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ ​#️⃣Tag : #GS3 #Economy #Infrastructure #ElectricVehicles #MakeInIndia #MoSPI #MHI #PIB #UPSC ​✨Join- https://t.me/PIB4UPSCHindi

​🔆 सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रशासन और गहरे अंतरिक्ष खगोल भौतिकी ​🌟 सारांश ✅ मंत्रालय: स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय / विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ✅ परियोजना: आरोग्य मंथन 2026 / ब्लैक होल जेट अध्ययन ✅ स्थान: नई दिल्ली / अंतरिक्ष अनुसंधान ✅ उद्देश्य: एबी-पीएमजेएवाई की संरचनात्मक सफलताओं का जश्न मनाना और आकाशगंगा के विकास को आकार देने वाले तंत्रों को उजागर करना। ✅ संक्षिप्त विवरण: स्वास्थ्य मंत्री ने आरोग्य मंथन 2026 का उद्घाटन किया, जबकि भारतीय वैज्ञानिकों ने बताया कि कैसे ब्लैक होल जेट "परि-आकाशगंगा माध्यम" (सीजीएम) को आकार देते हैं। ​♻️ मुख्य बातें 🔹 आरोग्य मंथन 2026: आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) और प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) की परिचालन उपलब्धियों को मनाने के लिए इसका उद्घाटन किया गया, जो कमजोर आबादी को विनाशकारी स्वास्थ्य व्यय से बचाने के लिए जारी है। 🔹 खगोल भौतिकी में सफलता: भारतीय शोधकर्ताओं ने विस्तार से बताया कि कैसे सुपरमैसिव ब्लैक होल से निकलने वाले शक्तिशाली जेट "शक्तिशाली प्रहार" के रूप में कार्य करते हैं, जो आकाशगंगाओं के भाग्य को आकार देते हैं। 🔹 सीजीएम का संबंध: ये जेट "परि-आकाशगंगा माध्यम" (सीजीएम) के साथ गहनता से संपर्क करते हैं - एक धुंधला, भूतिया गैस का आवरण जो एक आकाशगंगा के आकार से 10-20 गुना बड़ा होता है। चूंकि सीजीएम तारों के निर्माण के लिए सीधे ईंधन प्रदान करता है, इसलिए ये ब्लैक होल जेट उनकी मेजबान आकाशगंगाओं की स्टार-निर्माण क्षमता और विकासवादी जीवनकाल को मौलिक रूप से निर्धारित करते हैं। ​🔍 पृष्ठभूमि ✅ परि-आकाशगंगा माध्यम (सीजीएम): यह गैस और प्लाज्मा का विशाल प्रभामंडल है जो एक आकाशगंगा को घेरता है, जो आकाशगंगा और अंतर-आकाशगंगा माध्यम के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करता है; यह तारों के जन्म के लिए आवश्यक नई गैस के प्रवाह को नियंत्रित करता है। ​🗿 मुख्य बिंदु ✅ सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे (आरोग्य मंथन) या आकाशगंगाओं के ब्रह्मांडीय विकास (सीजीएम अनुसंधान) में मूलभूत शक्तियों को समझना, विकास को बढ़ावा देने और दीर्घकालिक स्थिरता निर्धारित करने वाले जटिल अंतःक्रियाओं को समझने की आवश्यकता होती है। ​🧠 प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण 🔹 कार्यक्रम: आरोग्य मंथन 2026 (एबी-पीएमजेएवाई और एबीडीएम का जश्न)। 🔹 वैज्ञानिक अवधारणा: परि-आकाशगंगा माध्यम (सीजीएम - तारों के निर्माण को बढ़ावा देने वाला गैसीय भंडार); सुपरमैसिव ब्लैक होल जेट। ​➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ ​#️⃣Tag : #GS2 #GS3 #Health #ScienceAndTech #Astrophysics #Governance #MoHFW #MoST #PIB #UPSC ​✨Join- https://t.me/PIB4UPSCHindi

​🔆 जैव विविधता, जल सुरक्षा और डिजिटल शासन ​🌟 सारांश ✅ मंत्रालय: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय / जल शक्ति मंत्रालय / संचार मंत्रालय ✅ पहल: एमईई-टीआर 2026 मैनुअल / 9वां भारत अंतर्राष्ट्रीय जल सप्ताह / डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग प्लेटफॉर्म ✅ स्थान: नई दिल्ली ✅ उद्देश्य: शीर्ष शिकारी संरक्षण का कठोरता से मूल्यांकन करना, जलवायु-प्रतिरोधी जल प्रबंधन को संस्थागत बनाना और दूरसंचार उपभोक्ताओं को सशक्त बनाना। ✅ संक्षिप्त विवरण: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने एमईई-टीआर 2026 के लिए तकनीकी मैनुअल जारी किया, जल शक्ति मंत्रालय ने 9वें भारत अंतर्राष्ट्रीय जल सप्ताह का समापन किया, और ट्राई ने एक व्यापक डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग प्लेटफॉर्म लॉन्च किया। ​♻️ मुख्य बातें 🔹 एमईई-टीआर 2026 मैनुअल: पर्यावरण मंत्रालय ने टाइगर रिजर्व के प्रबंधन प्रभाव मूल्यांकन (एमईई-टीआर) के लिए तकनीकी मैनुअल लॉन्च किया। यह आईयूसीएन ढांचे पर आधारित है, और यह छह महत्वपूर्ण तत्वों में 58 टाइगर रिजर्व का मूल्यांकन करता है: संदर्भ, योजना, इनपुट, प्रक्रियाएं, परिणाम और प्रभाव। 🔹 9वां आईआईडब्ल्यूडब्ल्यू का समापन: 9वें भारत अंतर्राष्ट्रीय जल सप्ताह का औपचारिक रूप से समापन हुआ, जिसमें वैश्विक नीति सहमति को सफलतापूर्वक वैश्विक दक्षिण के लिए संरचनात्मक रूप से जलवायु-प्रतिरोधी जल बुनियादी ढांचे के निर्माण की ओर स्थानांतरित किया गया। 🔹 ट्राई रेटिंग प्लेटफॉर्म: भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग प्लेटफॉर्म लॉन्च किया। यह उपभोक्ताओं को विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी की गुणवत्ता का पारदर्शी रूप से मूल्यांकन और रेटिंग करने की अनुमति देता है, और दूरसंचार ऑपरेटरों को जवाबदेह ठहराने के लिए डेटा एकत्र करता है। ​🔍 पृष्ठभूमि ✅ एमईई ढांचा: प्रबंधन प्रभाव मूल्यांकन एक वैश्विक स्तर पर स्वीकृत ऑडिटिंग उपकरण है जिसका उपयोग संयुक्त राष्ट्र और आईयूसीएन द्वारा संरक्षित क्षेत्रों के प्रबंधन का व्यवस्थित रूप से मूल्यांकन करने के लिए किया जाता है ताकि उनके घोषित संरक्षण उद्देश्यों को प्राप्त किया जा सके। ​🗿 मुख्य बिंदु ✅ संप्रभु शासन के लिए सख्त, डेटा-समर्थित मूल्यांकन की आवश्यकता होती है। ✅ चाहे टाइगर रिजर्व (एमईई-टीआर) की पारिस्थितिक प्रभावशीलता का ऑडिट किया जा रहा हो या दूरसंचार सेवा की गुणवत्ता (ट्राई रेटिंग प्लेटफॉर्म) का क्राउडसोर्सिंग किया जा रहा हो, जवाबदेही और नीतिगत सुधार के लिए पारदर्शी मूल्यांकन ढांचे स्थापित करना आवश्यक है। ​🧠 प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण 🔹 ढांचा: एमईई-टीआर 2026 (टाइगर रिजर्व के लिए प्रबंधन प्रभाव मूल्यांकन; आईयूसीएन ढांचे पर आधारित)। 🔹 प्लेटफॉर्म: डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग प्लेटफॉर्म (ट्राई द्वारा लॉन्च किया गया)। 🔹 कार्यक्रम: 9वां भारत अंतर्राष्ट्रीय जल सप्ताह (केंद्र बिंदु: जलवायु-प्रतिरोधी जल)। ​➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ ​#️⃣Tag : #GS2 #GS3 #Environment #Biodiversity #WaterManagement #eGovernance #MoEFCC #MoJS #TRAI #PIB #UPSC ​✨Join- https://t.me/PIB4UPSCHindi

​🔆 क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था, व्यापार कूटनीति और कृषि निर्यात ​🌟 सारांश ✅ मंत्रालय: गृह मंत्रालय / वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ✅ पहल: 4वां यूपी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार शो / जीआई-टैग किए गए तुअर दाल का निर्यात ✅ स्थान: ग्रेटर नोएडा / कर्नाटक ✅ उद्देश्य: क्षेत्रीय विनिर्माण क्षमता को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करना और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को सीधे अंतर्राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं में एकीकृत करना। ✅ एक पंक्ति में: गृह मंत्री ने ग्रेटर नोएडा में 4वें यूपी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार शो का उद्घाटन किया, जबकि एपीईडीए ने मालदीव को जीआई-टैग किए गए गुलबर्गा तुअर दाल का पहला निर्यात किया। ​♻️ मुख्य बातें 🔹 4वां यूपीआईटीएस (ग्रेटर नोएडा): पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती के उपलक्ष्य में, इस व्यापार शो ने उत्तर प्रदेश के एक विशाल विनिर्माण केंद्र में रूपांतरण को उजागर किया (जिसमें चिकित्सा उपकरण पार्क और रक्षा गलियारा शामिल हैं)। 🔹 ओडीओसी लॉन्च: गृह मंत्री ने 'एक जिला, एक व्यंजन' (ओडीओसी) वेबसाइट लॉन्च की ताकि वाराणसी की तिरंगा बर्फी और मथुरा की पेड़ा जैसे क्षेत्रीय व्यंजनों की वैश्विक स्तर पर मार्केटिंग की जा सके। 🔹 जीआई-टैग किए गए निर्यात: एपीईडीए ने कर्नाटक से मालदीव को जीआई-टैग किए गए गुलबर्गा तुअर दाल की खेप को रवाना किया। इस निर्यात-संबंधित चैनल ने स्थानीय बिचौलियों को सफलतापूर्वक दरकिनार कर दिया, जिससे किसानों को मौजूदा घरेलू बाजार मूल्य 60 रुपये प्रति किलोग्राम की तुलना में 82 रुपये प्रति किलोग्राम का लाभ मिला। ​🔍 पृष्ठभूमि ✅ गुलबर्गा तुअर दाल: यह कर्नाटक के कालाबुरागी क्षेत्र से जुड़ी है (जो एक प्रमुख शुष्क भूमि दाल उत्पादन केंद्र है), और इसे 2019 में इसके विशिष्ट स्वाद और गुणवत्ता के लिए भौगोलिक संकेत (जीआई) पंजीकरण प्राप्त हुआ। ​🗿 मुख्य बिंदु ✅ वास्तविक जमीनी स्तर पर आर्थिक सशक्तिकरण बिचौलियों को दरकिनार करता है। ✅ विशाल व्यापार मंचों (यूपीआईटीएस) का उपयोग करके स्थानीय व्यंजनों की मार्केटिंग करने और पड़ोसी देशों (मालदीव) को प्रीमियम जीआई-टैग किए गए दालों का सीधे निर्यात करके, राज्य संरचनात्मक रूप से एमएसएमई और कृषि आय को बढ़ावा देता है, साथ ही क्षेत्रीय 'सॉफ्ट पावर' को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करता है। ​🧠 प्रारंभिक परीक्षा के लिए ध्यान दें 🔹 कार्यक्रम: 4वां यूपी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार शो (ग्रेटर नोएडा)। 🔹 पहल: 'एक जिला, एक व्यंजन' (ओडीओसी)। 🔹 कृषि निर्यात: जीआई-टैग किए गए गुलबर्गा तुअर दाल (कर्नाटक से मालदीव)। ​➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ ​#️⃣Tag : #GS2 #GS3 #Economy #Agriculture #Exports #MSME #MHA #MoCI #PIB #UPSC ​✨Join- https://t.me/PIB4UPSCHindi

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24 Sep 2026 PIB Updates   English @upsc_pib_news       Hindi @pib4upschindi #pdf  #UPSC  #GS  #CA #pib #notes ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ Share & Support Us https://whatsapp.com/channel/0029VaGeBAB3wtbAVn6GBJ3F

​🔆 रक्षा क्षेत्र में उन्नत तकनीक और रणनीतिक समुद्री कूटनीति ​🌟 सारांश ✅ मंत्रालय: रक्षा मंत्रालय ✅ परियोजना: टीडीएफ (TDF) उन्नत तकनीक परियोजना / एक्सरसाइज वारुना (24वां संस्करण) ✅ स्थान: नई दिल्ली / टूलॉन, फ्रांस ✅ उद्देश्य: महत्वपूर्ण क्वांटम बुनियादी ढांचे को स्वदेशी बनाना और फ्रांस के साथ संयुक्त नौसैनिक परिचालन क्षमता को प्रदर्शित करना। ✅ संक्षिप्त विवरण: डीआरडीओ (DRDO) ने क्वांटम क्रायोजेनिक्स के क्षेत्र में अपनी पहली उच्च-मूल्य वाली उन्नत तकनीक स्टार्टअप समझौते पर हस्ताक्षर किए, जबकि आईएनएस (INS) त्रिशूल एक्सरसाइज वारुना के लिए फ्रांस पहुंचा। ​♻️ मुख्य बातें 🔹 क्वांटम क्रायोजेनिक्स (टीडीएफ): प्रौद्योगिकी विकास कोष (टीडीएफ) के तहत, डीआरडीओ ने स्टार्टअप ज़ीरो एमके इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए ताकि स्वदेशी रूप से एक 20 mK डिल्यूशन रेफ्रिजरेटर विकसित किया जा सके। यह 500 करोड़ रुपये के उन्नत तकनीक कोष के तहत पहली उच्च-मूल्य वाली परियोजना है। 🔹 राष्ट्रीय क्वांटम मिशन: यह विकास एक आत्मनिर्भर क्वांटम-तैयार पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए महत्वपूर्ण है, जो क्वांटम कंप्यूटिंग आर्किटेक्चर के लिए भारत की आयातित क्रायोजेनिक बुनियादी ढांचे पर पूर्ण निर्भरता को समाप्त करता है। 🔹 एक्स वारुना 2026: भारतीय नौसेना का जहाज (आईएनएस) त्रिशूल, भारत-फ्रांस के द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास के 24वें संस्करण के लिए टूलॉन, फ्रांस पहुंचा, जिससे भारतीय महासागर और भूमध्य सागर में रणनीतिक प्रभाव का विस्तार हो रहा है। ​🔍 पृष्ठभूमि ✅ प्रौद्योगिकी विकास कोष (टीडीएफ): डीआरडीओ द्वारा 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत रक्षा प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए कार्यान्वित, जो स्वदेशी अनुसंधान और विकास के लिए एमएसएमई (MSME) और स्टार्टअप को महत्वपूर्ण धन प्रदान करता है। ​🗿 मुख्य बिंदु ✅ रणनीतिक संप्रभुता समुद्र की गहराई से लेकर क्वांटम कंप्यूटिंग तक फैली हुई है। ✅ क्वांटम हार्डवेयर (टीडीएफ) के लिए स्वदेशी उन्नत तकनीक स्टार्टअप को बढ़ावा देकर और साथ ही वैश्विक स्तर पर नौसैनिक शक्ति का प्रदर्शन करके (एक्स वारुना), भारत यह सुनिश्चित करता है कि उसकी सैन्य शक्ति अत्याधुनिक, आत्मनिर्भर तकनीक द्वारा समर्थित है। ​🧠 प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण 🔹 परियोजना: स्वदेशी 20 mK डिल्यूशन रेफ्रिजरेटर (ज़ीरो एमके इंडिया प्राइवेट लिमिटेड)। 🔹 सैन्य अभ्यास: एक्स वारुना (24वां संस्करण, भारत-फ्रांस नौसैनिक अभ्यास)। ​➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ ​#️⃣Tag : #GS2 #GS3 #Defence #ScienceAndTech #InternationalRelations #MakeInIndia #MoD #PIB #UPSC ​✨Join- https://t.me/PIB4UPSCHindi

​🔆 विज्ञान और प्रौद्योगिकी, चक्रीय अर्थव्यवस्था और जैव-विनिर्माण ​🌟 सारांश ✅ मंत्रालय: विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ✅ परियोजना: पीएलए-आधारित जैव-अपघटनीय प्लास्टिक का वाणिज्यिक लॉन्च ✅ स्थान: कुम्भी, उत्तर प्रदेश / नई दिल्ली ✅ उद्देश्य: स्वदेशी जैव-आधारित विनिर्माण क्षमताओं का विकास करना और पेट्रोलियम-आधारित प्लास्टिक से दूर जाना। ✅ संक्षिप्त विवरण: सरकार ने महत्वाकांक्षी बायोई3 नीति के तहत, गन्ने से प्राप्त जैव-अपघटनीय प्लास्टिक (पीएलए) के वाणिज्यिक उपयोग को औपचारिक रूप से लॉन्च किया। ​♻️ मुख्य बातें 🔹 पीएलए जैव-अपघटनीय प्लास्टिक: मंत्री ने पॉलीलैक्टिक एसिड (पीएलए) और को-पॉलिमर के लिए वाणिज्यिक अनुसंधान और विकास चरण की शुरुआत की। बालरामपुर चीनी मिल्स द्वारा स्थापित पायलट सुविधा (100 टीपीए) को जैव प्रौद्योगिकी विभाग के तहत बीआईआरएसी द्वारा 75 करोड़ रुपये के अनुदान का समर्थन प्राप्त है। 🔹 बायोई3 नीति का क्रियान्वयन: यह परियोजना बायोई3 (अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी) ढांचे के प्रत्यक्ष क्रियान्वयन का प्रतीक है, जो गन्ने के बायोमास को अगली पीढ़ी के टिकाऊ सामग्रियों में परिवर्तित करता है, और अनिवार्य रूप से "कचरे को संपत्ति" में बदलने का काम करता है। 🔹 जैव-अर्थव्यवस्था में वृद्धि: भारत की जैव-अर्थव्यवस्था ने तेजी से वृद्धि देखी है, जो 2014 में 10 बिलियन डॉलर से बढ़कर आज लगभग 195 बिलियन डॉलर हो गई है, जिसमें प्रयोगशाला अनुसंधान से वाणिज्यिक जैव-विनिर्माण की ओर भारी बदलाव आया है। ​🔍 पृष्ठभूमि ✅ पॉलीलैक्टिक एसिड (पीएलए): एक नवीकरणीय, जैव-अपघटनीय और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य जैव-प्लास्टिक, जो कि किण्वित पौधे के स्टार्च (जैसे गन्ना या मक्का) से प्राप्त होता है, और यह पारंपरिक पेट्रोकेमिकल-आधारित प्लास्टिक का एक टिकाऊ विकल्प है। ​🗿 मुख्य बिंदु ✅ एक टिकाऊ 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था जहरीली पेट्रोकेमिकल आपूर्ति श्रृंखलाओं पर निर्भर नहीं हो सकती। ✅ बायोई3 नीति के माध्यम से स्वदेशी जैव-विनिर्माण (पीएलए प्लास्टिक) को वित्तीय सहायता प्रदान करके, राज्य कृषि उत्पादन (गन्ना) को उच्च मूल्य वाले उन्नत तकनीकी सामग्रियों में परिवर्तित करता है, जिससे एक चक्रीय और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी जैव-अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है। ​🧠 प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण 🔹 प्रौद्योगिकी: पीएलए (पॉलीलैक्टिक एसिड - पौधे-आधारित जैव-अपघटनीय प्लास्टिक)। 🔹 नीति: बायोई3 (अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी)। 🔹 संस्था: बीआईआरएसी (जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद)। ​➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ ​#️⃣Tag : #GS3 #ScienceAndTech #Environment #CircularEconomy #MakeInIndia #BioE3 #MoST #PIB #UPSC ​✨Join- https://t.me/PIB4UPSCHindi

​🔆 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, मुक्त व्यापार समझौते और सांस्कृतिक कूटनीति ​🌟 सारांश ✅ मंत्रालय: वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय / संस्कृति मंत्रालय ✅ कार्यक्रम: 14वां ईएएस-ईएमएम / ब्रिक्स थिएटर फेस्टिवल 2026 ✅ स्थान: मनीला, फिलीपींस / नई दिल्ली ✅ उद्देश्य: ब्रिक्स समूह में क्षेत्रीय व्यापार समझौतों को निष्पक्ष बनाना और लोगों के बीच संबंधों को बढ़ावा देना। ✅ संक्षिप्त विवरण: भारत ने मनीला में एएसईएएन आर्थिक मंत्रियों की परामर्श बैठक में संतुलित एआईटीआईजीए की समीक्षा की वकालत की और नई दिल्ली में आगामी ब्रिक्स थिएटर फेस्टिवल की घोषणा की। ​♻️ मुख्य बातें 🔹 एएसईएएन-भारत व्यापार समीक्षा: मनीला में 23वीं एएसईएएन-भारत आर्थिक मंत्रियों की परामर्श बैठक में, भारत ने मौजूदा व्यापार असंतुलन को दूर करने और घरेलू व्यवसायों के लिए बाजार पहुंच को आसान बनाने के लिए एएसईएएन-भारत वस्तुओं के व्यापार समझौते (एआईटीआईजीए) की त्वरित और निष्पक्ष समीक्षा का जोरदार समर्थन किया। 🔹 द्विपक्षीय व्यापार डेटा: 2025-26 में भारत और एएसईएएन के बीच द्विपक्षीय व्यापार 128.38 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो भारत के कुल वैश्विक व्यापार का 10.5% से अधिक है। 🔹 ब्रिक्स थिएटर फेस्टिवल 2026: संस्कृति मंत्रालय, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) के माध्यम से, भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के तहत नई दिल्ली में 12 से 14 अक्टूबर तक यह फेस्टिवल आयोजित करेगा। इस फेस्टिवल का विषय “साझा कहानियाँ, साझा भविष्य” है, और यह सीधे ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों द्वारा अपनाए गए भोपाल घोषणापत्र से प्रेरित है। ​🔍 पृष्ठभूमि ✅ पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (ईएएस): यह 18 देशों (10 एएसईएएन राज्य + 8 संवाद भागीदार, जिनमें भारत शामिल हैं) का एक प्रमुख क्षेत्रीय मंच है। यहां होने वाली आर्थिक चर्चाएं इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की आपूर्ति श्रृंखला संरचना को काफी प्रभावित करती हैं। ​🗿 मुख्य बिंदु ✅ भू-राजनीतिक एकीकरण दो मार्गों पर संचालित होता है: आर्थिक और सांस्कृतिक। ✅ दक्षिण पूर्व एशिया में संतुलित व्यापार संरचनाओं (एआईटीआईजीए समीक्षा) के लिए सक्रिय रूप से बातचीत करते हुए, और साथ ही वैश्विक दक्षिण के साथ सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देते हुए (ब्रिक्स थिएटर फेस्टिवल), भारत अपने आर्थिक हितों को सुरक्षित करता है और एक मजबूत सॉफ्ट पावर का प्रदर्शन करता है। ​🧠 प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण 🔹 समझौता: एआईटीआईजीए (एएसईएएन-भारत वस्तुओं का व्यापार समझौता)। 🔹 डेटा: 2025-26 में भारत-एएसईएएन व्यापार 128.38 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। 🔹 सांस्कृतिक कार्यक्रम: ब्रिक्स थिएटर फेस्टिवल 2026 (नई दिल्ली; यह भोपाल घोषणापत्र से प्रेरित है)। ​➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ ​#️⃣Tag : #GS2 #GS3 #Economy #ForeignTrade #InternationalRelations #ASEAN #BRICS #MoCI #PIB #UPSC ​✨Join- https://t.me/PIB4UPSCHindi

​🔆 जल सुरक्षा, बुनियादी ढांचा और दक्षिण-दक्षिण सहयोग ​🌟 सारांश ✅ मंत्रालय: जल शक्ति मंत्रालय ✅ पहल: 9वां भारत अंतर्राष्ट्रीय जल सप्ताह (IIWW) ✅ स्थान: भारत मंडपम, नई दिल्ली ✅ उद्देश्य: घरेलू मेगा-परियोजनाओं के लिए वैश्विक इंजीनियरिंग विशेषज्ञता का उपयोग करना और भारत को वैश्विक दक्षिण में जल कूटनीति में एक नेता के रूप में स्थापित करना। ✅ एक पंक्ति में: भारत ने 'कलपसर परियोजना' के लिए नीदरलैंड के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए और 9वें IIWW 2026 के दौरान 'इंडो-अफ्रीका WASH गोलमेज सम्मेलन' की मेजबानी की। ​♻️ मुख्य बातें 🔹 भारत-नीदरलैंड रणनीतिक साझेदारी: गुजरात में विशाल कलपसर परियोजना के लिए डच संस्थानों (डेल्टारेस और टीयू डेल्फ़्ट) के साथ दो महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। नीदरलैंड अपनी एक सदी पुरानी तटीय बुनियादी ढांचा इंजीनियरिंग विशेषज्ञता साझा करेगा। 🔹 कलपसर परियोजना: इसका उद्देश्य साबरमती, माही और धाधार नदियों से बहने वाले पानी और नर्मदा के पानी के संयोजन से खम्भात की खाड़ी में एक विशाल मीठे पानी का जलाशय बनाना है, जिससे गुजरात की क्षेत्रीय जल सुरक्षा में क्रांति आएगी। 🔹 इंडो-अफ्रीका WASH गोलमेज सम्मेलन: IIWW के दौरान आयोजित इस गोलमेज सम्मेलन में 22 अफ्रीकी देशों को भारत के सफल डिजिटल जल प्रबंधन, सामुदायिक-आधारित स्वच्छता (SBM-G) और जलवायु-प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे (जल जीवन मिशन) के मॉडल साझा किए गए, ताकि सामूहिक रूप से एसडीजी 6 को प्राप्त किया जा सके। ​🔍 पृष्ठभूमि ✅ जल जीवन मिशन का प्रभाव: ग्रामीण भारत में नल से पानी की पहुंच 2019 में 3.24 करोड़ घरों से बढ़कर आज 15.94 करोड़ घरों तक पहुंच गई है, जो विकासशील अफ्रीकी देशों के लिए एक सफल और व्यावहारिक मॉडल है। ​🗿 मुख्य बिंदु ✅ जल सुरक्षा आर्थिक लचीलापन का आधार है। ✅ भारत, एक तरफ नीदरलैंड के साथ मेगा-बांधों (कलपसर) के लिए उन्नत तटीय इंजीनियरिंग का आयात कर रहा है, और दूसरी तरफ, इंडो-अफ्रीका गोलमेज सम्मेलन के माध्यम से, अपने सफल ग्रामीण स्वच्छता मॉडल को वैश्विक दक्षिण में निर्यात कर रहा है, जिससे यह तकनीकी अवशोषण और कूटनीतिक प्रभाव दोनों में संतुलन बनाए रखता है। ​🧠 प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण 🔹 बुनियादी ढांचा: कलपसर परियोजना (खम्भात की खाड़ी, गुजरात; मीठे पानी का जलाशय)। 🔹 वैश्विक भागीदार: नीदरलैंड (डेल्टारेस और टीयू डेल्फ़्ट)। 🔹 कार्यक्रम: इंडो-अफ्रीका WASH गोलमेज सम्मेलन (9वें IIWW, नई दिल्ली में)। ​➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ ​#️⃣Tag : #GS2 #GS3 #Environment #Infrastructure #InternationalRelations #WaterManagement #MoJS #PIB #UPSC ​✨Join- https://t.me/PIB4UPSCHindi

​🔆 वैश्विक स्वास्थ्य कूटनीति और घरेलू खाद्य मानक ​🌟 सारांश ✅ मंत्रालय: स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय / एफएसएसएआई ✅ कार्यक्रम: संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के उप-कार्यक्रम / खाद्य सुरक्षा संशोधन का मसौदा 2026 ✅ स्थान: न्यूयॉर्क, यूएसए / नई दिल्ली ✅ उद्देश्य: भारत के सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (यूएचसी) मॉडल को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करना और घरेलू स्तर पर भ्रामक खाद्य विपणन को सख्ती से रोकना। ✅ संक्षिप्त विवरण: भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में हेपेटाइटिस और सिकल सेल रोग को खत्म करने के अपने लक्ष्यों को उजागर किया, जबकि एफएसएसएआई ने गैर-डेयरी उत्पादों को 'पनीर' के रूप में लेबल करने पर प्रतिबंध लगाने की पहल की। ​♻️ मुख्य बातें 🔹 संयुक्त राष्ट्र महासभा में स्वास्थ्य कूटनीति: संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (यूएचसी) की बैठक में, भारत ने अपने डिजिटल स्वास्थ्य परिवर्तन को प्रदर्शित किया, जिसमें 90 करोड़ से अधिक अद्वितीय स्वास्थ्य पहचान और 1.8 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की सफलता पर प्रकाश डाला गया। 🔹 रोग उन्मूलन लक्ष्य: भारत ने हेपेटाइटिस (बी और सी) को एक सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में 2030 तक समाप्त करने और सिकल सेल एनीमिया को 2047 तक पूरी तरह से खत्म करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। भारत ने सिकल सेल देखभाल को बदलने के लिए वनएससीडी वैश्विक साझेदारी के शुभारंभ का भी सह-आयोजन किया। 🔹 एफएसएसएआई 'पनीर' संशोधन: उपभोक्ताओं को गुमराह करने से रोकने के लिए, एफएसएसएआई ने बिक्री पर प्रतिबंध और नियम में एक संशोधन प्रस्तावित किया। यह सख्ती से अनिवार्य करता है कि एनालॉग उत्पाद (गैर-दूध घटकों से बने) अब अपने नामकरण या विपणन में "पनीर" शब्द का उपयोग नहीं कर सकते हैं। ​🔍 पृष्ठभूमि ✅ एनालॉग डेयरी उत्पाद: ये ऐसे विकल्प हैं जिन्हें डेयरी उत्पादों के स्वाद और बनावट की नकल करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिनमें सस्ते वनस्पति तेल और गैर-डेयरी प्रोटीन का उपयोग किया जाता है, और अक्सर उपभोक्ताओं को यह विश्वास दिलाते हैं कि वे वास्तविक दूध से बने उत्पादों को खरीद रहे हैं। ​🗿 मुख्य बिंदु ✅ सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए वैश्विक समन्वय और सख्त घरेलू विनियमन दोनों की आवश्यकता होती है। ✅ संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने डिजिटल यूएचसी मॉडल को प्रस्तुत करके और साथ ही खाद्य सुरक्षा परिभाषाओं को सख्त करके (पनीर बनाम एनालॉग) आहार में मिलावट से निपटने के लिए, राज्य अपने नागरिकों के लिए समग्र स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करता है। ​🧠 प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण 🔹 उन्मूलन लक्ष्य: हेपेटाइटिस (2030); सिकल सेल एनीमिया (2047)। 🔹 वैश्विक पहल: वनएससीडी (सिकल सेल रोग के लिए वैश्विक साझेदारी, जिसे संयुक्त राष्ट्र महासभा में लॉन्च किया गया)। 🔹 नियामक निकाय: एफएसएसएआई (एनालॉग 'पनीर' पर प्रतिबंध लगाने के लिए मसौदा संशोधन)। ​➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ ​#️⃣Tag : #GS2 #Health #InternationalRelations #FoodSecurity #Governance #MoHFW #PIB #UPSC ​✨Join- https://t.me/PIB4UPSCHindi

✨ Today's Hindi 24 sep 2026 PIB Current Affairs News https://t.me/PIB4UPSCHindi/549 ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ Get Updates on WhatsApp :- Click Here Join Our Discussion  :- Click here 🌟 For UPSC Beginners :- Click here
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23 Sep 2026 PIB Updates   English @upsc_pib_news       Hindi @pib4upschindi #pdf  #UPSC  #GS  #CA #pib #notes ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ Share & Support Us https://whatsapp.com/channel/0029VaGeBAB3wtbAVn6GBJ3F