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सुप्रीम कोर्ट: पर्यावरण मंजूरी पर बड़ा फैसला (Environmental Clearance Judgment)
क्या हुआ:
- सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के 2021 के आदेश को रद्द (cancel) कर दिया
- यह आदेश उन प्रोजेक्ट्स को "बाद में" (retrospective/post-facto) पर्यावरण मंजूरी देने की इजाजत देता था, जो बिना मंजूरी लिए ही काम शुरू कर चुके थे
कोर्ट ने क्या कहा:
- ऐसी छूट (exemption) सिर्फ एक सरकारी सर्कुलर (office memorandum) से नहीं दी जा सकती
- इसके लिए 1986 के कानून के तहत बाकायदा कानूनी अधिसूचना (proper statutory notification) चाहिए
- सरकार हर प्रोजेक्ट को छांट-छांट कर (selectively) ही मंजूरी दे सकती है, सबको एक साथ नहीं
- यह छूट सही और उचित (proportionality and reasonableness का test पास) होनी चाहिए
असर:
- जो मंजूरी (clearance) पहले से मिल चुकी है, उस पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा
- यह फैसला सिर्फ आगे के मामलों पर लागू होगा
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# (Syllabus Link)
GS-III — Environment (पर्यावरण)
- EIA अधिसूचना 2006 में साफ लिखा है कि प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले मंजूरी लेनी जरूरी है (prior approval)
- 2020 के Draft EIA में "post-facto clearance" जोड़ने का प्रस्ताव आया था — जिसका काफी विरोध हुआ था
- यह फैसला उसी सिद्धांत को दोबारा मजबूत करता है
GS-II — Governance / Judiciary
- Executive द्वारा जारी सर्कुलर (delegated legislation जैसा) और संसद के बनाए कानून (statute) में अंतर को दिखाता है
- न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) का उदाहरण — कोर्ट ने कार्यपालिका (executive) की शक्ति की सीमा तय की. Read more👇👇👇
